सुजानपुर शहर में नगर परिषद द्वारा लगाए गए सीसीटीवी कैमरे की निगरानी संबंधी चेतावनी संदेश अब केवल शोपीस बनकर रह गए हैं, क्योंकि एक साल पहले लगाए गए इन होर्डिंग्स के बावजूद कहीं भी कैमरे स्थापित नहीं किए गए हैं। इस स्थिति पर सुजानपुर की जनता नगर परिषद प्रशासन से सवाल पूछ रही है कि आखिर ये कैमरे कब लगेंगे। नगर परिषद ने करीब एक वर्ष पहले शहर के हर चौक-चौराहे पर ऐसे चेतावनी संदेश लगाए थे, जिसमें कहा गया था कि 'आप सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में हैं' और सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा-करकट फेंकना दंडनीय अपराध है। हालांकि, इन होर्डिंग्स को लगाने के बाद से आज तक किसी भी स्थान पर सीसीटीवी कैमरा फिट नहीं करवाया गया है, जिससे ये केवल चेतावनी बोर्ड बनकर रह गए हैं और चर्चा का केंद्र बन गए हैं कि चेतावनी तो लिख दी लेकिन कैमरे कब लगेंगे। बीती रात शहर के दो चौक-चौराहों पर शरारती तत्वों द्वारा खड़ी गाड़ियों के शीशे तोड़े जाने की घटना ने इस मुद्दे को और भी गंभीर बना दिया है। स्थानीय लोगों का तर्क है कि यदि इन स्थानों पर होर्डिंग्स की जगह सीसीटीवी कैमरे लगे होते, तो शरारती तत्व अब तक पुलिस की गिरफ्त में होते। नगर परिषद प्रशासन पर आरोप है कि उसने 'कैमरे लगे हैं' की चेतावनी तो दे दी, लेकिन वास्तव में कैमरे लगाना भूल गया है, जिसके कारण शहर की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय निवासियों ने नगर परिषद से आग्रह किया है कि जिन-जिन स्थानों पर ये चेतावनी होर्डिंग्स लगाए गए हैं, वहाँ तुरंत सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जाएं। इसके साथ ही, लोगों ने जीते हुए वार्ड पार्षदों से भी यह अपील की है कि वे इस महत्वपूर्ण विषय को नगर परिषद की पहली बैठक में प्राथमिकता से उठाएं, ताकि शहर की रक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
सुजानपुर शहर में नगर परिषद द्वारा लगाए गए सीसीटीवी कैमरे की निगरानी संबंधी चेतावनी संदेश अब केवल शोपीस बनकर रह गए हैं, क्योंकि एक साल पहले लगाए गए इन होर्डिंग्स के बावजूद कहीं भी कैमरे स्थापित नहीं किए गए हैं। इस स्थिति पर सुजानपुर की जनता नगर परिषद प्रशासन से सवाल पूछ रही है कि आखिर ये कैमरे कब लगेंगे। नगर परिषद ने करीब एक वर्ष पहले शहर के हर चौक-चौराहे पर ऐसे चेतावनी संदेश लगाए थे, जिसमें कहा गया था कि 'आप सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में हैं' और सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा-करकट फेंकना दंडनीय अपराध है। हालांकि, इन होर्डिंग्स को लगाने के बाद से आज तक किसी भी स्थान पर सीसीटीवी कैमरा फिट नहीं करवाया गया है, जिससे ये केवल चेतावनी बोर्ड बनकर रह गए हैं और चर्चा का केंद्र बन गए हैं कि चेतावनी तो लिख दी लेकिन कैमरे कब लगेंगे। बीती रात शहर के दो चौक-चौराहों पर शरारती तत्वों द्वारा खड़ी गाड़ियों के शीशे तोड़े जाने की घटना ने इस मुद्दे को और भी गंभीर बना दिया है। स्थानीय लोगों का तर्क है कि यदि इन स्थानों पर होर्डिंग्स की जगह सीसीटीवी कैमरे लगे होते, तो शरारती तत्व अब तक पुलिस की गिरफ्त में होते। नगर परिषद प्रशासन पर आरोप है कि उसने 'कैमरे लगे हैं' की चेतावनी तो दे दी, लेकिन वास्तव में कैमरे लगाना भूल गया है, जिसके कारण शहर की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय निवासियों ने नगर परिषद से आग्रह किया है कि जिन-जिन स्थानों पर ये चेतावनी होर्डिंग्स लगाए गए हैं, वहाँ तुरंत सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जाएं। इसके साथ ही, लोगों ने जीते हुए वार्ड पार्षदों से भी यह अपील की है कि वे इस महत्वपूर्ण विषय को नगर परिषद की पहली बैठक में प्राथमिकता से उठाएं, ताकि शहर की रक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
