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उत्तर प्रदेश के पीलीभीत स्थित आरटीओ विभाग में अधिकारियों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर दलाली और अवैध वसूली का खेल चल रहा है। विभाग में आवेदकों से तय सरकारी फीस से 8 गुना ज्यादा रुपये वसूले जा रहे हैं। इस विभाग में घूस देने पर गाड़ी न चला पाने वाले व्यक्ति को भी पास कर दिया जाता है, जबकि पैसे न देने पर सही से गाड़ी चलाने के बावजूद फेल कर दिया जाता है। आरटीओ विभाग में अफसरों और दलालों की साठगांठ से यह धांधली खुलेआम जारी है।
Pankaj gupta
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत स्थित आरटीओ विभाग में अधिकारियों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर दलाली और अवैध वसूली का खेल चल रहा है। विभाग में आवेदकों से तय सरकारी फीस से 8 गुना ज्यादा रुपये वसूले जा रहे हैं। इस विभाग में घूस देने पर गाड़ी न चला पाने वाले व्यक्ति को भी पास कर दिया जाता है, जबकि पैसे न देने पर सही से गाड़ी चलाने के बावजूद फेल कर दिया जाता है। आरटीओ विभाग में अफसरों और दलालों की साठगांठ से यह धांधली खुलेआम जारी है।
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- उत्तर प्रदेश के पीलीभीत स्थित आरटीओ विभाग में अधिकारियों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर दलाली और अवैध वसूली का खेल चल रहा है। विभाग में आवेदकों से तय सरकारी फीस से 8 गुना ज्यादा रुपये वसूले जा रहे हैं। इस विभाग में घूस देने पर गाड़ी न चला पाने वाले व्यक्ति को भी पास कर दिया जाता है, जबकि पैसे न देने पर सही से गाड़ी चलाने के बावजूद फेल कर दिया जाता है। आरटीओ विभाग में अफसरों और दलालों की साठगांठ से यह धांधली खुलेआम जारी है।1
- उत्तर प्रदेश में कासगंज-ऐशबाग ट्रेन का आज शुभारंभ कर दिया गया है। ट्रेन की शुरुआत के साथ ही इसके संचालन की झलक भी सामने आई है, जिसमें देखा जा सकता है कि यह ट्रेन किस तरह पटरी पर चल रही है।1
- केंद्रीय राज्य मंत्री एवं सांसद जितिन प्रसाद ने पूरनपुर स्टेशन से कासगंज-ऐशबाग दैनिक एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया है। सांसद के प्रयासों से वर्षों बाद पीलीभीत से लखनऊ तक रूहेलखंड एक्सप्रेस ट्रेन भी दौड़ी है। इस रेल सेवा के शुरू होने से क्षेत्रवासियों की लंबे समय से चली आ रही माँग पूरी हो गई है। इस ट्रेन के शुरू होने से पूरनपुर, पीलीभीत, मैलानी और लखीमपुर होते हुए लखनऊ तक के लिए बेहतर रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी। इससे क्षेत्र के छात्रों, व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।1
- उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में शिक्षामित्रों ने श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन एसडीएम को सौंपा है।1
- Post by Sudheer Kumar1
- दिल्ली के जंतर मंतर पर केंद्र सरकार के खिलाफ पिछले कई दिनों से लगातार विरोध प्रदर्शन जारी है। बड़ी संख्या में एकजुट हुए प्रदर्शनकारी अपनी समस्याओं को लंबे समय से नजरअंदाज किए जाने का हवाला देकर नारेबाजी कर रहे हैं। मौके पर कई संगठनों के बैनर और पोस्टर देखे जा सकते हैं, जिनमें मुख्य रूप से रोजगार, महंगाई, शिक्षा और सामाजिक न्याय से जुड़ी मांगें उठाई गई हैं। प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखते हुए सरकार से जल्द संवाद की मांग की है और समाधान न निकलने पर आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दी है। दूसरी ओर, सरकार की तरफ से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, हालांकि सूत्रों के अनुसार उच्च स्तर पर बैठक जारी है और जल्द ही हल निकालने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जंतर मंतर पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं और फिलहाल किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। दिल्ली पुलिस ने आम जनता से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है। इलाके में यातायात व्यवस्था में बदलाव के कारण लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। बता दें कि 18वीं सदी में महाराजा जय सिंह द्वितीय द्वारा बनवाया गया जंतर मंतर एक ऐतिहासिक स्थल व खगोलीय वेधशाला है, जो वर्तमान में विरोध प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र बन चुका है।1
- बरेली क्षेत्र के ग्राम गंगापुर डाबोरा में पिछले पांच दिनों से बिजली आपूर्ति ठप होने पर ग्रामीणों ने बिजली विभाग के खिलाफ प्रदर्शन कर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। प्रदर्शन में नन्हेलाल, रामबिलास, हरीश कुमार मौर्य, प्रमोद कश्यप, राजेंद्र, श्रीकृष्ण, महेंद्रपाल, रामेश्वर पाल, मुकेश और ममता देवी सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द बिजली बहाल नहीं हुई तो वे एसडीएम विदुषी सिंह को शिकायत देकर कार्रवाई की मांग करेंगे। वहीं, जेई संतोष कुमार शर्मा ने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं था, अब लाइनमैन को मौके पर भेजकर जल्द समस्या का समाधान कराया जाएगा।1
- पहले प्रधानमंत्री की 13वीं का खाना बाँटा गया और अब ऐसी दुर्दशा देखने को मिल रही है। इस स्थिति पर तंज कसते हुए कहा जा रहा है कि 'अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत', क्योंकि सब कुछ हो जाने के बाद अब पछताने से कोई फायदा नहीं है।1