कल से शुरू होगा पवित्र माहे रमजान: इबादत, सब्र और रहमत का महीना: मनेन्द्रगढ़/एमसीबी: कल से पवित्र माहे रमजान की शुरुआत होने जा रही है। चांद दिखने के साथ ही मुस्लिम समाज में खुशी और आध्यात्मिक उत्साह का माहौल है। मस्जिदों में विशेष नमाज़ (तरावीह) की तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं और घरों में भी सेहरी व इफ्तार की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं। रमजान इस्लाम का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इसी माह में पवित्र ग्रंथ कुरान का अवतरण हज़रत मुहम्मद (पैगंबर मुहम्मद) पर हुआ था। यही कारण है कि यह महीना इबादत, आत्मशुद्धि और अल्लाह की रहमत पाने का विशेष अवसर माना जाता है। *रमजान का महत्व: रोज़ा रखना इस्लाम के पांच अनिवार्य स्तंभों में से एक है। इस महीने में मुस्लिम समाज भोर (सेहरी) से लेकर सूर्यास्त (इफ्तार) तक उपवास रखते हैं। यह केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं, बल्कि आत्म-अनुशासन, बुरी आदतों से दूरी और आत्मा की शुद्धि का अभ्यास है। *रमजान के प्रमुख उद्देश्य: _कुरान का अवतरण: इसी महीने में कुरान की पहली आयतें अवतरित हुईं। _आध्यात्मिक शुद्धि: आत्म-नियंत्रण और पापों से तौबा (क्षमा याचना) का अवसर। _सहानुभूति और दान: भूख का अनुभव कर गरीबों की पीड़ा को समझना और जकात व सदका देना। _इबादत में वृद्धि: नमाज़, कुरान की तिलावत और दुआओं में अधिक समय देना। _रहमत और बरकत का महीना: धार्मिक विद्वानों के अनुसार रमजान का महीना रहमत (दया), मगफिरत (क्षमा) और निजात (मुक्ति) का पैगाम लेकर आता है। इस दौरान समाज में भाईचारे, प्रेम और सौहार्द की भावना और अधिक मजबूत होती है। इफ्तार के समय मस्जिदों और घरों में सामूहिक रूप से रोज़ा खोला जाता है, जो सामाजिक एकता का सुंदर उदाहरण है। रमजान का महीना 29 या 30 दिनों तक चलता है और इसका समापन ईद-उल-फितर के त्योहार के साथ होता है, जो खुशी, कृतज्ञता और साझा उत्सव का प्रतीक है। पवित्र माहे रमजान की आमद पर मुस्लिम समाज ने देश और प्रदेश की खुशहाली, अमन-चैन और तरक्की की दुआ की है।
कल से शुरू होगा पवित्र माहे रमजान: इबादत, सब्र और रहमत का महीना: मनेन्द्रगढ़/एमसीबी: कल से पवित्र माहे रमजान की शुरुआत होने जा रही है। चांद दिखने के साथ ही मुस्लिम समाज में खुशी और आध्यात्मिक उत्साह का माहौल है। मस्जिदों में विशेष नमाज़ (तरावीह) की तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं और घरों में भी सेहरी व इफ्तार की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं। रमजान इस्लाम का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इसी माह में पवित्र ग्रंथ कुरान का अवतरण हज़रत मुहम्मद (पैगंबर मुहम्मद) पर हुआ था। यही कारण है कि यह महीना इबादत, आत्मशुद्धि और अल्लाह की रहमत पाने का विशेष अवसर माना जाता है। *रमजान का महत्व: रोज़ा रखना इस्लाम के पांच अनिवार्य स्तंभों में से एक है। इस महीने में मुस्लिम समाज भोर (सेहरी) से लेकर सूर्यास्त (इफ्तार) तक उपवास रखते हैं। यह केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं, बल्कि आत्म-अनुशासन, बुरी आदतों से दूरी और आत्मा की शुद्धि का अभ्यास है। *रमजान के प्रमुख उद्देश्य: _कुरान का अवतरण: इसी महीने में कुरान की पहली आयतें अवतरित हुईं। _आध्यात्मिक शुद्धि: आत्म-नियंत्रण और पापों से तौबा (क्षमा याचना) का अवसर। _सहानुभूति और दान: भूख का अनुभव कर गरीबों की पीड़ा को समझना और जकात व सदका देना। _इबादत में वृद्धि: नमाज़, कुरान की तिलावत और दुआओं में अधिक समय देना। _रहमत और बरकत का महीना: धार्मिक विद्वानों के अनुसार रमजान का महीना रहमत (दया), मगफिरत (क्षमा) और निजात (मुक्ति) का पैगाम लेकर आता है। इस दौरान समाज में भाईचारे, प्रेम और सौहार्द की भावना और अधिक मजबूत होती है। इफ्तार के समय मस्जिदों और घरों में सामूहिक रूप से रोज़ा खोला जाता है, जो सामाजिक एकता का सुंदर उदाहरण है। रमजान का महीना 29 या 30 दिनों तक चलता है और इसका समापन ईद-उल-फितर के त्योहार के साथ होता है, जो खुशी, कृतज्ञता और साझा उत्सव का प्रतीक है। पवित्र माहे रमजान की आमद पर मुस्लिम समाज ने देश और प्रदेश की खुशहाली, अमन-चैन और तरक्की की दुआ की है।
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