छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील हसदेव अरंड वन क्षेत्र में स्थित घाटबर्रा गाँव, अपनी पैतृक भूमि और प्राचीन साल के जंगलों को व्यापक तथा निरंतर चल रही कोयला खनन परियोजनाओं से बचाने के लिए संघर्ष कर रहे मूल निवासी गोंड समुदाय के कारण एक बड़े विवाद का केंद्र बन गया है। यह संघर्ष गंभीर कानूनी और पर्यावरणीय विवादों से घिरा है। 2013 में घाटबर्रा के निवासियों को वन अधिकार अधिनियम के तहत सामुदायिक वन अधिकार (सीएफआर) प्रदान किए गए थे, लेकिन 2016 में जिला स्तरीय समिति ने इन अधिकारों को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि ये उस भूमि पर गलती से जारी किए गए थे जिसे पहले ही खनन के लिए उपयोग में लाया जा चुका था। अक्टूबर 2025 में, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने इस निरस्तीकरण को चुनौती देने वाली एक दशक पुरानी याचिका को खारिज करते हुए फैसला सुनाया कि सीएफआर शुरू से ही अमान्य थे, क्योंकि भूमि पहले से ही परसा ईस्ट और केटे बेसेन (पीईकेबी) कोयला ब्लॉकों के लिए आरक्षित थी। इन कानूनी फैसलों के बावजूद, राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (आरआरवीयूएनएल) के पास मौजूद वन भूमि हस्तांतरण की मंजूरी को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन और धरने दिए जा रहे हैं, जिसके तहत अडानी एंटरप्राइजेज खनन कार्य कर रही है। हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति जैसे समूहों के कार्यकर्ता और स्थानीय लोग तर्क देते हैं कि पीईएसए के तहत अनिवार्य ग्राम सभा की सहमति का अभाव है, जबकि औद्योगिक वृक्ष कटाई और खनन कार्य सक्रिय रूप से जारी हैं, जिससे घाटबर्रा में संघर्ष और गहरा गया है।
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील हसदेव अरंड वन क्षेत्र में स्थित घाटबर्रा गाँव, अपनी पैतृक भूमि और प्राचीन साल के जंगलों को व्यापक तथा निरंतर चल रही कोयला खनन परियोजनाओं से बचाने के लिए संघर्ष कर रहे मूल निवासी गोंड समुदाय के कारण एक बड़े विवाद का केंद्र बन गया है। यह संघर्ष गंभीर कानूनी और पर्यावरणीय विवादों से घिरा है। 2013 में घाटबर्रा के निवासियों को वन अधिकार अधिनियम के तहत सामुदायिक वन अधिकार (सीएफआर) प्रदान किए गए थे, लेकिन 2016 में जिला स्तरीय समिति ने इन अधिकारों को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि ये उस भूमि पर गलती से जारी किए गए थे जिसे पहले ही खनन के लिए उपयोग में लाया जा चुका था। अक्टूबर 2025 में, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने इस निरस्तीकरण को चुनौती देने वाली एक दशक पुरानी याचिका को खारिज करते हुए फैसला सुनाया कि सीएफआर शुरू से ही अमान्य थे, क्योंकि भूमि पहले से ही परसा ईस्ट और केटे बेसेन (पीईकेबी) कोयला ब्लॉकों के लिए आरक्षित थी। इन कानूनी फैसलों के बावजूद, राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (आरआरवीयूएनएल) के पास मौजूद वन भूमि हस्तांतरण की मंजूरी को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन और धरने दिए जा रहे हैं, जिसके तहत अडानी एंटरप्राइजेज खनन कार्य कर रही है। हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति जैसे समूहों के कार्यकर्ता और स्थानीय लोग तर्क देते हैं कि पीईएसए के तहत अनिवार्य ग्राम सभा की सहमति का अभाव है, जबकि औद्योगिक वृक्ष कटाई और खनन कार्य सक्रिय रूप से जारी हैं, जिससे घाटबर्रा में संघर्ष और गहरा गया है।
- छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर की एक महिला ने रायपुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान कथित परेशानियों का सामना करने को लेकर एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया है। इस वीडियो में महिला ने दावा किया है कि उसे इलाज के दौरान कई कठिनाइयों से गुजरना पड़ा, जिसके कारण वह मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हुई है। वीडियो के माध्यम से, महिला ने संबंधित अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। यह वीडियो सामने आने के बाद मामला लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। यदि महिला द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मरीजों के अधिकारों से जुड़ा एक गंभीर विषय हो सकता है। निष्पक्षता बनाए रखने के लिए संबंधित अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग का पक्ष भी सामने आना आवश्यक है। जनहित में ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक मानी गई है, ताकि यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई हो तो जिम्मेदारी तय की जा सके और भविष्य में मरीजों को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े। (नोट: यह समाचार महिला द्वारा वीडियो में किए गए दावों पर आधारित है, और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित पक्ष का आधिकारिक जवाब आना अभी बाकी है।)1
- 3 जुलाई 2026 को पेटला स्थित धान खरीदी केंद्र परिसर में पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान जनप्रतिनिधियों, समिति पदाधिकारियों, बैंक अधिकारियों, कर्मचारियों और बड़ी संख्या में किसानों ने मिलकर पौधे रोपे और उनके भविष्य में संरक्षण का भी संकल्प लिया। कार्यक्रम में कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति दर्ज की गई, जिनमें जिला सदस्य श्री शिवभरोस बेक, धान खरीदी केंद्र समिति के अध्यक्ष श्री जयपाल लकड़ा, भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के मंत्री श्री प्रेमचंद बेहरा, सरपंच प्रतिनिधि श्री सुखेचंद नागवंशी, भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के एक अन्य मंत्री श्री ऋषि गुप्ता, ग्राम पंचायत पेटला के पंच श्री काशीनाथ, कॉपरेटिव बैंक के प्रबंधक श्री उमा दास और समिति के प्रबंधक श्री हेमंत प्रधान शामिल थे। इनके साथ ही समिति के समस्त कर्मचारी और अनेक किसान भी मौजूद रहे। उपस्थित सभी लोगों ने अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल सुनिश्चित करने की प्रतिज्ञा ली। वक्ताओं ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि पर्यावरण की सुरक्षा के लिए वृक्षारोपण अत्यंत आवश्यक है, और आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ तथा सुरक्षित वातावरण प्रदान करने हेतु हर व्यक्ति को इस महत्वपूर्ण अभियान में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।1
- रायगढ़ जिले के जूटमिल थाना क्षेत्र में पुलिस ने अपनी पत्नी की हत्या के प्रयास के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। आरोपी पति पर बुलेट मोटरसाइकिल से अपनी पत्नी को कई बार कुचलने का गंभीर आरोप है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह के निर्देशन में, महिलाओं के विरुद्ध अपराधों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए जूटमिल पुलिस ने यह कार्रवाई की है। जानकारी के अनुसार, पीड़िता गणेशी साहू (32 वर्ष), निवासी कोड़ातराई ने 03 जुलाई 2026 को जूटमिल थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने बताया कि वर्ष 2014 में उसका अमित साहू से प्रेम विवाह हुआ था और उनके दो बच्चे भी हैं। शादी के बाद से ही आरोपी पति अमित शराब के नशे में अक्सर मारपीट और विवाद करता था। लगातार प्रताड़ना से परेशान होकर गणेशी अपने बच्चों को सास के पास छोड़कर किराए के मकान में अलग रहने लगी थी। रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि 30 जून को, जो पीड़िता का जन्मदिन था, आरोपी अमित उसे यह भरोसा दिलाकर अपने साथ ले गया कि वह भविष्य में शराब नहीं पिएगा और उसे अच्छे से रखेगा। हालांकि, 03 जुलाई 2026 की रात आरोपी उसे अपनी बुलेट मोटरसाइकिल क्रमांक CG-16-CQ-2698 से अपने घर कोड़ातराई ले गया, जहां उसने गणेशी के चरित्र पर संदेह करते हुए गाली-गलौज और मारपीट शुरू कर दी। अपनी जान बचाने के लिए जब गणेशी घर से बाहर भागी, तो आरोपी अमित ने अपनी बुलेट मोटरसाइकिल से उसे टक्कर