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उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में ट्रैफिक पुलिस ने एक ऑटो पकड़ा है, जिसमें निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक सवारियां थीं। यह ऑटो एक 7 सीटर वाहन था, लेकिन पुलिस की गिनती में इसमें 19 सवारियां मिलीं। इस उल्लंघन के बाद, पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ऑटो को सीज कर दिया है।
न्यूज़ पेपर
उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में ट्रैफिक पुलिस ने एक ऑटो पकड़ा है, जिसमें निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक सवारियां थीं। यह ऑटो एक 7 सीटर वाहन था, लेकिन पुलिस की गिनती में इसमें 19 सवारियां मिलीं। इस उल्लंघन के बाद, पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ऑटो को सीज कर दिया है।
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- पीलीभीत जिले की पूरनपुर तहसील के ग्राम धर्मापुर में स्थित प्राचीन और प्रसिद्ध धार्मिक स्थल सतभईया बाबा पर हर महीने पूर्णमासी के अवसर पर एक विशाल मेले का आयोजन होता है, जहाँ दूर-दराज से हजारों श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुँचते हैं। दुधिया खुर्द रेलवे स्टेशन के समीप स्थित यह आस्था का केंद्र अब रेलवे विभाग द्वारा लगाई गई ऊंची रेलिंग बैरियरों के कारण श्रद्धालुओं के लिए परेशानी का सबब बन गया है। स्थानीय लोगों और भक्तों के अनुसार, पहले जब यहाँ छोटी रेल लाइन थी, तब ट्रेन से उतरने के बाद श्रद्धालु सीधे और आसानी से सतभईया बाबा स्थान तक पहुँच जाते थे। बड़ी रेल लाइन बनने के बाद, रेलवे विभाग ने सुरक्षा की दृष्टि से स्टेशन के आसपास ऊंची-ऊंची रेलिंग लगा दी हैं, जिससे धार्मिक स्थल तक जाने वाला पुराना मार्ग पूरी तरह से बंद हो गया है। इसके परिणामस्वरूप, ट्रेन से आने वाले श्रद्धालुओं को अब गंतव्य तक पहुँचने के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ता है, जिससे खासकर पूर्णमासी मेले के दौरान बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को काफी दिक्कतें होती हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि रेलिंग लगाना सुरक्षा के लिहाज़ से सही है, लेकिन धार्मिक स्थल तक पहुँचने की सुविधा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए थी। भक्तों और क्षेत्रीय लोगों ने रेलवे प्रशासन से अपील की है कि सतभईया बाबा स्थान के पास रेलिंग में एक अधिकृत प्रवेश द्वार बनाया जाए। उनकी यह मांग है कि इससे श्रद्धालुओं को अनावश्यक परेशानी नहीं होगी और उनकी धार्मिक आस्था का सम्मान भी बना रहेगा। स्थान पर पहुँचे श्रद्धालुओं ने बताया कि यदि रेलवे विभाग एक गेट की व्यवस्था कर देता है, तो हजारों भक्तों को राहत मिलेगी और वर्षों पुरानी इस धार्मिक परंपरा को सुगम बनाया जा सकेगा। क्षेत्रवासियों ने जनहित और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे प्रशासन से इस समस्या का शीघ्र समाधान करने की मांग की है।3
- मोहम्मदी-खीरी के अमीर नगर चौकी परिसर में मोहर्रम के पवित्र त्योहार को शांति, सौहार्द और आपसी भाईचारे के साथ मनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पीस कमेटी की बैठक आयोजित की गई। जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह की अध्यक्षता और पुलिस अधीक्षक ख्याति गर्ग के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुई इस बैठक में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों और ताजियादारों ने हिस्सा लिया। