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तेतरिया पंचायत के मुखिया उमा भारती ने विभिन्न वैवाहिक कार्यक्रम में हुए शामिल मेसकौर (नवादा) सोमवार को प्रखंड अंतर्गत तेतरिया पंचायत के हेरो गांव निवासी सरदार यादव जी के पोती के विवाह समारोह में पहुंची पंचायत के मुखिया उमा भारती जी ने बधाई दी मौके पर पैक्स अध्यक्ष मनोज कुमार, पंचायत समिति प्रतिनिधि नरेश यादव, मुनि यादव, देवेंद्र पंडित, सुरेश यादव सहित कई लोग मौजूद रहे

3 hrs ago
user_अभिषेक कुमार पत्रकार
अभिषेक कुमार पत्रकार
Local News Reporter Meskaur, Nawada•
3 hrs ago
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तेतरिया पंचायत के मुखिया उमा भारती ने विभिन्न वैवाहिक कार्यक्रम में हुए शामिल मेसकौर (नवादा) सोमवार को प्रखंड अंतर्गत तेतरिया पंचायत के हेरो गांव निवासी सरदार यादव जी के पोती के विवाह समारोह में पहुंची पंचायत के मुखिया उमा भारती जी ने बधाई दी मौके पर पैक्स अध्यक्ष मनोज कुमार, पंचायत समिति प्रतिनिधि नरेश यादव, मुनि यादव, देवेंद्र पंडित, सुरेश यादव सहित कई लोग मौजूद रहे

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  • Post by News Of Nawada
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    user_News Of Nawada
    News Of Nawada
    Local News Reporter सिरदला, नवादा, बिहार•
    7 hrs ago
  • दखिनगाँव चौक का नाम बदलने पर बवाल, 24 घंटे के भीतर शुरू हुआ विरोध वज़ीरगंज प्रखंड के दखिनगाँव चौक का नाम बदलकर “परशुराम चौक” किए जाने के महज चौबीस घंटे के भीतर ही इलाके में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह सिर्फ एक नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि उनके गांव की पहचान और इतिहास से जुड़ा मामला है। ग्रामीणों का कहना है कि भगवान परशुराम के प्रति उनकी गहरी आस्था है और उनके नाम पर चौक का नामकरण करने से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन “दखिनगाँव” नाम सदियों से चला आ रहा है, जो उनके पूर्वजों की विरासत और पहचान का प्रतीक है। ऐसे में इस नाम को पूरी तरह हटाना उचित नहीं है। स्थानीय लोगों ने बताया कि दखिनगाँव नाम सिर्फ एक जगह का नाम नहीं, बल्कि यहां के इतिहास, संस्कृति और सामाजिक पहचान से जुड़ा हुआ है। “हमारे पूर्वजों ने इस गांव को बसाया, तब से यह दखिनगाँव के नाम से जाना जाता है। अगर नाम ही बदल दिया जाएगा, तो आने वाली पीढ़ी अपने इतिहास से कैसे जुड़ पाएगी,” एक ग्रामीण ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा। कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि अगर भगवान परशुराम के नाम पर सम्मान देना है, तो संयुक्त नाम रखा जा सकता है, जैसे “दखिनगाँव परशुराम चौक”, ताकि आस्था और परंपरा दोनों का सम्मान बना रहे। वहीं, इस मुद्दे पर सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। गांव के बुजुर्गों और युवाओं के बीच लगातार बैठकें हो रही हैं, जिसमें इस नामकरण के फैसले पर पुनर्विचार की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि बिना व्यापक जनमत के इस तरह का फैसला लेना उचित नहीं है। फिलहाल यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है और प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों तक इस पर प्रतिक्रिया की उम्मीद की जा रही है। अगर समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो यह विवाद और गहरा सकता है।
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    दखिनगाँव चौक का नाम बदलने पर बवाल, 24 घंटे के भीतर शुरू हुआ विरोध
वज़ीरगंज प्रखंड के दखिनगाँव चौक का नाम बदलकर “परशुराम चौक” किए जाने के महज चौबीस घंटे के भीतर ही इलाके में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह सिर्फ एक नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि उनके गांव की पहचान और इतिहास से जुड़ा मामला है। ग्रामीणों का कहना है कि भगवान परशुराम के प्रति उनकी गहरी आस्था है और उनके नाम पर चौक का नामकरण करने से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन “दखिनगाँव” नाम सदियों से चला आ रहा है, जो उनके पूर्वजों की विरासत और पहचान का प्रतीक है। ऐसे में इस नाम को पूरी तरह हटाना उचित नहीं है। स्थानीय लोगों ने बताया कि दखिनगाँव नाम सिर्फ एक जगह का नाम नहीं, बल्कि यहां के इतिहास, संस्कृति और सामाजिक पहचान से जुड़ा हुआ है। “हमारे पूर्वजों ने इस गांव को बसाया, तब से यह दखिनगाँव के नाम से जाना जाता है। अगर नाम ही बदल दिया जाएगा, तो आने वाली पीढ़ी अपने इतिहास से कैसे जुड़ पाएगी,” एक ग्रामीण ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा। कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि अगर भगवान परशुराम के नाम पर सम्मान देना है, तो संयुक्त नाम रखा जा सकता है, जैसे “दखिनगाँव परशुराम चौक”, ताकि आस्था और परंपरा दोनों का सम्मान बना रहे।
