निजी क्लीनिक में युवक की मौत, शव रखकर परिजनों ने गोविंदपुर बरेब मार्ग किया जाम, निजी क्लीनिक में युवक की मौत, शव रखकर परिजनों ने गोविंदपुर बरेब मार्ग किया जाम, गोविंदपुर थाना क्षेत्र के गोविंदपुर दरमनियां बाजार स्थित मां अम्बे निजी क्लीनिक में इलाज के बाद 32 वर्षीय दिलीप कुमार की मौत से आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने सोमवार को क्लीनिक के सामने गोविंदपुर-बरेव मुख्य मार्ग पर शव रखकर सड़क जाम कर दिया। करीब आधे घंटे तक सड़क जाम रहने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। मृतक युवक की पहचान झारखंड के सतगावां थाना क्षेत्र के कटैया टोला गजहड़ निवासी शिवदानी राय के 32 वर्षीय पुत्र दिलीप कुमार के रूप मे किया गया। परिजनों ने क्लीनिक संचालक डॉ. श्रवण कुमार पर इलाज में लापरवाही और गलत इलाज करने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि दिलीप को मलेरिया था, जबकि क्लीनिक में डेंगू का इलाज किया जा रहा था। परिजनों के अनुसार करीब पांच दिनों के इलाज में 65 हजार रुपये लिए गए। स्थिति बिगड़ने पर दिलीप को नवादा के एमएच अस्पताल ले जाया गया, जहां से गंभीर हालत में पटना रेफर किया गया। पटना के अस्पतालों में इलाज के दौरान सोमवार सुबह उसकी मौत हो गई। इसके बाद परिजन शव को एंबुलेंस से गोविंदपुर लाकर क्लीनिक के सामने पहुंच गए। हंगामे के दौरान क्लीनिक संचालक क्लीनिक बंद कर फरार हो गया। मृतक के पिता शिवदानी राय पत्नी नगीनी देवी और बड़े भाई नागेश्वर राय ने डॉ श्रवण कुमार पर गलत इलाज करने के आरोप लगाते हुए कहा कि दिलीप को मलेरिया बुखार था और श्रवण कुमार द्वारा डेंगू का इलाज किया जा रहा था जिससे मरीज की हालत बिगड़ते चले गए और 14 अगस्त को रात्रि मे मरीज की हालत बिगड़ने पर श्रवण कुमार बिना परिजन को बताए नवादा ले जाकर एम एच अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां से मरीज की हालत गंभीर रहने के कारण पटना रेफर कर दिया गया जहां पटना में इलाज के दौरान दिलीप कुमार की मौत हो गया, साथ ही उन्होंने कहा की श्रवण कुमार के द्वारा गलत इलाज करने के कारण दिलीप कुमार की मौत हो गई। परिजनों ने क्षेत्र में संचालित अवैध निजी क्लीनिकों की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। परिजनों का आरोप है कि उक्त क्लीनिक में पहले भी इलाज के दौरान कई लोगों की मौतें हो चुकी हैं। साथ ही बताया की गोविंदपुर मे लगभग आधा दर्जन अवैध नीजी क्लीनिक और नर्सिंग होम संचालित है लेकिन विभागीय स्तर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, मृतक के परिजनों एवं ग्रामीणों ने प्रशासन एवं अधिकारियों से अवैध नीजी क्लीनिक की जांच की मांग की है, सूचना पर बीडीओ कुमार शैलेंद्र और थानाध्यक्ष विजय कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों को समझाकर सड़क जाम समाप्त कराया। बीडीओ ने कहा कि परिजनों के आवेदन पर निजी क्लीनिक के संचालन और लगाए गए आरोपों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। मृतक दिलीप अपने पीछे पत्नी और तीन मासूम बेटियों को छोड़ गए हैं। चार वर्ष, दो वर्ष और एक वर्ष की तीनों बच्चियों के सिर से पिता का साया उठ गया। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा है। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इस घटना के बाद परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है, खबर लिखे जाने तक मृतक के परिजन एवं ग्रामीण शव को मां अम्बे नीजी क्लीनिक के गेट के पास शव रखकर मुआवजे और कारवाई की मांग पर अड़े रहे।