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी से त्योहार को शांतिपूर्ण ढंग से मनाने और आपसी भाईचारा बनाए रखने की अपील की। प्रशासन की ओर से मोहर्रम के जुलूस के दौरान 12 फीट तक के ही ताजिये निकालने का अनुरोध किया गया, जिस पर बैठक में मौजूद सभी 18 गांवों के संभ्रांत नागरिकों और ताजियादारों ने अपनी पूर्ण सहमति जताई। इसके अतिरिक्त, पुलिस अधीक्षक ख्याति गर्ग ने सोशल मीडिया पर फैलने वाली किसी भी तरह की अफवाहों और फर्जी खबरों से दूर रहने तथा सतर्क रहने की कड़ी हिदायत भी दी। इस बैठक का एक खास पहलू जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह का शायराना अंदाज रहा, जिन्होंने अपनी खूबसूरत शेरो-शायरी से माहौल में सकारात्मक ऊर्जा भर दी। उन्होंने "घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूं कर ले, किसी रोते हुए बच्चे को हंसाया जाए" और "परिंदों में फिरकापरस्ती क्यों नहीं होती, कभी मंदिर पर जा बैठे कभी मस्जिद पर जा बैठे" जैसी पंक्तियाँ सुनाईं, जिस पर पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। अधिकारियों ने कार्यक्रम का कुशल संचालन करने वाले प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहम्मद अब्बास नकवी की भी भूरि-भूरि प्रशंसा की। बैठक से पहले, अमीर नगर चौकी पर प्रथम आगमन पर जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को बुके देकर सम्मानित किया गया था। इस मौके पर गोला उप जिलाधिकारी प्रतीक्षा त्रिपाठी, पुलिस क्षेत्राधिकारी अरुण कुमार सिंह, उमेश चंद्र चौरसिया, चौकी इंचार्ज संजीत तिवारी, उपखंड अधिकारी शुभम मौर्य सहित जिला पंचायत सदस्य तौहीद खान, जियाउल्लाह खान, मोहम्मद आरिफ, पप्पू खान, आत्मानंद शुक्ला, सुनील रस्तोगी और गरदहा, रसूलपुर व मोहम्मदपुर सहित कई गांवों के प्रधान व सम्मानित ग्रामवासी उपस्थित रहे।1
- राम मंदिर में चंदा चोरी के मामले को लेकर महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज ने एक बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री स्वयं इस गड़बड़ी को लेकर चिंतित होंगे और इसकी जांच खुद करेंगे। महामंडलेश्वर ने स्पष्ट किया कि राम मंदिर की स्थापना प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हुई है, इसलिए उन्हें किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं होगी।1
- उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी स्थित दुधवा टाइगर रिजर्व में इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी से न केवल इंसान बल्कि वन्य जीव भी प्रभावित हो रहे हैं। इसी बीच दुधवा टाइगर रिजर्व से एक दुर्लभ और दिलचस्प दृश्य सामने आया है, जहाँ एक भालू गर्मी से राहत पाने के लिए जंगल के एक जलाशय में पानी में बैठकर अपने शरीर को ठंडक देता हुआ दिखाई दिया। इस अनोखे पल को वहाँ मौजूद सैलानियों ने अपने कैमरे में कैद कर लिया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे प्रकृति व वन्यजीवों से जुड़ा एक खास क्षण बता रहे हैं।1
- आज भारत की शिक्षा व्यवस्था को महज़ एक वसूली तंत्र बताया जा रहा है। एक चौंकाने वाले दावे में कहा गया है कि देशभर के परिवार जितना पैसा केवल NEET की तैयारी पर खर्च करते हैं, वह भारत सरकार के पूरे शिक्षा बजट के बराबर है। कोटा समेत देश के कोने-कोने से लाखों युवा एक साथ यह कह रहे हैं कि मौजूदा व्यवस्था ने उनके साथ अन्याय किया है। इन युवाओं की कहानियाँ अलग-अलग होने के बावजूद एक ही बात बताती हैं — या तो उन्हें बड़े सपने देखने नहीं दिए गए, या जो सपने उन्होंने देखे थे, वे तोड़ दिए गए। इस संदर्भ में, 'छात्रों की गूंज' को सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि एक क्रांति बताया जा रहा है। इसका उद्देश्य एक ऐसी व्यवस्था बनाना है, जो युवाओं को बड़े सपने देखने का अधिकार दे और उनकी ज़िंदगी को गिरवी रखे बिना, उन्हें पूरा करने में सहयोग करे।1
