सरकार की महाकाल की योजना धरातल पर फेल सचिव और प्रधान के प्रयागराज जनपद के यमुनापार क्षेत्र के विकासखंड चाका ब्लाक। अंतर्गत ग्राम पंचायत बगबना में वर्ष 2022-23 के दौरान अमृत सरोवर और अमृत वाटिका का निर्माण बड़े स्तर पर कराया गया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य गांवों में जल संरक्षण को बढ़ावा देना, पर्यावरण को हरा-भरा बनाना और ग्रामीणों को एक सुंदर एवं स्वच्छ सार्वजनिक स्थल उपलब्ध कराना था। शुरुआती दौर में यह योजना ग्रामीणों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी, लेकिन समय बीतने के साथ इसकी वास्तविक स्थिति अब बेहद चिंताजनक हो चुकी है। आज अमृत सरोवर के चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है। पानी की गुणवत्ता भी खराब हो चुकी है और कहीं-कहीं पर जलभराव के कारण बदबू की समस्या उत्पन्न हो रही है, जिससे आसपास के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरोवर के किनारे बैठने के लिए बनाए गए चबूतरे और अन्य संरचनाएं पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। कई स्थानों पर वे टूट-फूट का शिकार हैं, जिससे न केवल इसकी सुंदरता खत्म हो गई है बल्कि यह स्थान अब असुरक्षित भी हो गया है। वहीं, अमृत वाटिका की स्थिति भी बेहद खराब है। यहां लगाए गए अधिकांश पौधे और पेड़ सूख चुके हैं। जहां कभी हरियाली दिखती थी, वहां अब सूखे पेड़ों और उजाड़ जमीन का दृश्य देखने को मिल रहा है। पेड़ों की देखभाल और सिंचाई की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। सबसे बड़ी लापरवाही यह देखने को मिल रही है कि सरोवर के चारों ओर बनाई गई बाउंड्री दीवार भी कई जगहों से टूटकर गिर चुकी है। इससे न केवल सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि पशुओं के अंदर प्रवेश करने से और अधिक नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि यह स्थिति केवल समय के साथ नहीं बिगड़ी, बल्कि इसके पीछे ग्राम पंचायत स्तर पर गंभीर लापरवाही है। निर्माण कार्य के बाद न तो सचिव द्वारा कोई निगरानी की गई और न ही प्रधान द्वारा रखरखाव की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई। साफ-सफाई, पौधों की देखभाल और संरचनाओं की मरम्मत जैसी मूलभूत जिम्मेदारियों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। ग्रामीणों के अनुसार, अगर समय-समय पर निरीक्षण और देखरेख होती, तो आज यह योजना इस बदहाल स्थिति में नहीं पहुंचती। सचिव और प्रधान की अनदेखी के कारण सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना अब बर्बादी की कगार पर पहुंच चुकी है। सरकार की यह योजना, जो ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए शुरू की गई थी, आज अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रही है। यदि जल्द ही जिम्मेदार अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई और सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो यह योजना पूरी तरह समाप्त हो सकती है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन इस लापरवाही पर कार्रवाई करेगा या फिर ग्राम पंचायत स्तर की यह अनदेखी यूं ही जारी रहेगी।
