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चिरमिरी में नगर निगम की नियोजन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, पहले तो चेकर टाइल्स बिछाए गए और अब उन्हीं स्थानों पर पाइपलाइन डालने का काम शुरू कर दिया गया है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर नगर निगम चिरमिरी की प्लानिंग पर बड़े प्रश्नचिन्ह लगाए जा रहे हैं।
Sawan kumar
चिरमिरी में नगर निगम की नियोजन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, पहले तो चेकर टाइल्स बिछाए गए और अब उन्हीं स्थानों पर पाइपलाइन डालने का काम शुरू कर दिया गया है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर नगर निगम चिरमिरी की प्लानिंग पर बड़े प्रश्नचिन्ह लगाए जा रहे हैं।
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- चिरमिरी में नगर निगम की नियोजन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, पहले तो चेकर टाइल्स बिछाए गए और अब उन्हीं स्थानों पर पाइपलाइन डालने का काम शुरू कर दिया गया है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर नगर निगम चिरमिरी की प्लानिंग पर बड़े प्रश्नचिन्ह लगाए जा रहे हैं।1
- मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत कथित नकली मंगलसूत्र वितरण के मामले में एक बड़ा मोड़ आया है। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मनेंद्रगढ़ शहर के अध्यक्ष सौरव मिश्रा की शिकायत को जिला प्रशासन की जांच में प्रथम दृष्टया सही पाया गया है। जिला कलेक्टर द्वारा गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में खरीद प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि की है और संबंधित अधिकारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले ही महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक द्वारा इस मामले को 'निराधार' बताकर जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सौरव मिश्रा ने 18 जून 2026 को जिला कलेक्टर से लिखित शिकायत कर 10 फरवरी 2026 को विकासखंड खड़गवां के चनवारीडांड स्थित महामाया मंदिर परिसर में हुए सामूहिक विवाह समारोह में वितरित मंगलसूत्रों की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। शिकायत में बताया गया था कि योजना के तहत 184 जोड़ों का विवाह कराया गया था, लेकिन बाद में कई नवविवाहित महिलाओं ने वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि उन्हें चांदी के नाम पर निम्न गुणवत्ता के मंगलसूत्र दिए गए। इसे शासन की महत्वाकांक्षी योजना में संभावित वित्तीय अनियमितता, शासकीय धन के दुरुपयोग और नवविवाहित महिलाओं के सम्मान से जुड़ा गंभीर मामला बताया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर ने जांच समिति का गठन किया। लेकिन जांच रिपोर्ट आने से पहले ही महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पूरे मामले को निराधार बताया था, दावा किया था कि योजना में कोई अनियमितता नहीं हुई और सोशल मीडिया के आरोप तथ्यहीन हैं। अब कलेक्टर की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि जांच जारी रहते हुए विभाग ने किस आधार पर पहले ही मामले को क्लीन चिट दे दी। 19 जून 2026 को कलेक्टर ने महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक को भेजे पत्र में स्पष्ट लिखा कि 'जांच समिति द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के अनुसार प्रथम दृष्टया शिकायत सही पाई गई है', और जांच प्रतिवेदन को आगे की कार्रवाई के लिए भेजा गया। जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना को 92 लाख रुपये का आवंटन मिला था, जिसमें प्रत्येक हितग्राही के लिए 50 हजार रुपये निर्धारित थे। इसमें से 35 हजार रुपये सीधे हितग्राही के बैंक खाते में और शेष राशि विवाह आयोजन व उपहार सामग्री पर खर्च होनी थी, जिसमें प्रति जोड़े 7 हजार रुपये का प्रावधान था और चांदी का मंगलसूत्र भी शामिल था। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिला स्तरीय क्रय समिति ने स्पष्ट रूप से चांदी का मंगलसूत्र खरीदने और GeM पोर्टल से प्राथमिकता देने की अनुशंसा की थी। इसके बावजूद, जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा समिति की अनुशंसाओं के विपरीत सीमित निविदा प्रक्रिया अपनाई गई। जांच में पाया गया कि कोटेशन प्राप्त करने, क्रय समिति से अनुमोदन लेने, सामग्री का भौतिक सत्यापन कराने और भुगतान से पूर्व आवश्यक प्रशासनिक स्वीकृति लेने जैसी अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। यह भी सामने आया कि गुणवत्ता संबंधी शिकायत के बाद संबंधित फर्म के भुगतान से प्रति मंगलसूत्र एक हजार रुपये की कटौती कर कुल 1 लाख 84 हजार रुपये हितग्राही महिलाओं के खातों में अंतरित किए गए, जिसके बाद फर्म को लगभग 12.85 लाख रुपये का भुगतान किया गया। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि यदि शिकायत निराधार थी, तो भुगतान में कटौती कर राशि लौटाने की आवश्यकता क्यों पड़ी। जांच समिति ने निष्कर्ष निकाला कि जिला कार्यक्रम अधिकारी आदित्य शर्मा ने क्रय समिति की अनुशंसाओं की अवहेलना की, चांदी के स्थान पर अन्य प्रकार के मंगलसूत्र वितरित किए और खरीद प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया। समिति ने उनके विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की है। सौरव मिश्रा, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष प्रभा पटेल, जिला कांग्रेस कमेटी की महामंत्री पूनम सिंह, पूर्व जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष रूमा चटर्जी, पार्षद किरण कुजूर, पूर्व पार्षद हमीदा खातून और पूर्व महिला कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष शोभना वर्मा सहित अन्य कांग्रेस नेताओं ने दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई करने और विभाग द्वारा पहले जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने इसे गरीब बेटियों के सम्मान, शासन की विश्वसनीयता और पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।3
- आज दिन का पहला रेसक्यू सफलतापूर्वक संपन्न किया गया है। सांप से संबंधित किसी भी समस्या के लिए लोग 9993932032 पर संपर्क कर सकते हैं।1
- थाना गोलबाजार क्षेत्र में पुलिस ने प्रतिबंधित नशीली टेबलेट नाईट्रोसन-10 की बिक्री करने की फिराक में घूम रहे तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से लगभग ₹1,50,000 मूल्य की कुल 300 नग नाईट्रोसन-10 टेबलेट्स, ₹400 नगद और 02 मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान मोहम्मद असपाक (25, कबीर नगर, रायपुर), शिवम ढीमर (22, मंगल बाजार, रायपुर) और तुषार ढीमर (20, कुरूद, धमतरी) के रूप में हुई है। यह कार्रवाई 4 जुलाई 2026 को थाना गोलबाजार क्षेत्रांतर्गत दाई कोरा भवन के सामने प्रतिबंधित नशीली टेबलेट रखे होने और उनकी बिक्री की सूचना मिलने के बाद की गई। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस उपायुक्त (क्राइम एंड साइबर) श्री स्मृतिक राजनाला और पुलिस उपायुक्त (मध्य क्षेत्र) श्री उमेश प्रसाद गुप्ता ने संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और थाना गोलबाजार पुलिस की संयुक्त टीम ने बताए गए स्थान पर पहुंचकर मुखबिर द्वारा बताए गए हुलिए के आधार पर संदिग्धों की पहचान की। पुलिस टीम को देखकर आरोपियों ने भागने का प्रयास किया, लेकिन घेराबंदी कर तीनों को पकड़ लिया गया। तलाशी के दौरान उनके बैग से प्रतिबंधित नाईट्रोसन-10 टेबलेट्स बरामद की गईं। पूछने पर आरोपियों के पास इन टेबलेट्स को रखने और बेचने संबंधी कोई वैध दस्तावेज नहीं मिले और वे लगातार टीम को गुमराह करने की कोशिश कर रहे थे। तीनों के खिलाफ थाना गोलबाजार में अपराध क्रमांक 105/26 धारा 22(ख) नारकोटिक एक्ट के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की गई है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेजेस के आधार पर अन्य संलिप्त व्यक्तियों के संबंध में विस्तृत पूछताछ कर रही है, ताकि इस मामले में 'एंड-टू-एंड' कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।1
- छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर की एक महिला ने रायपुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान कथित परेशानियों का सामना करने को लेकर एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया है। इस वीडियो में महिला ने दावा किया है कि उसे इलाज के दौरान कई कठिनाइयों से गुजरना पड़ा, जिसके कारण वह मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हुई है। वीडियो के माध्यम से, महिला ने संबंधित अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। यह वीडियो सामने आने के बाद मामला लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। यदि महिला द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मरीजों के अधिकारों से जुड़ा एक गंभीर विषय हो सकता है। निष्पक्षता बनाए रखने के लिए संबंधित अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग का पक्ष भी सामने आना आवश्यक है। जनहित में ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक मानी गई है, ताकि यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई हो तो जिम्मेदारी तय की जा सके और भविष्य में मरीजों को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े। (नोट: यह समाचार महिला द्वारा वीडियो में किए गए दावों पर आधारित है, और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित पक्ष का आधिकारिक जवाब आना अभी बाकी है।)1
- अनूपपुर जिले के अनूपपुर और जैतहरी क्षेत्रों में चार हाथियों का समूह एक सप्ताह से अधिक समय से आतंक मचा रहा है। ये हाथी दिन में जंगलों में रुकने के बाद देर शाम और रात होते ही ग्रामीण इलाकों में घुस जाते हैं, घरों को तोड़ते हैं और खेतों व बाड़ियों में लगी फसलों-सब्जियों को अपना आहार बना लेते हैं। यह समूह तीन और एक हाथी के रूप में अलग-अलग होकर विचरण कर रहा है, जिसमें से एक हाथी शुक्रवार और शनिवार की रात जैतहरी के चोलना इलाके से छत्तीसगढ़ राज्य के मरवाही वन परिक्षेत्र के चुस्कियां बीट के जंगल में चला गया है, जबकि तीन हाथियों का समूह अभी भी अनूपपुर क्षेत्र में सक्रिय है। 2 जुलाई को तीन हाथियों के समूह ने अनूपपुर जिला मुख्यालय से मात्र 6 किलोमीटर दूर खांडा और भोलगढ़ के मध्य जंगल में दिन बिताया। रात होते ही वे जंगल से निकलकर खांडा गांव में बांध के पास खेत में घर बनाकर रह रहे मोहन सिंह के घर को आठवीं बार चार अलग-अलग स्थानों से तोड़कर पूरी तरह नष्ट कर दिया और घर के अंदर रखे चावल व अन्य सामान खा गए। इसके बाद उन्होंने खांडा बांध के पास साहेब सिंह की रसोई और गौशाला की दीवार तोड़कर नुकसान पहुँचाया। शुक्रवार की सुबह वे फिर से खांडा और भोलगढ़ के मध्य स्थित जंगल में लौट आए। शुक्रवार की दोपहर में ये तीनों हाथी जंगल से निकलकर भोलगढ़ गांव के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग को पार कर भोलगढ़ और मैरटोला