धरवाराघाट से साहपुर तक नामजद चेहरे बेनकाब—मिलीभगत, वसूली और धमकियों से दहशत में गांव प्रयागराज। करछना तहसील में अवैध खनन अब छुपा हुआ अपराध नहीं, बल्कि खुला संगठित कारोबार बन चुका है। टोंस नदी के धरवाराघाट पर बिना किसी वैध पट्टे के दिन- दहाड़े जेसीबी और ट्रैक्टरों से बालू निकासी की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ प्रशासनिक तंत्र की आंखों के सामने हो रहा है, फिर भी कार्रवाई शून्य है—जिससे मिलीभगत की बू साफ महसूस होती है। ग्रामीणों के मुताबिक, यह कोई बिखरा हुआ मामला नहीं,बल्कि एक संगठित “खनन सिंडिकेट” है जो धरवाराघाट से लेकर धरवारा साहपुर, सुलमई, इसैटा और झरियही तक अपनी पकड़ बनाए हुए है। आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क में बृजेश सिंह उर्फ चंदन, विजय प्रताप सिंह उर्फ मोहन सिंह, संजय निषाद, राम सिंह, गोरेलाल और शुभम तिवारी जैसे नाम खुलकर सामने आ रहे हैं, जो कथित तौर पर खुलेआम खनन कर रहे हैं और प्रभाव के दम पर सिस्टम को चुनौती दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी के किनारों का तेजी से कटाव हो रहा है, जलस्तर गिर रहा है और पर्यावरणीय संतुलन लगातार बिगड़ रहा है। लेकिन इन गंभीर खतरों के बावजूद जिम्मेदार विभागों की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। आरोप यहां तक हैं कि हर महीने मोटी रकम “सेटिंग” के नाम पर पहुंचाई जाती है, जिसके चलते खनन विभाग और स्थानीय पुलिस कार्रवाई से बचती नजर आती है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जो भी इस खेल के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश करता है, उसे डराया- धमकाया जाता है। ग्रामीणों ने साफ कहा कि शिकायत करने पर उन्हें प्रताड़ित किया जाता है और जान से मारने तक की धमकियां दी जाती हैं। इससे पूरे इलाके में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। अब सवाल यह है कि क्या करछना में कानून का राज है या फिर खनन माफियाओं का? क्या प्रशासन इस पूरे नेटवर्क पर शिकंजा कस पाएगा या फिर यह अवैध खेल यूं ही चलता रहेगा? ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष जांच कराई जाए, नामजद आरोपियों की भूमिका की पड़ताल हो और अवैध खनन के इस जाल को जड़ से खत्म किया जाए। अब देखना यह है कि प्रशासन इस चुनौती को गंभीरता से लेता है या फिर टोंस नदी का सीना यूं ही छलनी होता रहेगा।
धरवाराघाट से साहपुर तक नामजद चेहरे बेनकाब—मिलीभगत, वसूली और धमकियों से दहशत में गांव प्रयागराज। करछना तहसील में अवैध खनन अब छुपा हुआ अपराध नहीं, बल्कि खुला संगठित कारोबार बन चुका है। टोंस नदी के धरवाराघाट पर बिना किसी वैध पट्टे के दिन- दहाड़े जेसीबी और ट्रैक्टरों से बालू निकासी की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ प्रशासनिक तंत्र की आंखों के सामने हो रहा है, फिर भी कार्रवाई शून्य है—जिससे मिलीभगत की बू साफ महसूस होती है। ग्रामीणों के मुताबिक, यह कोई बिखरा हुआ मामला नहीं,बल्कि एक संगठित “खनन सिंडिकेट” है जो धरवाराघाट से लेकर धरवारा साहपुर, सुलमई, इसैटा और झरियही तक अपनी पकड़ बनाए हुए है। आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क में बृजेश सिंह उर्फ चंदन, विजय प्रताप सिंह उर्फ मोहन सिंह, संजय निषाद, राम सिंह, गोरेलाल