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महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले के मालवन स्थित 'मालवणी पाहुणचार रिसॉर्ट' में एक दुखद घटना सामने आई है, जहाँ 25 वर्षीय युवक श्रेणिक मिलिंद टाकले की स्विमिंग पूल में असुरक्षित डाइव लगाने के कारण जान चली गई। श्रेणिक ने रिसॉर्ट के पंप रूम के स्लैब से, जिसकी ऊँचाई लगभग 8 फीट थी, पूल के बच्चों वाले हिस्से में डाइव लगाई, जिसकी गहराई केवल 4 फीट थी। इस असुरक्षित डाइव के कारण श्रेणिक के सिर ने कंक्रीट से सीधे टक्कर ली, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं। पानी के अंदर ही दम घुटने से उसकी मौत हो गई। श्रेणिक अपने 9 दोस्तों के साथ उस रिसॉर्ट में वीकेंड मनाने गया था।
Naresh Bajaj
महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले के मालवन स्थित 'मालवणी पाहुणचार रिसॉर्ट' में एक दुखद घटना सामने आई है, जहाँ 25 वर्षीय युवक श्रेणिक मिलिंद टाकले की स्विमिंग पूल में असुरक्षित डाइव लगाने के कारण जान चली गई। श्रेणिक ने रिसॉर्ट के पंप रूम के स्लैब से, जिसकी ऊँचाई लगभग 8 फीट थी, पूल के बच्चों वाले हिस्से में डाइव लगाई, जिसकी गहराई केवल 4 फीट थी। इस असुरक्षित डाइव के कारण श्रेणिक के सिर ने कंक्रीट से सीधे टक्कर ली, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं। पानी के अंदर ही दम घुटने से उसकी मौत हो गई। श्रेणिक अपने 9 दोस्तों के साथ उस रिसॉर्ट में वीकेंड मनाने गया था।
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- मध्य प्रदेश के सागर जिले से चिकित्सा व्यवस्था को शर्मसार कर देने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ बंडा सिविल अस्पताल में हुई कथित लापरवाही के कारण मात्र डेढ़ साल के एक मासूम बच्चे ने अपनी दोनों आँखों की रोशनी हमेशा के लिए खो दी है। सिविल अस्पताल में इलाज कराने के बाद मासूम की आँखों में भयानक संक्रमण फैल गया, जिसके परिणामस्वरूप वह हमेशा के लिए अंधा हो गया। पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगाते हुए शनिवार को बंडा थाने पहुँचा, जहाँ उन्होंने अस्पताल प्रबंधन और दोषी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए एक शिकायती आवेदन दिया। मासूम के पिता ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि जब बच्चे की हालत बिगड़ने पर उसे देश के प्रतिष्ठित संस्थान एम्स ले जाया गया, तो वहाँ के डॉक्टरों ने जाँच के बाद स्पष्ट किया कि यह सब बंडा अस्पताल में हुए 'गलत इलाज' का नतीजा है। इस हृदय विदारक घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं और डॉक्टरों की जिम्मेदारी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय जनता और पीड़ित परिवार में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों की जांच पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।1
- पुलिस अधीक्षक श्री अभिनय विश्वकर्मा के निर्देश पर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री कमल मौर्य और अनुविभागीय अधिकारी श्री वीरेन्द्र धार्वे के मार्गदर्शन में, निरीक्षक अभिषेक चौबे के नेतृत्व में विजयराघवगढ़ पुलिस की टीम ने अवैध रेत परिवहन करने वाले एक ट्रैक्टर को जब्त किया है। यह कार्रवाई बीएनएसएस और खनन अधिनियम के तहत की गई। यह घटना 25 और 26 जून की दरम्यानी रात की है। पुलिस टीम को कटनी नदी के बकठा घाट पर एक ट्रैक्टर द्वारा अवैध रूप से नदी से रेत निकालकर परिवहन करने की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचने पर पुलिस ने देखा कि एक ट्रैक्टर चालक ट्रॉली में रेत भरकर जा रहा था। पुलिस ने रेत का अवैध परिवहन कर रहे इस ट्रैक्टर को अपनी अभिरक्षा में ले लिया, क्योंकि ट्रैक्टर चालक रेत के परिवहन से संबंधित कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद, बिना नंबर के इस ट्रैक्टर को मौके पर उपस्थित गवाहों के समक्ष धारा 106 बीएनएसएस के तहत जब्त किया गया और धारा 4/21 खनन अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई की गई। इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी अभिषेक चौबे, सउनि संतोष स्वामी, आरक्षक पप्पू प्रजापति और आरक्षक चालक मज्जू कोल की मुख्य भूमिका रही।1