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शनिवार को आरा शहर में हुई जमकर बारिश ने पूरे शहर को नर्क बना दिया है। इस भारी बारिश के कारण शहर की सड़कों पर पानी फैल गया, जिससे स्थानीय लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी।
Sanjay srivastava
शनिवार को आरा शहर में हुई जमकर बारिश ने पूरे शहर को नर्क बना दिया है। इस भारी बारिश के कारण शहर की सड़कों पर पानी फैल गया, जिससे स्थानीय लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी।
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- शनिवार को आरा शहर में हुई जमकर बारिश ने पूरे शहर को नर्क बना दिया है। इस भारी बारिश के कारण शहर की सड़कों पर पानी फैल गया, जिससे स्थानीय लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी।1
- बिहार में दांतों की सड़न (डेंटल कैविटी) और मसूड़ों की बीमारियां काफी तेजी से बढ़ रही हैं। पटना के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों की रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी संख्या में बच्चे और युवा इस समस्या की चपेट में आ रहे हैं। आरा के विशेषज्ञ दंत चिकित्सक डॉ. कुणाल कुमार के अनुसार, क्षेत्र के लगभग 80% युवाओं में किसी न किसी तरह की ओरल हेल्थ की समस्या मिल रही है, जबकि करीब 25% बच्चे कैविटी से प्रभावित हैं। जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक्स, चॉकलेट, मीठे खाद्य पदार्थ, तंबाकू, गुटखा और धूम्रपान को दांतों की सड़न और मसूड़ों की बीमारी का मुख्य कारण माना जा रहा है। भोजपुर सहित बिहार के कई इलाकों में दंत स्वच्छता को लेकर जागरूकता की भारी कमी है। लोग नियमित रूप से ब्रश नहीं करते, हर छह महीने पर दांतों की जांच नहीं कराते और जब तक तेज दर्द न हो, तब तक डॉक्टर के पास जाने से बचते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ठंडा या गर्म खाने पर दर्द होना, दांतों में काले गड्ढे दिखना, खाना फंसना, मसूड़ों से खून आना, मुंह से बदबू आना और चबाने में दर्द होने जैसे लक्षणों को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर इलाज न कराने से कैविटी गहरी हो जाती है, जिससे बाद में रूट कैनाल कराने या दांत निकालने की नौबत आ जाती है। शुरुआती चरण में ही टूथ फिलिंग (Dental Filling) करा लेने से प्राकृतिक दांत को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। आजकल आधुनिक फ्लोराइड थेरेपी, पिट एंड फिशर सीलेंट और उच्च गुणवत्ता वाली टूथ फिलिंग जैसी सुरक्षित तकनीकें उपलब्ध हैं। डॉ. कुणाल कुमार (बीडीएस, डेंटल सर्जन, आरा) ने जनहित में सलाह दी है कि दिन में दो बार फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से ब्रश करें, मीठी और चिपचिपी चीजें कम खाएं, तंबाकू-गुटखे से दूर रहें और हर छह महीने में डेंटिस्ट से दांतों की जांच जरूर कराएं। दांतों का दर्द अपने आप ठीक नहीं होता, इसलिए सही समय पर इलाज कराना बेहद जरूरी है।1
- आरा-बलिया फोरलेन सड़क परियोजना के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस पर बड़हरा विधायक ने गहरी खुशी व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार और बिहार सरकार के प्रति आभार जताया है। विधायक का कहना है कि यह परियोजना इस क्षेत्र के समग्र विकास और यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत लगभग 1,564 करोड़ रुपये है। बड़हरा विधायक ने बताया कि वे काफी लंबे समय से महुली घाट पर एक पक्के पुल के निर्माण और आरा से बलिया तक फोरलेन सड़क बनाने की मांग लगातार उठाते रहे हैं। अब इस महत्वाकांक्षी परियोजना की प्रक्रिया शुरू होने से क्षेत्र की जनता में भारी उत्साह और खुशी का माहौल है। इस फोरलेन सड़क के निर्माण से बिहार और उत्तर प्रदेश के बीच आवागमन काफी सुगम और आसान हो जाएगा। इससे दोनों राज्यों के बीच आपसी व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी एक नई रफ्तार मिलेगी। विधायक ने विश्वास व्यक्त किया है कि निर्माण कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा होगा और इससे लाखों लोगों को सीधे तौर पर लाभ पहुंचेगा।1
