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पलवल के गांव घोड़ी में धानुका एग्रीटेक लिमिटेड द्वारा गेहूं फसल कटाई दिवस मनाया। जिसमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के सहायक महानिदेशक (तिलहन एवं दलहन) डॉ.संजीव गुप्ता ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। इस अवसर पर आईसीएआर एवं भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान लुधियाना के पूर्व निदेशक व हाइब्रिड फसलों के सलाहकार डॉ.साई दास,धानुका एग्रीटेक कंपनी के चेयरमैन रामगोपाल अग्रवाल,बागवानी विभाग हरियाणा के पूर्व निदेशक एवं धानुका एग्रीटेक अनुसंधान केंद्र सिहोल के सलाहकार डॉ.बी.एस.सहरावत, धानुका एग्रीटेक अनुसंधान केंद्र सिहोल के जीएम सुधीर,प्रगतिशील किसान क्लब के अध्यक्ष बिजेंद्र दलाल सहित सैकड़ों की संख्या में किसान मौजूद थे। पलवल भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के सहायक महानिदेशक (तिलहन एवं दलहन) डॉ.संजीव गुप्ता ने कहा कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है। भारत दुनिया के तमाम देशों को गेहूं का निर्यात भी करता है उसके बावजूद भी देश के भंडार गेहूं से भरे हुए है। उन्होंने कहा कि गेहूं की फसल का अधिक उत्पादन लेने के लिए किसानों को आधुनिक तरीके एवं वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार खेती करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि फसल उत्पादन के दौरान अंधाधुंध रासायनिक खादों के प्रयोग से मृदा का स्वास्थ्य खराब हो रहा है। उन्होंने कहा कि मिट्टी में कार्बनिक कार्बन पौधों के अवशेषों, सूक्ष्मजीवों और सड़ी-गली कार्बनिक पदार्थों से बनता है, जो मिट्टी की उर्वरता, संरचना और नमी धारण क्षमता का मुख्य सूचक है। अच्छी उपजाऊ मिट्टी में 0.75 प्रतिशत से अधिक कार्बनिक कार्बन होना चाहिए, जबकि 0.5 प्रतिशत से कम होने पर यह मिट्टी की खराब गुणवत्ता और कम उर्वरता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि धानुका एग्रीटेक अनुसंधान केंद्र में सॉयल टेस्ट प्रयोगशाला बनाई गई है, किसानों को फसल की बिजाई से पहले मिट्टी की जांच अवश्य करवानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मृदा के स्वास्थ्य को सुधारने के लिए किसानों को तिलहन एवं दलहन की फसलों की बिजाई करनी चाहिए। देश में तिलहन एवं दलहन का आयात करना पड़ रहा है। फसल चक्र में तिलहन एवं दलहन की फसलों को लाना जरूरी है। गेहूं की कटाई के उपरांत मूंग की फसल की बिजाई करें। मूंग की खेती 15 मार्च से 15 अप्रैल के बीच करने से पैदावार में बढ़ोतरी होती है। बाजार में हाइब्रिड के बीज उपलब्ध है। किसान मूंग की खेती कर 60 दिनों में दोगुना लाभ अर्जित कर सकते है आईसीएआर एवं भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान लुधियाना के पूर्व निदेशक व हाइब्रिड फसलों के सलाहकार डॉ.साई दास ने कहा कि किसान अप्रैल महीने में मक्का की खेती करें। मक्का की फसल को चारे के तौर पर प्रयोग करें। मक्का की फसल की लिए तापमान अनुकूल है। जिससे मक्का की बढ़वार अधिक होती है। मिट्टी को भुरभुरी बनाने के लिए 3-4 बार हैरो या कल्टीवेटर से जुताई करें। अंतिम जुताई से पहले गोबर की खाद मिलाएं। उन्होंने कहा कि बाजार में मक्का की हाइब्रिड किस्में जिनमें डेकाल्व की 90-81 और 928, पायोनियर की पी 396 और 3567, और एडवांटा पीएसी 751 उच्च पैदावार देने वाली प्रमुख हाइब्रिड किस्में हैं बागवानी विभाग हरियाणा के पूर्व निदेशक एवं धानुका एग्रीटेक अनुसंधान केंद्र सिहोल के सलाहकार डॉ.बी.एस.सहरावत ने बताया कि धानुका एग्रीटेक लिमिटेड द्वारा गेहूं फसल कटाई दिवस मनाया गया है। जिसमें खेत में उन्नत तकनीकों के परिणामों के बारे में कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के साथ संवाद किया गया है। फील्ड डेमोंस्ट्रेशन किया गया है। उन्होंने बताया कि जिन किसानों ने गेहूं की फसल के दौरान धानुका एग्रीटेक कंपनी के प्रोडक्ट प्रयोग किए है ऐसे किसानों के उत्पादन में बढोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि किसान अच्छी गुणवत्ता वाले इनपुट का प्रयोग करें और अपनी पैदावार को बढाऐं। प्रगतिशील किसान बिजेंद्र दलाल ने कहा कि उन्होंने गेहूं की फसल के दौरान धानुका द्वारा बनाई गई दवाइयों का प्रयोग किया जिसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले। उन्होंने कहा कि फसलों में होने वाली बीमारियों की रोकथाम एवं फसलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए धानुका द्वारा बनाए गए प्रोडक्ट का प्रयोग करें।