वहीं, इस मुद्दे पर सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। गांव के बुजुर्गों और युवाओं के बीच लगातार बैठकें हो रही हैं, जिसमें इस नामकरण के फैसले पर पुनर्विचार की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि बिना व्यापक जनमत के इस तरह का फैसला लेना उचित नहीं है।
फिलहाल यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है और प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों तक इस पर प्रतिक्रिया की उम्मीद की जा रही है। अगर समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो यह विवाद और गहरा सकता है।
    user_हेमन्त कुमार  सिंह
    हेमन्त कुमार सिंह
    जनहित मे समर्पित Wazirganj•
    11 hrs ago
  • भीम आर्मी जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र राजवंशी जी के अगुवाई में आज 19 अप्रैल 2026 को बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी के 135वां जयंती के सिलसिले और मौका पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई जिसमें चाहने वालों का उमड़ा जनसैलाब।
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    भीम आर्मी जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र राजवंशी जी के अगुवाई में आज 19 अप्रैल 2026 को बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी के 135वां जयंती के सिलसिले और मौका पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई जिसमें चाहने वालों का उमड़ा जनसैलाब।
    user_Tws News
    Tws News
    Advertising Photographer हिसुआ, नवादा, बिहार•
    12 hrs ago
  • रब ने बना दी जोड़ी। जुबेद और खदीजा दोनों करते से मोहब्बत। दोनों ने रस्मो रिवाज के साथ कर ली शादी। बैंड बाजा के साथ गई बारात, दूल्हा ने दुल्हन को ले आए अपने साथ।
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    रब ने बना दी जोड़ी। जुबेद और खदीजा दोनों करते से मोहब्बत। दोनों ने रस्मो रिवाज के साथ कर ली शादी। बैंड बाजा के साथ गई बारात, दूल्हा ने दुल्हन को ले आए अपने साथ।
    user_Imtiyaj A Fonwel
    Imtiyaj A Fonwel
    हिसुआ, नवादा, बिहार•
    16 hrs ago
  • 10 रुपये की. झालमुरी खाते दिखे प्रधानमंत्री, वीडियो वायरल संजय वर्मा " सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि भारत के प्रधानमंत्री एक साधारण भेलपुरी की दुकान पर पहुंचकर मात्र 10 रुपये की झालमुरी का आनंद लेते नजर आ रहे हैं। वीडियो में दिख रहा है कि प्रधानमंत्री बेहद सादगी के साथ आम लोगों के बीच खड़े होकर झालमुरी खाते हैं। इस दौरान वहां मौजूद लोगों की भारी भीड़ जुट जाती है और कई लोग अपने मोबाइल फोन से इस पल को कैद करते दिखाई देते हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे प्रधानमंत्री की सादगी और आम जनता से जुड़ाव का प्रतीक बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे राजनीतिक नजरिए से भी देख रहे हैं। खासकर पश्चिम बंगाल की राजनीति के संदर्भ में इस वीडियो को जोड़ते हुए चर्चा हो रही है कि इस तरह की छवि का आगामी समय में असर पड़ सकता है। हालांकि, इस वायरल वीडियो की सत्यता की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कई बार सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो पुराने, संपादित या भ्रामक भी हो सकते हैं। ऐसे में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों की जांच करना आवश्यक है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के दृश्य आम जनता के बीच नेताओं की छवि को प्रभावित करते हैं। सादगी और आम लोगों के बीच उपस्थिति लोगों को आकर्षित करती है, लेकिन इसका वास्तविक राजनीतिक प्रभाव कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है। फिलहाल, यह वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
