बिलासपुर में आगामी 21 जून को होने वाली नीट (यूजी) 2026 परीक्षा के सफल और सुचारू संचालन को लेकर 20 जून को बचत भवन में एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। उपायुक्त राहुल कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में परीक्षा की तैयारियों की विभिन्न विभागीय अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा की गई। जिला बिलासपुर में कुल पाँच परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें से तीन बिलासपुर मुख्यालय में और दो घुमारवीं में हैं, जहाँ 1352 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। उपायुक्त राहुल कुमार ने सभी संबंधित विभागीय अधिकारियों को परीक्षा के सफल संचालन के लिए अपने-अपने स्तर पर आवश्यक प्रबंध समयबद्ध तरीके से पूरे करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी परीक्षा केंद्रों पर निर्बाध विद्युत आपूर्ति, अभ्यर्थियों के लिए सुगम परिवहन सेवाएं, पेयजल आपूर्ति, इंटरनेट सुविधा तथा आपातकालीन सेवाओं के तहत एंबुलेंस एवं अग्निशमन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने पर जोर दिया। इसके अतिरिक्त, दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए भी सभी सुविधाएं समयबद्ध सुनिश्चित करने को कहा गया। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस विभाग को पर्याप्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करने और परीक्षा केंद्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए। उपायुक्त ने बताया कि परीक्षा की निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत प्रत्येक परीक्षा केंद्र में एक ड्यूटी मजिस्ट्रेट और एक पुलिस टीम लीडर भी तैनात रहेंगे, और केंद्रों में अनधिकृत प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। राहुल कुमार ने सभी अभ्यर्थियों से 1:30 बजे के निर्धारित समय से पहले परीक्षा केंद्रों पर पहुंचने का आह्वान किया ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने परीक्षार्थियों को नया एडमिट कार्ड, वास्तविक पहचान पत्र और दो फोटोग्राफ साथ लाने को भी कहा। उन्होंने सभी संबंधित विभागीय अधिकारियों से परीक्षा संचालन के लिए निर्धारित एसओपी का कड़ाई से पालन करने के साथ-साथ आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए, ताकि परीक्षा शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष ढंग से संपन्न हो सके। बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त ओम कांत ठाकुर, एसडीएम डाॅ. राजदीप सिंह, गौरव चैधरी, सहायक आयुक्त राज कुमार, केंद्रीय विद्यालय की प्रधानाचार्य रिंकु कुमारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
बिलासपुर में आगामी 21 जून को होने वाली नीट (यूजी) 2026 परीक्षा के सफल और सुचारू संचालन को लेकर 20 जून को बचत भवन में एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। उपायुक्त राहुल कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में परीक्षा की तैयारियों की विभिन्न विभागीय अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा की गई। जिला बिलासपुर में कुल पाँच परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें से तीन बिलासपुर मुख्यालय में और दो घुमारवीं में हैं, जहाँ 1352 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। उपायुक्त राहुल कुमार ने सभी संबंधित विभागीय अधिकारियों को परीक्षा के सफल संचालन के लिए अपने-अपने स्तर पर आवश्यक प्रबंध समयबद्ध तरीके से पूरे करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी परीक्षा केंद्रों पर निर्बाध विद्युत आपूर्ति, अभ्यर्थियों के लिए सुगम परिवहन सेवाएं, पेयजल आपूर्ति, इंटरनेट सुविधा तथा आपातकालीन सेवाओं के तहत एंबुलेंस एवं अग्निशमन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने पर जोर दिया। इसके अतिरिक्त, दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए भी सभी सुविधाएं समयबद्ध सुनिश्चित करने को कहा गया। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस विभाग को पर्याप्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करने और परीक्षा केंद्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए। उपायुक्त ने बताया कि परीक्षा की निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत प्रत्येक परीक्षा केंद्र में एक ड्यूटी मजिस्ट्रेट और एक पुलिस टीम लीडर भी तैनात रहेंगे, और केंद्रों में अनधिकृत प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। राहुल कुमार ने सभी अभ्यर्थियों से 1:30 बजे के निर्धारित समय से पहले परीक्षा केंद्रों पर पहुंचने का आह्वान किया ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने परीक्षार्थियों को नया एडमिट कार्ड, वास्तविक पहचान पत्र और दो फोटोग्राफ साथ लाने को भी कहा। उन्होंने सभी संबंधित विभागीय अधिकारियों से परीक्षा संचालन के लिए निर्धारित एसओपी का कड़ाई से पालन करने के साथ-साथ आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए, ताकि परीक्षा शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष ढंग से संपन्न हो सके। बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त ओम कांत ठाकुर, एसडीएम डाॅ. राजदीप सिंह, गौरव चैधरी, सहायक आयुक्त राज कुमार, केंद्रीय विद्यालय की प्रधानाचार्य रिंकु कुमारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
- शनिवार को लाखों रुपये की लागत से बनी एक पेयजल स्कीम के भवन और परिसर का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें स्कीम के परिसर की हालत बेहद दयनीय दिखाई दे रही थी। मीडिया द्वारा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह वायरल वीडियो गोलवां-बतराहन पंचायत की सीमा पर स्थित दरैड पेयजल स्कीम का निकला। इस संबंध में, विभागीय एसडीओ अमित रंधावां से शनिवार शाम करीब चार बजे फोन पर बातचीत की गई। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा इस स्कीम के लिए टेंडर लगा दिया गया है और इसे जल्द ही शुरू करके लोगों को सुविधा प्रदान की जाएगी।1
- सुजानपुर शहर में नगर परिषद द्वारा लगाए गए सीसीटीवी कैमरे की निगरानी संबंधी चेतावनी संदेश अब केवल शोपीस बनकर रह गए हैं, क्योंकि एक साल पहले लगाए गए इन होर्डिंग्स के बावजूद कहीं भी कैमरे स्थापित नहीं किए गए हैं। इस स्थिति पर सुजानपुर की जनता नगर परिषद प्रशासन से सवाल पूछ रही है कि आखिर ये कैमरे कब लगेंगे। नगर परिषद ने करीब एक वर्ष पहले शहर के हर चौक-चौराहे पर ऐसे चेतावनी संदेश लगाए थे, जिसमें कहा गया था कि 'आप सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में हैं' और सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा-करकट फेंकना दंडनीय अपराध है। हालांकि, इन होर्डिंग्स को लगाने के बाद से आज तक किसी भी स्थान पर सीसीटीवी कैमरा फिट नहीं करवाया गया है, जिससे ये केवल चेतावनी बोर्ड बनकर रह गए हैं और चर्चा का केंद्र बन गए हैं कि चेतावनी तो लिख दी लेकिन कैमरे कब लगेंगे। बीती रात शहर के दो चौक-चौराहों पर शरारती तत्वों द्वारा खड़ी गाड़ियों के शीशे तोड़े जाने की घटना ने इस मुद्दे को और भी गंभीर बना दिया है। स्थानीय लोगों का तर्क है कि यदि इन स्थानों पर होर्डिंग्स की जगह सीसीटीवी कैमरे लगे होते, तो शरारती तत्व अब तक पुलिस की गिरफ्त में होते। नगर परिषद प्रशासन पर आरोप है कि उसने 'कैमरे लगे हैं' की चेतावनी तो दे दी, लेकिन वास्तव में कैमरे लगाना भूल गया है, जिसके कारण शहर की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय निवासियों ने नगर परिषद से आग्रह किया है कि जिन-जिन स्थानों पर ये चेतावनी होर्डिंग्स लगाए गए हैं, वहाँ तुरंत सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जाएं। इसके साथ ही, लोगों ने जीते हुए वार्ड पार्षदों से भी यह अपील की है कि वे इस महत्वपूर्ण विषय को नगर परिषद की पहली बैठक में प्राथमिकता से उठाएं, ताकि शहर की रक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।1
- हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के पूर्व वाइस चेयरमैन नवीन शर्मा ने पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के गृह जिले हमीरपुर में स्थित प्रदेश के एकमात्र हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय (HPTU) में स्थायी वाइस चांसलर (कुलपति) का पद पिछले एक वर्ष से खाली होने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि कुलपति का पद विश्वविद्यालय का सर्वोच्च प्रशासनिक और शैक्षणिक पद होता है, और एक साल से स्थायी वाइस चांसलर न होने के कारण विश्वविद्यालय का प्रशासनिक ढांचा और शैक्षणिक माहौल पूरी तरह चरमरा गया है, जिससे नीतिगत और बड़े फैसले भी लटके हुए हैं। शर्मा ने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय में नियमित शिक्षकों की भारी कमी है, जिसके चलते यह प्रमुख संस्थान वर्तमान में गेस्ट फैकल्टी के सहारे चल रहा है। इस स्थिति से विश्वविद्यालय परिसर और इससे संबद्ध कॉलेजों