सरकार की महाकाल की योजना धरातल पर फेल सचिव और प्रधान के प्रयागराज जनपद के यमुनापार क्षेत्र के विकासखंड चाका ब्लाक। अंतर्गत ग्राम पंचायत बगबना में वर्ष 2022-23 के दौरान अमृत सरोवर और अमृत वाटिका का निर्माण बड़े स्तर पर कराया गया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य गांवों में जल संरक्षण को बढ़ावा देना, पर्यावरण को हरा-भरा बनाना और ग्रामीणों को एक सुंदर एवं स्वच्छ सार्वजनिक स्थल उपलब्ध कराना था। शुरुआती दौर में यह योजना ग्रामीणों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी, लेकिन समय बीतने के साथ इसकी वास्तविक स्थिति अब बेहद चिंताजनक हो चुकी है। आज अमृत सरोवर के चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है। पानी की गुणवत्ता भी खराब हो चुकी है और
कहीं-कहीं पर जलभराव के कारण बदबू की समस्या उत्पन्न हो रही है, जिससे आसपास के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरोवर के किनारे बैठने के लिए बनाए गए चबूतरे और अन्य संरचनाएं पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। कई स्थानों पर वे टूट-फूट का शिकार हैं, जिससे न केवल इसकी सुंदरता खत्म हो गई है बल्कि यह स्थान अब असुरक्षित भी हो गया है। वहीं, अमृत वाटिका की स्थिति भी बेहद खराब है। यहां लगाए गए अधिकांश पौधे और पेड़ सूख चुके हैं। जहां कभी हरियाली दिखती थी, वहां अब सूखे पेड़ों और उजाड़ जमीन का दृश्य देखने को मिल रहा है। पेड़ों की देखभाल और सिंचाई की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण यह स्थिति
उत्पन्न हुई है। सबसे बड़ी लापरवाही यह देखने को मिल रही है कि सरोवर के चारों ओर बनाई गई बाउंड्री दीवार भी कई जगहों से टूटकर गिर चुकी है। इससे न केवल सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि पशुओं के अंदर प्रवेश करने से और अधिक नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि यह स्थिति केवल समय के साथ नहीं बिगड़ी, बल्कि इसके पीछे ग्राम पंचायत स्तर पर गंभीर लापरवाही है। निर्माण कार्य के बाद न तो सचिव द्वारा कोई निगरानी की गई और न ही प्रधान द्वारा रखरखाव की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई। साफ-सफाई, पौधों की देखभाल और संरचनाओं की मरम्मत जैसी मूलभूत जिम्मेदारियों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। ग्रामीणों के अनुसार, अगर
समय-समय पर निरीक्षण और देखरेख होती, तो आज यह योजना इस बदहाल स्थिति में नहीं पहुंचती। सचिव और प्रधान की अनदेखी के कारण सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना अब बर्बादी की कगार पर पहुंच चुकी है। सरकार की यह योजना, जो ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए शुरू की गई थी, आज अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रही है। यदि जल्द ही जिम्मेदार अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई और सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो यह योजना पूरी तरह समाप्त हो सकती है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन इस लापरवाही पर कार्रवाई करेगा या फिर ग्राम पंचायत स्तर की यह अनदेखी यूं ही जारी रहेगी।
- मदरा टेल गंगा घाट पर बड़ा हादसा टला, बारातियों से भरी बोलेरो गंगा में समाई मेजा, प्रयागराज। मेजा तहसील क्षेत्र के मदरा टेल गंगा घाट पर शनिवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। बारातियों से भरी एक बोलेरो गाड़ी पीपा पुल पार करते समय अचानक अनियंत्रित होकर गंगा नदी में जा गिरी। गाड़ी में सवार लोगों में चीख-पुकार मच गई। शोर सुनकर घाट पर मौजूद स्थानीय नाविक और ग्रामीण तुरंत बचाव के लिए नदी में कूद पड़े। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सुबह करीब 7 बजे बारात लेकर जा रही बोलेरो जैसे ही पीपा पुल पर चढ़ी, अचानक संतुलन बिगड़ने से रेलिंग तोड़ते हुए नदी में समा गई। गाड़ी में ड्राइवर समेत 8 लोग सवार थे। हादसे के बाद घाट पर अफरा-तफरी का माहौल हो गया। स्थानीय लोगों की तत्परता से सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। 