महापुरुषों के कारवां के साथ निकली डॉ. अंबेडकर शोभायात्रा, 'जय भीम' के नारों से गूंजा हिसुआ हिसुआ : संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर रविवार को हिसुआ नगर में श्रद्धा और उत्साह का सैलाब उमड़ पड़ा। 'अंबेडकर शोभायात्रा' के दौरान हजारों की संख्या में जुटे अंबेडकरवादियों ने नीले झंडों और जय भीम के गगनभेदी उद्घोष से पूरे शहर को गुंजायमान कर दिया। झांकियां रहीं आकर्षण का केंद्र : शोभायात्रा की सबसे खास बात इसमें शामिल महापुरुषों की जीवंत झांकियां थीं। भगवान बुद्ध, ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले ,महाराजा बिजली पासी ,भगवान बिरसा मुंडा ,एतवा रजवार ,कांशीराम ,संत रविदास ,साहू जी महाराज चंद्रशेखर आजाद रावण और बाबा साहब समेत अन्य के जीवन दर्शन को दर्शाती झांकियों ने लोगों का मन मोह लिया। युवाओं और महिलाओं की टोली हाथों में भारत का संविधान और नीला झंडा थामे समतामूलक समाज के निर्माण का संकल्प दोहरा रही थी। समतामूलक समाज का संकल्प: शोभायात्रा में शामिल भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र राजवंशी ने कहा, "आज की यह भीड़ केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि बाबा साहब के उस सपने को पूरा करने की प्रतिबद्धता है, जिसमें ऊंच-नीच और भेदभाव का कोई स्थान न हो। हम संविधान की रक्षा के लिए संकल्पित हैं।" शिक्षा ही एकमात्र हथियार: युवाओं को संबोधित करते हुए गौरव गजराज ने 'शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो' के नारे पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने जो कलम की ताकत हमें दी है, उसी के जरिए हम समाज की मुख्यधारा में मजबूती से खड़े हो सकते हैं। यात्रा में शामिल उपमुख्य पार्षद टिंकू चौधरी ने सावित्रीबाई फुले का स्मरण करते हुए कहा कि आज की नारी शिक्षित और जागरूक हो रही है, यह बाबा साहब की ही देन है। समाज के सर्वांगीण विकास के लिए महिलाओं का आगे आना अनिवार्य है। सुरक्षा के कड़े इंतजाम : हजारों की भीड़ को देखते हुए हिसुआ पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। शोभायात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए गुजरी, जहां जगह-जगह लोगों ने पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। अन्य वक्ताओं ने कहा यह शोभायात्रा केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि समाज के वंचित और शोषित वर्ग की एकजुटता का प्रतीक बनकर उभरी। हिसुआ की सड़कों पर उमड़ा यह कारवां इस बात का प्रमाण है कि बाबा साहब के विचार आज भी करोड़ों दिलों में मशाल की तरह जल रहे हैं। मौके पार भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र राजवंशी, भीम आर्मी नवादा नगर अध्यक्ष बिल्लू चौधरी, प्रदेश उपाध्यक्ष निशांत चौधरी, हिसुआ नगर उपाध्यक्ष टिंकू चौधरी ,अशोक चौधरी ,संजय चौधरी ,सुरेश चौधरी ,गौतम चौधरी ,सकलदेव मांझी ,विनोद रविदास ,दिलीप अधिवक्ता ,अरविंद सिंह ,जिला परिषद उमेश यादव ,तुलसी चौधरी ,सुबोध कुमार ,दीनबंधु मांझी ,रामकरण पासवान ,रंजीत चौधरी ,कौशल कुमार, पिंटू पासवान, जोगिंदर राजवंशी, प्रिंस चौधरी, अमन कुमार, संतोष कुमार, चंदन चौधरी, विनय चौधरी , कौशल चौधरी , सकलदेव मांझी ,मुकेश मांझी ,मोहम्मद कलाम ,असगर अली ,मिथुन चौधरी आदि लोग उपस्थित हुए हैं।