के हजारों छात्रों का भविष्य अधर में है, क्योंकि स्थायी मुखिया के अभाव में परीक्षा, परिणाम और नए शैक्षणिक सत्र की योजनाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं, जिससे छात्रों के भविष्य पर संकट गहरा गया है। नवीन शर्मा ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जो सरकार मुख्यमंत्री के अपने ही गृह जिले के इतने बड़े तकनीकी संस्थान में एक साल के भीतर एक वाइस चांसलर नियुक्त नहीं कर सकती, वह पूरे प्रदेश में युवाओं को रोजगार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का दावा कैसे कर सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री के गृह जिले में ही तकनीकी शिक्षा बेपटरी हो चुकी है।1
- नूरपुर में एक प्रेसवार्ता के दौरान नूरपुर फोरलेन संघर्ष समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुदर्शन शर्मा ने पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग फोरलेन परियोजना से प्रभावित लोगों के लंबित मुआवजे का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम-2013 के तहत अधिग्रहित भूमि का मुआवजा अधिकांश प्रभावितों को फैक्टर-1 के आधार पर दिया गया है, जबकि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार उन्हें फैक्टर-2 के आधार पर मुआवजा मिलना चाहिए। शर्मा ने आरोप लगाया कि एक "पिक एंड चूज" नीति के तहत कुछ चुनिंदा लोगों को ही फैक्टर-2 का लाभ मिला है, जबकि अधिकांश प्रभावित अब भी फैक्टर-1 के आधार पर मिले आधे-अधूरे मुआवजे से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना था कि अपर्याप्त मुआवजे के कारण प्रभावित परिवार पुनर्वास और पुनर्स्थापन करने में असमर्थ हैं। सुदर्शन शर्मा ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार से मांग की है कि संबंधित विभागों और अधिकारियों को शीघ्र निर्देश जारी किए जाएं ताकि सभी पात्र प्रभावितों को फैक्टर-2 के आधार पर भूमि अधिग्रहण का मुआवजा मिल सके। उन्होंने जोर दिया कि पिछले पांच वर्षों से लंबित इस मामले का जल्द से जल्द समाधान किया जाना चाहिए, ताकि प्रभावित परिवारों को न्याय मिल सके।1
- हिमाचल प्रदेश के सलोनी में शिक्षकों की भारी कमी के कारण स्थानीय लोगों में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिल रहा है। इस मुद्दे पर एक विशाल आक्रोश रैली निकाली गई, जहाँ लोगों का गुस्सा हिमाचल सरकार और प्रशासन के खिलाफ साफ झलका। शिक्षकों की कमी के विरोध में SMC के प्रधान और उप प्रधान अनशन पर बैठे हैं। आज उनके अनशन का तीसरा दिन है, बावजूद इसके सरकार की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। प्रदर्शनकारी लगातार सवाल उठा रहे हैं कि क्या हिमाचल सरकार सोई हुई है और क्या प्रशासन भी उदासीन हो गया है।1
- द्रंग क्षेत्र का पराशर मेला धूमधाम के साथ आयोजित किया गया। इस भव्य आयोजन में देवी-देवता भी मौजूद रहे, जिससे मेले की गरिमा और बढ़ गई।1
- नाचन जन कल्याण फाउंडेशन ने एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए महादेव पंचायत के पूर्व प्रधान नीलकमल को महादेव जोन का अध्यक्ष नियुक्त किया है। सुंदरनगर में आयोजित फाउंडेशन की बैठक के दौरान यह बड़ी जिम्मेदारी नीलकमल को सौंपी गई, जिसके तहत उन्हें 18 पंचायतों की कमान मिली है।1
- उपमंडल मुख्यालय फतेहपुर में स्थित उपरोजगार कार्यालय के भवन और उसमें ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी आसपास लगे पेड़ों के कारण लगातार भय में जी रहे हैं। इस समस्या से मुक्ति पाने के लिए वे बार-बार एसडीएम कार्यालय से निवेदन कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्हें कोई राहत नहीं मिल पाई है। कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021 और 2022 से लगातार एसडीएम कार्यालय से इन पेड़ों को कटवाने की अपील की जा रही है। इतना ही नहीं, क्षेत्रीय रोजगार कार्यालय धर्मशाला ने भी 29-10-2021 को पत्र संख्या 2019/211 के माध्यम से इसी संबंध में अपील की थी। बताया जा रहा है कि पिछले साल एक पेड़ के टूटने से कार्यालय का मुख्य द्वार पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। यह भगवान का शुक्र रहा कि इस घटना में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। उक्त नुकसान के बारे में भी संबंधित कार्यालय को अवगत करवा दिया गया था, फिर भी कोई राहत नहीं मिली है। अब नए सिरे से फिर अपील की जाएगी। यह देखना होगा कि उक्त भवन और उसमें कार्यरत कर्मचारियों को पेड़ों के इस भय से कितने समय में मुक्ति मिल पाती है।1