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हिमालय की दुर्लभ सूक्ष्म हरियाली होने लगी है विलुप्त डा सपना पंत की नजरें उन दुर्लभ वनस्पतियों पर हैं, जो जलवायु परिवर्तन की पहली शिकार हैं। इससे खतरनाक और क्या हो सकता है कि ये प्रजातियां आईयूसीएन रेड डाटा बुक में जगह बना चुकी है। समझते हैं इनके जीवन को लेकर डा सपना पंत से। हिमालय की हरी-भरी वादियों में छिपी एक ऐसी दुनिया है, जो नंगी आंखों से मुश्किल से दिखती है, लेकिन पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद अहम है। ये हैं ब्रायोफाइट्स — मॉस (काई), लीवरवोर्ट्स और हॉर्नवोर्ट्स जैसी छोटी-छोटी वनस्पतियां, जो नमी और छाया में पनपती हैं। इनमें से कई प्रजातियां सिर्फ पश्चिमी हिमालय के एक छोटे से इलाके — मुक्तेश्वर में ही पाई जाती हैं, और दुनिया के किसी अन्य हिस्से में नहीं। इन्हें मोनोटिपिक इंडेमिक (एकमात्र स्थानीय) कहा जाता है, और ये आईयूसीएन रेड डाटा बुक (राष्ट्रीय लाल पुस्तक) में शामिल हैं। लेकिन अब इनकी अस्तित्व की लड़ाई कठिन हो गई है। जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान बढ़ रहा है, जबकि हवा में नमी (आर्द्रता) लगातार घट रही है। ये वनस्पतियां नमी और छायादार वातावरण पर निर्भर हैं — बिना इनके इनका भविष्य अंधकारमय है। इस संकट पर गहन शोध करने वाली हैं डॉ. सपना पंत, कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी कैंपस, नैनीताल की एक प्रतिभाशाली शोधार्थी। वर्ष 2019 में शुरू हुए उनके पीएचडी शोध का फोकस रहा — "मुक्तेश्वर एज ए साइट ऑफ ब्रायोलॉजिकल हॉटस्पॉट इन नॉर्थ वेस्ट हिमालया"। उन्होंने मुक्तेश्वर को ब्रायोलॉजिकल हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किया, जहां उच्च जैव विविधता के साथ दुर्लभ प्रजातियां मौजूद हैं। शोध के दौरान डॉ. पंत ने कई दुर्लभ प्रजातियों को चिन्हित किया। 2024 में दोबारा सर्वेक्षण करने पर चौंकाने वाला खुलासा हुआ — कई लीवरवोर्ट्स प्रजातियां कई जगहों से पूरी तरह विलुप्त हो चुकी हैं। यह हिमालय की जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन के लिए गंभीर चेतावनी है। ब्रायोफाइट्स मिट्टी बनने, जल चक्र बनाए रखने और कार्बन संग्रहण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनके लुप्त होने से पूरा पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो सकता है। डॉ. सपना पंत ने बताया, "मानवजनित अनियोजित विकास, जंगलों की कटाई और ग्लोबल वार्मिंग ने इन संवेदनशील प्रजातियों के लिए संकट पैदा कर दिया है। तापमान में वृद्धि और आर्द्रता में कमी इनके लिए घातक साबित हो रही है।" शोध की सराहना में डॉ. पंत को यंग साइंटिस्ट अवार्ड भी मिल चुका है। उन्होंने व्यावहारिक कदम भी उठाया — खुरपाताल के समीप लिंगाधार में मॉस गार्डन स्थापित किया, जहां संवेदनशील प्रजातियों को संरक्षित किया जा रहा है। यह प्रयास इन दुर्लभ वनस्पतियों को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। मुक्तेश्वर अब सिर्फ पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि ब्रायोलॉजिकल हॉटस्पॉट के रूप में वैज्ञानिक महत्व रखता है। यहां पाई जाने वाली कुछ प्रजातियां, जैसे Sewardiella tuberifera जैसी लंबे समय से खोई हुई लीवरवोर्ट, हाल ही में दोबारा खोजी गई हैं — यह बताता है कि अभी भी बचाने के लिए समय है। डॉ. पंत का संदेश साफ है: "इन छोटी वनस्पतियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अगर हमने अभी संरक्षण नहीं किया, तो हिमालय की यह अनमोल धरोहर हमेशा के लिए खो सकती है।" यह कहानी सिर्फ वैज्ञानिक शोध की नहीं, बल्कि हमारी धरती की उस नाजुक परत की है, जो दिखती नहीं, लेकिन जीवन को थामे हुए है। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में ऐसे शोध और प्रयास हमें याद दिलाते हैं कि छोटी-छोटी चीजें कितनी बड़ी भूमिका निभाती हैं। इन्हें बचाने के लिए ठोस प्रयास करना पड़ेगा।

