क्या आपको पटना के इस रहस्यमयी 'बसियौरा मेले' के बारे में पहले से पता था? "क्या आपको पटना के पुनडीह गांव में लगने वाले इस रहस्यमयी 'बसियौरा मेले' की जानकारी पहले से थी? अगर नहीं, तो यह वीडियो अंत तक जरूर देखिएगा क्योंकि यहां की परंपरा जितनी अद्भुत है, उतनी ही हैरान कर देने वाली भी! "दीदारगंज के पुनडीह गांव में हर साल होली के बाद हाथी, घोड़े और बैंड-बाजे के साथ माता सती की एक भव्य सवारी निकाली जाती है। गुरुवार की पूरी रात तांत्रिक विधि-विधान से पूजा हुई और शुक्रवार की सुबह सजी हुई डोली में सती बनी लड़की को पूरे गांव में घुमाया गया। सदियों पहले एक नवविवाहिता के सती होने के बाद गांव में फैली महामारी को शांत करने के लिए यह पूजा शुरू हुई थी। आज भी मान्यता है कि अगर ये पूजा नहीं हुई, तो गांव पर कोई बड़ी आफत आ सकती है।" "गुलमहियाचक और आलमपुर जैसे गांवों के हजारों लोगों की मौजूदगी में सबलपुर घाट पर प्रतिमा का विसर्जन किया गया। क्या आपने कभी इस मेले में शिरकत की है? हमें कमेंट्स में जरूर बताएं और ऐसी ही स्थानीय खबरों के लिए फॉलो करें Explore Fatuha!" गौरव कुमार, पटना
क्या आपको पटना के इस रहस्यमयी 'बसियौरा मेले' के बारे में पहले से पता था? "क्या आपको पटना के पुनडीह गांव में लगने वाले इस रहस्यमयी 'बसियौरा मेले' की जानकारी पहले से थी? अगर नहीं, तो यह वीडियो अंत तक जरूर देखिएगा क्योंकि यहां की परंपरा जितनी अद्भुत है, उतनी ही हैरान कर देने वाली भी! "दीदारगंज के पुनडीह गांव में हर साल होली के बाद हाथी, घोड़े और बैंड-बाजे के साथ माता सती की एक भव्य सवारी निकाली जाती है। गुरुवार की पूरी रात तांत्रिक विधि-विधान से पूजा हुई और शुक्रवार की सुबह सजी हुई डोली में सती बनी लड़की को पूरे गांव में घुमाया गया। सदियों पहले एक नवविवाहिता के सती होने के बाद गांव में फैली महामारी को शांत करने के लिए यह पूजा शुरू हुई थी। आज भी मान्यता है कि अगर ये पूजा नहीं हुई, तो गांव पर कोई बड़ी आफत आ सकती है।" "गुलमहियाचक और आलमपुर जैसे गांवों के हजारों लोगों की मौजूदगी में सबलपुर घाट पर प्रतिमा का विसर्जन किया गया। क्या आपने कभी इस मेले में शिरकत की है? हमें कमेंट्स में जरूर बताएं और ऐसी ही स्थानीय खबरों के लिए फॉलो करें Explore Fatuha!" गौरव कुमार, पटना
- EXPLORE FATUHAFatwah, Patnaक्या आपको पटना के इस रहस्यमयी 'बसियौरा मेले' के बारे में पहले से पता था?21 hrs ago
- पटना सदर प्रखंड के पुनाडीह से "मां सती" की निकली भव्य शोभायात्रा1
- "क्या आपको पटना के पुनडीह गांव में लगने वाले इस रहस्यमयी 'बसियौरा मेले' की जानकारी पहले से थी? अगर नहीं, तो यह वीडियो अंत तक जरूर देखिएगा क्योंकि यहां की परंपरा जितनी अद्भुत है, उतनी ही हैरान कर देने वाली भी! "दीदारगंज के पुनडीह गांव में हर साल होली के बाद हाथी, घोड़े और बैंड-बाजे के साथ माता सती की एक भव्य सवारी निकाली जाती है। गुरुवार की पूरी रात तांत्रिक विधि-विधान से पूजा हुई और शुक्रवार की सुबह सजी हुई डोली में सती बनी लड़की को पूरे गांव में घुमाया गया। सदियों पहले एक नवविवाहिता के