और शुभम तिवारी जैसे नाम खुलकर सामने आ रहे हैं, जो कथित तौर पर खुलेआम खनन कर रहे हैं और प्रभाव के दम पर सिस्टम को चुनौती दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी के किनारों का तेजी से कटाव हो रहा है, जलस्तर गिर रहा है और पर्यावरणीय संतुलन लगातार बिगड़ रहा है। लेकिन इन गंभीर खतरों के बावजूद जिम्मेदार विभागों की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। आरोप यहां तक हैं कि हर महीने मोटी रकम “सेटिंग” के नाम पर पहुंचाई जाती है, जिसके चलते खनन विभाग और स्थानीय पुलिस कार्रवाई से बचती नजर आती है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जो भी इस खेल के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश करता है, उसे डराया- धमकाया जाता है। ग्रामीणों ने साफ कहा कि शिकायत करने पर उन्हें प्रताड़ित किया जाता है और जान से मारने तक की धमकियां दी जाती हैं। इससे पूरे इलाके में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। अब सवाल यह है कि क्या करछना में कानून का राज है या फिर खनन माफियाओं का? क्या प्रशासन इस पूरे नेटवर्क पर शिकंजा कस पाएगा या फिर यह अवैध खेल यूं ही चलता रहेगा? ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष जांच कराई जाए, नामजद आरोपियों की भूमिका की पड़ताल हो और अवैध खनन के इस जाल को जड़ से खत्म किया जाए। अब देखना यह है कि प्रशासन इस चुनौती को गंभीरता से लेता है या फिर टोंस नदी का सीना यूं ही छलनी होता रहेगा।
- बलिया में दामाद ने ससुर सास और पत्नी को मारी चाकू, चाकू लगने से सास और पत्नी की हुई मौत।1
- भारी स्कूल बैग से तंग आया मासूम, बोला-"जब मैं प्रधानमंत्री बनूँगा, स्कूल में बैग ले जाना बैन कर दूँगा"1
- Post by हिमांशु गुप्ता समाचार नेशन1
- उत्तर प्रदेश अलीगढ़ से एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है...पाइपलाइन का कार्य चल रहा था तभी एक मजदूर गहरे गड्ढे में उतरा. कुछ देर के बाद मिट्टी के एक बड़ा हिस्सा अचानक उसके ऊपर आकर गिर गया और मजदूर को पूरी तरह दब गया मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई...स्थानीय लोगों और साथियों ने तुरंत बचाव की कोशिश शुरू की,लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी...मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई1
- प्रयागराज। करछना तहसील में अवैध खनन अब छुपा हुआ अपराध नहीं, बल्कि खुला संगठित कारोबार बन चुका है। टोंस नदी के धरवाराघाट पर बिना किसी वैध पट्टे के दिन- दहाड़े जेसीबी और ट्रैक्टरों से बालू निकासी की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ प्रशासनिक तंत्र की आंखों के सामने हो रहा है, फिर भी कार्रवाई शून्य है—जिससे मिलीभगत की बू साफ महसूस होती है। ग्रामीणों के मुताबिक, यह कोई बिखरा हुआ मामला नहीं,बल्कि एक संगठित “खनन सिंडिकेट” है जो धरवाराघाट से लेकर धरवारा साहपुर, सुलमई, इसैटा और झरियही तक अपनी पकड़ बनाए हुए है। आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क में बृजेश सिंह उर्फ चंदन, विजय प्रताप सिंह उर्फ मोहन सिंह, संजय निषाद, राम सिंह, गोरेलाल और शुभम तिवारी जैसे नाम खुलकर सामने आ रहे हैं, जो कथित तौर पर खुलेआम खनन कर रहे हैं और प्रभाव के दम पर सिस्टम को चुनौती दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी के किनारों का तेजी से कटाव हो रहा है, जलस्तर गिर रहा है और पर्यावरणीय संतुलन लगातार बिगड़ रहा है। लेकिन इन गंभीर खतरों के बावजूद जिम्मेदार विभागों की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। आरोप यहां तक हैं कि हर महीने मोटी रकम “सेटिंग” के नाम पर पहुंचाई जाती है, जिसके चलते खनन विभाग और स्थानीय पुलिस कार्रवाई से बचती नजर आती है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जो भी इस खेल के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश करता है, उसे डराया- धमकाया जाता है। ग्रामीणों ने साफ कहा कि शिकायत करने पर उन्हें प्रताड़ित किया जाता है और जान से मारने तक की धमकियां दी जाती हैं। इससे पूरे इलाके में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। अब सवाल यह है कि क्या करछना में कानून का राज है या फिर खनन माफियाओं का? क्या प्रशासन इस पूरे नेटवर्क पर शिकंजा कस पाएगा या फिर यह अवैध खेल यूं ही चलता रहेगा? ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष जांच कराई जाए, नामजद आरोपियों की भूमिका की पड़ताल हो और अवैध खनन के इस जाल को जड़ से खत्म किया जाए। अब देखना यह है कि प्रशासन इस चुनौती को गंभीरता से लेता है या फिर टोंस नदी का सीना यूं ही छलनी होता रहेगा।1
- *मिट्टी मे दब कर मज़दूर की मौत का लाइव वीडियो आया सामने* यूपी के अलीगढ़ में पाइप लाइन का काम चल रहा था,एक मजदूर गड्ढे में उतरा तभी मिट्टी का बड़ा हिस्सा मजदूर पर गिर गया,साथी मज़दूरों ने उसकी जान बचाने की बहुत कोशिश की लेकिन तब तक मजदूर की मौत हो चुकी थी।1
- उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है पाइपलाइन का कार्य करते समय ऊपर से मिट्टी का एक हिस्सा भरभरा कर गिर गया जिससे एक मजदूर पूरी तरह से दब गया और मौके पर कल के गाल में समाहित हो गया1
- कौंधियारा थाना क्षेत्र के रीवा रोड पर अचानक एक व्यक्ति चलती कार में बेहोश हो गया और उसकी कार नींद में ही चलती रही । आप अगर लंबा सफर कर रहें हैं तो भोर की नींद से सावधान रहिए । आज रविवार को सुबह करीब 5:30 बजे रीवा रोड पर जारी गांव के पास एक अर्टिका कार का ड्राइवर अचानक स्टेरिंग पर ही बेहोश हो गया और गाड़ी चलती रही । गनीमत रही की गाड़ी स्लो स्पीड में चलने लगी, उसका पर एक्सीलेटर से हट गया । रीवा रोड जारी गांव के पास ग्रामीणों ने जब देखा कि उसमें कोई ड्राइवर नहीं है वह सीट पर लेट गया है और कर आगे बढ़ रही है तो धीमी गति से चल रही कर के सामने पत्थर रख और गाड़ी को रोक लिया भीतर जाता देखा तो खून से भीगा एक व्यक्ति सीट बेल्ट लगाएं बेहोश हालत में ड्राइविंग सीट पर था । कौंधियारा और जारी पुलिस को खबर दी गई। गाड़ी से ड्राइवर को उतारा गया । स्टेरिंग पर नींद में गिरने । के कारण एक दांत टूट गया और व्यक्ति बेहोश था। बाहर निकल गया चाय पिलाई गई थोड़ी देर में जौनपुर का रहने वाला । यह व्यक्ति होश में आया और फिर बोला कि हम चले जाएंगे । 100 नंबर की पुलिस मौके पर पहुंची व्यक्ति का होलिया नोट करने के बाद उसे जाने दिया और ग्रामीणों को उसकी जान बचाने के लिए धन्यवाद दिया । कुल मिलाकर वाहन चलाते समय नींद आए तो आप आराम करने के बाद ही सड़क पर वाहन चलाएं ,इस घटना से हमे यही सीख मिलती है ।1