गोंडा में जिम ट्रेनर सूरज पटेल (30) की मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच से कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, सूरज पटेल की मौत का कारण फांसी के चलते गला कसना पाया गया है, और रिपोर्ट में किसी अन्य वजह से मौत होने की पुष्टि नहीं हुई है। पोस्टमार्टम के बाद शव उनके पिता दिनेश कुमार पटेल को सौंप दिया गया, जिसके बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए शव को बिहार ले गए। परिवार इस घटना से स्तब्ध है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि घटना से पहले सूरज पटेल अपने मोबाइल फोन पर आत्महत्या से संबंधित सामग्री देख रहे थे। जांच एजेंसियां उनकी डिजिटल गतिविधियों और अन्य तथ्यों की पड़ताल कर रही हैं ताकि घटना के पीछे की परिस्थितियों को स्पष्ट किया जा सके। परिजनों ने बताया कि उन्हें लगा था कि सूरज जिम से जुड़े कामों के कारण देर रात तक जाग रहे हैं, और बाद में परिवार के लोगों ने ही घटना के बारे में जानकारी हुई। नगर कोतवाली पुलिस सूरज पटेल के आईफोन का लॉक खोलने का प्रयास कर रही है। पुलिस मोबाइल फोन में मौजूद जानकारियों, कॉल रिकॉर्ड और मैसेजिंग ऐप्स पर हुई बातचीत की पड़ताल करने के लिए तकनीकी सहायता ले रही है। इसके साथ ही, पुलिस सूरज के परिचितों और संपर्क में रहने वाले लोगों से भी पूछताछ की तैयारी कर रही है ताकि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा सके। नगर कोतवाल बिंदेश्वरी मणि त्रिपाठी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी आया है, और पुलिस तकनीकी तथा परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर विस्तृत जांच कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मोबाइल फोन की जांच के बाद कई अन्य तथ्य भी सामने आ सकते हैं।
गोंडा में जिम ट्रेनर सूरज पटेल (30) की मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच से कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, सूरज पटेल की मौत का कारण फांसी के चलते गला कसना पाया गया है, और रिपोर्ट में किसी अन्य वजह से मौत होने की पुष्टि नहीं हुई है। पोस्टमार्टम के बाद शव उनके पिता दिनेश कुमार पटेल को सौंप दिया गया, जिसके बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए शव को बिहार ले गए। परिवार इस घटना से स्तब्ध है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि घटना से पहले सूरज पटेल अपने मोबाइल फोन पर आत्महत्या से संबंधित सामग्री देख रहे थे। जांच एजेंसियां उनकी डिजिटल गतिविधियों और अन्य तथ्यों की पड़ताल कर रही हैं ताकि घटना के पीछे की परिस्थितियों को स्पष्ट किया जा सके। परिजनों ने बताया कि उन्हें लगा था कि सूरज जिम से जुड़े कामों के कारण देर रात तक जाग रहे हैं, और बाद में परिवार के लोगों ने ही घटना के बारे में जानकारी हुई। नगर कोतवाली पुलिस सूरज पटेल के आईफोन का लॉक खोलने का प्रयास कर रही है। पुलिस मोबाइल फोन में मौजूद जानकारियों, कॉल रिकॉर्ड और मैसेजिंग ऐप्स पर हुई बातचीत की पड़ताल करने के लिए तकनीकी सहायता ले रही है। इसके साथ ही, पुलिस सूरज के परिचितों और संपर्क में रहने वाले लोगों से भी पूछताछ की तैयारी कर रही है ताकि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा सके। नगर कोतवाल बिंदेश्वरी मणि त्रिपाठी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी आया है, और पुलिस तकनीकी तथा परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर विस्तृत जांच कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मोबाइल फोन की जांच के बाद कई अन्य तथ्य भी सामने आ सकते हैं।
- जनपद गोण्डा में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी प्रदीप कुमार का कार्यकाल पूरा होने पर पुलिस विभाग द्वारा उन्हें कैंप कार्यालय में भावभीनी विदाई दी गई। पुलिस अधीक्षक गोण्डा के निर्देशन में आयोजित इस समारोह में अधिकारियों ने प्रदीप कुमार को पुष्पगुच्छ और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। प्रशिक्षण अवधि के दौरान, प्रदीप कुमार ने मोतीगंज थाना प्रभारी के रूप में कार्य करते हुए कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, विवेचना, जनसुनवाई और सामुदायिक पुलिसिंग के विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने पुलिस कार्यप्रणाली को करीब