2 लोगों को मामूली चोटें आई हैं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया। बताया जा रहा है कि सरकार द्वारा लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए गंगा नदी पर पीपा पुल का निर्माण कराया जाता है, ताकि लोग कम समय में आर-पार जा सकें। मदरा टेल गंगा घाट पर बने इस पीपा पुल से रोजाना सैकड़ों लोगों का आवागमन होता है। इस पुल की चौड़ाई कम होने और रेलिंग कमजोर होने की शिकायत पहले भी कई बार की जा चुकी है। गौरतलब है कि मदरा टेल गंगा घाट हादसों के लिए पहले से ही संवेदनशील माना जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले 10 सालों में यहां स्टीमर और नाव से सफर के दौरान कई अनहोनी घटनाएं हो चुकी हैं। कभी नाव पलटने तो कभी स्टीमर में तकनीकी खराबी के कारण लोगों की जान पर बन आती है। हादसे से बाल-बाल बचे यात्रियों ने इसे "भगवान की मर्जी" बताया। वहीं ग्रामीणों ने प्रशासन से पीपा पुल की मरम्मत और सुरक्षा इंतजाम पुख्ता करने की मांग की है। फिलहाल पुलिस ने मौके पर पहुंचकर क्रेन की मदद से बोलेरो को नदी से बाहर निकलवाया है और जांच शुरू कर दी है। हादसे की वजह ड्राइवर को झपकी आना या तकनीकी खराबी मानी जा रही है।1
- वैशाख मास में श्री सोमेश्वर महादेव मंदिर अरैल में "सरस्वती परिवार ने चलाया स्वच्छता अभियान 172वें स्वच्छता अभियान की कड़ी में आज दिनांक -26.04.2026 को "*सरस्वती सामाजिक सेवा संस्थान अरैल नैनी प्रयागराज*" द्वारा संस्थान सचिव *कुंवर जी तिवारी के नेतृत्व में* श्री सोमेश्वर महादेव मंदिर अरैल में स्वच्छता अभियान चलाया गया। जिसमें उन्होंने वहां के पुजारियों, दर्शनार्थियों एवं श्रद्धालुओं को जनजागरण अभियान चलाते हुए स्वच्छता के प्रति जागरूक किया। कमला स्मारक बलापुर विघालय की *प्रधानाचार्या अल्का विश्वकर्मा ने कहा कि* मंदिर आस्था का पवित्र स्थल है, जहां पर श्रद्धालुओं के मन को शांति व सुकुन मिलता है। इसलिए ऐसे पवित्र स्थलों को साफ सुथरा रखना हम सभी का कर्तव्य है। नवांगतुक अतिथि के रूप आये हुए सदस्य *हरि मोहन पाण्डेय ने कहा कि* पिछले कयी वर्षों से प्रयागराज के तीर्थस्थलो पर सरस्वती परिवार द्वारा निरंतर प्रतिमाह स्वच्छता अभियान चलाकर स्वच्छता की मुहिम द्वारा आम जनमानस को स्वच्छता का संदेश दिया जा रहा है,जो कि बड़ा ही सुन्दर व सराहनीय कदम है। सभी लोगों को स्वच्छता के प्रति क़दम बढ़ाना चाहिए। स्वच्छता अभियान कार्यक्रम में सर्वश्री *कुंवर जी तिवारी, सहदेव चौरसिया,विकास मिश्रा,डां.एस.बी.यादव, सुनील गुप्ता,डां.सुनीता विश्वकर्मा,नीलम गुप्ता, धीरज राजवानी, विनोद गुरानी,नीरज पांडेय, प्रियांशु उपाध्याय, इन्दु प्रकाश सिंह,कार्तिकेय तिवारी,* आदि उपस्थित रहे।4
- बलिया में दामाद ने ससुर सास और पत्नी को मारी चाकू, चाकू लगने से सास और पत्नी की हुई मौत।1
- भारी स्कूल बैग से तंग आया मासूम, बोला-"जब मैं प्रधानमंत्री बनूँगा, स्कूल में बैग ले जाना बैन कर दूँगा"1
- Post by हिमांशु गुप्ता समाचार नेशन1
- उत्तर प्रदेश अलीगढ़ से एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है...पाइपलाइन का कार्य चल रहा था तभी एक मजदूर गहरे गड्ढे में उतरा. कुछ देर के बाद मिट्टी के एक बड़ा हिस्सा अचानक उसके ऊपर आकर गिर गया और मजदूर को पूरी तरह दब गया मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई...स्थानीय लोगों और साथियों ने तुरंत बचाव की कोशिश शुरू की,लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी...मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई1