निजी क्लीनिक में युवक की मौत, शव रखकर परिजनों ने गोविंदपुर बरेब मार्ग किया जाम, निजी क्लीनिक में युवक की मौत, शव रखकर परिजनों ने गोविंदपुर बरेब मार्ग किया जाम, गोविंदपुर थाना क्षेत्र के गोविंदपुर दरमनियां बाजार स्थित मां अम्बे निजी क्लीनिक में इलाज के बाद 32 वर्षीय दिलीप कुमार की मौत से आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने सोमवार को क्लीनिक के सामने गोविंदपुर-बरेव मुख्य मार्ग पर शव रखकर सड़क जाम कर दिया। करीब आधे घंटे तक सड़क जाम रहने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। मृतक युवक की पहचान झारखंड के सतगावां थाना क्षेत्र के कटैया टोला गजहड़ निवासी शिवदानी राय के 32 वर्षीय पुत्र दिलीप कुमार के रूप मे किया गया। परिजनों ने क्लीनिक संचालक डॉ. श्रवण कुमार पर इलाज में लापरवाही और गलत इलाज करने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि दिलीप को मलेरिया था, जबकि क्लीनिक में डेंगू का इलाज किया जा रहा था। परिजनों के अनुसार करीब पांच दिनों के इलाज में 65 हजार रुपये लिए गए। स्थिति बिगड़ने पर दिलीप को नवादा के एमएच अस्पताल ले जाया गया, जहां से गंभीर हालत में पटना रेफर किया गया। पटना के अस्पतालों में इलाज के दौरान सोमवार सुबह उसकी मौत हो गई। इसके बाद परिजन शव को एंबुलेंस से गोविंदपुर लाकर क्लीनिक के सामने पहुंच गए। हंगामे के दौरान क्लीनिक संचालक क्लीनिक बंद कर फरार हो गया। मृतक के पिता शिवदानी राय पत्नी नगीनी देवी और बड़े भाई नागेश्वर राय ने डॉ श्रवण कुमार पर गलत इलाज करने के आरोप लगाते हुए कहा कि दिलीप को मलेरिया बुखार था और श्रवण कुमार द्वारा डेंगू का इलाज किया जा रहा था जिससे मरीज की हालत बिगड़ते चले गए और 14 अगस्त को रात्रि मे मरीज की हालत बिगड़ने पर श्रवण कुमार बिना परिजन को बताए नवादा ले जाकर एम एच अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां से मरीज की हालत गंभीर रहने के कारण पटना रेफर कर दिया गया जहां पटना में इलाज के दौरान दिलीप कुमार की मौत हो गया, साथ ही उन्होंने कहा की श्रवण कुमार के द्वारा गलत इलाज करने के कारण दिलीप कुमार की मौत हो गई। परिजनों ने क्षेत्र में संचालित अवैध निजी क्लीनिकों की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। परिजनों का आरोप है कि उक्त क्लीनिक में पहले भी इलाज के दौरान कई लोगों की मौतें हो चुकी हैं। साथ ही बताया की गोविंदपुर मे लगभग आधा दर्जन अवैध नीजी क्लीनिक और नर्सिंग होम संचालित है लेकिन विभागीय स्तर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, मृतक के परिजनों एवं ग्रामीणों ने प्रशासन एवं अधिकारियों से अवैध नीजी क्लीनिक की जांच की मांग की है, सूचना पर बीडीओ कुमार शैलेंद्र और थानाध्यक्ष विजय कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों को समझाकर सड़क जाम समाप्त कराया। बीडीओ ने कहा कि परिजनों के आवेदन पर निजी क्लीनिक के संचालन और लगाए गए आरोपों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। मृतक दिलीप अपने पीछे पत्नी और तीन मासूम बेटियों को छोड़ गए हैं। चार वर्ष, दो वर्ष और एक वर्ष की तीनों बच्चियों के सिर से पिता का साया उठ गया। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा है। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इस घटना के बाद परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है, खबर लिखे जाने तक मृतक के परिजन एवं ग्रामीण शव को मां अम्बे नीजी क्लीनिक के गेट के पास शव रखकर मुआवजे और कारवाई की मांग पर अड़े रहे।
