समय की मिट्टी में दबा राजा मोरध्वज का किला उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद के बिलसंडा क्षेत्र में स्थित मरौरी खास आज एक साधारण गाँव दिखाई देता है। लेकिन कहते हैं कि यही वह भूमि है जहाँ कभी महादानी राजा मोरध्वज का भव्य किला खड़ा था। समय बदला, राजाओं का युग समाप्त हुआ, और धीरे-धीरे वह गौरवशाली किला मिट्टी में समा गया। आज जहाँ कभी ऊँची ऊँची दीवारे थीं, वहाँ खेत लहलहाते हैं। लोगों ने किले की भूमि को जोतकर खेती शुरू कर दी। इतिहास की ईंटें मिट्टी में मिल गईं, लेकिन अतीत की कुछ निशानियाँ आज भी चुपचाप खड़ी हैं—जैसे आठ कोने वाला प्राचीन कुआँ और कहीं-कहीं दिखाई देती पुरानी दीवारों के अवशेष। गाँव के बुजुर्ग जब इन खंडहरों के पास बैठते हैं, तो उनकी आँखों में बीता हुआ इतिहास जीवित हो उठता है। वे बच्चों से कहते हैं, “बेटा, यही वह स्थान है जहाँ कभी राजा मोरध्वज का महल था। यहाँ वीरता थी, धर्म था और दान की ऐसी मिसाल थी जिसकी चर्चा आज भी होती है।” बरसात की शाम जब हवा उन टूटी हुई दीवारों से टकराती है, तो ऐसा लगता है मानो इतिहास स्वयं पुकार रहा हो—“मुझे मत भूलो। मेरी पहचान बचाओ।” आठ कोने वाला कुआँ आज भी इस बात का मौन साक्षी है कि यहाँ कभी एक समृद्ध नगरी बसी थी। वह न बोलता है, न शिकायत करता है, लेकिन उसकी हर ईंट मानो यही कहती है कि यदि समय रहते इस धरोहर की रक्षा नहीं हुई, तो आने वाली पीढ़ियाँ केवल कहानियाँ ही सुनेंगी, इतिहास देख नहीं पाएँगी। मरौरी खास केवल एक गाँव नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत का एक जीवित अध्याय है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि राजा मोरध्वज के किले के बचे हुए चिन्हों—आठ कोने वाले कुएँ, पुरानी दीवारों और अन्य अवशेषों—को सुरक्षित रखा जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ अपने इतिहास पर गर्व कर सकें। इतिहास मिटाया नहीं जाता, केवल भुला दिया जाता है। आइए, मरौरी खास की इस अमूल्य धरोहर को फिर से पहचान दिलाएँ। समय की मिट्टी में दबा राजा मोरध्वज का किला उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद के बिलसंडा क्षेत्र में स्थित मरौरी खास आज एक साधारण गाँव दिखाई देता है। लेकिन कहते हैं कि यही वह भूमि है जहाँ कभी महादानी राजा मोरध्वज का भव्य किला खड़ा था। समय बदला, राजाओं का युग समाप्त हुआ, और धीरे-धीरे वह गौरवशाली किला मिट्टी में समा गया। आज जहाँ कभी ऊँची ऊँची दीवारे थीं, वहाँ खेत लहलहाते हैं। लोगों ने किले की भूमि को जोतकर खेती शुरू कर दी। इतिहास की ईंटें मिट्टी में मिल गईं, लेकिन अतीत की कुछ निशानियाँ आज भी चुपचाप खड़ी हैं—जैसे आठ कोने वाला प्राचीन कुआँ और कहीं-कहीं दिखाई देती पुरानी दीवारों के अवशेष। गाँव के बुजुर्ग जब इन खंडहरों के पास बैठते हैं, तो उनकी आँखों में बीता हुआ इतिहास जीवित हो उठता है। वे बच्चों से कहते हैं, “बेटा, यही वह स्थान है जहाँ कभी राजा मोरध्वज का महल था। यहाँ वीरता थी, धर्म था और दान की ऐसी मिसाल थी जिसकी चर्चा आज भी होती है।” बरसात की शाम जब हवा उन टूटी हुई दीवारों से टकराती है, तो ऐसा