आज लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की 301वीं जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय संकल्प मोर्चा ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए एक संकल्प पत्र जारी किया है। संगठन ने न्यायप्रिय, धर्मनिरपेक्ष और लोक कल्याणकारी शासक के रूप में मालवा की महारानी अहिल्याबाई होलकर को शत्-शत् नमन और अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। मोर्चा ने कहा कि अहिल्याबाई होलकर भारतीय इतिहास की वह स्वर्णिम हस्ताक्षर हैं, जिन्होंने यह सिद्ध किया कि शासन का वास्तविक अर्थ जनसेवा है। 31 मई 1725 को जन्मी अहिल्याबाई होलकर ने 1767 से 1795 तक अपने 28 वर्ष के शासनकाल में मालवा को रामराज्य का आदर्श स्वरूप प्रदान किया। उनका जीवन नारी शक्ति, सुशासन, सामाजिक समरसता और जनसेवा का ज्वलंत उदाहरण रहा है। उन्होंने न केवल युद्ध और राजनीति में कुशलता दिखाई, बल्कि पूरे भारतवर्ष में मंदिरों का जीर्णोद्धार कराकर सांस्कृतिक एकता को मजबूत किया। काशी विश्वनाथ मंदिर, सोमनाथ मंदिर, बद्रीनाथ, द्वारका, गया, अयोध्या, मथुरा और हरिद्वार जैसे तीर्थस्थलों का पुनर्निर्माण उनकी धर्मनिरपेक्ष दृष्टि का प्रमाण है। उन्होंने कभी धर्म के नाम पर भेदभाव नहीं किया, बल्कि घाट, बावड़ी, कुएं, धर्मशाला, सड़कें और अन्नक्षेत्र बनवाकर लोक कल्याण को शासन का मूलमंत्र बनाया। अहिल्याबाई होलकर का न्याय इतना प्रसिद्ध था कि प्रजा उन्हें "देवी" कहकर पुकारती थी, और उन्होंने न्याय के लिए अपने इकलौते पुत्र को भी दंड देने में संकोच नहीं किया। "प्रजा की खुशी ही राजा का धर्म है" – यह उनका शासन दर्शन था। उनके सुशासन के तीन स्तंभ पारदर्शी प्रशासन, जनहित सर्वोपरि और नैतिक जवाबदेही थे; उन्होंने कभी खजाने को अपनी निजी संपत्ति नहीं समझा, हर निर्णय से पहले प्रजा की राय ली, महिलाओं को सेना में स्थान दिया और किसानों के लगान माफ किए, जिसे असली लोकतंत्र बताया गया है। राष्ट्रीय संकल्प मोर्चा का स्पष्ट मत है कि आज जब राजनीति सत्ता, स्वार्थ और भ्रष्टाचार का पर्याय बनती जा रही है, तब लोकमाता का चरित्र हमें आईना दिखाता है। उनकी जयंती पर संगठन ने पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ ही यह संकल्प लिया है कि अहिल्याबाई होलकर के आदर्शों को राजनीति में वापस लाने के लिए सतत संघर्ष करेगा। मोर्चा ने राइट टू रिकॉल, जवाबदेह प्रतिनिधि और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था जैसे मूल्यों को पुनः स्थापित करने का आह्वान किया है, जो लोकमाता के शासन में जीवंत थे। राष्ट्रीय संकल्प मोर्चा युवा पीढ़ी से लोकमाता के जीवन से प्रेरणा लेने, नारी शक्ति का सम्मान करने, कमजोर वर्गों का उत्थान करने और राष्ट्र निर्माण में भागीदारी निभाने की अपील करता है, जिसे उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया गया है। संगठन ने देश की समस्त जनता, विशेषकर महिलाओं और युवाओं से आग्रह किया है कि अहिल्याबाई होलकर के पदचिह्नों पर चलकर एक नैतिक, पारदर्शी और जनकल्याणकारी भारत के निर्माण में सहयोग करें। राष्ट्रीय संकल्प मोर्चा ने "लोकमाता अहिल्याबाई होलकर जी अमर रहें। उनके विचार अमर रहें।।" के उद्घोष के साथ अपनी बात समाप्त की।