सती होने के बाद गांव में फैली महामारी को शांत करने के लिए यह पूजा शुरू हुई थी। आज भी मान्यता है कि अगर ये पूजा नहीं हुई, तो गांव पर कोई बड़ी आफत आ सकती है।" "गुलमहियाचक और आलमपुर जैसे गांवों के हजारों लोगों की मौजूदगी में सबलपुर घाट पर प्रतिमा का विसर्जन किया गया। क्या आपने कभी इस मेले में शिरकत की है? हमें कमेंट्स में जरूर बताएं और ऐसी ही स्थानीय खबरों के लिए फॉलो करें Explore Fatuha!" गौरव कुमार, पटना1
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- बिदुपुर प्रखंड में स्वर्गीय कार्तिक लाल शाह के मरनोंपरांत शोकाकुल परिवार द्वारा साह परिवार जिला भोज का आयोजन 15 मार्च दिन रविवार को किया जाना है। इसको लेकर बैठक का आयोजन किया गया जिसमें वैशाली जिले से गणमान्य लोग उपस्थित होकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए।1
- मुख्यमंत्री नितीश कुमार के आवास के बाहर जेडीयू कार्य करता का जोड़ दार प्रदरसन #ApnaCityTakNews #PatnaBihar #CmNitishKumar #MukhymantriNitishKumar #NitishKumar #JDU #BiharSarkar #VairlNews1
- कौन है पटना का गांव जहां माता सती की पूजा न होने से आ जाता है जलजला/फैलने लगती है बीमारियां। पटना के दीदारगंज थाना क्षेत्र के पुनाडीह गांव में होली के बाद बसियौरा मेले का आयोजन किया जाता है। मेले की शुरुआत गुरुवार की देर रात पारंपरिक गीत-संगीत से होती है ,बही शुक्रवार की सुबह हाथी, घोड़े ,ऊंट और बैंड बाजे के साथ विशाल जुलूस निकाला जाता है। इस दौरान सजी हुई रथ पर स्वयं माता सती विराजमान रहती है। सती शोभा यात्रा में कलाकारों ने सती की जीवंत झांकी प्रस्तुत की, जो दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। जुलूस में शामिल ग्रामीण होली के गीत गाते हुए नज़र आ रहे थे और औऱ झूम रहे थे।इस बसियौरा मेले (सती शोभा यात्रा में दर्जनों गांव के लोग इकट्ठा होते है। श्रद्धालु व समाजसेवी रौशन राजा ने बताया कि सदियाों पहले होली के दूसरे दिन एक नवविवाहिता के पति की मौत हो गई थी। नवविवाहिता अपने पति की चिता पर जाकर सती हो गई। उसके कुछ ही महीनों बाद आसपास के गांव में महामारी फैल गई। बीमारियों से लोग मरने लगे। इसके बाद लोगों ने पूनाडीह गांव में मंदिर बनाकर सती की मूर्ति स्थापित की। जिसके बाद महामारी शांत हुई। तब से हर साल होली के दूसरे दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। पूजा-पाठ के बाद लोग ठीक होने लगे। तब से हर साल होली के दूसरे दिन रात्रि में सती मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती है। तांत्रिक पूरे मंत्र अनुष्ठान के साथ पूजा करते हैं। उसके बाद सुबह में जुलूस के रूप में सती बनी लड़की को डोली पर बिठाकर गांवों में घुमाया जाता है। लोग भक्ति भाव से भजन-कीर्तन और होली गाते हुए निकलते हैं। कच्ची दरगाह होते हुए सबलपुर घाट पर जुलूस समाप्त होता है।उन्होंने बताया कि अगर किसी कारण वश यह पूजा नहीं होती है तो गांव में कोई ना कोई अप्रिय घटना घट जाती है। सदियों से ये परंपरा चली आ रही है।4
- नवजात बच्ची का शव बरामद पुलिस जांच में जुटी1