लगता है मानो इतिहास स्वयं पुकार रहा हो—“मुझे मत भूलो। मेरी पहचान बचाओ।” आठ कोने वाला कुआँ आज भी इस बात का मौन साक्षी है कि यहाँ कभी एक समृद्ध नगरी बसी थी। वह न बोलता है, न शिकायत करता है, लेकिन उसकी हर ईंट मानो यही कहती है कि यदि समय रहते इस धरोहर की रक्षा नहीं हुई, तो आने वाली पीढ़ियाँ केवल कहानियाँ ही सुनेंगी, इतिहास देख नहीं पाएँगी। मरौरी खास केवल एक गाँव नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत का एक जीवित अध्याय है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि राजा मोरध्वज के किले के बचे हुए चिन्हों—आठ कोने वाले कुएँ, पुरानी दीवारों और अन्य अवशेषों—को सुरक्षित रखा जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ अपने इतिहास पर गर्व कर सकें। इतिहास मिटाया नहीं जाता, केवल भुला दिया जाता है। आइए, मरौरी खास की इस अमूल्य धरोहर को फिर से पहचान दिलाएँ
समय की मिट्टी में दबा राजा मोरध्वज का किला उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद के बिलसंडा क्षेत्र में स्थित मरौरी खास आज एक साधारण गाँव दिखाई देता है। लेकिन कहते हैं कि यही वह भूमि है जहाँ कभी महादानी राजा मोरध्वज का भव्य किला खड़ा था। समय बदला, राजाओं का युग समाप्त हुआ, और धीरे-धीरे वह गौरवशाली किला मिट्टी में समा गया। आज जहाँ कभी ऊँची ऊँची दीवारे थीं, वहाँ खेत लहलहाते हैं। लोगों ने किले की भूमि को जोतकर खेती शुरू कर दी। इतिहास की ईंटें मिट्टी में मिल गईं, लेकिन अतीत की कुछ निशानियाँ आज भी चुपचाप खड़ी हैं—जैसे आठ कोने वाला प्राचीन कुआँ और कहीं-कहीं दिखाई देती पुरानी दीवारों के अवशेष। गाँव के बुजुर्ग जब इन खंडहरों के पास बैठते हैं, तो उनकी आँखों में बीता हुआ इतिहास जीवित हो उठता है। वे बच्चों से कहते हैं, “बेटा, यही वह स्थान है जहाँ कभी राजा मोरध्वज का महल था। यहाँ वीरता थी, धर्म था और दान की ऐसी मिसाल थी जिसकी चर्चा आज भी होती है।” बरसात की शाम जब हवा उन टूटी हुई दीवारों से टकराती है, तो ऐसा लगता है मानो इतिहास स्वयं पुकार रहा हो—“मुझे मत भूलो। मेरी पहचान बचाओ।” आठ कोने वाला कुआँ आज भी इस बात का मौन साक्षी है कि यहाँ कभी एक समृद्ध नगरी बसी थी। वह न बोलता है, न शिकायत करता है, लेकिन उसकी हर ईंट मानो यही कहती है कि यदि समय रहते इस धरोहर की रक्षा नहीं हुई, तो आने वाली पीढ़ियाँ केवल कहानियाँ ही सुनेंगी, इतिहास देख नहीं पाएँगी। मरौरी खास केवल एक गाँव नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत का एक जीवित अध्याय है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि राजा मोरध्वज के किले के बचे हुए चिन्हों—आठ कोने वाले कुएँ, पुरानी दीवारों और अन्य अवशेषों—को सुरक्षित रखा जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ अपने इतिहास पर गर्व कर सकें। इतिहास मिटाया नहीं जाता, केवल भुला दिया जाता है। आइए, मरौरी खास की इस अमूल्य धरोहर को फिर से पहचान दिलाएँ। समय की मिट्टी में दबा राजा मोरध्वज का किला उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद के बिलसंडा क्षेत्र में स्थित मरौरी