मारकर गिरा दिया। आरोप है कि इसके बाद आरोपी ने हत्या की नीयत से मोटरसाइकिल को कई बार उसके शरीर के ऊपर चढ़ाया और जान से मारने की धमकी देते हुए लगातार कुचलने का प्रयास किया, जिससे पीड़िता के हाथ, गर्दन, सिर, जांघ, चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। पीड़िता की रिपोर्ट पर, थाना प्रभारी जूटमिल निरीक्षक अभिनव कांत सिंह ने अपराध क्रमांक 362/2026 के तहत धारा 109(1) भारतीय न्याय संहिता (BNS) का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी अमित साहू (36 वर्ष), पिता कृष्णा साहू, निवासी कोड़ातराई, थाना जूटमिल, जिला रायगढ़ को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। आरोपी की पतासाजी और गिरफ्तारी में थाना प्रभारी जूटमिल निरीक्षक अभिनव कांत सिंह, एएसआई राजेन्द्र सिंह पटेल और उनके स्टाफ की अहम भूमिका रही है। रायगढ़ पुलिस ने इस मामले में संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ कार्रवाई की है, और एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह ने संदेश दिया है कि घरेलू विवाद की आड़ में अपराध करने वालों के खिलाफ कानून के तहत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी तथा महिलाओं के विरुद्ध किसी भी प्रकार की हिंसा या जानलेवा हमला किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।1
- चिरमिरी में नगर निगम की नियोजन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, पहले तो चेकर टाइल्स बिछाए गए और अब उन्हीं स्थानों पर पाइपलाइन डालने का काम शुरू कर दिया गया है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर नगर निगम चिरमिरी की प्लानिंग पर बड़े प्रश्नचिन्ह लगाए जा रहे हैं।1
- वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह के निर्देशन में चलाए जा रहे 'अभियान संवेदना' के तहत रायगढ़ के पूंजीपथरा पुलिस ने लगभग नौ माह से गुम 17 वर्षीय नाबालिग बालिका को सकुशल बरामद कर लिया है। पुलिस ने बालिका को बहला-फुसलाकर भगाने वाले 30 वर्षीय आरोपी राजेश कुमार बंजारे, निवासी ग्राम मनपसार, थाना सरसिंवा, जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा है। जानकारी के अनुसार, बालिका के पिता ने 28 सितंबर 2025 को थाना पूंजीपथरा में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी नाबालिग पुत्री 21 सितंबर 2025 को कपड़ा सिलाई के लिए जाने की बात कहकर घर से निकली थी, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटी। परिजनों द्वारा काफी तलाश के बाद भी जब उसका पता नहीं चला, तो शिकायत दर्ज की गई, जिसके आधार पर थाना पूंजीपथरा में अपराध क्रमांक 217/2025 धारा 137(2) BNS के तहत मामला पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई थी। बालिका ने अपने बयान में बताया कि वर्ष 2025 में उसके घर के सामने निर्माणाधीन मकान में मजदूरी करने वाले राजेश बंजारे से उसकी पहचान हुई थी। बाद में आरोपी ने उसे प्रेम और शादी का झांसा देकर 21 सितंबर 2025 को सारंगढ़ बस स्टैंड बुलाया और अपने साथ ले गया, जहां उसने उसका शारीरिक शोषण किया। विवेचना के दौरान पुलिस टीम लगातार गुम बालिका और संदेही की पतासाजी करती रही। इसी बीच मुखबिर से सूचना मिली कि संदेही राजेश कुमार बंजारे बालिका को बहला-फुसलाकर सारंगढ़ बस स्टैंड से अपने साथ ले गया था। इस सूचना के आधार पर पुलिस लगातार आरोपी की तलाश में जुटी रही। अंततः 04 जुलाई 2026 को मिली सूचना पर उप निरीक्षक दिलीप बेहरा के नेतृत्व में पूंजीपथरा पुलिस ने ग्राम मनपसार स्थित आरोपी के घर में दबिश दी, जहां से गुम बालिका को सकुशल बरामद कर आरोपी को हिरासत में ले लिया गया। थाना लाकर महिला पुलिस अधिकारी द्वारा बालिका का कथन दर्ज किया गया, जिसके आधार पर और मेडिकल रिपोर्ट के उपरांत प्रकरण में धारा 87, 65(1) BNS और 4, 6 पॉक्सो एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गईं। प्रकरण में आवश्यक वैधानिक कार्रवाई पूर्ण करते हुए आरोपी राजेश कुमार