1 hr ago
user_NTL
NTL
Nainital, Uttarakhand•
1 hr ago
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हिमालय की दुर्लभ सूक्ष्म हरियाली होने लगी है विलुप्त डा सपना पंत की नजरें उन दुर्लभ वनस्पतियों पर हैं, जो जलवायु परिवर्तन की पहली शिकार हैं। इससे खतरनाक और क्या हो सकता है कि ये प्रजातियां आईयूसीएन रेड डाटा बुक में जगह बना चुकी है। समझते हैं इनके जीवन को लेकर डा सपना पंत से। हिमालय की हरी-भरी वादियों में छिपी एक ऐसी दुनिया है, जो नंगी आंखों से मुश्किल से दिखती है, लेकिन पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद अहम है। ये हैं ब्रायोफाइट्स — मॉस (काई), लीवरवोर्ट्स और हॉर्नवोर्ट्स जैसी छोटी-छोटी वनस्पतियां, जो नमी और छाया में पनपती हैं। इनमें से कई प्रजातियां सिर्फ पश्चिमी हिमालय के एक छोटे से इलाके — मुक्तेश्वर में ही पाई जाती हैं, और दुनिया के किसी अन्य हिस्से में नहीं। इन्हें मोनोटिपिक इंडेमिक (एकमात्र स्थानीय) कहा जाता है, और ये आईयूसीएन रेड डाटा बुक (राष्ट्रीय लाल पुस्तक) में शामिल हैं। लेकिन अब इनकी अस्तित्व की लड़ाई कठिन हो गई है। जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान बढ़ रहा है, जबकि हवा में नमी (आर्द्रता) लगातार घट रही है। ये वनस्पतियां नमी और छायादार वातावरण पर निर्भर हैं — बिना इनके इनका भविष्य अंधकारमय है। इस संकट पर गहन शोध करने वाली हैं डॉ. सपना पंत, कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी कैंपस, नैनीताल की एक प्रतिभाशाली शोधार्थी। वर्ष 2019 में शुरू हुए उनके पीएचडी शोध का फोकस रहा — "मुक्तेश्वर एज ए साइट ऑफ ब्रायोलॉजिकल हॉटस्पॉट इन नॉर्थ वेस्ट हिमालया"। उन्होंने मुक्तेश्वर को ब्रायोलॉजिकल हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किया, जहां उच्च जैव विविधता के साथ दुर्लभ प्रजातियां मौजूद हैं। शोध के दौरान डॉ. पंत ने कई दुर्लभ प्रजातियों को चिन्हित किया। 2024 में दोबारा सर्वेक्षण करने पर चौंकाने वाला खुलासा हुआ — कई लीवरवोर्ट्स प्रजातियां कई जगहों से पूरी तरह विलुप्त हो चुकी हैं। यह हिमालय की जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन के लिए गंभीर चेतावनी है। ब्रायोफाइट्स मिट्टी बनने, जल चक्र बनाए रखने और कार्बन संग्रहण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनके लुप्त होने से पूरा पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो सकता है। डॉ. सपना पंत ने बताया, "मानवजनित अनियोजित विकास, जंगलों की कटाई और ग्लोबल वार्मिंग ने इन संवेदनशील प्रजातियों के लिए संकट पैदा कर दिया है। तापमान में वृद्धि और आर्द्रता में कमी इनके लिए घातक साबित हो रही है।" शोध की सराहना में डॉ. पंत को यंग साइंटिस्ट अवार्ड भी मिल चुका है। उन्होंने व्यावहारिक कदम भी उठाया — खुरपाताल के समीप लिंगाधार में मॉस गार्डन स्थापित किया, जहां संवेदनशील प्रजातियों को संरक्षित किया जा रहा है। यह प्रयास इन दुर्लभ वनस्पतियों को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। मुक्तेश्वर अब सिर्फ पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि ब्रायोलॉजिकल हॉटस्पॉट के रूप में वैज्ञानिक महत्व रखता है। यहां पाई जाने वाली कुछ प्रजातियां, जैसे Sewardiella tuberifera जैसी लंबे समय से खोई हुई लीवरवोर्ट, हाल ही में दोबारा खोजी गई हैं — यह बताता है कि अभी भी बचाने के लिए समय है। डॉ. पंत का संदेश साफ है: "इन छोटी वनस्पतियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अगर हमने अभी संरक्षण नहीं किया, तो हिमालय की यह अनमोल धरोहर हमेशा के लिए खो सकती है।" यह कहानी सिर्फ वैज्ञानिक शोध की नहीं, बल्कि हमारी धरती की उस नाजुक परत की है, जो दिखती नहीं, लेकिन जीवन को थामे हुए है। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में ऐसे शोध और प्रयास हमें याद दिलाते हैं कि छोटी-छोटी चीजें कितनी बड़ी भूमिका निभाती हैं। इन्हें बचाने के लिए ठोस प्रयास करना पड़ेगा।

