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कोंडागांव में गायत्री जयंती और गंगा दशहरा के पावन अवसर पर एक भव्य जिला स्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस विशेष आयोजन के तहत एक विशाल बाइक रैली भी निकाली गई, जिसमें लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
ESHENDRA PATEL
कोंडागांव में गायत्री जयंती और गंगा दशहरा के पावन अवसर पर एक भव्य जिला स्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस विशेष आयोजन के तहत एक विशाल बाइक रैली भी निकाली गई, जिसमें लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
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- कोंडागांव में गायत्री जयंती और गंगा दशहरा के पावन अवसर पर एक भव्य जिला स्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस विशेष आयोजन के तहत एक विशाल बाइक रैली भी निकाली गई, जिसमें लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।1
- कोंडागांव जिले के केशकाल राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर बोरगांव स्थित जिला सहकारी बैंक के पास एक ट्रक और ट्रैक्टर की जोरदार भिड़ंत हो गई। इस सड़क हादसे में पैदल चल रही दो महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं। घटना के तुरंत बाद, स्थानीय लोगों ने दोनों घायल महिलाओं को तत्काल केशकाल अस्पताल पहुंचाया। वहां प्राथमिक उपचार प्रदान करने के बाद, उन्हें बेहतर इलाज के लिए आगे रेफर कर दिया गया है।1
- नारायणपुर जिले के भरंडा गांव में दो समुदायों के बीच विवाद के बाद तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई है। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने गांव में भारी अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है, जिससे पूरा क्षेत्र एक छावनी में तब्दील नजर आ रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, यह विवाद कथित धर्मांतरण के मुद्दे को लेकर शुरू हुआ था, जिसके चलते दोनों पक्षों में कहासुनी और तनाव बढ़ गया। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रण में लिया। वर्तमान में, पुलिस गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी कर रही है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने में सहयोग करें।1
- छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के केसकाल स्थित ग्राम पंचायत सिकागांव के राजस्व ग्राम सालेभाट में जल संसाधन विभाग की पानी टंकी से आज 2024 से लेकर 2026 तक पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। इस अवधि के लिए पानी सप्लाई पूरी तरह बाधित है।1
- हर साल लाखों पौधे लगाए जाने और 'पेड़ लगाए गए' जैसी खबरें प्रमुखता से प्रकाशित होने के बावजूद, यह गंभीर चिंता जताई गई है कि 'पेड़ मर गए' जैसी खबरें कभी सामने नहीं आतीं। इस विरोधाभास पर तीखा सवाल उठाते हुए पूछा गया है कि पिछले साल लगाए गए पौधों में से आज कितने वास्तव में जीवित हैं। 'तीसरी आंख' के माध्यम से इस विषय पर प्रकाश डालते हुए, इस बात पर जोर दिया गया है कि 'पेड़ की मौत की खबर नहीं छपती' की यह सच्चाई हमें वृक्षारोपण के प्रयासों को एक नए और अधिक यथार्थवादी दृष्टिकोण से देखने पर मजबूर करती है।1
- जगदलपुर के नगरनार थाना क्षेत्र अंतर्गत खुटपदर में सोमवार देर शाम एक ढाबे के सामने तलवारबाजी की घटना सामने आई है, जिसमें तीन लोग घायल हो गए। यह हिंसक झड़प एक ट्रक मालिक और उसके पूर्व चालक के बीच शुरू हुए विवाद के कारण हुई। दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हुई और तलवारें भी चलीं, जिसके परिणामस्वरूप तीन लोगों को चोटें आईं। घटना की जानकारी मिलने पर नगरनार पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। दोनों पक्षों ने थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराई है, और पुलिस अब इस पूरे मामले की जांच कर रही है। पुलिस को घटना का सीसीटीवी फुटेज भी मिला है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।3
- छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के भरंडा गांव में कथित धर्मांतरण को लेकर गहरा विवाद खड़ा हो गया है। इस तनावपूर्ण स्थिति के मद्देनजर, प्रशासन ने गांव में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया है। ग्रामीणों के कड़े विरोध और लगातार बढ़ते तनाव के कारण, पूरे क्षेत्र को सुरक्षा छावनी में बदल दिया गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। प्रशासनिक अधिकारी शांति व्यवस्था बनाए रखने और इस पूरे मामले की गहन जांच करने में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।1
- नारायणपुर के भरण्डा गाँव में धर्मान्तरण को लेकर गहराए विवाद के बाद गाँव छावनी में तब्दील हो गया है। इस दौरान दो पक्षों के बीच जमकर झूमा झटकी भी हुई। सुरक्षा के मद्देनजर गाँव में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है और सुबह से ही तनाव की स्थिति बनी हुई है। लगभग 26 मतांतरित परिवारों ने आरोप लगाया है कि आदिवासी ग्रामीणों ने उन्हें घर से निकाल कर गाँव छोड़ने का फरमान सुनाया है। इन परिवारों से ईसाई धर्म छोड़कर आदिवासी रीति-नीति अपनाने की मांग भी की गई है। वहीं, आदिवासी समुदाय का कहना है कि ईसाई धर्म मानने वाले लोग उनकी रीति-नीति और देवी-देवताओं का अपमान करते हैं। आदिवासी समुदाय की मांग है कि या तो ये लोग आदिवासी रीति-नीति में शामिल हों या गाँव छोड़कर चले जाएं। फिलहाल, दोनों ही पक्ष एक-दूसरे की बात मानने को तैयार नहीं हैं, जिससे विवाद और भी गहरा गया है।1