महापुरुषों के कारवां के साथ निकली डॉ. अंबेडकर शोभायात्रा, 'जय भीम' के नारों से गूंजा हिसुआ हिसुआ : संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर रविवार को हिसुआ नगर में श्रद्धा और उत्साह का सैलाब उमड़ पड़ा। 'अंबेडकर शोभायात्रा' के दौरान हजारों की संख्या में जुटे अंबेडकरवादियों ने नीले झंडों और जय भीम के गगनभेदी उद्घोष से पूरे शहर को गुंजायमान कर दिया। झांकियां रहीं आकर्षण का केंद्र : शोभायात्रा की सबसे खास बात इसमें शामिल महापुरुषों की जीवंत झांकियां थीं। भगवान बुद्ध, ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले ,महाराजा बिजली पासी ,भगवान बिरसा मुंडा ,एतवा रजवार ,कांशीराम ,संत रविदास ,साहू जी महाराज चंद्रशेखर आजाद रावण और बाबा साहब समेत अन्य के जीवन दर्शन को दर्शाती झांकियों ने लोगों का मन मोह लिया। युवाओं और महिलाओं की टोली हाथों में भारत का संविधान और नीला झंडा थामे समतामूलक समाज के निर्माण का संकल्प दोहरा रही थी। समतामूलक समाज का संकल्प: शोभायात्रा में शामिल भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र राजवंशी ने कहा, "आज की यह भीड़ केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि बाबा साहब के उस सपने को पूरा करने की प्रतिबद्धता है, जिसमें ऊंच-नीच और भेदभाव का कोई स्थान न हो। हम संविधान की रक्षा के लिए संकल्पित हैं।" शिक्षा ही एकमात्र हथियार: युवाओं को संबोधित करते हुए गौरव गजराज ने 'शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो' के नारे पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने जो कलम की ताकत हमें दी है, उसी के जरिए हम समाज की मुख्यधारा में मजबूती से खड़े हो सकते हैं। यात्रा में शामिल उपमुख्य पार्षद टिंकू चौधरी ने सावित्रीबाई फुले का स्मरण करते हुए कहा कि आज की नारी शिक्षित और जागरूक हो रही है, यह बाबा साहब की ही देन है। समाज के सर्वांगीण विकास के लिए महिलाओं का आगे आना अनिवार्य है। सुरक्षा के कड़े इंतजाम : हजारों की भीड़ को देखते हुए हिसुआ पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। शोभायात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए गुजरी, जहां जगह-जगह लोगों ने पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। अन्य वक्ताओं ने कहा यह शोभायात्रा केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि समाज के वंचित और शोषित वर्ग की एकजुटता का प्रतीक बनकर उभरी। हिसुआ की सड़कों पर उमड़ा यह कारवां इस बात का प्रमाण है कि बाबा साहब के विचार आज भी करोड़ों दिलों में मशाल की तरह जल रहे हैं। मौके पार भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र राजवंशी, भीम आर्मी नवादा नगर अध्यक्ष बिल्लू चौधरी, प्रदेश उपाध्यक्ष निशांत चौधरी, हिसुआ नगर उपाध्यक्ष टिंकू चौधरी ,अशोक चौधरी ,संजय चौधरी ,सुरेश चौधरी ,गौतम चौधरी ,सकलदेव मांझी ,विनोद रविदास ,दिलीप अधिवक्ता ,अरविंद सिंह ,जिला परिषद उमेश यादव ,तुलसी चौधरी ,सुबोध कुमार ,दीनबंधु मांझी ,रामकरण पासवान ,रंजीत चौधरी ,कौशल कुमार, पिंटू पासवान, जोगिंदर राजवंशी, प्रिंस चौधरी, अमन कुमार, संतोष कुमार, चंदन चौधरी, विनय चौधरी , कौशल चौधरी , सकलदेव मांझी ,मुकेश मांझी ,मोहम्मद कलाम ,असगर अली ,मिथुन चौधरी आदि लोग उपस्थित हुए हैं।
- Post by News Of Nawada1
