कोटा: सरकार पर मजदूर विरोधी रवैए का आरोप, फैक्ट्री की जमीन पर कब्जा करने की चेतावनी बकाया भुगतान की मांग को लेकर 425 वें दिन भी जारी रहा जेके मजदूरों का धरना कोटा। जेके सिंथेटिक फैक्ट्री (उद्योग नगर, कोटा) के 1997 में बंद होने के बाद पिछले 29 साल से बकाया वेतन और अन्य परिलाभ की मांग को लेकर सीटू (सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स) के बैनर तले सैकड़ों मजदूर, महिलाएं और परिजन जिला कलेक्ट्रेट गेट पर अनिश्चित कालीन धरना दे रहे हैं। शनिवार को धरने का 425वां दिन पूरा हो गया, लेकिन सरकार और प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। धरने के दौरान मजदूर नेताओं ने सख्त चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द ही 500 करोड़ रुपए से अधिक के बकाया वेतन का भुगतान नहीं करती, तो मजदूर फैक्ट्री की अधिगृहीत जमीन पर कब्जा कर लेंगे। मजदूर नेताओं ने बताया कि 1997 में बंद हुई जेके सिंथेटिक फैक्ट्री के लगभग 4200 मजदूरों का मूल बकाया वेतन करीब 260 करोड़ रुपए था। सुप्रीम कोर्ट के 2023 के आदेश के अनुसार 18 प्रतिशत ब्याज जोड़ने के बाद यह राशि अब 500 करोड़ रुपए से अधिक हो चुकी है। सीटू के नेतृत्व में तीनों मजदूर यूनियनों (कामरेड हबीब खान, कामरेड उमाशंकर और कामरेड नरेंद्र सिंह) ने 18 फरवरी 2025 से धरना शुरू किया था। धरने के दबाव में सरकार ने फैक्ट्री की जमीन अधिग्रहण कर ली, लेकिन मजदूरों को बकाया वेतन का भुगतान अभी तक नहीं किया गया। मजदूरों को गुमराह कर रही सरकार धरना स्थल पर मजदूरों को संबोधित करते हुए कामरेड हबीब खान और कामरेड उमाशंकर ने कहा कि सरकार बार-बार हाईकोर्ट में चल रहे केस का हवाला देकर मजदूरों को गुमराह कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अराफात ग्रुप द्वारा दायर केस का बकाया वेतन भुगतान से कोई संबंध नहीं है। कामरेड अली मोहम्मद ने बताया कि सरकार ने जमीन अधिग्रहण मजदूरों के बकाया भुगतान की शर्त पर किया था, लेकिन अब शर्त पूरी नहीं की जा रही। मजदूर नेताओं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की शर्तों को लागू कर जल्द से जल्द 4200 मजदूरों का बकाया वेतन चुकाया जाए, अन्यथा हमें फैक्ट्री की जमीन पर कब्जा करने को मजबूर होना पड़ेगा। कामरेड उमाशंकर, कामरेड नरेंद्र सिंह, कामरेड अली मोहम्मद, कामरेड कालीचरण सोनी और कामरेड अशोक सिंह ने भी मजदूरों को संबोधित किया। धरने में लगातार बढ़ रही उपस्थिति यूनियन रजिस्टर में शनिवार को 870 मजदूरों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल रहीं। क्षेत्र में बढ़ती भीषण गर्मी और लू को देखते हुए मजदूरों ने सरकार से तत्काल न्याय की अपील की है।सीटू मीडिया प्रभारी मुरारीलाल बैरवा ने कहा कि मजदूर 29 साल से अपनी मेहनत का हक मांग रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद सरकार की उदासीनता से आक्रोश बढ़ रहा है। धरने को सीटू और माकपा कार्यकर्ताओं के अलावा स्थानीय आमजन भी लगातार समर्थन दे रहे हैं। मजदूरों का कहना है कि गर्मी के बावजूद वे अपना संघर्ष जारी रखेंगे जब तक बकाया वेतन का पूरा भुगतान नहीं हो जाता।
कोटा: सरकार पर मजदूर विरोधी रवैए का आरोप, फैक्ट्री की जमीन पर कब्जा करने की चेतावनी बकाया भुगतान की मांग को लेकर 425 वें दिन भी जारी रहा जेके मजदूरों का धरना कोटा। जेके सिंथेटिक फैक्ट्री (उद्योग नगर, कोटा) के 1997 में बंद होने के बाद पिछले 29 साल से बकाया वेतन और अन्य परिलाभ की मांग को लेकर सीटू (सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स) के बैनर तले सैकड़ों मजदूर, महिलाएं और परिजन जिला कलेक्ट्रेट गेट पर अनिश्चित कालीन धरना दे रहे हैं। शनिवार को धरने का 425वां दिन पूरा हो गया, लेकिन सरकार और प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। धरने के दौरान मजदूर नेताओं ने सख्त चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द ही 500 करोड़ रुपए से