6 hrs ago
user_Mahipal
Mahipal
Journalist पलवल, पलवल, हरियाणा•
6 hrs ago

पलवल के गांव घोड़ी में धानुका एग्रीटेक लिमिटेड द्वारा गेहूं फसल कटाई दिवस मनाया। जिसमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के सहायक महानिदेशक (तिलहन एवं दलहन) डॉ.संजीव गुप्ता ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। इस अवसर पर आईसीएआर एवं भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान लुधियाना के पूर्व निदेशक व हाइब्रिड फसलों के सलाहकार डॉ.साई दास,धानुका एग्रीटेक कंपनी के चेयरमैन रामगोपाल अग्रवाल,बागवानी विभाग हरियाणा के पूर्व निदेशक एवं धानुका एग्रीटेक अनुसंधान केंद्र सिहोल के सलाहकार डॉ.बी.एस.सहरावत, धानुका एग्रीटेक अनुसंधान केंद्र सिहोल के जीएम सुधीर,प्रगतिशील किसान क्लब के अध्यक्ष बिजेंद्र दलाल सहित सैकड़ों की संख्या में किसान मौजूद थे। पलवल भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के सहायक महानिदेशक (तिलहन एवं दलहन) डॉ.संजीव गुप्ता ने कहा कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है। भारत दुनिया के तमाम देशों को गेहूं का निर्यात भी करता है उसके बावजूद भी देश के भंडार गेहूं से भरे हुए है। उन्होंने कहा कि गेहूं की फसल का अधिक उत्पादन लेने के लिए किसानों को आधुनिक तरीके एवं वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार खेती करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि फसल उत्पादन के दौरान अंधाधुंध रासायनिक खादों के प्रयोग से मृदा का स्वास्थ्य खराब हो रहा है। उन्होंने कहा कि मिट्टी में कार्बनिक कार्बन पौधों के अवशेषों, सूक्ष्मजीवों और सड़ी-गली कार्बनिक पदार्थों से बनता है, जो मिट्टी की उर्वरता, संरचना और नमी धारण क्षमता का मुख्य सूचक है। अच्छी उपजाऊ मिट्टी में 0.75 प्रतिशत से अधिक कार्बनिक कार्बन होना चाहिए, जबकि 0.5 प्रतिशत से कम होने पर यह मिट्टी की खराब गुणवत्ता और कम उर्वरता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि धानुका एग्रीटेक अनुसंधान केंद्र में सॉयल टेस्ट प्रयोगशाला बनाई गई है, किसानों को फसल की बिजाई से पहले मिट्टी की जांच अवश्य करवानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मृदा के स्वास्थ्य को सुधारने के लिए किसानों को तिलहन एवं दलहन की फसलों की बिजाई करनी चाहिए। देश में तिलहन एवं दलहन का आयात करना पड़ रहा है। फसल चक्र में तिलहन एवं दलहन की फसलों को लाना जरूरी है। गेहूं की कटाई के उपरांत मूंग की फसल की बिजाई करें। मूंग की खेती 15 मार्च से 15 अप्रैल के बीच करने से पैदावार में बढ़ोतरी होती है। बाजार में हाइब्रिड के बीज उपलब्ध है। किसान मूंग की खेती कर 60 दिनों में दोगुना लाभ अर्जित कर सकते है आईसीएआर एवं भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान लुधियाना के पूर्व निदेशक व हाइब्रिड फसलों के सलाहकार डॉ.साई दास ने कहा कि किसान अप्रैल महीने में मक्का की खेती करें। मक्का की फसल को चारे के तौर पर प्रयोग करें। मक्का की फसल की लिए तापमान अनुकूल है। जिससे मक्का की बढ़वार अधिक होती है। मिट्टी को भुरभुरी बनाने के लिए 3-4 बार हैरो या कल्टीवेटर से जुताई करें। अंतिम जुताई से पहले गोबर की खाद मिलाएं। उन्होंने कहा कि बाजार में मक्का की हाइब्रिड किस्में जिनमें डेकाल्व की 90-81 और 928, पायोनियर की पी 396 और 3567, और एडवांटा पीएसी 751 उच्च पैदावार देने वाली प्रमुख हाइब्रिड किस्में हैं बागवानी विभाग हरियाणा के पूर्व निदेशक एवं धानुका एग्रीटेक अनुसंधान केंद्र सिहोल के सलाहकार डॉ.