खास आज एक साधारण गाँव दिखाई देता है। लेकिन कहते हैं कि यही वह भूमि है जहाँ कभी महादानी राजा मोरध्वज का भव्य किला खड़ा था। समय बदला, राजाओं का युग समाप्त हुआ, और धीरे-धीरे वह गौरवशाली किला मिट्टी में समा गया। आज जहाँ कभी ऊँची ऊँची दीवारे थीं, वहाँ खेत लहलहाते हैं। लोगों ने किले की भूमि को जोतकर खेती शुरू कर दी। इतिहास की ईंटें मिट्टी में मिल गईं, लेकिन अतीत की कुछ निशानियाँ आज भी चुपचाप खड़ी हैं—जैसे आठ कोने वाला प्राचीन कुआँ और कहीं-कहीं दिखाई देती पुरानी दीवारों के अवशेष। गाँव के बुजुर्ग जब इन खंडहरों के पास बैठते हैं, तो उनकी आँखों में बीता हुआ इतिहास जीवित हो उठता है। वे बच्चों से कहते हैं, “बेटा, यही वह स्थान है जहाँ कभी राजा मोरध्वज का महल था। यहाँ वीरता थी, धर्म था और दान की ऐसी मिसाल थी जिसकी चर्चा आज भी होती है।” बरसात की शाम जब हवा उन टूटी हुई दीवारों से टकराती है, तो ऐसा लगता है मानो इतिहास स्वयं पुकार रहा हो—“मुझे मत भूलो। मेरी पहचान बचाओ।” आठ कोने वाला कुआँ आज भी इस बात का मौन साक्षी है कि यहाँ कभी एक समृद्ध नगरी बसी थी। वह न बोलता है, न शिकायत करता है, लेकिन उसकी हर ईंट मानो यही कहती है कि यदि समय रहते इस धरोहर की रक्षा नहीं हुई, तो आने वाली पीढ़ियाँ केवल कहानियाँ ही सुनेंगी, इतिहास देख नहीं पाएँगी। मरौरी खास केवल एक गाँव नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत का एक जीवित अध्याय है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि राजा मोरध्वज के किले के बचे हुए चिन्हों—आठ कोने वाले कुएँ, पुरानी दीवारों और अन्य अवशेषों—को सुरक्षित रखा जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ अपने इतिहास पर गर्व कर सकें। इतिहास मिटाया नहीं जाता, केवल भुला दिया जाता है। आइए, मरौरी खास की इस अमूल्य धरोहर को फिर से पहचान दिलाएँ
- पीलीभीत: कंजा हरैया के विद्यालय में विधिक जागरूकता अभियान, पीलीभीत। गजरौला थाना क्षेत्र के कंजा हरैया स्थित संजय गांधी मेमोरियल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में विधिक जागरूकता अभियान के तहत विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में महिला उपनिरीक्षक (एसआई) रीना ने विद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं एवं उपस्थित महिलाओं को विभिन्न कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा, उनके संवैधानिक एवं कानूनी अधिकार, घरेलू हिंसा, साइबर अपराध, महिला हेल्पलाइन तथा कानून द्वारा उपलब्ध सुरक्षा उपायों के बारे में जागरूक किया। एसआई रीना ने कहा कि किसी भी प्रकार के उत्पीड़न, हिंसा या अपराध की स्थिति में महिलाएं और छात्राएं बिना किसी भय के पुलिस से संपर्क करें तथा सरकार द्वारा उपलब्ध हेल्पलाइन और कानूनी सहायता का लाभ उठाएं। उन्होंने छात्राओं से आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने, अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और किसी भी घटना की तुरंत सूचना पुलिस को देने की अपील की। कार्यक्रम में मौजूद छात्राओं एवं महिलाओं ने भी कानूनी विषयों से जुड़े अपने सवाल पूछे, जिनका विस्तार से जवाब दिया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं एवं छात्राओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना तथा कानून के प्रति विश्वास बढ़ाना रहा।1