More news from Uttarakhand and nearby areas
  • नैनीताल में सुबह से हल्की बारिश शुरू हो गई है। रुक रुक कर पानी बरस रहा है। गुरुवार की सुबह हुई बारिश से सूखे से राहत मिली है। पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के कारण मौसम में बदलाव आया है और वर्षा भी अचानक ही हुई है। 3300 मीटर से अधिक ऊंची चोटियों में बर्फबारी की उम्मीद बनी हुई है ।
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    नैनीताल में सुबह से हल्की बारिश शुरू हो गई है। रुक रुक कर पानी बरस रहा है। गुरुवार की सुबह हुई बारिश से  सूखे से राहत मिली है।  पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के कारण मौसम में बदलाव आया है और वर्षा भी अचानक ही हुई है। 3300 मीटर से अधिक ऊंची चोटियों में बर्फबारी की उम्मीद बनी हुई है ।
    user_NTL
    NTL
    Nainital, Uttarakhand•
    1 hr ago
  • हरिद्वार के बहादुरपुर जट में सुबह-सुबह कार्रवाई के लिए पहुंची विजिलेंस टीम को स्थानीय युवकों के विरोध और हमले का सामना करना पड़ा। बताया जा रहा है कि टीम किसी शिकायत के आधार पर छापेमारी करने पहुंची थी, तभी मौके पर मौजूद कुछ युवकों ने विरोध शुरू कर दिया, जिससे हालात तनावपूर्ण हो गए। सूचना मिलते ही पथरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है और संबंधित लोगों से पूछताछ जारी है।
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    हरिद्वार के बहादुरपुर जट में सुबह-सुबह कार्रवाई के लिए पहुंची विजिलेंस टीम को स्थानीय युवकों के विरोध और हमले का सामना करना पड़ा। बताया जा रहा है कि टीम किसी शिकायत के आधार पर छापेमारी करने पहुंची थी, तभी मौके पर मौजूद कुछ युवकों ने विरोध शुरू कर दिया, जिससे हालात तनावपूर्ण हो गए। सूचना मिलते ही पथरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है और संबंधित लोगों से पूछताछ जारी है।
    user_नवीन चन्द्र आर्य
    नवीन चन्द्र आर्य
    Nainital, Uttarakhand•
    14 hrs ago
  • कुमाऊँ आयुक्त दीपक रावत ने रानीखेत तहसील और उप निबंधक कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान तहसील कार्यालय में रखे पुराने अभिलेखों की स्थिति का परीक्षण किया गया तथा अभिलेखों के सुव्यवस्थित रूप से संरक्षण की समीक्षा की गई। तहसील न्यायालय में दायर वादों की विस्तार से समीक्षा करते हुए आयुक्त ने कई प्रकरणों के लंबे समय से लंबित पाए जाने पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने निर्देश दिए कि अधिक समय से लंबित वादों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर 45 से 60 दिवस के भीतर सुनिश्चित किया जाए। निरीक्षण के दौरान एक प्रकरण में फाइल पर अनावश्यक आपत्ति लगाए जाने को गंभीरता से लेते हुए आयुक्त ने संबंधित नायब तहसीलदार को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त उप निबंधक कार्यालय एवं संयुक्त मजिस्ट्रेट कार्यालय का भी निरीक्षण किया गया। आयुक्त ने अभिलेख संधारण, जनसुनवाई व्यवस्था तथा लंबित मामलों की प्रगति की समीक्षा करते हुए सभी विभागों को कार्यप्रणाली में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान अपर जिलाधिकारी युक्ता मिश्र, संयुक्त मजिस्ट्रेट गौरी प्रभात सहित तहसील के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