- हथमरवा में सावन सोमवारी के शुभ अवसर पर निकली भव्य जल यात्रा हथमरवा में सावन सोमवारी के शुभ अवसर पर श्रद्धालुओं द्वारा भव्य जल यात्रा निकाली गई। जल यात्रा में महिलाओं, बच्चों और बच्चियों ने बड़ी संख्या में उत्साहपूर्वक भाग लिया। श्रद्धालु डीजे की धुन और भक्ति गीतों के साथ यात्रा में शामिल हुए। सभी श्रद्धालु तिलैया नदी पहुंचे, जहां से पवित्र जल लेकर वापस हथमरवा के शिव मंदिर पहुंचे। इस दौरान पूरा क्षेत्र हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक किया और सुख-समृद्धि की कामना की। जल यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। महिलाओं और बच्चों की बड़ी संख्या में भागीदारी ने कार्यक्रम को और भी खास बना दिया। सावन के पावन महीने में आयोजित इस जल यात्रा से पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना रहा।1
- Mera Naam Hai Makhdumpur gaon ke thana pthapur jilla gaya ji Mera janda Dhola Bahadurpur Gaon Hai ismein dekhiae yah Gaon Mein Kitna barish ho raha hai Barish ma nagpanchmi ka din bhi hai Achcha Shubh muhurt Hai Barish Achcha Hona bhi chahie Kyunki kishal Logon Ka Dhyan Sukh raha hai isliye Barish Ka Bhi jaruri hai1
- 🌧️ हल्की बारिश में जाकिर मोड़ जलमग्न! तरवां-फतेहपुर मुख्य मार्ग पर जलजमाव से राहगीरों और वाहन चालकों की बढ़ी परेशानी। प्रशासन से जल्द स्थायी समाधान की मांग। #JS24News #तरवां #जाकिरमोड़ #जलजमाव #गयाखबर हल्की बारिश में जाकिर मोड़ जलमग्न, राहगीरों और वाहन चालकों की बढ़ी परेशानी वजीरगंज। तरवां-फतेहपुर मुख्य मार्ग पर स्थित जाकिर मोड़ के पास हल्की बारिश के बाद ही जलजमाव की समस्या सामने आ गई। सड़क पर पानी जमा होने से राहगीरों, स्थानीय ग्रामीणों और वाहन चालकों को आवागमन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों के अनुसार, बारिश के बाद सड़क के किनारे और मुख्य मार्ग पर पानी जमा हो जाता है। जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण पानी काफी देर तक सड़क पर ही ठहरा रहता है। इससे दोपहिया वाहन चालकों को विशेष रूप से परेशानी होती है, वहीं पैदल आने-जाने वाले लोगों को भी पानी से होकर गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि तरवां-फतेहपुर मुख्य मार्ग क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण सड़क है और इस रास्ते से रोजाना बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं। ऐसे में बारिश के दौरान जलजमाव की समस्या राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से जाकिर मोड़ के पास जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था कराने, नाले की सफाई कराने तथा सड़क पर जमा होने वाले पानी की समस्या का जल्द समाधान कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जलनिकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो लगातार बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर हो सकती है। लोगों ने जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों से मौके का निरीक्षण कर स्थायी समाधान कराने की अपील की है। अब देखना होगा कि जाकिर मोड़ पर जलजमाव की इस समस्या को लेकर प्रशासन की ओर से कब तक ठोस कदम उठाया जाता है।1
- अगर आप भी ऐसे किसी जल्लाद को रास्ता बताने के लिए रुकते है,तो ये वीडियो आपके लिए है। देखिए कैसे एक बुजुर्ग के साथ इस जल्लाद ने क्या किया। घटना उत्तराखंड का है1
