बिना अनुमति पेड़ कटवाकर पोल लगाने में जुटा था संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र प्रबंधन, वन विभाग ने मौके पर रुकवाया काम बिना अनुमति पेड़ कटवाकर पोल लगाने में जुटा था संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र प्रबंधन, वन विभाग ने मौके पर रुकवाया काम उमरिया तपस गुप्ता जिले के बिरसिंहपुर पाली स्थित संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र का प्रबंधन एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला बिना वैधानिक अनुमति के पेड़ कटवाकर विद्युत पोल लगाने का सामने आया है। मामला आरएस 563 रखड़ा डेम के पास का बताया जा रहा है, जहां प्लांट प्रबंधन द्वारा कथित तौर पर वन विभाग की स्वीकृति के बिना कार्य कराया जा रहा था। जानकारी के अनुसार, संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र प्रबंधन द्वारा संबंधित क्षेत्र में लाइट (पोल) लगाने का कार्य शुरू कराया गया था। आरोप है कि इस कार्य के लिए पहले पेड़ों की कटाई कराई गई, जबकि इसके लिए आवश्यक वन अनुमति और दस्तावेज पूरे नहीं किए गए थे। जैसे ही इस बात की सूचना वन विभाग को मिली, विभाग हरकत में आया और मौके पर पहुंचकर काम तत्काल प्रभाव से रुकवा दिया। बताया जा रहा है कि क्षेत्र के बीट गार्ड माखनलाल द्विवेदी को सूचना मिली थी कि प्लांट प्रबंधन की ओर से बिना अनुमति पेड़ कटवाने और पोल लगाने का काम किया जा रहा है। सूचना मिलते ही उन्होंने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और संबंधित कर्मचारियों को काम बंद करने के निर्देश दिए। वन विभाग की इस त्वरित कार्रवाई से मौके पर हड़कंप की स्थिति बन गई। मामले को लेकर जब पाली रेंजर सचिन कांत से चर्चा की गई तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि संबंधित भूमि के लिए एफसीए (Forest Conservation Act) के तहत संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र को लैंड डायवर्जन की प्रक्रिया पूरी करनी है। लेकिन अभी तक विभाग को अंतिम दस्तावेज प्राप्त नहीं हुए हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य या पेड़ों की कटाई नियमों के विरुद्ध है। रेंजर ने कहा कि जब तक सभी दस्तावेज और वैधानिक स्वीकृतियां विभाग को नहीं मिल जातीं, तब तक संबंधित क्षेत्र में कोई भी कार्य करना उचित नहीं माना जाएगा। बावजूद इसके, प्लांट प्रबंधन द्वारा काम शुरू कराना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या अधिकारियों ने नियमों को दरकिनार कर जानबूझकर काम शुरू कराया, या फिर उन्हें कानून की अनदेखी करने की खुली छूट मिली हुई है? स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब बड़े संस्थानों द्वारा नियमों को नजरअंदाज करने की कोशिश की गई हो। अक्सर देखा जाता है कि प्रभावशाली विभाग और संस्थान पहले काम शुरू कर देते हैं और बाद में अनुमति लेने की प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश करते हैं। यदि समय रहते वन विभाग कार्रवाई नहीं करता, तो कई पेड़ कट चुके होते और सरकारी नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ जातीं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस मामले में केवल काम रुकवाकर कार्रवाई पूरी मान ली जाएगी, या फिर बिना अनुमति कार्य शुरू कराने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर भी जवाबदेही तय होगी। पर्यावरण और वन संरक्षण के नियम सभी के लिए समान हैं, ऐसे में बड़े संस्थानों को विशेष छूट देना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। फिलहाल वन विभाग की कार्रवाई के बाद काम बंद करा दिया गया है, लेकिन पूरे मामले ने संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। अब देखना होगा कि विभाग आगे क्या कठोर कदम उठाता है।
बिना अनुमति पेड़ कटवाकर पोल लगाने में जुटा था संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र प्रबंधन, वन विभाग ने मौके पर रुकवाया काम बिना अनुमति पेड़ कटवाकर पोल लगाने में जुटा था संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र प्रबंधन, वन विभाग ने मौके पर रुकवाया काम उमरिया तपस गुप्ता जिले के बिरसिंहपुर पाली स्थित संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र का प्रबंधन एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला बिना वैधानिक अनुमति के पेड़ कटवाकर विद्युत पोल लगाने का सामने आया है। मामला आरएस 563 रखड़ा डेम के पास का बताया जा रहा है, जहां प्लांट प्रबंधन द्वारा कथित तौर पर वन विभाग की स्वीकृति के बिना कार्य कराया जा रहा था। जानकारी के अनुसार, संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र प्रबंधन द्वारा संबंधित क्षेत्र में लाइट (पोल) लगाने का कार्य शुरू कराया गया था। आरोप है कि इस कार्य के लिए पहले पेड़ों की कटाई कराई गई, जबकि इसके लिए आवश्यक वन अनुमति और दस्तावेज पूरे नहीं किए गए थे। जैसे ही इस बात की सूचना वन विभाग को मिली, विभाग हरकत में आया और मौके पर पहुंचकर काम तत्काल प्रभाव से रुकवा दिया। बताया जा रहा है