आज लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की 301वीं जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय संकल्प मोर्चा ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए एक संकल्प पत्र जारी किया है। संगठन ने न्यायप्रिय, धर्मनिरपेक्ष और लोक कल्याणकारी शासक के रूप में मालवा की महारानी अहिल्याबाई होलकर को शत्-शत् नमन और अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। मोर्चा ने कहा कि अहिल्याबाई होलकर भारतीय इतिहास की वह स्वर्णिम हस्ताक्षर हैं, जिन्होंने यह सिद्ध किया कि शासन का वास्तविक अर्थ जनसेवा है। 31 मई 1725 को जन्मी अहिल्याबाई होलकर ने 1767 से 1795 तक अपने 28 वर्ष के शासनकाल में मालवा को रामराज्य का आदर्श स्वरूप प्रदान किया। उनका जीवन नारी शक्ति, सुशासन, सामाजिक समरसता और जनसेवा का ज्वलंत उदाहरण रहा है। उन्होंने न केवल युद्ध और राजनीति में कुशलता दिखाई, बल्कि पूरे भारतवर्ष में मंदिरों का जीर्णोद्धार कराकर सांस्कृतिक एकता को मजबूत किया। काशी विश्वनाथ मंदिर, सोमनाथ मंदिर, बद्रीनाथ, द्वारका, गया, अयोध्या, मथुरा और हरिद्वार जैसे तीर्थस्थलों का पुनर्निर्माण उनकी धर्मनिरपेक्ष दृष्टि का प्रमाण है। उन्होंने कभी धर्म के नाम पर भेदभाव नहीं किया, बल्कि घाट, बावड़ी, कुएं, धर्मशाला, सड़कें और अन्नक्षेत्र बनवाकर लोक कल्याण को शासन का मूलमंत्र बनाया। अहिल्याबाई होलकर का न्याय इतना प्रसिद्ध था कि प्रजा उन्हें "देवी" कहकर पुकारती थी, और उन्होंने न्याय के लिए अपने इकलौते पुत्र को भी दंड देने में संकोच नहीं किया। "प्रजा की खुशी ही राजा का धर्म है" – यह उनका शासन दर्शन था। उनके सुशासन के तीन स्तंभ पारदर्शी प्रशासन, जनहित सर्वोपरि और नैतिक जवाबदेही थे; उन्होंने कभी खजाने को अपनी निजी संपत्ति नहीं समझा, हर निर्णय से पहले प्रजा की राय ली, महिलाओं को सेना में स्थान दिया और किसानों के लगान माफ किए, जिसे असली लोकतंत्र बताया गया है। राष्ट्रीय संकल्प मोर्चा का स्पष्ट मत है कि आज जब राजनीति सत्ता, स्वार्थ और भ्रष्टाचार का पर्याय बनती जा रही है, तब लोकमाता का चरित्र हमें आईना दिखाता है। उनकी जयंती पर संगठन ने पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ ही यह संकल्प लिया है कि अहिल्याबाई होलकर के आदर्शों को राजनीति में वापस लाने के लिए सतत संघर्ष करेगा। मोर्चा ने राइट टू रिकॉल, जवाबदेह प्रतिनिधि और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था जैसे मूल्यों को पुनः स्थापित करने का आह्वान किया है, जो लोकमाता के शासन में जीवंत थे। राष्ट्रीय संकल्प मोर्चा युवा पीढ़ी से लोकमाता के जीवन से प्रेरणा लेने, नारी शक्ति का सम्मान करने, कमजोर वर्गों का उत्थान करने और राष्ट्र निर्माण में भागीदारी निभाने की अपील करता है, जिसे उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया गया है। संगठन ने देश की समस्त जनता, विशेषकर महिलाओं और युवाओं से आग्रह किया है कि अहिल्याबाई होलकर के पदचिह्नों पर चलकर एक नैतिक, पारदर्शी और जनकल्याणकारी भारत के निर्माण में सहयोग करें। राष्ट्रीय संकल्प मोर्चा ने "लोकमाता अहिल्याबाई होलकर जी अमर रहें। उनके विचार अमर रहें।।" के उद्घोष के साथ अपनी बात समाप्त की।
- अयोध्या में तेजी से चल रहे विकास कार्यों, जैसे राम मंदिर निर्माण, रामपथ और चौड़ी सड़कों के बीच, प्राचीन धरोहरों के अस्तित्व पर सवाल खड़े हो गए हैं। गुप्तार घाट स्थित पौराणिक निर्मली कुंड, जिसका संबंध भगवान श्रीराम और देवराज इंद्र से जुड़ी मान्यताओं से है, अब 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के चौड़ीकरण के कारण संकट में है। यह कुंड सदियों से आस्था का केंद्र रहा है, जहां श्रावण पूर्णिमा पर विशेष धार्मिक यात्रा निकलती है और श्रद्धालु स्नान कर पापों से मुक्ति पाने की कामना करते हैं।4