- भोजपुर जिले के आरा में आईसेक्ट इंडिया–रोजगार मंत्रा द्वारा आयोजित निःशुल्क रोजगार मेले में 253 युवाओं का चयन विभिन्न कंपनियों में किया गया है। शनिवार को जिला स्कूल और सिविल कोर्ट के पीछे स्थित ए3 इंटरनेशनल (आईसेक्ट इंडिया बिजनेस पार्टनर) कार्यालय में इस मेले का आयोजन हुआ, जिसमें नौकरी की उम्मीद लेकर हजारों की संख्या में युवक-युवतियां पहुंचे। इस रोजगार मेले में बजाज ऑटो, टाटा मोटर, उत्कर्ष फाइनेंस, बिलिंकिट, टेक्निको इंडस्ट्रीज और जय भारत मारुती जैसी निजी कंपनियों ने भाग लेकर अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लिया, जिससे युवाओं में भारी उत्साह देखा गया। आईसेक्ट इंडिया के प्रतिनिधि आयुष कुमार सिन्हा ने बताया कि इस रोजगार मेले के माध्यम से रिसेप्शनिस्ट, काउंसलर, कंप्यूटर ऑपरेटर, हेल्पर, सुपरवाइजर, प्रोडक्शन एग्जीक्यूटिव, आईटीआई टेक्नीशियन, बैंकिंग फील्ड एग्जीक्यूटिव तथा मोबाइल व लैपटॉप सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर इंजीनियर जैसे कुल 327 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चलाई गई थी। भर्ती के लिए न्यूनतम योग्यता आठवीं पास से लेकर स्नातक और आयु सीमा 18 से 30 वर्ष निर्धारित थी। ए3 इंटरनेशनल के प्रबंधक के अनुसार, मेले में बिहार के विभिन्न जिलों से आए अभ्यर्थियों ने भाग लिया, जिन्हें पद एवं योग्यता के अनुसार ₹15,000 से ₹30,500 प्रतिमाह तक का वेतन दिया जाएगा और कुछ कंपनियां रहने व भोजन की सुविधा भी देंगी। आयोजकों ने अपील की है कि यह भर्ती पूरी तरह निःशुल्क थी, इसलिए नौकरी के नाम पर किसी को भी पैसा न दें। जो अभ्यर्थी बारिश के कारण मेले में शामिल नहीं हो पाए, वे आरा कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।4
- ₹1564 करोड़ की आरा-बैरिया फोरलेन परियोजना को लेकर आई बड़ी खुशखबरी पर बड़हरा विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने बेहद खुशी जताई है। इस बड़ी सौगात के लिए उन्होंने केंद्र सरकार, बिहार सरकार और नितिन गडकरी का आभार व्यक्त किया है। विधायक ने महुली घाट पक्का पुल और आरा-बलिया रेल लाइन पर भी बड़ी बात कही है। इस परियोजना के जरिए भोजपुर और बलिया की कनेक्टिविटी को एक नया आयाम मिलेगा।1
- दिनभर की मुख्य खबरों में नीट (NEET) और राहुल गांधी से जुड़ा विरोध प्रदर्शन प्रमुख रूप से चर्चा में रहा। देश की आज की इन शीर्ष खबरों में इस प्रदर्शन को लेकर बड़ी हलचल देखने को मिली है।1
- जनतंत्र आवाज पार्टी ने केंद्र सरकार से जोरदार मांग की है कि आँगन सेविका का मानदेय बिना किसी देरी के अविलंब 18000 किया जाए।1
- बिहार के भोजपुर जिले के बिहिया थाना क्षेत्र के धोबी मोहल्ला में शनिवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हो गया। यहाँ घर के बाहर खेल रहे दो मासूम बच्चों की एक जर्जर दीवार गिरने से मलबे में दबकर मौत हो गई। इस हादसे में बच्चों के साथ मौजूद एक बुजुर्ग भी घायल हुए हैं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया है। मृतक बच्चों की पहचान चार वर्षीय शिवांश कुमार और तीन वर्षीय अंकित कुमार के रूप में हुई है। दोनों बच्चे घर के बाहर खेल रहे थे कि अचानक जर्जर दीवार भरभराकर उन पर गिर गई। शिवांश की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अंकित ने अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में दम तोड़ दिया। हादसे में अंकित के दादा को भी हल्की चोटें आई हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह दीवार काफी दिनों से जर्जर और झुकी हुई थी, लेकिन कई बार शिकायत करने के बावजूद इसे हटाने या सुरक्षित करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे प्रशासन और संबंधित लोगों की लापरवाही के कारण दो मासूमों की जान चली गई। इस हादसे से आक्रोशित लोगों ने बिहिया–जगदीशपुर स्टेट हाईवे-102 को जाम कर दिया और प्रशासन व मकान मालिक के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर जाम समाप्त कराया और मामले की जांच शुरू की। प्रशासन ने पीड़ित परिवारों को तत्काल सहायता राशि देने की घोषणा की है और जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई करने की बात कही है। यह घटना प्रशासन की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े करती है कि यदि समय रहते जर्जर दीवारों और भवनों को लेकर शिकायतों पर कार्रवाई होती, तो शायद इन दो मासूमों की जान बच सकती थी।1