- उत्तर प्रदेश के दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगल में भीषण गर्मी से परेशान एक भालू का दुर्लभ नजारा देखने को मिला। जंगल के जलाशय में अपने शरीर की गर्मी मिटाते हुए इस भालू का वीडियो सैलानियों ने बनाया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह घटना इन दिनों पड़ रही अत्यधिक गर्मी को दर्शाती है, जिससे न केवल इंसान बल्कि जंगल में रहने वाले वन्य जीव भी काफी परेशान हैं।1
- मिल की चिमनी अजवापुर चीनी मिल की चिमनी सकुशल गिराई गई है अजवापुर चीनी मिल की चिमनी सकुशल गिराई गई मिल की चिमनी1
- भीषण गर्मी में तालाब में उतरा भालू, दुधवा के जंगल में यूं लिया शीतल जल का आनंद भीषण गर्मी और उमस से जहां इंसान बेहाल हैं, वहीं जंगल के वन्यजीव भी राहत पाने के लिए जलस्रोतों का सहारा ले रहे हैं। पलिया के दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगल में एक भालू तालाब के ठंडे पानी में गर्मी से राहत लेते हुए दिखाई दिया। भालू का यह मनमोहक दृश्य कैमरे में कैद हो गया, जो अब वन्यजीव प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। भालू तालाब के बीचों-बीच पानी में बैठकर आराम फरमा रहा है। तालाब की सतह पर जलीय वनस्पतियां फैली हुई हैं, जबकि भालू पानी में डूबकर ठंडक का आनंद लेता नजर आ रहा है। जंगल के इस अनोखे दृश्य ने प्रकृति और वन्यजीवों के बीच गहरे संबंध को एक बार फिर उजागर किया है। दुधवा टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर जगदीश आर ने बताया कि इन दिनों क्षेत्र में तापमान लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में जंगल के जीव-जन्तु भीषण गर्मी से बचने के लिए तालाबों, नालों और अन्य जलस्रोतों की ओर रुख कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वन विभाग द्वारा जंगल में मौजूद प्राकृतिक एवं कृत्रिम जलस्रोतों की नियमित निगरानी की जा रही है, ताकि वन्यजीवों को पानी की कमी का सामना न करना पड़े। बताया कि गर्मी के मौसम में बाघ, हाथी, हिरन, भालू समेत अन्य वन्यजीव अक्सर पानी के आसपास देखे जाते हैं। इससे उन्हें न केवल प्यास बुझाने में मदद मिलती है, बल्कि शरीर का तापमान नियंत्रित रखने में भी राहत मिलती है। दुधवा के जंगल से सामने आया यह दृश्य वन्यजीवों की प्राकृतिक जीवनशैली की एक खूबसूरत झलक पेश करता है, जो यह बताता है कि बढ़ती गर्मी का असर जंगल के जीवों पर भी उतना ही पड़ रहा है, जितना कि इंसानों पर।1
- उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ जिला कलेक्ट्रेट परिसर में खुद को एक 'कड़क पुलिस अफसर' के रूप में दिखाने की कोशिश कर रहा एक फर्जी इंस्पेक्टर रंगे हाथों पकड़ा गया। पहली नजर में, कंधे पर चमचमाता सिंगल स्टार, रौबदार दाढ़ी और हीरो जैसे बालों के स्टाइल के कारण वह आम जनता और प्रशासन को भी चकमा देने में कामयाब रहा। लेकिन उसकी ढीली-ढाली वर्दी और जरूरत से ज्यादा स्टाइल मारने की आदत ने लोगों के मन में शक पैदा कर दिया। वर्दी की फिटिंग का सही न होना और पुलिस मैनुअल के खिलाफ बालों का स्टाइल उसके पकड़े जाने का सबसे बड़ा कारण बना। इसी संदेह के चलते, सजग जनता और वहाँ मौजूद लोगों ने मौके पर ही उस फर्जी इंस्पेक्टर का 'फैक्ट चेक' किया और उसकी असलियत सबके सामने ला दी, जिससे उसके फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हो गया। इस घटना ने सुरक्षित माने जाने वाले कलेक्ट्रेट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि एक फर्जी इंस्पेक्टर का इतनी आसानी से परिसर में घूमना चिंताजनक है।1