- आज लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की 301वीं जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय संकल्प मोर्चा ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए एक संकल्प पत्र जारी किया है। संगठन ने न्यायप्रिय, धर्मनिरपेक्ष और लोक कल्याणकारी शासक के रूप में मालवा की महारानी अहिल्याबाई होलकर को शत्-शत् नमन और अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। मोर्चा ने कहा कि अहिल्याबाई होलकर भारतीय इतिहास की वह स्वर्णिम हस्ताक्षर हैं, जिन्होंने यह सिद्ध किया कि शासन का वास्तविक अर्थ जनसेवा है। 31 मई 1725 को जन्मी अहिल्याबाई होलकर ने 1767 से 1795 तक अपने 28 वर्ष के शासनकाल में मालवा को रामराज्य का आदर्श स्वरूप प्रदान किया। उनका जीवन नारी शक्ति, सुशासन, सामाजिक समरसता और जनसेवा का ज्वलंत उदाहरण रहा है। उन्होंने न केवल युद्ध और राजनीति में कुशलता दिखाई, बल्कि पूरे भारतवर्ष में मंदिरों का जीर्णोद्धार कराकर सांस्कृतिक एकता को मजबूत किया। काशी विश्वनाथ मंदिर, सोमनाथ मंदिर, बद्रीनाथ, द्वारका, गया, अयोध्या, मथुरा और हरिद्वार जैसे तीर्थस्थलों का पुनर्निर्माण उनकी धर्मनिरपेक्ष दृष्टि का प्रमाण है। उन्होंने कभी धर्म के नाम पर भेदभाव नहीं किया, बल्कि घाट, बावड़ी, कुएं, धर्मशाला, सड़कें और अन्नक्षेत्र बनवाकर लोक कल्याण को शासन का मूलमंत्र बनाया। अहिल्याबाई होलकर का न्याय इतना प्रसिद्ध था कि प्रजा उन्हें "देवी" कहकर पुकारती थी, और उन्होंने न्याय के लिए अपने इकलौते पुत्र को भी दंड देने में संकोच नहीं किया। "प्रजा की खुशी ही राजा का धर्म है" – यह उनका शासन दर्शन था। उनके सुशासन के तीन स्तंभ पारदर्शी प्रशासन, जनहित सर्वोपरि और नैतिक जवाबदेही थे; उन्होंने कभी खजाने को अपनी निजी संपत्ति नहीं समझा, हर निर्णय से पहले प्रजा की राय ली, महिलाओं को सेना में स्थान दिया और किसानों के लगान माफ किए, जिसे असली लोकतंत्र बताया गया है। राष्ट्रीय संकल्प मोर्चा का स्पष्ट मत है कि आज जब राजनीति सत्ता, स्वार्थ और भ्रष्टाचार का पर्याय बनती जा रही है, तब लोकमाता का चरित्र हमें आईना दिखाता है। उनकी जयंती पर संगठन ने पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ ही यह संकल्प लिया है कि अहिल्याबाई होलकर के आदर्शों को राजनीति में वापस लाने के लिए सतत संघर्ष करेगा। मोर्चा ने राइट टू रिकॉल, जवाबदेह प्रतिनिधि और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था जैसे मूल्यों को पुनः स्थापित करने का आह्वान किया है, जो लोकमाता के शासन में जीवंत थे। राष्ट्रीय संकल्प मोर्चा युवा पीढ़ी से लोकमाता के जीवन से प्रेरणा लेने, नारी शक्ति का सम्मान करने, कमजोर वर्गों का उत्थान करने और राष्ट्र निर्माण में भागीदारी निभाने की अपील करता है, जिसे उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया गया है। संगठन ने देश की समस्त जनता, विशेषकर महिलाओं और युवाओं से आग्रह किया है कि अहिल्याबाई होलकर के पदचिह्नों पर चलकर एक नैतिक, पारदर्शी और जनकल्याणकारी भारत के निर्माण में सहयोग करें। राष्ट्रीय संकल्प मोर्चा ने "लोकमाता अहिल्याबाई होलकर जी अमर रहें। उनके विचार अमर रहें।।" के उद्घोष के साथ अपनी बात समाप्त की।1
