झारखंड के सुप्रसिद्ध तीर्थ स्थान बासुकीनाथ धाम को फौजदारी दरबार के नाम से भी जाना जाता है, जहाँ कामना ज्योतिर्लिंग नागेश के रूप में भगवान शिव माता पार्वती के साथ विराजमान हैं। भक्तों को स्वप्न में दर्शन देने और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिए प्रसिद्ध इस धाम में भगवान शिव का गोवंश से आत्मिक संबंध है, जिसकी पुष्टि उनके वाहन नंदी की पत्थर की मूर्ति की पूजा से होती है। हालांकि, इससे भी बड़ा सत्य यह है कि मंदिर में विराजमान जीवित गोवंश की पीड़ा को समझना तो दूर, इसके बारे में कोई सोचता भी नहीं है। सभी मौसमों में खुले आसमान के नीचे रहने वाले इन बेजुबान गोवंशजों की दयनीय स्थिति पर न ही मंदिर प्रशासन, न ही यहाँ का पंडा समाज और न ही गाय के नाम पर राजनीति करने वाले धर्म के ठेकेदार ध्यान दे रहे हैं। ऐसे में ये बेजुबान आखिर कहाँ जाएँ, यह एक बहुत बड़ा सवाल है। इस समस्या के समाधान हेतु गौशाला बनाने के लिए सरकारी जमीन चिन्हित की गई है और कई निजी संस्थाएं भी इसके निर्माण को तैयार हैं। लेकिन मंदिर न्यास समिति के अध्यक्ष और जिला के जिलाधिकारी, जिन्हें कलेक्टर साहब कहा जाता है, ने आज तक गौशाला बनाने की अनुमति नहीं दी है, जिसके चलते इसका निर्माण नहीं हो सका। अनुमति के अभाव में गौशाला का निर्माण रुकने के कारण ये गोवंश बेमौत मरने को मजबूर हैं। इस परिस्थिति में यह सवाल उठता है कि इन बेजुबानों की पीड़ा को कौन समझेगा – मंदिर प्रशासन या वे लोग जो गाय के नाम पर डंडा में झंडा लगाकर राजनीति करते हैं।
झारखंड के सुप्रसिद्ध तीर्थ स्थान बासुकीनाथ धाम को फौजदारी दरबार के नाम से भी जाना जाता है, जहाँ कामना ज्योतिर्लिंग नागेश के रूप में भगवान शिव माता पार्वती के साथ विराजमान हैं। भक्तों को स्वप्न में दर्शन देने और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिए प्रसिद्ध इस धाम में भगवान शिव का गोवंश से आत्मिक संबंध है, जिसकी पुष्टि उनके वाहन नंदी की पत्थर की मूर्ति की पूजा से होती है। हालांकि, इससे भी बड़ा सत्य यह है कि मंदिर में विराजमान जीवित गोवंश की पीड़ा को समझना तो दूर, इसके बारे में कोई सोचता भी नहीं है। सभी मौसमों में खुले आसमान के नीचे रहने वाले इन बेजुबान गोवंशजों की दयनीय स्थिति पर न ही मंदिर प्रशासन, न ही यहाँ का पंडा समाज और न ही गाय के नाम पर राजनीति करने वाले धर्म के ठेकेदार ध्यान दे रहे हैं। ऐसे में ये बेजुबान आखिर कहाँ जाएँ, यह एक बहुत बड़ा सवाल है। इस समस्या के समाधान हेतु गौशाला बनाने के लिए सरकारी जमीन चिन्हित की गई है और कई निजी संस्थाएं भी इसके निर्माण को तैयार हैं। लेकिन मंदिर न्यास समिति के अध्यक्ष और जिला के जिलाधिकारी, जिन्हें कलेक्टर साहब कहा जाता है, ने आज तक गौशाला बनाने की अनुमति नहीं दी है, जिसके चलते इसका निर्माण नहीं हो सका। अनुमति के अभाव में गौशाला का निर्माण रुकने के कारण ये गोवंश बेमौत मरने को मजबूर हैं। इस परिस्थिति में यह सवाल उठता है कि इन बेजुबानों की पीड़ा को कौन समझेगा – मंदिर प्रशासन या वे लोग जो गाय के नाम पर डंडा में झंडा लगाकर राजनीति करते हैं।
- झारखंड के सुप्रसिद्ध तीर्थ स्थान बासुकीनाथ धाम को फौजदारी दरबार के नाम से भी जाना जाता है, जहाँ कामना ज्योतिर्लिंग नागेश के रूप में भगवान शिव माता पार्वती के साथ विराजमान हैं। भक्तों को स्वप्न में दर्शन देने और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिए प्रसिद्ध इस धाम में भगवान शिव का गोवंश से आत्मिक संबंध है, जिसकी पुष्टि उनके वाहन नंदी की पत्थर की मूर्ति की पूजा से होती है। हालांकि, इससे भी बड़ा सत्य यह है कि मंदिर में विराजमान जीवित गोवंश की पीड़ा को समझना तो दूर, इसके बारे में कोई सोचता भी नहीं है। सभी मौसमों में खुले आसमान के नीचे रहने वाले इन बेजुबान गोवंशजों की दयनीय स्थिति पर न ही मंदिर प्रशासन, न ही यहाँ का पंडा समाज और न ही गाय के नाम पर राजनीति करने वाले धर्म के ठेकेदार ध्यान दे रहे हैं। ऐसे में ये बेजुबान आखिर कहाँ जाएँ, यह एक बहुत बड़ा सवाल है। इस समस्या के समाधान हेतु गौशाला बनाने के लिए सरकारी जमीन चिन्हित की गई है और कई निजी संस्थाएं भी इसके निर्माण को तैयार हैं। लेकिन मंदिर न्यास समिति के अध्यक्ष और जिला के जिलाधिकारी, जिन्हें कलेक्टर साहब कहा जाता है, ने आज तक गौशाला बनाने की अनुमति नहीं दी है, जिसके चलते इसका निर्माण नहीं हो सका। अनुमति के अभाव में गौशाला का निर्माण रुकने के कारण ये गोवंश बेमौत मरने को मजबूर हैं। इस परिस्थिति में यह सवाल उठता है कि इन बेजुबानों की पीड़ा को कौन समझेगा – मंदिर प्रशासन या वे लोग जो गाय के नाम पर डंडा में झंडा लगाकर राजनीति करते हैं।1