से समझा और अधिकारियों तथा कर्मचारियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया। समारोह में उपस्थित अधिकारियों ने प्रदीप कुमार की कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और सीखने की उत्कृष्ट क्षमता की सराहना की, यह विश्वास व्यक्त करते हुए कि उनका सकारात्मक दृष्टिकोण और कार्य के प्रति समर्पण उन्हें भविष्य में एक कुशल एवं प्रभावी पुलिस अधिकारी के रूप में स्थापित करेगा। अपने संबोधन में, प्रदीप कुमार ने जनपद गोण्डा में मिले मार्गदर्शन, सहयोग और आत्मीयता के लिए पुलिस अधीक्षक सहित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त अनुभव और सीख उनके भावी सेवा जीवन में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे। कार्यक्रम के अंत में, सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उनके सफल सेवा जीवन, उत्तम स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाओं के साथ प्रदीप कुमार को विदाई दी।4
- सोहावल में भाजपा कार्यकर्ता शिवम सिंह की ह*त्या के मामले पर समाजवादी पार्टी के नेता अनूप सिंह ने योगी आदित्यनाथ की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।1
- Post by Md Arif1
- अयोध्या में तेजी से चल रहे विकास कार्यों, जैसे राम मंदिर निर्माण, रामपथ और चौड़ी सड़कों के बीच, प्राचीन धरोहरों के अस्तित्व पर सवाल खड़े हो गए हैं। गुप्तार घाट स्थित पौराणिक निर्मली कुंड, जिसका संबंध भगवान श्रीराम और देवराज इंद्र से जुड़ी मान्यताओं से है, अब 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के चौड़ीकरण के कारण संकट में है। यह कुंड सदियों से आस्था का केंद्र रहा है, जहां श्रावण पूर्णिमा पर विशेष धार्मिक यात्रा निकलती है और श्रद्धालु स्नान कर पापों से मुक्ति पाने की कामना करते हैं।4
- आज लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की 301वीं जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय संकल्प मोर्चा ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए एक संकल्प पत्र जारी किया है। संगठन ने न्यायप्रिय, धर्मनिरपेक्ष और लोक कल्याणकारी शासक के रूप में मालवा की महारानी अहिल्याबाई होलकर को शत्-शत् नमन और अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। मोर्चा ने कहा कि अहिल्याबाई होलकर भारतीय इतिहास की वह स्वर्णिम हस्ताक्षर हैं, जिन्होंने यह सिद्ध किया कि शासन का वास्तविक अर्थ जनसेवा है। 31 मई 1725 को जन्मी अहिल्याबाई होलकर ने 1767 से 1795 तक अपने 28 वर्ष के शासनकाल में मालवा को रामराज्य का आदर्श स्वरूप प्रदान किया। उनका जीवन नारी शक्ति, सुशासन, सामाजिक समरसता और जनसेवा का ज्वलंत उदाहरण रहा है। उन्होंने न केवल युद्ध और राजनीति में कुशलता दिखाई, बल्कि पूरे भारतवर्ष में मंदिरों का जीर्णोद्धार कराकर सांस्कृतिक एकता को मजबूत किया। काशी विश्वनाथ मंदिर, सोमनाथ मंदिर, बद्रीनाथ, द्वारका, गया, अयोध्या, मथुरा और हरिद्वार जैसे तीर्थस्थलों का पुनर्निर्माण उनकी धर्मनिरपेक्ष दृष्टि का प्रमाण है। उन्होंने कभी धर्म के नाम पर भेदभाव नहीं किया, बल्कि घाट, बावड़ी, कुएं, धर्मशाला, सड़कें और अन्नक्षेत्र बनवाकर लोक कल्याण को शासन का मूलमंत्र बनाया। अहिल्याबाई होलकर का न्याय इतना प्रसिद्ध था कि प्रजा उन्हें "देवी" कहकर पुकारती थी, और उन्होंने न्याय के लिए अपने इकलौते पुत्र को भी दंड देने में संकोच नहीं किया। "प्रजा की खुशी ही राजा का धर्म है" – यह उनका शासन दर्शन था। उनके सुशासन के तीन स्तंभ पारदर्शी प्रशासन, जनहित सर्वोपरि और नैतिक जवाबदेही थे; उन्होंने कभी खजाने को अपनी निजी संपत्ति नहीं समझा, हर निर्णय से पहले प्रजा की राय ली, महिलाओं को सेना में स्थान दिया और किसानों के लगान माफ किए, जिसे असली लोकतंत्र बताया गया है। राष्ट्रीय संकल्प मोर्चा का स्पष्ट मत है कि आज जब राजनीति सत्ता, स्वार्थ और भ्रष्टाचार का पर्याय बनती जा रही है, तब लोकमाता का चरित्र हमें आईना दिखाता है। उनकी जयंती पर संगठन ने पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ ही यह संकल्प लिया है कि अहिल्याबाई होलकर के आदर्शों को राजनीति में वापस लाने के लिए सतत संघर्ष करेगा। मोर्चा ने राइट टू रिकॉल, जवाबदेह प्रतिनिधि और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था जैसे मूल्यों को पुनः स्थापित करने का आह्वान