से सोन नदी पार करते हुए जिला मुख्यालय से 5 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत हर्री के भगतबांध गांव पहुँचे। वहाँ उन्होंने भगवानदास राठौर, जगत नारायण राठौर, रमेश राठौर, नेमसाय राठौर और अन्य लोगों के खेतों व बाड़ियों में लगी विभिन्न प्रकार की फसलों और सब्जियों को खाकर नष्ट कर दिया। शनिवार की सुबह वे एक बार फिर सोन नदी और राष्ट्रीय राजमार्ग को पार कर भोलगढ़ गांव व वन बीट के जंगल में पहुँचकर आराम कर रहे थे और शाम व रात होने का इंतजार कर रहे थे। वहीं, एक अकेला बड़ा नर हाथी जो एक सप्ताह से अपने तीन साथी हाथियों से अलग होकर घूम रहा था, उसने 2 जुलाई को धनगवां बीट के आमापानी के जंगल में दिन बिताया। शाम और रात होते ही यह हाथी ग्राम पंचायत पड़रिया के चोई गांव अंतर्गत भलुवान टोला और पदमनियाटोला निवासी सीताराम राठौर के घर में घुसकर तोड़फोड़ की और खेतों व बाड़ी में लगे तथा रखे फसलों व अनाज को खाकर फैला दिया। इसके अतिरिक्त, उसने अन्य लोगों के खेतों में भी नुकसान पहुँचाया। शुक्रवार की सुबह चोलना और धनगवां बीट के जंगल में दिन बिताने के बाद, शाम/रात होते ही वह जंगल से निकलकर ग्राम पंचायत पड़रिया के भलुवान टोला में विक्रम, राजू राठौर, मोरध्वज सिंह, बाबूलाल सिंह, मुन्नी बाई भरिया और भूप सिंह के घरों में तोड़फोड़ की। उसने सुखू सिंह, धीरसाय सिंह, बाल सिंह, मिठाई लाल सिंह और रमेश नापित के खेत व वांडियों में लगे अनाज व विभिन्न प्रकार की फसलों को भी खाया। यह हाथी धनगवां, कुसुमहाई, कुकुरगोड़ा, बचहा और चोलना पंचायतों की सीमा से होते हुए शनिवार की सुबह गूजरनाला पार कर छत्तीसगढ़ राज्य के सिवनी वन बीट अंतर्गत मालाडांड, पथर्री, पडरी, चरचेडी से घुसरिया होकर शनिवार की सुबह से घुसरिया बीट के जंगल में पहुँचकर दिन के समय विश्राम कर रहा था। हाथियों के लगातार विचरण करने और रात-रात भर ग्रामीण जनों की संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने से ग्रामीण परेशान और भयभीत हैं। वन विभाग का अमला हाथियों की गतिविधियों पर अलग-अलग स्थानों पर लगातार निगरानी रख रहा है। जैतहरी और अनूपपुर क्षेत्र के ग्रामीण, जिनकी संपत्तियों को हाथियों के समूह द्वारा पहले भी कई बार नुकसान पहुँचाया जा चुका है, अब तक राजस्व विभाग से आर्थिक सहायता न मिलने के कारण नाराज हैं और वन विभाग के मैदानी कर्मचारियों से उत्तेजित ढंग से बातचीत करते देखे गए। संक्षेप में, तीन हाथी खांडा और भगतबांध में उत्पात मचा रहे हैं, वहीं अकेले हाथी ने पड़रिया, धनगवां, कुसुमहाई और कुकुरगोड़ा में हंगामा किया और शनिवार को छत्तीसगढ़ के जंगल में पहुँच गया।1
- अनूपपुर पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है, जहाँ उन्होंने रामपुर बटुरा ओपन कोल माइंस की जय अम्बे प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के कार्यालय में देसी कट्टे से फायर कर हत्या के प्रयास के मुख्य आरोपी श्रीराम विश्वकर्मा को नासिक (महाराष्ट्र) से गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक अनूपपुर विक्रान्त मुराब (भारतीय पुलिस सेवा) के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनूपपुर जगनाथ मरकाम एवं एसडीओपी अनूपपुर नवीन तिवारी के मार्गदर्शन में की गई। यह घटना 07 जून 2026 को दोपहर करीब 3 बजे ग्राम खांडा स्थित कंपनी के कार्यालय में हुई थी। कंपनी के टाइम कीपर अमन सिंह क्षत्रिय, निवासी लमकना, थाना बड़वारा, जिला कटनी ने कोतवाली अनूपपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार, श्रीराम विश्वकर्मा अपने दो साथियों पप्पू विश्वकर्मा और मिथलेश विश्वकर्मा के साथ कार्यालय में घुस आया था। उसने आरोप लगाया