- झारखंड के दुमका जिले के जरमुंडी प्रखंड में केंदुवाटिकर ग्राम/वार्ड के निवासी मंगल कोल ने सार्वजनिक कुएं की मरम्मत हेतु स्थानीय मुखिया और प्रखंड विकास अधिकारी (बीडीओ) को एक आवेदन पत्र सौंपा है। आवेदन में बताया गया है कि मोहल्ले का सार्वजनिक कुआं काफी समय से जर्जर स्थिति में है, जिससे उसकी जगत (दीवार) टूट गई है और कुएं का पानी दूषित हो गया है। इस गंभीर समस्या के कारण स्थानीय निवासियों को स्वच्छ जल की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। प्रार्थी ने जनहित का हवाला देते हुए अनुरोध किया है कि जल्द से जल्द इस कुएं की मरम्मत और साफ-सफाई कराई जाए ताकि जल संकट का समाधान हो सके।4
- एक चलती कार अचानक आग के गोले में तब्दील हो गई। इस घटना में गाड़ी में सवार तीन लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए चलती कार से कूदकर खुद को सुरक्षित कर लिया।1
- एक अनोखी प्रेम कहानी सामने आई है, जिसमें 'यादव जी' और 'साहू जी' के बीच संबंध स्थापित हुआ है। इस कहानी के अनुसार, एक भाभी को अपने देवर से प्रेम हो गया। जब यह प्रेम प्रसंग सामने आया, तो ग्रामीणों ने पहल करते हुए उन दोनों की शादी करवा दी। यह पूरी घटना अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।1
- एक तेज आंधी के कारण एक परिवार का आशियाना पूरी तरह उजाड़ दिया गया है। आंधी इतनी तीव्र थी कि कुछ ही पलों में कड़ी मेहनत से बनाया गया उनका घर बिखर गया। इस मुश्किल घड़ी में, अब इंसानियत के साथ मदद के हाथ बढ़ाने की आवश्यकता है।1
- बिहार के बांका जिले में देर रात एक सुनसान जंगल में जिला पुलिस की गाड़ी का टायर पंचर हो जाने से वह खराब हो गई। ऐसे मुश्किल वक्त में शिवेश मिश्रा ने 'शेर वाले जिगड़े' के साथ आगे बढ़कर पुलिस की मदद की। इस घटना को लेकर DM कलेक्टर कार्यालय बांका और बांका बिहार न्यूज़ में सराहना की गई है।1
- निरसा/रामकनाली में फ्लाईओवर निर्माण कार्य के दौरान जान गंवाने वाले मजदूर अभिजीत मुर्मू के मामले में, जीत एशिया प्रोजेक्ट ऑफिस पर लगभग 9 घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद एक समझौता हो गया है। यह सहमति कंपनी और मृतक के परिजनों के बीच बनी, जिसमें जेएमएम जिला अध्यक्ष लख्खी सोरेन, रामकनाली मुखिया सुक्कलाल मरांडी और स्थानीय ग्रामीण भी मौजूद थे। समझौते के अनुसार, कंपनी ने मृतक के परिजनों को तत्काल सहायता के तौर पर कुल 8 लाख रुपये देने पर सहमति व्यक्त की है। इसमें से 28 मई को दाह-संस्कार और श्राद्ध कार्य के लिए 1 लाख रुपये नकद दिए गए, जबकि शेष 7 लाख रुपये 29 मई 2026 को मृतक के पिता बुधन मुर्मू के खाते में आरटीजीएस के माध्यम से भेजे जाएंगे। इसके अतिरिक्त, कंपनी द्वारा उपलब्ध कराए गए दुर्घटना बीमा प्रावधान के तहत लगभग 16.50 से 17 लाख रुपये की दावा राशि नियमानुसार एक से डेढ़ महीने के भीतर श्रम आयुक्त, धनबाद के सरकारी खाते में जमा की जाएगी। कंपनी ने संबंधित विभाग और श्रम आयुक्त को दुर्घटना की सूचना देने की भी जानकारी दी है। समझौता पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यह निर्णय दोनों पक्षों की आपसी सहमति से और बिना किसी दबाव के लिया गया है, तथा भविष्य में किसी भी विवाद की स्थिति में विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाई जाएगी।3
- झारखंड के दुमका जिले अंतर्गत जरमुंडी प्रखंड की चुरखेड़ा पंचायत के केंदुआतिकर गांव में अत्यंत ही घटिया व्यवस्था होने का आरोप लगाया गया है। स्थानीय लोगों ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सवाल उठाया है कि आखिर इस खराब व्यवस्था का ज़िम्मेदार कौन है। यह प्रश्न किया गया है कि क्या इसके लिए पंचायत अधिकारी जवाबदेह हैं या प्रखंड अधिकारी।1