- सुजानपुर शहर में नगर परिषद द्वारा लगाए गए सीसीटीवी कैमरे की निगरानी संबंधी चेतावनी संदेश अब केवल शोपीस बनकर रह गए हैं, क्योंकि एक साल पहले लगाए गए इन होर्डिंग्स के बावजूद कहीं भी कैमरे स्थापित नहीं किए गए हैं। इस स्थिति पर सुजानपुर की जनता नगर परिषद प्रशासन से सवाल पूछ रही है कि आखिर ये कैमरे कब लगेंगे। नगर परिषद ने करीब एक वर्ष पहले शहर के हर चौक-चौराहे पर ऐसे चेतावनी संदेश लगाए थे, जिसमें कहा गया था कि 'आप सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में हैं' और सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा-करकट फेंकना दंडनीय अपराध है। हालांकि, इन होर्डिंग्स को लगाने के बाद से आज तक किसी भी स्थान पर सीसीटीवी कैमरा फिट नहीं करवाया गया है, जिससे ये केवल चेतावनी बोर्ड बनकर रह गए हैं और चर्चा का केंद्र बन गए हैं कि चेतावनी तो लिख दी लेकिन कैमरे कब लगेंगे। बीती रात शहर के दो चौक-चौराहों पर शरारती तत्वों द्वारा खड़ी गाड़ियों के शीशे तोड़े जाने की घटना ने इस मुद्दे को और भी गंभीर बना दिया है। स्थानीय लोगों का तर्क है कि यदि इन स्थानों पर होर्डिंग्स की जगह सीसीटीवी कैमरे लगे होते, तो शरारती तत्व अब तक पुलिस की गिरफ्त में होते। नगर परिषद प्रशासन पर आरोप है कि उसने 'कैमरे लगे हैं' की चेतावनी तो दे दी, लेकिन वास्तव में कैमरे लगाना भूल गया है, जिसके कारण शहर की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय निवासियों ने नगर परिषद से आग्रह किया है कि जिन-जिन स्थानों पर ये चेतावनी होर्डिंग्स लगाए गए हैं, वहाँ तुरंत सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जाएं। इसके साथ ही, लोगों ने जीते हुए वार्ड पार्षदों से भी यह अपील की है कि वे इस महत्वपूर्ण विषय को नगर परिषद की पहली बैठक में प्राथमिकता से उठाएं, ताकि शहर की रक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।1
- हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के पूर्व वाइस चेयरमैन नवीन शर्मा ने पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के गृह जिले हमीरपुर में स्थित प्रदेश के एकमात्र हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय (HPTU) में स्थायी वाइस चांसलर (कुलपति) का पद पिछले एक वर्ष से खाली होने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि कुलपति का पद विश्वविद्यालय का सर्वोच्च प्रशासनिक और शैक्षणिक पद होता है, और एक साल से स्थायी वाइस चांसलर न होने के कारण विश्वविद्यालय का प्रशासनिक ढांचा और शैक्षणिक माहौल पूरी तरह चरमरा गया है, जिससे नीतिगत और बड़े फैसले भी लटके हुए हैं। शर्मा ने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय में नियमित शिक्षकों की भारी कमी है, जिसके चलते यह प्रमुख संस्थान वर्तमान में गेस्ट फैकल्टी के सहारे चल रहा है। इस स्थिति से विश्वविद्यालय परिसर और इससे संबद्ध कॉलेजों के हजारों छात्रों का भविष्य अधर में है, क्योंकि स्थायी मुखिया के अभाव में परीक्षा, परिणाम और नए शैक्षणिक सत्र की योजनाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं, जिससे छात्रों के भविष्य पर संकट गहरा गया है। नवीन शर्मा ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जो सरकार मुख्यमंत्री के अपने ही गृह जिले के इतने बड़े तकनीकी संस्थान में एक साल के भीतर एक वाइस चांसलर नियुक्त नहीं कर सकती, वह पूरे प्रदेश में युवाओं को रोजगार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का दावा कैसे कर सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री के गृह जिले में ही तकनीकी शिक्षा बेपटरी हो चुकी है।1