अधिक के बकाया वेतन का भुगतान नहीं करती, तो मजदूर फैक्ट्री की अधिगृहीत जमीन पर कब्जा कर लेंगे। मजदूर नेताओं ने बताया कि 1997 में बंद हुई जेके सिंथेटिक फैक्ट्री के लगभग 4200 मजदूरों का मूल बकाया वेतन करीब 260 करोड़ रुपए था। सुप्रीम कोर्ट के 2023 के आदेश के अनुसार 18 प्रतिशत ब्याज जोड़ने के बाद यह राशि अब 500 करोड़ रुपए से अधिक हो चुकी है। सीटू के नेतृत्व में तीनों मजदूर यूनियनों (कामरेड हबीब खान, कामरेड उमाशंकर और कामरेड नरेंद्र सिंह) ने 18 फरवरी 2025 से धरना शुरू किया था। धरने के दबाव में सरकार ने फैक्ट्री की जमीन अधिग्रहण कर ली, लेकिन मजदूरों को बकाया वेतन का भुगतान अभी तक नहीं किया गया। मजदूरों को गुमराह कर रही सरकार धरना स्थल
पर मजदूरों को संबोधित करते हुए कामरेड हबीब खान और कामरेड उमाशंकर ने कहा कि सरकार बार-बार हाईकोर्ट में चल रहे केस का हवाला देकर मजदूरों को गुमराह कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अराफात ग्रुप द्वारा दायर केस का बकाया वेतन भुगतान से कोई संबंध नहीं है। कामरेड अली मोहम्मद ने बताया कि सरकार ने जमीन अधिग्रहण मजदूरों के बकाया भुगतान की शर्त पर किया था, लेकिन अब शर्त पूरी नहीं की जा रही। मजदूर नेताओं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की शर्तों को लागू कर जल्द से जल्द 4200 मजदूरों का बकाया वेतन चुकाया जाए, अन्यथा हमें फैक्ट्री की जमीन पर कब्जा करने को मजबूर होना पड़ेगा। कामरेड उमाशंकर, कामरेड नरेंद्र सिंह, कामरेड अली मोहम्मद, कामरेड कालीचरण सोनी और
कामरेड अशोक सिंह ने भी मजदूरों को संबोधित किया। धरने में लगातार बढ़ रही उपस्थिति यूनियन रजिस्टर में शनिवार को 870 मजदूरों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल रहीं। क्षेत्र में बढ़ती भीषण गर्मी और लू को देखते हुए मजदूरों ने सरकार से तत्काल न्याय की अपील की है।सीटू मीडिया प्रभारी मुरारीलाल बैरवा ने कहा कि मजदूर 29 साल से अपनी मेहनत का हक मांग रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद सरकार की उदासीनता से आक्रोश बढ़ रहा है। धरने को सीटू और माकपा कार्यकर्ताओं के अलावा स्थानीय आमजन भी लगातार समर्थन दे रहे हैं। मजदूरों का कहना है कि गर्मी के बावजूद वे अपना संघर्ष जारी रखेंगे जब तक बकाया वेतन का पूरा भुगतान नहीं हो जाता।
- सूरत से काफी दर्द नाक खबर आ रही है: मजदूरों का बड़े पैमाने पर पलायन हो रहा है: वहीं भीड़ को कंट्रोल करने के नाम पर उन पर लाठियां बरसाई जा रही हैं: ( धीरे-धीरे लोगों को समझ आ रहा है कि इस सरकार ने पिछले 12 साल में देश को बार-बार संकट में डालने के सिवा कुछ नहीं किया: श्रवण गर्ग- वरिष्ठ पत्रकार, संपादक और लेखक)1
- कोटा। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, कमला उद्यान (लैंडमार्क सिटी) में “मीडिया द्वारा आध्यात्मिक जागरण से विश्व परिवर्तन” विषय पर एक भव्य सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न स्थानों से आए मीडिया प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और आध्यात्मिकता व सकारात्मक सोच के महत्व पर गहन चर्चा की। