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श्रीराधा के चरणों में उमड़ा आस्था का सैलाब, वृन्दावन चन्द्रोदय मंदिर में भव्य राधाष्टमी महामहोत्सव श्रीराधा के चरणों में उमड़ा आस्था का सैलाब, वृन्दावन चन्द्रोदय मंदिर में भव्य राधाष्टमी महामहोत्सव
Pandit Rahul brijwasi
श्रीराधा के चरणों में उमड़ा आस्था का सैलाब, वृन्दावन चन्द्रोदय मंदिर में भव्य राधाष्टमी महामहोत्सव श्रीराधा के चरणों में उमड़ा आस्था का सैलाब, वृन्दावन चन्द्रोदय मंदिर में भव्य राधाष्टमी महामहोत्सव
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- कहा जाता है कि राधाजी का अवतार श्री कृष्ण के प्रेम भाव को धरातल पर चरितार्थ करने के लिए हुआ था। 'एक प्राण दो देह' कहे जाने वाले राधा-कृष्ण की पावन भूमि मथुरा-बरसाना, इस बार भी राधा जन्मोत्सव पर पूरी तरह श्री राधा के रंग में रंगी नज़र आई। ब्रज की अधिष्ठात्री देवी और श्रीकृष्ण की आल्हादिनी शक्ति, वृषभानुसुता श्री राधिका रानी के जन्मोत्सव पर उनकी एक अलौकिक झलक पाने के लिए देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालु बरसाना पहुंचे। आस्था के इस उल्लास में समूचा बरसाना राधा नाम की मस्ती में सराबोर हो उठा और लाडलीजी मंदिर का प्रांगण 'राधा रानी की जय, महारानी की जय' के जयकारों से गुंजायमान रहा। अपनी आराध्या के प्रकटोत्सव का साक्षी बनने के लिए श्रद्धालु कई दिन पहले से ही बरसाना जुटने लगे थे। कड़कती धूप भी भक्तों की अटूट आस्था को न डिगा सकी। मंदिर के सेवायतों द्वारा दूध, दही, शहद, घी, बूरा, केसर, और गुलाब जल से लाडली जी का पंचामृत अभिषेक किया गया। चूंकि राधा रानी का जन्म 'मूल नक्षत्र' में हुआ था, इसलिए परंपरा अनुसार रात्रि 2 बजे से 4 बजे के बीच 27 कुओं के जल, 27 पेड़ों की पत्तियों, 27 स्थानों की मिट्टी और औषधियों के साथ मूल शांति कराई गई। इसके बाद अभिषेक संपन्न हुआ और श्रीजी को दिव्य पीले रंग की जड़ित पोशाक धारण कराई गई। बरसाना के मुख्य लाडली जी मंदिर के साथ-साथ गोपाल जी मंदिर, रस मंदिर, मान मंदिर, रंगीली महल और अष्टसखी मंदिर में भी जन्मोत्सव की धूम रही। रात भर बरसाना की हर गली में भजन संध्याओं का दौर चलता रहा। देश-विदेश से आई महिला श्रद्धालु भी राधा नाम के रंग में रंगी और नृत्य करती नजर आईं। बरसाना की पावन धरा से श्री राधा रानी के जन्मोत्सव की यह अलौकिक छटा बता रही है कि जब बात आस्था और प्रेम की हो, तो दूरी और परेशानियां बेमायने हो जाती हैं।1
- स्वामी हरिदास जी के 546वें आविर्भाव महोत्सव में श्री हरिदास वंशीय सागर ग्रंथ का विमोचन छठवें दिन रत्नों से हुआ स्वामी हरिदास जी का महाअभिषेक, संतों और विद्वानों की मौजूदगी में हुआ ग्रंथ विमोचन वृंदावन। स्वामी हरिदास जी के 546वें आविर्भाव महोत्सव के छठवें दिन वृंदावन में भव्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर श्री स्वामी राधाप्रसाद देवजू महाराज की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस दौरान स्वामी हरिदास जी का रत्नों से महाअभिषेक किया गया। महोत्सव के अंतर्गत प्रातःकाल बधाई गायन, समाज गायन और ठाकुर जी की महाआरती का आयोजन हुआ। भक्तों ने धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में स्वामी हरिदास जी के चरणों में श्रद्धा अर्पित की। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण स्वामी हरिदास जी द्वारा रचित ‘श्री हरिदास वंशीय सागर’ ग्रंथ के प्रथम खंड का विमोचन रहा। उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने वृंदावन के संतों, विद्वानों और धर्माचार्यों की उपस्थिति में ग्रंथ का विमोचन किया। आयोजकों के अनुसार, यह ग्रंथ संतों, रसिकों और साधकों के लिए साधना के पथ पर उपयोगी सिद्ध होगा। ग्रंथ में स्वामी हरिदास जी के पदों को सरल एवं सुगम गद्य रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे पाठक उनके भाव, भक्ति और आध्यात्मिक संदेश को आसानी से समझ सकें। ग्रंथ में संगीत साधना से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों का भी विस्तृत वर्णन किया गया है। इसमें तानसेन और बैजू बावरा जैसे महान संगीत साधकों के स्वामी हरिदास जी के सानिध्य में आने, उनकी लीलाओं तथा राग-रागिनियों के ज्ञान प्राप्त करने से जुड़े प्रसंग शामिल किए गए हैं। ग्रंथ विमोचन के दौरान संतों और विद्वानों ने स्वामी हरिदास जी की भक्ति, संगीत साधना और वृंदावन की रस परंपरा में उनके योगदान को स्मरण किया। महोत्सव में शामिल श्रद्धालुओं ने धार्मिक आयोजनों का आनंद लेते हुए स्वामी हरिदास जी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।1
- गांधी जी को कौन जानता था । उनका नाम इतना कैसे हुआ सब जानते है। किसी को बताने की जरूरत नहीं है सबको पता है गांधी जी को कौन जानता था । उनका नाम इतना कैसे हुआ सब जानते है। किसी को बताने की जरूरत नहीं है सबको पता है1
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- राया में एमएलसी डॉ. आकाश अग्रवाल ने किया 1000 से अधिक शिक्षकों का सम्मान शिक्षकों को बताया सच्चा राष्ट्र निर्माता, वित्तविहीन शिक्षकों की समस्याओं और मानदेय पर भी हुई चर्चा मथुरा। कस्बा राया में आगरा शिक्षक खंड से विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) डॉ. आकाश अग्रवाल के नेतृत्व में भव्य शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में राया, मांट, गोकुल, महावन और नौझील क्षेत्र के करीब 100 विद्यालयों से पहुंचे 1,000 से अधिक प्रबंधकों, प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एमएलसी डॉ. आकाश अग्रवाल ने कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र के सच्चे निर्माता हैं। शिक्षकों के योगदान से ही देश की नई पीढ़ी को सही दिशा और संस्कार मिलते हैं। उन्होंने कहा कि उनके संगठन द्वारा पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से पूरे उत्तर प्रदेश में शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। मथुरा जनपद में आयोजित यह सम्मान समारोह इस श्रृंखला का चौथा कार्यक्रम है। समारोह के दौरान वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों की समस्याओं और उनकी मांगों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि एमएलसी डॉ. आकाश अग्रवाल लगातार वित्तविहीन शिक्षकों के हितों को विधान परिषद में उठाते रहे हैं। वक्ताओं के अनुसार, वित्तविहीन शिक्षकों के लिए पांच लाख रुपये तक की कैशलेस उपचार सुविधा उपलब्ध कराने की मांग को विधान परिषद में प्रमुखता से उठाया गया। इसके साथ ही कम वेतन पर कार्य कर रहे वित्तविहीन शिक्षकों के लिए निश्चित मानदेय निर्धारित किए जाने की मांग भी सरकार के समक्ष रखी जा रही है। प्रस्तावित मानदेय को 8 हजार से 15 हजार रुपये तक किए जाने की मांग का उद्देश्य शिक्षकों को आर्थिक रूप से अधिक स्थिरता प्रदान करना बताया गया। समारोह में बड़ी संख्या में शिक्षक, विद्यालय प्रबंधक एवं प्रधानाचार्य मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान सम्मानित होने वाले शिक्षकों में उत्साह देखने को मिला। आयोजकों ने कहा कि शिक्षकों के सम्मान और उनके हितों से जुड़े मुद्दों को आगे भी प्रमुखता से उठाया जाता रहेगा।1