- नाचन जन कल्याण फाउंडेशन ने एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए महादेव पंचायत के पूर्व प्रधान नीलकमल को महादेव जोन का अध्यक्ष नियुक्त किया है। सुंदरनगर में आयोजित फाउंडेशन की बैठक के दौरान यह बड़ी जिम्मेदारी नीलकमल को सौंपी गई, जिसके तहत उन्हें 18 पंचायतों की कमान मिली है।1
- द्रंग क्षेत्र का पराशर मेला धूमधाम के साथ आयोजित किया गया। इस भव्य आयोजन में देवी-देवता भी मौजूद रहे, जिससे मेले की गरिमा और बढ़ गई।1
- हॉस्टलों में एक एंटी-चिट्टा सर्च अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत छात्रों को जागरूक करने का कार्य भी किया गया।1
- शनिवार को लाखों रुपये की लागत से बनी एक पेयजल स्कीम के भवन और परिसर का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें स्कीम के परिसर की हालत बेहद दयनीय दिखाई दे रही थी। मीडिया द्वारा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह वायरल वीडियो गोलवां-बतराहन पंचायत की सीमा पर स्थित दरैड पेयजल स्कीम का निकला। इस संबंध में, विभागीय एसडीओ अमित रंधावां से शनिवार शाम करीब चार बजे फोन पर बातचीत की गई। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा इस स्कीम के लिए टेंडर लगा दिया गया है और इसे जल्द ही शुरू करके लोगों को सुविधा प्रदान की जाएगी।1
- भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) द्वारा उठाई गई मांग के बाद, हिमाचल प्रदेश सरकार ने NEET अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए एक अहम निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने 20 से 22 जून तक हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) की बसों में परीक्षार्थियों को निःशुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान करने की घोषणा की है। बिलासपुर के भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के जिला अध्यक्ष नितिन चड्डा ने विद्यार्थियों के हित में उठाए गए इस कदम को सराहनीय बताया है।1
- हमीरपुर में पत्रकार वार्ता के दौरान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव पवन ठाकुर ने नीट परीक्षा के बार-बार लीक होने के लिए केंद्र सरकार को पूरी तरह से जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस गंभीर धांधली के कारण देश के लाखों बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है और वे भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। ठाकुर ने दावा किया कि पिछले बारह सालों में नीट की परीक्षा में दस बार गड़बड़ी हो चुकी है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि वर्तमान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में ही यह नीट पेपर चौथी बार लीक हुआ है। उनके अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने से देश के लोगों में गहरा रोष है। पवन ठाकुर ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार नौकरियां बेच रही है और 'जाली आईएएस' बना रही है। कांग्रेस महासचिव ने मांग की कि शिक्षा मंत्री को तुरंत बर्खास्त किया जाए और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित कर इस पूरे मामले की गहन जांच-पड़ताल कराने की भी मांग की। पवन ठाकुर ने आश्चर्य व्यक्त किया कि इस बड़े घोटाले पर प्रधानमंत्री मोदी ने अब तक एक ट्वीट तक नहीं किया है और न ही कार्रवाई के नाम पर कोई कदम उठाया गया है, जिससे उचित कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।1