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता माउंट आबू से पधारे बीके कोमल (मीडिया प्रभारी, मधुबन न्यूज़) ने अपने संबोधन में कहा कि मीडिया प्रजातंत्र का चौथा स्तंभ है और इसकी भूमिका समाज को दिशा देने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने मीडिया कर्मियों को राजयोग मेडिटेशन अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि इससे जीवन में सकारात्मकता, मानसिक शांति और कार्य में संतुलन आता है। साथ ही उन्होंने सभी को माउंट आबू आकर आध्यात्मिक अनुभव लेने का निमंत्रण दिया। इंदौर से पधारी बीके अनीता दीदी ने कहा कि मीडिया कर्मी देश सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन उन्हें अपने आंतरिक सशक्तिकरण के लिए भी नियमित मेडिटेशन करना चाहिए। उन्होंने आत्मिक उन्नति और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। आशीर्वचन देते हुए कोटा संभाग प्रभारी बीके उर्मिला दीदी ने सभी पत्रकारों का आभार व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में उनकी भूमिका को सराहा।1
- Post by Rajendra Kumar Doveriya1
- ओपनिंग वीकेंड: फिल्म ने अपने पहले दो दिनों में ही वर्ल्डवाइड ₹60.50 करोड़ का ग्रॉस कलेक्शन कर लिया है। घरेलू कमाई: भारत में फिल्म ने दूसरे दिन (शनिवार) जबरदस्त उछाल दिखाते हुए लगभग ₹19 करोड़ का नेट कलेक्शन किया, जिससे दो दिनों की कुल कमाई ₹35 करोड़ (नेट) पहुंच गई है। रिकॉर्ड: फिल्म ने अक्षय कुमार की ही पिछली फिल्म 'भूल भुलैया 2' के ओपनिंग रिकॉर्ड्स को पीछे छोड़ दिया है। क्यों पसंद आ रही है फिल्म? दर्शकों और समीक्षकों के बीच 'भूत बंगला' को लेकर काफी चर्चा है। फिल्म की सफलता के पीछे ये मुख्य कारण माने जा रहे हैं: कल्ट कॉमेडी तिकड़ी: अक्षय कुमार, परेश रावल और राजपाल यादव की वापसी ने दर्शकों को 'हेरा फेरी' और 'भूल भुलैया' वाले पुराने दिन याद दिला दिए हैं। प्रियदर्शन का निर्देशन: 14 साल बाद अक्षय और प्रियदर्शन की जोड़ी ने साबित कर दिया कि कॉमेडी और हॉरर का तालमेल बिठाने में उनका कोई सानी नहीं है। तगड़ी कास्ट: फिल्म में तबू, वामिका गब्बी और मिथिला पालकर की मौजूदगी ने कहानी में और जान फूंक दी है। दर्शकों की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर 'ब्लॉकबस्टर' वाले रिएक्शन मिल रहे हैं। फैंस का कहना है कि फिल्म का फर्स्ट हाफ हंसी से भरपूर है, जबकि सेकंड हाफ में हॉरर और सस्पेंस का जबरदस्त तड़का है। ट्रेड एनालिस्ट्स का मानना है: "अगर फिल्म की रफ्तार ऐसी ही रही, तो यह इस साल की सबसे बड़ी हॉरर-कॉमेडी हिट साबित हो सकती है और 'स्त्री 2' जैसे बड़े मुकाम को टक्कर दे सकती है।"1
- कोटा। चंबल नदी के किनारे स्थित सुप्रसिद्ध गोदावरी धाम हनुमान मंदिर इन दिनों अपनी अलौकिक शक्ति और श्रद्धालुओं की अपार श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र बना।।1
- कोटा, 19 अप्रैल 2026। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम के दौरान बीके कोमल (चीफ एडिटर, मधुबन न्यूज़) ने मीडिया जागरूकता को लेकर अपना विशेष इंटरव्यू दिया। उन्होंने कहा कि मीडिया समाज का दर्पण है और इसकी जिम्मेदारी केवल खबर दिखाने तक सीमित नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देने की भी है। बीके कोमल ने अपने वक्तव्य में बताया कि आज के समय में सकारात्मक और सत्य आधारित पत्रकारिता की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। मीडिया यदि जागरूक, निष्पक्ष और जिम्मेदार बने, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना संभव है। उन्होंने आगे कहा कि नकारात्मक खबरों के बीच सकारात्मक पत्रकारिता को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है, ताकि लोगों में आशा, विश्वास और जागरूकता बनी रहे। साथ ही उन्होंने मीडिया कर्मियों से अपील की कि वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए समाजहित को सर्वोपरि रखें। इस विशेष इंटरव्यू के माध्यम से मीडिया की भूमिका, उसकी जिम्मेदारियों और जागरूकता के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया, जिसे उपस्थित पत्रकारों ने भी सराहा। आप देख रहे हैं सूचना इंडिया टीवी न्यूज चैनल पर जेबा पटेल द्वारा स्पेशल न्यूज़ इंटरव्यू1
- Post by Mahendar.merotha1
- Post by Rajendra Kumar Doveriya1