प्रतापगढ़ जिले की पंडावा ग्राम पंचायत के जूना बोरिया गांव में वन विभाग की कार्रवाई से एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि बिना उचित जांच किए और भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट किए, वन विभाग ने गरीब परिवारों के आशियानों को ध्वस्त कर दिया है, जिससे कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। इस घटना के बाद पूरे गांव में भारी आक्रोश है, और पीड़ित ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है। मामले की जानकारी लेने पर पटवारी ने दावा किया कि संबंधित भूमि चरागाह भूमि है, वन विभाग की नहीं। वहीं, वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें मामले की पूरी जानकारी नहीं है, जबकि ग्रामीणों का आरोप है कि अतिक्रमण हटाने की यह कार्रवाई विभागीय निर्देशों पर ही की गई थी। ग्रामीण महिलाओं ने कार्रवाई के दौरान दुर्व्यवहार के आरोप भी लगाए, जिसमें एक महिला ने बताया कि उसके घर में छोटा बच्चा होने के बावजूद उसे जबरन घर से बाहर निकाला गया और धक्का-मुक्की की गई। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए धरियावद विधायक थावरचंद मीणा स्वयं जूना बोरिया पहुंचे और ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याएँ सुनीं। उन्होंने मौके पर वन विभाग के अधिकारियों को बुलाकर कड़ी नाराजगी जताई और चार दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि जिन परिवारों के घर तोड़े गए हैं, उनके रहने, खाने-पीने और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं तत्काल की जाएं। विधायक ने चेतावनी दी कि यदि पीड़ितों को राहत नहीं मिली तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। इस पर वन विभाग के अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि पूरे मामले की जांच की जाएगी और यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ निलंबन सहित सख्त कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों ने भी स्पष्ट चेतावनी दी है कि उनके मकानों और सामान का जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई जल्द की जाए, अन्यथा आंदोलन को और तेज किया जाएगा। विधायक थावरचंद मीणा ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि "गरीबों के आशियाने उजाड़ना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिन परिवारों को बेघर किया गया है, उनके घर तत्काल बनाए जाएं और उचित मुआवजा दिया जाए। यदि प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा।"
प्रतापगढ़ जिले की पंडावा ग्राम पंचायत के जूना बोरिया गांव में वन विभाग की कार्रवाई से एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि बिना उचित जांच किए और भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट किए, वन विभाग ने गरीब परिवारों के आशियानों को ध्वस्त कर दिया है, जिससे कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। इस घटना के बाद पूरे गांव में भारी आक्रोश है, और पीड़ित ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है। मामले की जानकारी लेने पर पटवारी ने दावा किया कि संबंधित भूमि चरागाह भूमि है, वन विभाग की नहीं। वहीं, वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें मामले की पूरी जानकारी नहीं है, जबकि ग्रामीणों का आरोप है कि अतिक्रमण हटाने की यह कार्रवाई विभागीय निर्देशों पर ही की गई थी। ग्रामीण महिलाओं ने कार्रवाई के दौरान दुर्व्यवहार के आरोप भी लगाए, जिसमें एक महिला ने बताया कि उसके घर में छोटा बच्चा होने के बावजूद उसे जबरन घर से बाहर निकाला गया और धक्का-मुक्की की गई। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए धरियावद विधायक थावरचंद मीणा स्वयं जूना बोरिया पहुंचे और ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याएँ सुनीं। उन्होंने मौके पर वन विभाग के अधिकारियों को बुलाकर कड़ी नाराजगी जताई और चार दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि जिन परिवारों के घर तोड़े गए हैं, उनके रहने, खाने-पीने और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं तत्काल की जाएं। विधायक ने चेतावनी दी कि यदि पीड़ितों को राहत नहीं मिली तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। इस पर वन विभाग के अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि पूरे मामले की जांच की जाएगी और यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ निलंबन सहित सख्त कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों ने भी स्पष्ट चेतावनी दी है कि उनके मकानों और सामान का जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई जल्द की जाए, अन्यथा आंदोलन को और तेज किया जाएगा। विधायक थावरचंद मीणा ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि "गरीबों के आशियाने उजाड़ना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिन परिवारों को बेघर किया गया है, उनके घर तत्काल बनाए जाएं और उचित मुआवजा दिया जाए। यदि प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा।"