बी.एस.सहरावत ने बताया कि धानुका एग्रीटेक लिमिटेड द्वारा गेहूं फसल कटाई दिवस मनाया गया है। जिसमें खेत में उन्नत तकनीकों के परिणामों के बारे में कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के साथ संवाद किया गया है। फील्ड डेमोंस्ट्रेशन किया गया है। उन्होंने बताया कि जिन किसानों ने गेहूं की फसल के दौरान धानुका एग्रीटेक कंपनी के प्रोडक्ट प्रयोग किए है ऐसे किसानों के उत्पादन में बढोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि किसान अच्छी गुणवत्ता वाले इनपुट का प्रयोग करें और अपनी पैदावार को बढाऐं। प्रगतिशील किसान बिजेंद्र दलाल ने कहा कि उन्होंने गेहूं की फसल के दौरान धानुका द्वारा बनाई गई दवाइयों का प्रयोग किया जिसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले। उन्होंने कहा कि फसलों में होने वाली बीमारियों की रोकथाम एवं फसलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए धानुका द्वारा बनाए गए प्रोडक्ट का प्रयोग करें।

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    पलवल भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के सहायक महानिदेशक (तिलहन एवं दलहन) डॉ.संजीव गुप्ता ने कहा कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है। भारत दुनिया के तमाम देशों को गेहूं का निर्यात भी करता है उसके बावजूद भी देश के भंडार गेहूं से भरे हुए है। उन्होंने कहा कि गेहूं की फसल का अधिक उत्पादन लेने के लिए किसानों को आधुनिक तरीके एवं वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार खेती करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि फसल उत्पादन के दौरान अंधाधुंध रासायनिक खादों के प्रयोग से मृदा का स्वास्थ्य खराब हो रहा है। उन्होंने कहा कि मिट्टी में कार्बनिक कार्बन पौधों के अवशेषों, सूक्ष्मजीवों और सड़ी-गली कार्बनिक पदार्थों से बनता है, जो मिट्टी की उर्वरता, संरचना और नमी धारण क्षमता का मुख्य सूचक है। अच्छी उपजाऊ मिट्टी में 0.75 प्रतिशत से अधिक कार्बनिक कार्बन होना चाहिए, जबकि 0.5 प्रतिशत से कम होने पर यह मिट्टी की खराब गुणवत्ता और कम उर्वरता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि धानुका एग्रीटेक अनुसंधान केंद्र में सॉयल टेस्ट प्रयोगशाला बनाई गई है, किसानों को फसल की बिजाई से पहले मिट्टी की जांच अवश्य करवानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मृदा के स्वास्थ्य को सुधारने के लिए किसानों को तिलहन एवं दलहन की फसलों की बिजाई करनी चाहिए। देश में तिलहन एवं दलहन का आयात करना पड़ रहा है। फसल चक्र में तिलहन एवं दलहन की फसलों को लाना जरूरी है। गेहूं की कटाई के उपरांत मूंग की फसल की बिजाई करें। मूंग की खेती 15 मार्च से 15 अप्रैल के बीच करने से पैदावार में बढ़ोतरी होती है। बाजार में हाइब्रिड के बीज उपलब्ध है। किसान मूंग की खेती कर 60 दिनों में दोगुना लाभ अर्जित कर सकते है आईसीएआर एवं भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान लुधियाना के पूर्व निदेशक व  हाइब्रिड फसलों के सलाहकार डॉ.साई दास ने कहा कि किसान अप्रैल महीने में मक्का की खेती करें। मक्का की फसल को चारे के तौर पर प्रयोग करें। मक्का की फसल की लिए तापमान अनुकूल है। जिससे मक्का की बढ़वार अधिक होती है। मिट्टी को भुरभुरी बनाने के लिए 3-4 बार हैरो या कल्टीवेटर से जुताई करें। अंतिम जुताई से पहले गोबर की खाद मिलाएं। उन्होंने कहा कि बाजार में मक्का की हाइब्रिड किस्में जिनमें डेकाल्व की 90-81 और 928, पायोनियर की पी 396 और 3567, और एडवांटा पीएसी 751 उच्च पैदावार देने वाली प्रमुख हाइब्रिड किस्में हैं बागवानी विभाग हरियाणा के पूर्व निदेशक एवं धानुका एग्रीटेक अनुसंधान केंद्र सिहोल के सलाहकार डॉ.बी.एस.