कि क्षेत्र के बीट गार्ड माखनलाल द्विवेदी को सूचना मिली थी कि प्लांट प्रबंधन की ओर से बिना अनुमति पेड़ कटवाने और पोल लगाने का काम किया जा रहा है। सूचना मिलते ही उन्होंने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और संबंधित कर्मचारियों को काम बंद करने के निर्देश दिए। वन विभाग की इस त्वरित कार्रवाई से मौके पर हड़कंप की स्थिति बन गई। मामले को लेकर जब पाली रेंजर सचिन कांत से चर्चा की गई तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि संबंधित भूमि के लिए एफसीए (Forest Conservation Act) के तहत संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र को लैंड डायवर्जन की प्रक्रिया पूरी करनी है। लेकिन अभी तक विभाग को अंतिम दस्तावेज प्राप्त नहीं हुए हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य या पेड़ों की कटाई नियमों के विरुद्ध है। रेंजर ने कहा कि जब तक सभी दस्तावेज और वैधानिक स्वीकृतियां विभाग को नहीं मिल जातीं, तब तक संबंधित क्षेत्र में कोई भी कार्य करना उचित नहीं माना जाएगा। बावजूद इसके, प्लांट प्रबंधन द्वारा काम शुरू कराना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या अधिकारियों ने नियमों को दरकिनार कर जानबूझकर काम शुरू कराया, या
फिर उन्हें कानून की अनदेखी करने की खुली छूट मिली हुई है? स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब बड़े संस्थानों द्वारा नियमों को नजरअंदाज करने की कोशिश की गई हो। अक्सर देखा जाता है कि प्रभावशाली विभाग और संस्थान पहले काम शुरू कर देते हैं और बाद में अनुमति लेने की प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश करते हैं। यदि समय रहते वन विभाग कार्रवाई नहीं करता, तो कई पेड़ कट चुके होते और सरकारी नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ जातीं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस मामले में केवल काम रुकवाकर कार्रवाई पूरी मान ली जाएगी, या फिर बिना अनुमति कार्य शुरू कराने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर भी जवाबदेही तय होगी। पर्यावरण और वन संरक्षण के नियम सभी के लिए समान हैं, ऐसे में बड़े संस्थानों को विशेष छूट देना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। फिलहाल वन विभाग की कार्रवाई के बाद काम बंद करा दिया गया है, लेकिन पूरे मामले ने संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। अब देखना होगा कि विभाग आगे क्या कठोर कदम उठाता है।
- ग्रामीणों के साहस से बड़ा हादसा टला,भालू के हमले में महिला घायल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के धमोखर बफर क्षेत्र में रविवार सुबह ग्रामीणों की बहादुरी और सूझबूझ से एक बड़ा हादसा टल गया।तेंदूपत्ता संग्रहण के दौरान भालू के अचानक हमले का शिकार हुई महिला की जान आसपास मौजूद ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाकर बचा ली।जानकारी के अनुसार ग्राम गौरैया निवासी मीरा सिंह पिता गजराज सिंह अपने परिवार एवं अन्य ग्रामीणों के साथ सुबह करीब 8 बजे तेंदूपत्ता तोड़ने जंगल गई थीं।यह घटना गौरैया बीट के कक्ष क्रमांक पीएफ-160 की बताई जा रही है।इसी दौरान जंगल में विचरण कर रहे भालू ने अचानक मीरा सिंह पर हमला कर दिया और उनके दाहिने पैर में दांत गड़ा दिए।हमले के बाद मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने घबराने के बजाय साहस का परिचय दिया।ग्रामीणों ने तेज आवाज और शोर मचाकर भालू को वहां से खदेड़ दिया,जिससे महिला की जान बच सकी।घटना के बाद जानकारी उपरांत वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी मौके पर पहुंचे और घायल महिला को तत्काल जिला चिकित्सालय पहुंचाया गया, जहां महिला उपचारार्थ है।फिलहाल महिला की हालत सामान्य बताई जा रही है।घटना को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग ने क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी है।विभाग ने अपील की है कि तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए लोग समूह में ही जंगल जाएं तथा सुबह 8 बजे के बाद ही जंगल में प्रवेश करें।बीटीआर क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने घटना को दुखद बताया,और कहा कि क्षेत्र में मानव-वन्यप्राणी संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए निगरानीबढ़ा दी गई है और ग्रामीणों को आवश्यक सावधानियां बरतने के लिए जागरूक किया जा रहा है।1
