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- इंदौर मंदिर विवाद में पुलिस का खुलासा, CCTV से तीन आरोपी गिरफ्तार माफी वीडियो भी आया सामने, पुलिस की कार्रवाई जारी1
- बकाया भुगतान को लेकर प्रदर्शन: खगड़िया/बेलदौर में बिहार राज्य आशा संघ तथा आशा फैसिलेटर ने सिविल सर्जन कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि अगस्त 2025 से उनके भुगतान बकाया है, जिसके चलते उन्होंने “पैसा नहीं तो काम नहीं”, “आशा का शोषण बंद करो” जैसे नारे लगाए। उन्होंने मांग की कि भुगतान तुरंत शुरू किया जाए और हर महीने नियमित भुगतान सुनिश्चित किया जाए1
- सौर बाजार प्रखंड क्षेत्र के गमहरिया पंचायत अंतर्गत रामपुर गांव स्थित जालंधर धाम शिव मंदिर में महाशिव रात्रि को लेकर तैयारी जोड़ शोर से शुरू।1
- saharsa jila sanjeet kumar1
- सहरसा ओभरब्रिज कार्य ❣️ पिलर ढलाई हो गया 💞🥰1
- देशव्यापी भारत बंद का असर बिहार के मधेपुरा में भी देखने को मिला। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर मजदूरों, कर्मचारियों और किसान संगठनों ने शहर में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चार नए लेबर कोड को रद्द करने की मांग उठाई। मधेपुरा में गुरुवार को भारत बंद का व्यापक असर देखने को मिला। शहर के मुख्य बाजार क्षेत्र में स्थित भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा के सामने ट्रेड यूनियनों, किसान संगठनों और वाम दलों के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। हाथों में लाल झंडे और मांगों से जुड़ी तख्तियां लिए प्रदर्शनकारी केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए। प्रदर्शन का नेतृत्व एक्टू समेत देश की 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, विभिन्न सेवा संघों और फेडरेशनों ने किया। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग चार नए लेबर कोड को वापस लेने की रही। यूनियनों का आरोप है कि ये श्रम संहिताएं मजदूर विरोधी हैं और इससे श्रमिकों के अधिकार कमजोर होंगे। उनका कहना है कि नए कानून लागू होने से काम के घंटे बढ़ सकते हैं, नौकरी की सुरक्षा खत्म हो सकती है और संगठित व असंगठित क्षेत्र के मजदूरों का शोषण बढ़ेगा। भारत बंद के दौरान बैंकिंग, बीमा, बिजली, परिवहन, स्वास्थ्य, गैस और जलापूर्ति जैसी सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई गई। हालांकि प्रशासन ने आवश्यक सेवाओं को सुचारू रखने का दावा किया। बैंकिंग क्षेत्र में आंशिक असर देखने को मिला, जहां कुछ शाखाओं में कामकाज प्रभावित रहा। प्रदर्शन में अखिल भारतीय किसान सभा, भाकपा माले सहित कई संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। किसान सभा के राष्ट्रीय सचिव प्रमोद प्रभाकर ने केंद्र सरकार पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने के लिए श्रमिक कानूनों को कमजोर कर रही है। वहीं अन्य वक्ताओं ने चेतावनी दी कि जब तक मजदूरों और किसानों की मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। बाइट --प्रमोद प्रभाकर, अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय सचिव4
- Post by नाम सोनू पासवान कम लेबर का1
- बकाया भुगतान को लेकर प्रदर्शन: खगड़िया में बिहार राज्य आशा संघ तथा आशा फैसिलेटर ने सिविल सर्जन कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि अगस्त 2025 से उनके भुगतान बकाया है, जिसके चलते उन्होंने “पैसा नहीं तो काम नहीं”, “आशा का शोषण बंद करो” जैसे नारे लगाए। उन्होंने मांग की कि भुगतान तुरंत शुरू किया जाए और हर महीने नियमित भुगतान सुनिश्चित किया जाए1