सहरावत ने बताया कि धानुका एग्रीटेक लिमिटेड द्वारा गेहूं फसल कटाई दिवस मनाया गया है। जिसमें खेत में उन्नत तकनीकों के परिणामों के बारे में कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के साथ संवाद किया गया है। फील्ड डेमोंस्ट्रेशन किया गया है। उन्होंने बताया कि जिन किसानों ने गेहूं की फसल के दौरान धानुका एग्रीटेक कंपनी के प्रोडक्ट प्रयोग किए है ऐसे किसानों के उत्पादन में बढोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि किसान अच्छी गुणवत्ता वाले इनपुट का प्रयोग करें और अपनी पैदावार को बढाऐं। प्रगतिशील किसान बिजेंद्र दलाल ने कहा कि उन्होंने गेहूं की फसल के दौरान धानुका द्वारा बनाई गई दवाइयों का प्रयोग किया जिसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले। उन्होंने कहा कि फसलों में होने वाली बीमारियों की रोकथाम एवं फसलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए धानुका द्वारा बनाए गए प्रोडक्ट का प्रयोग करें।
    user_Mahipal
    Mahipal
    Journalist पलवल, पलवल, हरियाणा•
    6 hrs ago
  • पलवल बस स्टैंड पर एक तिरुपति डायग्नोस्टिक सेंटर है, जिसमें एक फर्जी रिपोर्ट का बयान किया गया है इस तरीके के आरोप इस सेंटर पर लगे हैं,सच तो जांच के बाद ही पता चलेगा लेकिन आरोप तो लग रहे हैं। वहां पर एक मरीज ने सी टी कराई तो रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर ने मरीज की टी बी की मेडिसिन शुरू की तो मरीज के हालत खराब होती चली गई।
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    पलवल बस स्टैंड पर एक तिरुपति डायग्नोस्टिक सेंटर है, जिसमें एक फर्जी रिपोर्ट का बयान किया गया है इस तरीके के आरोप इस सेंटर पर लगे हैं,सच तो जांच के बाद ही पता चलेगा लेकिन आरोप तो लग रहे हैं। वहां पर एक मरीज  ने सी टी कराई तो रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर ने मरीज की टी बी की मेडिसिन शुरू की तो मरीज के हालत खराब होती चली गई।
    user_AMAR NAUHWAR
    AMAR NAUHWAR
    Local News Reporter पलवल, पलवल, हरियाणा•
    1 day ago
  • Post by माथुर पत्रकार
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    Post by माथुर पत्रकार
    user_माथुर पत्रकार
    माथुर पत्रकार
    Voice of people हथीन, पलवल, हरियाणा•
    3 hrs ago
  • Shri Hari mandir ashram Patodi distt Gurugram me gufa ka Darshan/ Swadesh mandawari, Faridabad
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    Shri Hari mandir ashram Patodi distt Gurugram me gufa ka Darshan/ Swadesh mandawari, Faridabad
    user_SWADESH MANDAWARI 8929878271
    SWADESH MANDAWARI 8929878271
    फरीदाबाद, फरीदाबाद, हरियाणा•
    7 hrs ago
  • फर्जी आई-कार्ड के सहारे टोल चोरी का खेल, 2 साल में 3000 कार्ड जब्त
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    फर्जी आई-कार्ड के सहारे टोल चोरी का खेल, 2 साल में 3000 कार्ड जब्त
    user_Vikrambhardwaj Faridabad
    Vikrambhardwaj Faridabad
    गौंची मार्ग, फरीदाबाद, हरियाणा•
    11 hrs ago
  • गुरुग्रम निवासी सुप्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पुष्पलता जी ने कहा फर्जी ज्योतिषियों से संभल कर रहे महिलाएं। अशोक खरात की कहां कितनी प्रॉपर्टी ? क्या ज्योतिषी बदनाम हुई? जानिए राजपथ न्यूज़ पर
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    user_Rajpath News
    Rajpath News
    Sohna, Gurugram•
    18 hrs ago
  • Post by तेज़24न्यूज
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    Post by तेज़24न्यूज
    user_तेज़24न्यूज
    तेज़24न्यूज
    बड़खल, फरीदाबाद, हरियाणा•
    22 hrs ago
  • Post by माथुर पत्रकार
    1
    Post by माथुर पत्रकार
    user_माथुर पत्रकार
    माथुर पत्रकार
    Voice of people हथीन, पलवल, हरियाणा•
    5 hrs ago
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