- देवघर से लौटने के क्रम में बरबीघा पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार, श्री बाबू की प्रतिमा पर माल्यार्पण का प्रयास रहा चर्चा में बरबीघा शेखपुरा खबर.. संवाददाता: तरुण कुमार के रिपोर्ट... *बरबीघा सिटी खबर... *देवघर से लौटने के क्रम में बरबीघा पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार, श्री बाबू की प्रतिमा पर माल्यार्पण का प्रयास रहा चर्चा में बरबीघा। देवघर से वापस लौटने के क्रम में बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार सोमवार को बरबीघा पहुंचे। उनके बरबीघा पहुंचने की खबर मिलते ही स्थानीय लोगों और समर्थकों के बीच हलचल देखने को मिली। इस दौरान मंत्री ने बिहार केसरी डॉ. श्रीकृष्ण सिंह (श्री बाबू) की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि देने का प्रयास किया। मंत्री प्रतिमा स्थल पर पहुंचे और सीढ़ियों के रास्ते प्रतिमा के पास जाने लगे। प्रतिमा पर माल्यार्पण के लिए उन्होंने कुछ सीढ़ियां भी चढ़ीं, लेकिन कुछ सीढ़ियां ऊपर जाने के बाद वे अचानक वापस नीचे लौट आए। इसके बाद वे प्रतिमा पर माल्यार्पण नहीं कर सके। मंत्री के इस तरह प्रतिमा स्थल से वापस लौटने की घटना वहां मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई। मौके पर मौजूद लोग आपस में तरह-तरह की चर्चा करते नजर आए। हालांकि, मंत्री के सीढ़ियों से वापस लौटने के पीछे वास्तविक कारण क्या था, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। श्री बाबू की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे मंत्री गौरतलब है कि डॉ. श्रीकृष्ण सिंह, जिन्हें बिहार केसरी के नाम से जाना जाता है, बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री थे। बिहार के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास में उनका महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। बरबीघा और आसपास के क्षेत्र में भी श्री बाबू की विरासत और उनके योगदान को लेकर लोगों में विशेष सम्मान की भावना है। इसी कारण किसी भी राजनीतिक अथवा सार्वजनिक प्रतिनिधि का श्री बाबू की प्रतिमा पर माल्यार्पण करना स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण माना जाता है। स्वास्थ्य मंत्री के प्रतिमा स्थल पर पहुंचने और फिर बिना माल्यार्पण किए लौटने की घटना लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही। मौके पर बनी रही लोगों की नजर मंत्री के प्रतिमा स्थल पर पहुंचने के दौरान वहां मौजूद लोगों की नजर पूरे घटनाक्रम पर बनी रही। कुछ सीढ़ियां चढ़ने के बाद जब मंत्री वापस लौटे तो वहां मौजूद लोगों के बीच इसको लेकर चर्चा शुरू हो गई। हालांकि, इस घटनाक्रम को लेकर किसी प्रकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल, स्वास्थ्य मंत्री के बरबीघा आगमन और श्री बाबू की प्रतिमा पर माल्यार्पण के प्रयास के बाद वापस लौटने का मामला स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।4
- पश्चिम बंगाल के Kalimpong के Bindu इलाके में भारी landslide का डरावना नज़ारा सामने आया। ⛰️🌧️ पश्चिम बंगाल के Kalimpong के Bindu इलाके में भारी landslide का डरावना नज़ारा सामने आया। ⛰️🌧️ अचानक पहाड़ी का बड़ा हिस्सा सड़क पर आ गिरा, लेकिन मौके से गुजर रहा एक biker बाल-बाल बच गया। 😱 इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है और लोगों को पहाड़ी इलाकों में सफर के दौरान सावधानी बरतने की याद दिला रहा है। � The Voice Of Sikkim +1 ⚠️ Monsoon में landslide-prone इलाकों में अतिरिक्त सावधानी बरतें और प्रशासन की travel advisories का पालन करें। 📍 Bindu, Kalimpong, West Bengal1