- भारत में होने वाले 'करिश्मों' की एक और बानगी सामने आई है, जहाँ उत्तर प्रदेश के एक थाने के मालखाने से एक करोड़ रुपये का सोना (जी हाँ, पापड़ नहीं) बंदर लेकर फरार हो गए। यह घटना योगीजी के उत्तर प्रदेश से जुड़ी है, जहाँ मालखाने की छत पर सोना सुखाया जा रहा था। इस तरह की घटना को 'योगी राज' से जोड़ते हुए सवाल उठाया जा रहा है कि अगर बंदरों ने थाने से ही एक करोड़ का सोना उड़ा लिया, तो इसमें हैरानी की क्या बात है।1
- मध्य प्रदेश हेड ब्यूरो मंगल देव राठौर की एक खास रिपोर्ट में लोगों से एक 'एकदम मस्त वीडियो' देखने का आग्रह किया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, असल में बहू ही परिवार का अभिमान, स्वाभिमान और मालकिन होती है।1
- राजस्थान के बांसवाड़ा में छाजा राशन घोटाले का एक मामला सामने आया है। इस मामले में 564.78 क्विंटल गेहूं गायब हो गया है, और कुल 15.22 लाख रुपये का गबन किया गया है।1
- भारतीय क्रिकेट टीम के विश्व कप विजेता कप्तान रोहित शर्मा को भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया। इस समारोह में राष्ट्रपति ने रोहित शर्मा को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया।1
- राष्ट्रीय अफीम किसान संघ ने अफीम किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर 23 जून को एक किसान जागरण रैली आयोजित करने की घोषणा की है। यह रैली 26 जून को चित्तौड़गढ़ में प्रस्तावित एक महापड़ाव की तैयारियों के तहत निकाली जा रही है, जिसमें डूंगला, बड़ीसादड़ी, कानोड़, भिंडर और वल्लभनगर सहित कई क्षेत्रों से हजारों किसानों के शामिल होने की संभावना है। संघ के अध्यक्ष दुर्गेश जोशी ने बताया कि रैली 23 जून को सुबह 10 बजे डूंगला से शुरू होकर बड़ीसादड़ी क्षेत्र के जरखाना मोड़ पहुंचेगी। वहाँ स्थानीय किसान इसका स्वागत करेंगे और उपखंड अधिकारी को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपेंगे। इसके बाद रैली लूंणदा, अमरपुरा, मेनार और वल्लभनगर होते हुए आगे बढ़ेगी। हर पड़ाव पर क्षेत्रीय किसान रैली का स्वागत करेंगे और संबंधित उपखंड अधिकारियों को 8 सूत्रीय मांगपत्र प्रस्तुत किया जाएगा। रात्रि विश्राम इटली गांव में प्रस्तावित है। जोशी ने आगे बताया कि 24 जून को यह रैली मावली, भूपालसागर, कपासन और राशमी क्षेत्रों में पहुंचेगी, जहाँ किसानों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा। संघ का कहना है कि अफीम किसानों पर डोडा-चूरा नष्ट करने का लगातार दबाव बनाया जा रहा है, जबकि उनका वर्षों पुराना बकाया डोडा-चूरा अभी तक लंबित है। किसानों की मुख्य मांग है कि बिना उचित मुआवजे के नष्टीकरण की कोई कार्रवाई न की जाए और उनकी अन्य लंबित मांगों का भी जल्द समाधान किया जाए। संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि किसानों की 8 सूत्रीय मांगों को लेकर 26 जून को चित्तौड़गढ़ में महापड़ाव आयोजित किया जाएगा। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि आवश्यकता पड़ी, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसमें आमरण अनशन जैसे कड़े कदम भी उठाए जा सकते हैं, क्योंकि यह अफीम किसानों के अधिकारों की लड़ाई है और 26 जून के महापड़ाव की तैयारी तेजी से चल रही है।1
- आसपुर के सोम कमला आबा बांध के ग्रामीण पिछले 40 वर्षों से आवासीय पट्टों का इंतजार कर रहे हैं, जिसके कारण वे विभिन्न सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। डूब क्षेत्र से विस्थापित हुए करीब 50 से 60 परिवार, जो अमृतिया ग्राम पंचायत क्षेत्र से उजाड़े गए थे, पिछले पांच दशकों से अपने आवासीय पट्टों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते थक चुके हैं। ग्रामीणों के अनुसार, 1980 से ही उन्हें यह उम्मीद थी कि पूर्व में सरकार और प्रशासन आवासीय पट्टे देकर उन्हें पुनर्स्थापित करने का अपना वादा पूरा करेगा। पट्टे न मिलने के कारण इन ग्रामीणों ने अब पंचायत में लगे ग्राम सेवा शिविर में न्याय की गुहार लगाई है। इस मामले को लेकर विधायक उमेश डामोर ने जिला कलेक्टर देशल दान को ग्रामीणों की परेशानी से अवगत कराया है। विधायक ने कलेक्टर से आग्रह किया है कि गरीब लोगों को उनके आशियाने का मालिकाना हक दिया जाए, ताकि उनका 40 साल का लंबा इंतजार खत्म हो सके और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल पाए।1
- मध्य प्रदेश हेड ब्यूरो मंगल देव राठौर की एक खास रिपोर्ट के मुताबिक, इंदौर के शिशुकुंज स्कूल में सैकड़ों बच्चे अचानक बीमार पड़ गए हैं। इस घटना की जानकारी मिलते ही अभिभावक बड़ी संख्या में स्कूल पहुँच गए।1
- राजस्थान के बांसवाड़ा में बाल श्रम से जुड़ा एक बड़ा खुलासा हुआ है। इस घटना में एक ईंट भट्टे से एक नाबालिग बालक को मुक्त कराया गया। यह मामला मनोहर सिंह राजपूत केस से संबंधित है।1
- कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) के नतीजे घोषित होने के साथ ही देश को एक नई एजुकेशनल आइकॉन मिल गई है। इस वर्ष की CUET परीक्षा में पूरे देश में पहली रैंक (All India Rank 1) हासिल करने वाली देविना अब देश के लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं। देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए आयोजित होने वाली इस बेहद कठिन और प्रतिस्पर्धी परीक्षा में शीर्ष स्थान प्राप्त करना एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) के साथ एक विशेष बातचीत में, देविना ने अपनी इस शानदार और ऐतिहासिक यात्रा के हर छोटे-बड़े पहलू को खुलकर साझा किया है।1