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    कुमाऊँ आयुक्त दीपक रावत ने रानीखेत तहसील और उप निबंधक कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान तहसील कार्यालय में रखे पुराने अभिलेखों  की स्थिति का परीक्षण किया गया तथा अभिलेखों के सुव्यवस्थित रूप से संरक्षण की समीक्षा की गई।
तहसील न्यायालय में दायर वादों की विस्तार से समीक्षा करते हुए आयुक्त ने कई प्रकरणों के लंबे समय से लंबित पाए जाने पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने निर्देश दिए कि अधिक समय से  लंबित वादों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर 45 से 60 दिवस के भीतर सुनिश्चित किया जाए।
निरीक्षण के दौरान एक प्रकरण में फाइल पर अनावश्यक आपत्ति लगाए जाने को गंभीरता से लेते हुए आयुक्त ने संबंधित नायब तहसीलदार को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
इसके अतिरिक्त उप निबंधक कार्यालय एवं संयुक्त मजिस्ट्रेट कार्यालय का भी निरीक्षण किया गया। आयुक्त ने अभिलेख संधारण, जनसुनवाई व्यवस्था तथा लंबित मामलों की प्रगति की समीक्षा करते हुए सभी विभागों को कार्यप्रणाली में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान अपर जिलाधिकारी युक्ता मिश्र, संयुक्त मजिस्ट्रेट गौरी प्रभात सहित तहसील के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
    user_Vinod Joshi
    Vinod Joshi
    Local News Reporter अल्मोड़ा, अल्मोड़ा, उत्तराखंड•
    1 hr ago
  • कव्वाली अच्छी लगी हो तो लाइक करना फॉलो करना 🙏🙏👍👍
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    कव्वाली अच्छी लगी हो तो लाइक करना फॉलो करना 🙏🙏👍👍
    user_Danish Khan
    Danish Khan
    Dancer अल्मोड़ा, अल्मोड़ा, उत्तराखंड•
    21 hrs ago
  • Post by शैल शक्ति
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    Post by शैल शक्ति
    user_शैल शक्ति
    शैल शक्ति
    पत्रकार लालकुआँ, नैनीताल, उत्तराखंड•
    12 hrs ago
  • Post by Laxman bisht
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    Post by Laxman bisht
    user_Laxman bisht
    Laxman bisht
    Local News Reporter लोहाघाट, चंपावत, उत्तराखंड•
    10 hrs ago
  • *चम्पावत: सरस कॉर्बेट महोत्सव–2026 की तैयारियों का जिलाधिकारी मनीष कुमार ने लिया जायजा,
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    *चम्पावत: सरस कॉर्बेट महोत्सव–2026 की तैयारियों का जिलाधिकारी मनीष कुमार ने लिया जायजा,
    user_The Public Matter
    The Public Matter
    पत्रकार चंपावत, चंपावत, उत्तराखंड•
    18 hrs ago
  • तूफान तो आपने बहुत देखे होंगे, लेकिन अंतरिक्ष से आने वाले इस तूफान को आपने कभी नहीं देखा होगा। ये सौर तूफान है, जो चुपचाप सूर्य में होने वाले विस्फोटों से निकलता है और पलक झपकते ही हमारे सैटेलाइटस को खत्म कर जाता है। इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रिक का यह सबसे बड़ा दुश्मन है। दुनियाभर के सौर वैज्ञानिक इस पर नजर रखते हैं। इनके बारे में कहानी लम्बी कभी और चर्चा करेंगे। फिलहाल आप इस भयानक खतरे वाले वीडियो को देखिए।
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    तूफान तो आपने बहुत देखे होंगे, लेकिन अंतरिक्ष से आने वाले इस तूफान को आपने कभी नहीं देखा होगा। ये सौर तूफान है, जो चुपचाप सूर्य में होने वाले विस्फोटों से निकलता है और पलक झपकते ही हमारे सैटेलाइटस को खत्म कर जाता है। इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रिक का यह सबसे बड़ा दुश्मन है। दुनियाभर के सौर वैज्ञानिक इस पर नजर रखते हैं। इनके बारे में कहानी लम्बी कभी और चर्चा करेंगे। फिलहाल आप इस भयानक खतरे वाले वीडियो को देखिए।
    user_NTL
    NTL
    Nainital, Uttarakhand•
    12 hrs ago
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