- नल-जल योजना बनी भ्रष्टाचार का कुआं करोड़ों डकार गए अफसर-ठेकेदार पीने के पानी को मोहताज ग्रामीण उमरिया// केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी हर घर नल से जल योजना उमरिया जिले में भ्रष्टाचार कमीशनखोरी और लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। पाली एवं करकेली विकासखंड के दर्जनों गांवों में करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद ग्रामीण आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए भटक रहे हैं। हालात इतने बदतर हैं कि गांवों में खड़ी विशाल पानी टंकियां अब विकास नहीं बल्कि सरकारी भ्रष्टाचार की मूक गवाही बन चुकी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पीएचई विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की सांठगांठ ने पूरी योजना को खोखला कर दिया। कहीं घटिया पाइपलाइन डालकर सरकारी धन का बंदरबांट किया गया तो कहीं बोरवेल खुदाई में ऐसा खेल खेला गया कि कुछ ही महीनों में बोर जवाब दे गए। कई गांवों में पर्याप्त पानी तक नहीं निकला लेकिन कागजों में योजनाएं पूर्ण दिखाकर करोड़ों का भुगतान निकाल लिया गया। पाली विकासखंड के बेली मलियागुड़ा कुरकुचा ममान मलहदू सास चिनकी गढ़रोला सहित कई गांवों और करकेली विकासखंड के पोड़ी कल्दा मछेहा टकटई जैसे गांवों में नल-जल योजना पूरी तरह दम तोड़ चुकी है। कहीं पाइपलाइन फूट रही है कहीं मोटर बंद पड़ी है तो कहीं महीनों से एक बूंद पानी नहीं पहुंचा। ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदारों ने महज कुछ दिन पानी सप्लाई चालू रखकर योजनाओं को पंचायतों के गले मढ़ दिया और बाद में नौ-दो ग्यारह हो गए। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शासन ने गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की स्पष्ट गाइडलाइन तय कर रखी थी तो आखिर घटिया पाइप और निम्नस्तरीय निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किसके संरक्षण में हुआ? क्या बिना विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के करोड़ों रुपये की यह बंदरबांट संभव थी? गांवों में आज भी महिलाएं और बच्चे हैंडपंपों एवं कुओं के सहारे जीवन गुजारने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी में जलसंकट विकराल रूप ले चुका है लेकिन जिम्मेदार अफसरों के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही। जनता का आरोप है कि फाइलों में हर घर जल पहुंच चुका है जबकि धरातल पर हर घर संकट की तस्वीर दिखाई दे रही है। मीडिया द्वारा मामले को लेकर जिले के पालक मंत्री से सवाल पूछे गए तो उन्होंने जांच का रटा-रटाया आश्वासन देकर पल्ला झाड़ लिया। इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हो जाए तो करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा होना तय है। अब निगाहें जिले की संवेदनशील कलेक्टर पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या जनता की प्यास पर राजनीति और भ्रष्टाचार भारी पड़ेगा या फिर लापरवाह अधिकारियों एवं ठेकेदारों पर ऐसा हंटर चलेगा कि भविष्य में सरकारी योजनाओं को लूट का जरिया बनाने वालों की नींद उड़ जाए।1
- एक सोशल मीडिया पोस्ट में मध्य प्रदेश में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री 'थलापति' जैसा नेतृत्व होने की इच्छा व्यक्त की गई है। यूज़र ने पूछा कि कितने लोग इस विचार से सहमत हैं।1
- मलमाथर गांव में बिजली विभाग की टीम पर हमला, बकाया वसूली के दौरान हंगामा का वीडियो वायरल... गोहपारू क्षेत्र के मलमाथर गांव में बकाया बिजली बिल की वसूली करने पहुंची बिजली विभाग की टीम के साथ अभद्रता और मारपीट का मामला सामने आया है। घटना के दौरान गोहपारू जेई भी मौके पर मौजूद थे। विभागीय कर्मचारियों ने बताया कि संबंधित उपभोक्ताओं पर कई वर्षों से बिजली बिल बकाया था। विभाग द्वारा कई बार नोटिस दिए जाने के बावजूद जब बिल जमा नहीं किया गया, तब अधिकारियों के निर्देश पर बिजली कनेक्शन काटने की कार्रवाई करने टीम गांव पहुंची थी। आरोप है कि इसी दौरान उपभोक्ताओं ने, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, विभागीय कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी और विवाद बढ़ते-बढ़ते कथित तौर पर हमला कर दिया। घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मामले के बाद विभागीय कर्मचारियों में आक्रोश है और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की जा रही है।2
- Post by पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार1
- शहडोल-बुढार मार्ग पर हुए भीषण सड़क हादसे में एक व्यक्ति की जान चली गई। इस घटना ने एक बार फिर इलाके में सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।1
- शहडोल में ओवरलोड रेत वाहनों से प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की सड़कें जर्जर हो गई हैं। ग्रामीणों ने अवैध रेत परिवहन पर रोक और सड़कों की मरम्मत की मांग करते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।1
- मानपुर (उमरिया) के वार्ड-6 में पिछले 15 दिनों से कीड़ेयुक्त और मटमैले पानी की सप्लाई हो रही है, जिससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। शिकायतों और निरीक्षण के बावजूद प्रशासन ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है, जिससे जलजनित बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। नगरवासियों ने जल्द समाधान न होने पर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है।1