किया है, जो लोकमाता के शासन में जीवंत थे। राष्ट्रीय संकल्प मोर्चा युवा पीढ़ी से लोकमाता के जीवन से प्रेरणा लेने, नारी शक्ति का सम्मान करने, कमजोर वर्गों का उत्थान करने और राष्ट्र निर्माण में भागीदारी निभाने की अपील करता है, जिसे उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया गया है। संगठन ने देश की समस्त जनता, विशेषकर महिलाओं और युवाओं से आग्रह किया है कि अहिल्याबाई होलकर के पदचिह्नों पर चलकर एक नैतिक, पारदर्शी और जनकल्याणकारी भारत के निर्माण में सहयोग करें। राष्ट्रीय संकल्प मोर्चा ने "लोकमाता अहिल्याबाई होलकर जी अमर रहें। उनके विचार अमर रहें।।" के उद्घोष के साथ अपनी बात समाप्त की।1
- मुजफ्फरनगर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के ग्राम आदमपुर में एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जहाँ कथित तौर पर 21 वर्षीय अदीबा की उसके भाई द्वारा गला रेतकर हत्या कर दी गई। इस घटना की सूचना मिलते ही एसएसपी संजय कुमार वर्मा, एसपी ग्रामीण अक्षय संजय महाडीक और अन्य पुलिस अधिकारी तुरंत मौके पर पहुँचे और घटनास्थल का गहन निरीक्षण किया। पुलिस के अनुसार, यह वारदात इसलिए अंजाम दी गई क्योंकि युवती किसी युवक से बातचीत करती थी, जिससे उसका भाई नाराज था। इसी नाराजगी के चलते भाई ने इस घटना को अंजाम दिया। फॉरेंसिक टीम ने मौके से आवश्यक साक्ष्य जुटाए हैं, और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। एसएसपी ने बताया है कि आरोपी भाई घटना के बाद से फरार है। उसकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए पुलिस की कई टीमें गठित कर दी गई हैं, और अधिकारियों का कहना है कि आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।1
- निरंकरपुर हैबतपुर स्थित राणा पाली चौकी के तहत एक किसान की भूमि पर पुलिस और राजस्व प्रशासन की मिलीभगत से कब्जा करा दिया गया है। इस घटनाक्रम के दौरान, पीड़ित किसान लगातार रोता रहा और न्याय की गुहार लगाता रहा, परंतु उसकी एक भी नहीं सुनी गई।3
- अयोध्या के सोहावल क्षेत्र में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल छह महीने के लिए बढ़ाए जाने और उन्हें प्रशासक नियुक्त करने के प्रदेश सरकार के निर्णय का जमीनी स्तर पर सकारात्मक प्रभाव दिख रहा है। एक भव्य कार्यक्रम में दर्जनों ग्राम प्रधानों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त किया और सरकार के इस फैसले को "जनहित में ऐतिहासिक निर्णय" बताया। इस कार्यक्रम में बीकापुर विधायक डॉ. अमित सिंह चौहान का मुख्य अतिथि के रूप में जोरदार स्वागत और सम्मान किया गया, जिनके माध्यम से प्रधानों ने मुख्यमंत्री तक अपना धन्यवाद संदेश पहुंचाने की बात कही। प्रधानों का कहना है कि पंचायतों में किसी अधिकारी को प्रशासक बनाने की बजाय निर्वाचित प्रधानों को ही जिम्मेदारी सौंपना गांवों के हित में बड़ा फैसला है, क्योंकि वे गांव की समस्याओं, जनभावनाओं, सड़कों, नालियों और हर गरीब-जरूरतमंद की पीड़ा से सीधे जुड़े रहते हैं। उनका यह भी मानना है कि पांच वर्ष तक जनता की सेवा करने के बाद, सरकार ने बिना किसी अतिरिक्त चुनावी खर्च या प्रशासनिक बोझ के कार्यकाल बढ़ाकर ग्रामीण विकास कार्यों की निरंतरता सुनिश्चित की है, जिससे अधूरे कार्य पूरे होंगे और जनता को योजनाओं का लाभ लगातार मिलता रहेगा। प्रधानों ने एक स्वर में कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह साबित किया है कि उनकी सरकार गांव और किसानों की नब्ज को समझती है। उनके अनुसार, चुने हुए जनप्रतिनिधियों पर भरोसा जताना लोकतंत्र को मजबूत करने वाला कदम है। विधायक डॉ. अमित सिंह चौहान ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सरकार की योजनाओं और ग्रामीण विकास के प्रति प्रतिबद्धता का उल्लेख किया, साथ ही प्रधानों के आभार संदेश को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम के दौरान उत्साह का माहौल देखा गया, जहां प्रधानों ने इस निर्णय को केवल कार्यकाल विस्तार नहीं, बल्कि गांवों में चल रहे विकास कार्यों को गति देने का अवसर बताया। राजनीतिक गलियारों में भी इस कार्यक्रम की चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि पंचायत प्रतिनिधियों का इतना बड़ा समर्थन ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार के प्रति बढ़ते विश्वास का संकेत माना जा रहा है।1