बंजारे को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। वहीं, बालिका को नियमानुसार उसके परिजनों के सुपुर्द करने की प्रक्रिया की गई। इस पूरी कार्रवाई में एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह के दिशा-निर्देशन, एडिशनल एसपी श्री अनिल सोनी के मार्गदर्शन तथा डीएसपी सुशांतो बनर्जी के सुपरविजन में थाना प्रभारी पूंजीपथरा निरीक्षक रामकिंकर यादव, उप निरीक्षक दिलीप बेहरा, उप निरीक्षक संध्या रानी कोका, प्रशिक्षु उप निरीक्षक मनीष पोया, प्रधान आरक्षक विनीत तिर्की, आरक्षक ओम प्रकाश तिवारी, हेम सागर पटेल और चंद्र शेखर चन्द्राकर की अहम भूमिका रही। एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह ने इस अवसर पर संदेश दिया कि गुम बालक-बालिका की सुरक्षित बरामदगी रायगढ़ पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है और 'अभियान संवेदना' के तहत बच्चों को बहला-फुसलाकर ले जाने वाले आरोपियों के विरुद्ध त्वरित एवं कठोर वैधानिक कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।1
- छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में उच्च न्यायालय ने एक हत्या के मामले पर अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। इस न्यायिक प्रक्रिया के दौरान, कोर्ट ने नार्को टेस्ट से जुड़े बिंदुओं पर भी अपनी राय व्यक्त की है।1
- कोरबा के कुसमुंडा कोयला खदान क्षेत्र में आज एक बड़ा हादसा उस समय होते-होते टल गया जब नीलकंठ कंपनी का एक विशालकाय डंपर अनजाने में ऊपर से गुजर रही बिजली की हाई-टेंशन लाइन से टकरा गया। गनीमत यह रही कि उस समय लाइन में विद्युत प्रवाह बंद था, जिसके कारण डंपर चालक की जान बाल-बाल बच गई। मिली जानकारी के अनुसार, नीलकंठ कंपनी के डंपर ऑपरेटर लकी यादव, जो ग्राम पाली निवासी रामदास यादव के पुत्र हैं, रोजाना की तरह खदान क्षेत्र में काम कर रहे थे। इसी दौरान डंपर का ऊपरी हिस्सा वहां से गुजर रहे भारी भरकम बिजली के तारों से टकरा गया। घटना के बाद मौके पर हड़कंप मच गया और मौजूद लोगों ने देखा कि बिजली का तार डंपर के पिछले टायरों और बॉडी के बीच बुरी तरह फंस चुका था। यदि उस वक्त लाइन में सप्लाई चालू होती, तो डंपर में भीषण ब्लास्ट हो सकता था और ऑपरेटर लकी यादव की जान को गंभीर खतरा हो सकता था। इस घटना ने एसईसीएल (SECL) प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खदान क्षेत्र में, जहाँ हर वक्त भारी वाहनों की आवाजाही रहती है, वहाँ इतनी नीचे बिजली की लाइनें होना सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों का उल्लंघन माना जा रहा है। घटनास्थल पर मौजूद लोगों और सहकर्मियों के बीच भी इस बात को लेकर तीखी बहस देखने को मिली, जिसमें कुछ लोगों ने सीधे तौर पर वहाँ तैनात सुपरवाइजरों और प्रबंधन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया, जो समय रहते ऐसी जगहों पर सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करते। बिजली सप्लाई बंद होने के कारण एक बड़ा अनर्थ होने से रुक गया। घटना के बाद मौके पर मौजूद सुरक्षा अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई है और तार को डंपर से सुरक्षित अलग करने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय लोगों और कर्मचारियों ने मांग की है कि खदान क्षेत्रों में इस तरह के हादसों को रोकने के लिए बिजली के तारों को पर्याप्त ऊंचाई पर रखा जाए।1
- कोरिया जिले के शिवपुर चर्चा वार्ड क्रमांक 3 में चारों ओर गंदगी दिखाई दे रही है और साफ-सफाई का काम बिल्कुल नहीं हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्तमान में अरुण जायसवाल ढाई साल से काम संभाल रहे हैं, लेकिन उनके कार्यकाल में भी सफाई नहीं हो पा रही है। इससे पहले श्रीमती लाल मुनि जी भी ढाई साल तक अध्यक्ष पद पर बैठी थीं, और तब भी वार्ड की हर गली में गंदगी व्याप्त थी। इस लगातार बनी हुई गंदगी और सफाई के अभाव को लेकर अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है।2