कि कंपनी उनके 8-10 लोगों को काम पर नहीं रखती, जिस पर विवाद करते हुए उसने गंदी गंदी गालियाँ दीं और कमर से देसी कट्टा निकालकर जान से मारने के इरादे से फायर कर दिया। हालाँकि, गार्ड पारस द्वारा धक्का दिए जाने से गोली कार्यालय के फर्श की टाइल्स में जा धँसी। तीनों आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से फरार हो गए थे। इस रिपोर्ट पर कोतवाली अनूपपुर थाने में अपराध क्रमांक 324/2026 धारा 109(1), 296(बी), 351(2), 331(7), 333, 3(5) बीएनएस एवं 25/27 आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस प्रकरण की विवेचना के दौरान, पुलिस ने 10 जून 2026 को आरोपी पप्पू विश्वकर्मा, निवासी रामपुर, थाना अमलाई, जिला शहडोल और 11 जून 2026 को आरोपी मिथलेश चर्मकार, निवासी ग्राम रामपुर, थाना अमलाई, जिला शहडोल को गिरफ्तार किया था, जिन्हें माननीय न्यायालय द्वारा जेल भेज दिया गया था। घटना के तुरंत बाद मुख्य आरोपी श्रीराम विश्वकर्मा फरार हो गया था और कोतवाली पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रही थी। टी.आई. कोतवाली अरविंद जैन के नेतृत्व में उपनिरीक्षक जयपुश लकड़ा, प्रधान आरक्षक महेंद्र सिंह, प्रधान आरक्षक शिवशंकर प्रजापति, प्रधान आरक्षक राजेंद्र अहिरवार (सायबर सेल), आरक्षक अमित यादव और आरक्षक पंकज मिश्रा (सायबर सेल) की टीम ने श्रीराम विश्वकर्मा, पिता गोविन्द प्रसाद विश्वकर्मा, उम्र 39 वर्ष, निवासी ग्राम रामपुर, थाना अमलाई, जिला शहडोल को नासिक (महाराष्ट्र) से गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की। पुलिस ने आरोपी से वारदात में इस्तेमाल किया गया देसी कट्टा भी जब्त कर लिया है। पुलिस अधीक्षक अनूपपुर श्री विक्रान्त मुराब ने थाना कोतवाली अनूपपुर की इस टीम को देसी कट्टे से फायर कर हत्या के प्रयास के मुख्य आरोपी को नासिक (महाराष्ट्र) से गिरफ्तार करने के लिए पुरस्कृत करने की घोषणा की है।1
- छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील हसदेव अरंड वन क्षेत्र में स्थित घाटबर्रा गाँव, अपनी पैतृक भूमि और प्राचीन साल के जंगलों को व्यापक तथा निरंतर चल रही कोयला खनन परियोजनाओं से बचाने के लिए संघर्ष कर रहे मूल निवासी गोंड समुदाय के कारण एक बड़े विवाद का केंद्र बन गया है। यह संघर्ष गंभीर कानूनी और पर्यावरणीय विवादों से घिरा है। 2013 में घाटबर्रा के निवासियों को वन अधिकार अधिनियम के तहत सामुदायिक वन अधिकार (सीएफआर) प्रदान किए गए थे, लेकिन 2016 में जिला स्तरीय समिति ने इन अधिकारों को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि ये उस भूमि पर गलती से जारी किए गए थे जिसे पहले ही खनन के लिए उपयोग में लाया जा चुका था। अक्टूबर 2025 में, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने इस निरस्तीकरण को चुनौती देने वाली एक दशक पुरानी याचिका को खारिज करते हुए फैसला सुनाया कि सीएफआर शुरू से ही अमान्य थे, क्योंकि भूमि पहले से ही परसा ईस्ट और केटे बेसेन (पीईकेबी) कोयला ब्लॉकों के लिए आरक्षित थी। इन कानूनी फैसलों के बावजूद, राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (आरआरवीयूएनएल) के पास मौजूद वन भूमि हस्तांतरण की मंजूरी को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन और धरने दिए जा रहे हैं, जिसके तहत अडानी एंटरप्राइजेज खनन कार्य कर रही है। हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति जैसे समूहों के कार्यकर्ता और स्थानीय लोग तर्क देते हैं कि पीईएसए के तहत अनिवार्य ग्राम सभा की सहमति का अभाव है, जबकि औद्योगिक वृक्ष कटाई और खनन कार्य सक्रिय रूप से जारी हैं, जिससे घाटबर्रा में संघर्ष और गहरा गया है।1