- गहलौर में गूंजा ‘पर्वत पुरुष’ का जयकारा, दशरथ मांझी महोत्सव पर निकली भव्य बाइक रैली गया जिले के गहलौर घाटी में आज दिनांक 17 अगस्त, सोमवार को दशरथ मांझी महोत्सव के अवसर पर भव्य बाइक रैली निकाली गई। रैली में बड़ी संख्या में लोगों ने शामिल होकर ‘पर्वत पुरुष’ दशरथ मांझी को श्रद्धांजलि दी और उनके संघर्ष, साहस तथा संकल्प को याद किया। गहलौर की धरती उस ऐतिहासिक कहानी की गवाह है, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। दशरथ मांझी ने अपनी पत्नी फगुनिया की याद में अकेले छेनी और हथौड़ी के सहारे पहाड़ काटकर रास्ता बनाने का संकल्प लिया था। बताया जाता है कि उनकी पत्नी पहाड़ से गिरकर घायल हो गई थीं और समय पर इलाज नहीं मिल पाने के कारण उनकी मौत हो गई। इस घटना ने मांझी को भीतर तक झकझोर दिया। इसके बाद दशरथ मांझी ने पहाड़ को काटकर रास्ता बनाने का बीड़ा उठाया और वर्षों तक लगातार मेहनत करते रहे। उनकी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति ने असंभव को संभव कर दिखाया और गहलौर घाटी में रास्ता बनकर तैयार हुआ। यही वजह है कि उन्हें आज भी पूरे देश में ‘पर्वत पुरुष’ के नाम से याद किया जाता है। दशरथ मांझी महोत्सव के दौरान निकली बाइक रैली में उनके जीवन संघर्ष और अदम्य साहस की गूंज सुनाई दी। गहलौर घाटी आज भी उस महान व्यक्तित्व की कहानी बयां करती है, जिसने अपने हाथों से पहाड़ का सीना चीरकर लोगों के लिए रास्ता बना दिया।1
- सावन की तीसरी सोमवारी पर अशोक धाम में बड़ा हादसा, भगदड़ में 7 महिला श्रद्धालुओं की मौत, दो दर्जन से अधिक घायल लखीसराय खबर... संवाददाता: तरुण कुमार की रिपोर्ट.. * बिहार/ लखीसराय/ अशोक धाम/ सावन की तीसरी सोमवारी / बड़ा हादसा... सावन की तीसरी सोमवारी पर अशोक धाम में बड़ा हादसा, भगदड़ में 7 महिला श्रद्धालुओं की मौत, दो दर्जन से अधिक घायल लखीसराय। सावन की तीसरी सोमवारी के पावन अवसर पर लखीसराय के प्रसिद्ध अशोक धाम स्थित श्री इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर में सोमवार की सुबह आस्था का माहौल अचानक चीख-पुकार में बदल गया। भारी भीड़ के बीच भगदड़ मचने से 7 महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि दो दर्जन से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। जलाभिषेक के लिए उमड़ा था श्रद्धालुओं का सैलाब सावन की तीसरी सोमवारी होने के कारण अशोक धाम में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी थी। भगवान शिव के जलाभिषेक और दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे थे। रिपोर्टों के अनुसार, श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में थी और भीड़ लगातार बढ़ती जा रही थी। इसी दौरान मंदिर के आसपास अचानक भीड़ का दबाव बढ़ गया। अशोक धाम हॉल्ट की ओर से श्रद्धालुओं के पहुंचने और भारी भीड़ के कारण स्थिति और गंभीर हो गई। बिजली के पोल और अफवाह के बाद मची भगदड़ प्रारंभिक जानकारी के अनुसार घटना के दौरान एक बिजली का पोल/तार गिरने की स्थिति बनी। इसके बाद भीड़ में यह अफवाह फैल गई कि बिजली का करंट फैल गया है। अफवाह के कारण श्रद्धालुओं में अचानक दहशत फैल गई और लोग सुरक्षित निकलने के लिए एक-दूसरे को धक्का देने लगे। देखते ही देखते भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो गई। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह और घटनाक्रम की प्रशासनिक जांच की जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, घटना कुछ ही मिनटों में इतनी तेजी से हुई कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। भीड़ के दबाव में कई श्रद्धालु जमीन पर गिर गए और उनके ऊपर से दूसरे लोग निकलते चले गए। सात महिला श्रद्धालुओं की मौत हादसे में सात महिला श्रद्धालुओं की मौत की पुष्टि हुई है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की कार्रवाई की गई, जबकि घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। लखीसराय सदर अस्पताल में घायलों के पहुंचने के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जुट गई। अपनों की तलाश में लोग अस्पताल में इधर-उधर भटकते नजर आए। अस्पताल परिसर में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। प्रशासन ने शुरू किया राहत और बचाव कार्य घटना के बाद जिला प्रशासन और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की ओर से हादसे के कारणों की जांच की जा रही है और भीड़ नियंत्रण तथा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी जानकारी जुटाई जा रही है। घटना ने धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सावन की सोमवारी पर अशोक धाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना पहले से रहती है। ऐसे में प्रवेश-निकास व्यवस्था, बैरिकेडिंग, पुलिस बल और आपातकालीन व्यवस्था को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने जताया दुख, मृतकों के परिजनों को सहायता हादसे पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की गई है। घायलों के समुचित इलाज के लिए भी प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और केंद्रीय नेताओं ने भी घटना पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। जांच के बाद सामने आएगी हादसे की पूरी सच्चाई अशोक धाम हादसे ने सावन जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल प्रशासन घटना के प्रत्येक पहलू की जांच कर रहा है। बिजली के पोल/तार की स्थिति, अफवाह कैसे फैली, भीड़ किस दिशा में बढ़ी और बैरिकेडिंग व सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी थी—इन सभी बिंदुओं की जांच के बाद हादसे की पूरी तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है। सावन की तीसरी सोमवारी पर भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए यह धार्मिक उत्सव देखते ही देखते एक भयावह त्रासदी में बदल गया। सात महिलाओं की मौत से पूरे लखीसराय और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर है।4
- Ashokdham Temple Stampede 🚨 | 7 श्रद्धालुओं की मौत | Lakhisarai, Bihar बिहार के लखीसराय स्थित प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर में सावन के तीसरे सोमवार को दर्दनाक हादसा हो गया। भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे थे। � Outlook India +1 रिपोर्टों के मुताबिक, बिजली के खंभे/तार गिरने की खबर और उससे फैली अफरा-तफरी, भारी भीड़ और बैरिकेडिंग टूटने के बीच भगदड़ जैसी स्थिति बनी। हादसे में 7 श्रद्धालुओं की मौत और एक दर्जन से अधिक लोगों के घायल होने की सूचना है। � The Times of India +1 ⚠️ घटना के कारणों को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में अलग-अलग जानकारियां सामने आई हैं। प्रशासन की जांच के बाद पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी। 🙏 दिवंगत श्रद्धालुओं को विनम्र श्रद्धांजलि। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना। 📍 Ashokdham Temple, Lakhisarai, Bihar #lakhisarai #ashokdham #bihar #sawansomwar #templestampede1