- जरूरत थी- नौजवान लड़कियों को जलील करने की उनको बेरहमी से पिटवाने की उन पर आंसू गोले दागने की,? पूंछता है भारत1
- Post by AASHIQ ALI1
- पति-पत्नी के कलह का खौफनाक अंत, घर-जमाई बनकर रह रहे पति का पत्नी ने घोंटा गला, आरोपी महिला गिरफ्तार पति-पत्नी के कलह का खौफनाक अंत, घर-जमाई बनकर रह रहे पति का पत्नी ने घोंटा गला, आरोपी महिला गिरफ्तार माधोटांडा (पीलीभीत)। ससुराल में रह रहे पति और पत्नी के बीच का विवाद इस कदर बढ़ा कि एक हंसता-खेलता परिवार पल भर में उजाड़ गया। थाना माधोटांडा क्षेत्र के लोहरपुरी गांव में पारिवारिक क्लेश के चलते पत्नी ने ही अपने पति की गला दबाकर बेरहमी से हत्या कर दी। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की छानबीन शुरू कर दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, चितरपुर गांव निवासी उमाशंकर पुत्र श्री कृष्णा पिछले कुछ समय से अपने गांव के बजाय अपनी ससुराल लोहरपुरी में 'घर-जमाई' के रूप में रह रहा था। बीती रात संदिग्ध परिस्थितियों में ससुराल के ही घर में उमाशंकर का शव मिला। पुलिस की शुरुआती जांच और पूछताछ में यह बात सामने आई है कि पति-पत्नी के बीच आपस में गहरा विवाद हुआ था, जिसके बाद पत्नी ममता उर्फ सीमा ने पति का गला दबाकर उसे मौत के घाट उतार दिया। स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों के मुताबिक, आरोपी महिला ममता उर्फ सीमा ने उमाशंकर से पहले गुजरात के किसी व्यक्ति से कोर्ट मैरिज की थी। बाद में वह उमाशंकर के संपर्क में आई। पुलिस अब महिला के इस आपराधिक और व्यक्तिगत बैकग्राउंड की भी पड़ताल कर रही है, ताकि हत्या के असली कारणों का पता लगाया जा सके। इस दिल दहला देने वाली वारदात ने दो छोटे-छोटे मासूम बच्चों—विकास और गीता—को पूरी तरह अनाथ कर दिया है। पिता की हत्या और मां के जेल चले जाने के बाद दोनों मासूमों का रो-रोकर बुरा हाल है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रथम दृष्टया मामला पति-पत्नी के आपसी विवाद में गला दबाकर हत्या का लग रहा है। आरोपी पत्नी को हिरासत में लेकर विधिक कार्रवाई की जा रही है।1
- बड़ी खबर: CHC अधीक्षक ने अनुशासनहीनता की हद पार की, DM और CMO के सामने शर्ट का ऊपरी बटन खोलकर बैठे।1
- #pilibhit #Dmpilibhit #viralreelsシ #viralvideoシ #Pilibhitpolice #facebookviral #UPPolice पीलीभीत की गौशाला में तेंदुए ने ब*छ*ड़े को बनाया नि*वा*ला,1
- #pilibhit #viralreelsシ #viralvideoシ #Dmpilibhit #Pilibhitpolice #facebookviral #UPPolice #YogiAdityanath पीलीभीत में तेज रफ्तार के चलते स्कूली वैन पेड़ से टकरा गई जिसमें 8 ब*च्चे सवार थे जिनमें से तीन ब*च्चे घायल हो गए घा*य*ल ब*च्चों को देखने के लिए पीटीओ जिला अस्पताल पहुंच गए वहीं पीटीओ ने वाहन चालक का लाइसेंस निरस्त किया है पीलीभीत के थाना सुनगढ़ी क्षेत्र के नबदिया दहला के पास हुई घटना।1