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    10 रुपये की. झालमुरी खाते दिखे प्रधानमंत्री, वीडियो वायरल
संजय वर्मा
"
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि भारत के प्रधानमंत्री एक साधारण भेलपुरी की दुकान पर पहुंचकर मात्र 10 रुपये की झालमुरी का आनंद लेते नजर आ रहे हैं। वीडियो में दिख रहा है कि प्रधानमंत्री बेहद सादगी के साथ आम लोगों के बीच खड़े होकर झालमुरी खाते हैं। इस दौरान वहां मौजूद लोगों की भारी भीड़ जुट जाती है और कई लोग अपने मोबाइल फोन से इस पल को कैद करते दिखाई देते हैं।
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे प्रधानमंत्री की सादगी और आम जनता से जुड़ाव का प्रतीक बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे राजनीतिक नजरिए से भी देख रहे हैं। खासकर पश्चिम बंगाल की राजनीति के संदर्भ में इस वीडियो को जोड़ते हुए चर्चा हो रही है कि इस तरह की छवि का आगामी समय में असर पड़ सकता है।
हालांकि, इस वायरल वीडियो की सत्यता की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कई बार सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो पुराने, संपादित या भ्रामक भी हो सकते हैं। ऐसे में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों की जांच करना आवश्यक है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के दृश्य आम जनता के बीच नेताओं की छवि को प्रभावित करते हैं। सादगी और आम लोगों के बीच उपस्थिति लोगों को आकर्षित करती है, लेकिन इसका वास्तविक राजनीतिक प्रभाव कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है।
फिलहाल, यह वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
    user_Sanjay Verma
    Sanjay Verma
    बिजनेस के साथ साथ पत्रकारिता नवादा, नवादा, बिहार•
    9 hrs ago
  • गया: रात 1:30 बजे मानपुर के भुसुंडा बाजार समिति के पास भीषण आग, लाखों का नुकसान — 13 बकरा, 50 मुर्गी और एक गाय जिंदा जलीगया के मानपुर इलाके से बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां बीती रात करीब 1:30 बजे भुसुंडा बाजार समिति के पास भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। इस आगजनी की घटना में लाखों रुपये का सामान जलकर राख हो गया। बताया जा रहा है कि 13 बकरा, 50 मुर्गी और एक गाय भी आग की चपेट में आकर जिंदा जल गई। इसके अलावा करीब 20 प्लंग (खाट/बेड) समेत घर का सारा सामान पूरी तरह नष्ट हो गया।
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    गया: रात 1:30 बजे मानपुर के भुसुंडा बाजार समिति के पास भीषण आग, लाखों का नुकसान — 13 बकरा, 50 मुर्गी और एक गाय जिंदा जलीगया के मानपुर इलाके से बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां बीती रात करीब 1:30 बजे भुसुंडा बाजार समिति के पास भीषण आग लग गई।
आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
इस आगजनी की घटना में लाखों रुपये का सामान जलकर राख हो गया।
बताया जा रहा है कि 13 बकरा, 50 मुर्गी और एक गाय भी आग की चपेट में आकर जिंदा जल गई।
इसके अलावा करीब 20 प्लंग (खाट/बेड) समेत घर का सारा सामान पूरी तरह नष्ट हो गया।
    user_Ashutosh kumar
    Ashutosh kumar
    Local News Reporter मानपुर, गया, बिहार•
    1 hr ago
  • नए एसपी का सख्त संदेश: अपराधियों की अब खैर नहीं, तस्करी और अवैध वसूली के खिलाफ चलेगा कड़ा अभियान
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    नए एसपी का सख्त संदेश: अपराधियों की अब खैर नहीं, तस्करी और अवैध वसूली के खिलाफ चलेगा कड़ा अभियान
    user_JANATA 1 NEWS
    JANATA 1 NEWS
    Media house कोडरमा, कोडरमा, झारखंड•
    2 hrs ago