- प्रयागराज: कमिश्नरेट की रिजर्व पुलिस लाइन्स में प्रशिक्षण पूर्ण कर चुके रिक्रूट आरक्षियों की Passing Out Parade (POP) का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि पुलिस आयुक्त जोगेन्द्र कुमार ने परेड की सलामी ली और विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले रिक्रूट आरक्षियों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने नवप्रशिक्षित आरक्षियों को संवेदनशीलता,कर्तव्यनिष्ठा,निष्पक्षता,सत्यनिष्ठा,संविधान के प्रति आस्था और जनसेवा की शपथ दिलाई। इस अवसर पर जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा सहित अन्य पुलिस अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।1
- प्रयागराज। करछना तहसील में अवैध खनन अब छुपा हुआ अपराध नहीं, बल्कि खुला संगठित कारोबार बन चुका है। टोंस नदी के धरवाराघाट पर बिना किसी वैध पट्टे के दिन- दहाड़े जेसीबी और ट्रैक्टरों से बालू निकासी की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ प्रशासनिक तंत्र की आंखों के सामने हो रहा है, फिर भी कार्रवाई शून्य है—जिससे मिलीभगत की बू साफ महसूस होती है। ग्रामीणों के मुताबिक, यह कोई बिखरा हुआ मामला नहीं,बल्कि एक संगठित “खनन सिंडिकेट” है जो धरवाराघाट से लेकर धरवारा साहपुर, सुलमई, इसैटा और झरियही तक अपनी पकड़ बनाए हुए है। आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क में बृजेश सिंह उर्फ चंदन, विजय प्रताप सिंह उर्फ मोहन सिंह, संजय निषाद, राम सिंह, गोरेलाल और शुभम तिवारी जैसे नाम खुलकर सामने आ रहे हैं, जो कथित तौर पर खुलेआम खनन कर रहे हैं और प्रभाव के दम पर सिस्टम को चुनौती दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी के किनारों का तेजी से कटाव हो रहा है, जलस्तर गिर रहा है और पर्यावरणीय संतुलन लगातार बिगड़ रहा है। लेकिन इन गंभीर खतरों के बावजूद जिम्मेदार विभागों की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। आरोप यहां तक हैं कि हर महीने मोटी रकम “सेटिंग” के नाम पर पहुंचाई जाती है, जिसके चलते खनन विभाग और स्थानीय पुलिस कार्रवाई से बचती नजर आती है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जो भी इस खेल के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश करता है, उसे डराया- धमकाया जाता है। ग्रामीणों ने साफ कहा कि शिकायत करने पर उन्हें प्रताड़ित किया जाता है और जान से मारने तक की धमकियां दी जाती हैं। इससे पूरे इलाके में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। अब सवाल यह है कि क्या करछना में कानून का राज है या फिर खनन माफियाओं का? क्या प्रशासन इस पूरे नेटवर्क पर शिकंजा कस पाएगा या फिर यह अवैध खेल यूं ही चलता रहेगा? ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष जांच कराई जाए, नामजद आरोपियों की भूमिका की पड़ताल हो और अवैध खनन के इस जाल को जड़ से खत्म किया जाए। अब देखना यह है कि प्रशासन इस चुनौती को गंभीरता से लेता है या फिर टोंस नदी का सीना यूं ही छलनी होता रहेगा।1
- *मिट्टी मे दब कर मज़दूर की मौत का लाइव वीडियो आया सामने* यूपी के अलीगढ़ में पाइप लाइन का काम चल रहा था,एक मजदूर गड्ढे में उतरा तभी मिट्टी का बड़ा हिस्सा मजदूर पर गिर गया,साथी मज़दूरों ने उसकी जान बचाने की बहुत कोशिश की लेकिन तब तक मजदूर की मौत हो चुकी थी।1