- मुजफ्फरनगर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के ग्राम आदमपुर में एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जहाँ कथित तौर पर 21 वर्षीय अदीबा की उसके भाई द्वारा गला रेतकर हत्या कर दी गई। इस घटना की सूचना मिलते ही एसएसपी संजय कुमार वर्मा, एसपी ग्रामीण अक्षय संजय महाडीक और अन्य पुलिस अधिकारी तुरंत मौके पर पहुँचे और घटनास्थल का गहन निरीक्षण किया। पुलिस के अनुसार, यह वारदात इसलिए अंजाम दी गई क्योंकि युवती किसी युवक से बातचीत करती थी, जिससे उसका भाई नाराज था। इसी नाराजगी के चलते भाई ने इस घटना को अंजाम दिया। फॉरेंसिक टीम ने मौके से आवश्यक साक्ष्य जुटाए हैं, और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। एसएसपी ने बताया है कि आरोपी भाई घटना के बाद से फरार है। उसकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए पुलिस की कई टीमें गठित कर दी गई हैं, और अधिकारियों का कहना है कि आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।1
- निरंकरपुर हैबतपुर स्थित राणा पाली चौकी के तहत एक किसान की भूमि पर पुलिस और राजस्व प्रशासन की मिलीभगत से कब्जा करा दिया गया है। इस घटनाक्रम के दौरान, पीड़ित किसान लगातार रोता रहा और न्याय की गुहार लगाता रहा, परंतु उसकी एक भी नहीं सुनी गई।3
- अयोध्या को मुख्यमंत्री योगी की ओर से एक और नई और बड़ी सौगात मिली है, जहाँ अब एक भव्य "लवकुश पार्क" का निर्माण किया जाएगा। यह पार्क 17.72 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होगा, जिसमें "वेस्ट टू आर्ट" की थीम पर रामायण के विभिन्न प्रसंगों को 3D और लाइट-साउंड तकनीक के माध्यम से जीवंत किया जाएगा। इस "लवकुश पार्क" को अयोध्या के मऊशिवाला क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा। इस पहल से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन और संस्कृति को एक नया आयाम मिलने की उम्मीद है।1
- जनपद अयोध्या के बीकापुर तहसील में किसान मस्त राम वर्मा का चार दिनों से चल रहा अनशन प्रशासन ने 24 घंटे के भीतर ही तुड़वा दिया। शुक्रवार की रात करीब 11 बजे नायब तहसीलदार राम खेलावन ने तारुन और बीकापुर के कोतवाल के साथ मिलकर शहीद स्मारक पर किसान से वार्ता की। इस वार्ता के बाद किसान मस्त राम वर्मा को जूस पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया गया, जिसके बाद किसान अपने गांव लौट गया। किसान का आरोप था कि SDM और नायब उन्हें पुराने घर के स्थान पर नया घर बनाने नहीं दे रहे थे, क्योंकि इस संबंध में कोई मुकदमा चल रहा है। प्रशासन के हरकत में आने से पहले बकरीद के दिन LIU ने भी अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी थी, जिसके बाद SDM बीकापुर ने इस प्रकरण का संज्ञान लिया था। इसी पृष्ठभूमि में किसान और प्रशासन के बीच सौहार्दपूर्ण बातचीत हुई, जिसके परिणामस्वरूप यह मामला निपट गया।1
- Post by Md Arif1
- लखनऊ के चारबाग रेलवे प्लेटफॉर्म पर 'स्वच्छ भारत अभियान' का स्पष्ट प्रभाव दिखाई दे रहा है, जिसके चलते यह प्लेटफॉर्म बेहद सुंदर और आकर्षक नज़र आ रहा है। लाल चंद सोनी ने 'आज सुबह टाइम्स टीम लखनऊ' के लिए यह रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें प्लेटफॉर्म की स्वच्छता और सुंदरता की सराहना की गई है।1