  • जय जय परशुराम के उद्घोष से गूंज उठा दखिनगाँव, चौक का हुआ नामकरण! वज़ीरगंज प्रखंड अंतर्गत दखिनगाँव में उस समय भक्ति और उत्साह का अद्भुत माहौल देखने को मिला, जब पूरे गाँव के लोग एक स्वर में जय जय परशुराम के जयघोष से दखिनगाँव चौक को गूंजयमान कर दिए । आपको बता दे की वज़ीरगंज के दखिनगाँव चौक का विधिवत नामकरण हुआ अब उसे परशुराम चौक के नाम से जाना जाएगा। इस ऐतिहासिक पहल से ग्रामीणों में खासा उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम का आयोजन स्थानीय ग्रामीणों एवं समाज के गणमान्य लोगों के सहयोग से किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु और युवा वर्ग उपस्थित रहे। चौक पर भगवान परशुराम के आदर्शों, उनके जीवन और पराक्रम का विस्तार से वर्णन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि भगवान परशुराम केवल एक योद्धा ही नहीं, बल्कि धर्म और न्याय के प्रतीक थे। भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। उनका जन्म ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के घर हुआ था। वे बचपन से ही अत्यंत तेजस्वी, विद्वान और पराक्रमी थे। उन्हें भगवान शिव से फरसा प्राप्त हुआ, जिसके कारण उनका नाम परशुराम पड़ा। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब पृथ्वी पर अत्याचार और अधर्म बढ़ गया था, तब भगवान परशुराम ने अन्यायी और अत्याचारी क्षत्रियों के खिलाफ युद्ध किया और इक्कीस बार पृथ्वी को अत्याचार से मुक्त कराया। उनका जीवन सत्य, धर्म और न्याय की रक्षा के लिए समर्पित रहा। कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि भगवान परशुराम ने समाज को यह संदेश दिया कि अन्याय के खिलाफ खड़े होना ही सच्चा धर्म है। उनका जीवन संघर्ष, साहस और धर्म की रक्षा का प्रतीक है।चौक के नामकरण के अवसर पर पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल रहा। युवाओं ने झंडा, बैनर के साथ जुलूस निकाला, वहीं बुजुर्गों ने इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। कई लोगों ने कहा कि परशुराम चौक नाम से नई पीढ़ी को अपने धर्म और संस्कृति के प्रति जागरूकता मिलेगी। अंत में उपस्थित लोगों ने एक स्वर में भगवान परशुराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक भावना को मजबूत किया, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक जागरूकता का भी संदेश दिया।
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    जय जय परशुराम के उद्घोष से गूंज उठा दखिनगाँव, चौक का हुआ नामकरण! 
वज़ीरगंज प्रखंड अंतर्गत दखिनगाँव में उस समय भक्ति और उत्साह का अद्भुत माहौल देखने को मिला, जब पूरे गाँव के लोग एक स्वर में जय जय परशुराम के जयघोष से दखिनगाँव चौक को गूंजयमान कर दिए । आपको बता दे की वज़ीरगंज के दखिनगाँव चौक का विधिवत नामकरण हुआ अब उसे परशुराम चौक के नाम से जाना जाएगा। इस ऐतिहासिक पहल से ग्रामीणों में खासा उत्साह देखने को मिला।
कार्यक्रम का आयोजन स्थानीय ग्रामीणों एवं समाज के गणमान्य लोगों के सहयोग से किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु और युवा वर्ग उपस्थित रहे। चौक पर भगवान परशुराम के आदर्शों, उनके जीवन और पराक्रम का विस्तार से वर्णन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि भगवान परशुराम केवल एक योद्धा ही नहीं, बल्कि धर्म और न्याय के प्रतीक थे। भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। उनका जन्म ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के घर हुआ था। वे बचपन से ही अत्यंत तेजस्वी, विद्वान और पराक्रमी थे। उन्हें भगवान शिव से फरसा प्राप्त हुआ, जिसके कारण उनका नाम परशुराम पड़ा। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब पृथ्वी पर अत्याचार और अधर्म बढ़ गया था, तब भगवान परशुराम ने अन्यायी और अत्याचारी क्षत्रियों के खिलाफ युद्ध किया और इक्कीस बार पृथ्वी को अत्याचार से मुक्त कराया। उनका जीवन सत्य, धर्म और न्याय की रक्षा के लिए समर्पित रहा। कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि भगवान परशुराम ने समाज को यह संदेश दिया कि अन्याय के खिलाफ खड़े होना ही सच्चा धर्म है। उनका जीवन संघर्ष, साहस और धर्म की रक्षा का प्रतीक है।चौक के नामकरण के अवसर पर पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल रहा। युवाओं ने झंडा, बैनर के साथ जुलूस निकाला, वहीं बुजुर्गों ने इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। कई लोगों ने कहा कि परशुराम चौक नाम से नई पीढ़ी को अपने धर्म और संस्कृति के प्रति जागरूकता मिलेगी। अंत में उपस्थित लोगों ने एक स्वर में भगवान परशुराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक भावना को मजबूत किया, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक जागरूकता का भी संदेश दिया।
    user_हेमन्त कुमार  सिंह
    हेमन्त कुमार सिंह
    जनहित मे समर्पित Wazirganj•
    12 hrs ago
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