- दखिनगाँव चौक का नाम बदलने पर बवाल, 24 घंटे के भीतर शुरू हुआ विरोध वज़ीरगंज प्रखंड के दखिनगाँव चौक का नाम बदलकर “परशुराम चौक” किए जाने के महज चौबीस घंटे के भीतर ही इलाके में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह सिर्फ एक नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि उनके गांव की पहचान और इतिहास से जुड़ा मामला है। ग्रामीणों का कहना है कि भगवान परशुराम के प्रति उनकी गहरी आस्था है और उनके नाम पर चौक का नामकरण करने से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन “दखिनगाँव” नाम सदियों से चला आ रहा है, जो उनके पूर्वजों की विरासत और पहचान का प्रतीक है। ऐसे में इस नाम को पूरी तरह हटाना उचित नहीं है। स्थानीय लोगों ने बताया कि दखिनगाँव नाम सिर्फ एक जगह का नाम नहीं, बल्कि यहां के इतिहास, संस्कृति और सामाजिक पहचान से जुड़ा हुआ है। “हमारे पूर्वजों ने इस गांव को बसाया, तब से यह दखिनगाँव के नाम से जाना जाता है। अगर नाम ही बदल दिया जाएगा, तो आने वाली पीढ़ी अपने इतिहास से कैसे जुड़ पाएगी,” एक ग्रामीण ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा। कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि अगर भगवान परशुराम के नाम पर सम्मान देना है, तो संयुक्त नाम रखा जा सकता है, जैसे “दखिनगाँव परशुराम चौक”, ताकि आस्था और परंपरा दोनों का सम्मान बना रहे। वहीं, इस मुद्दे पर सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। गांव के बुजुर्गों और युवाओं के बीच लगातार बैठकें हो रही हैं, जिसमें इस नामकरण के फैसले पर पुनर्विचार की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि बिना व्यापक जनमत के इस तरह का फैसला लेना उचित नहीं है। फिलहाल यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है और प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों तक इस पर प्रतिक्रिया की उम्मीद की जा रही है। अगर समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो यह विवाद और गहरा सकता है।1
- भीम आर्मी जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र राजवंशी जी के अगुवाई में आज 19 अप्रैल 2026 को बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी के 135वां जयंती के सिलसिले और मौका पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई जिसमें चाहने वालों का उमड़ा जनसैलाब।1
- रब ने बना दी जोड़ी। जुबेद और खदीजा दोनों करते से मोहब्बत। दोनों ने रस्मो रिवाज के साथ कर ली शादी। बैंड बाजा के साथ गई बारात, दूल्हा ने दुल्हन को ले आए अपने साथ।1
- Post by PKHINDINEWS1
- 10 रुपये की. झालमुरी खाते दिखे प्रधानमंत्री, वीडियो वायरल संजय वर्मा " सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि भारत के प्रधानमंत्री एक साधारण भेलपुरी की दुकान पर पहुंचकर मात्र 10 रुपये की झालमुरी का आनंद लेते नजर आ रहे हैं। वीडियो में दिख रहा है कि प्रधानमंत्री बेहद सादगी के साथ आम लोगों के बीच खड़े होकर झालमुरी खाते हैं। इस दौरान वहां मौजूद लोगों की भारी भीड़ जुट जाती है और कई लोग अपने मोबाइल फोन से इस पल को कैद करते दिखाई देते हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे प्रधानमंत्री की सादगी और आम जनता से जुड़ाव का प्रतीक बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे राजनीतिक नजरिए से भी देख रहे हैं। खासकर पश्चिम बंगाल की राजनीति के संदर्भ में इस वीडियो को जोड़ते हुए चर्चा हो रही है कि इस तरह की छवि का आगामी समय में असर पड़ सकता है। हालांकि, इस वायरल वीडियो की सत्यता की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कई बार सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो पुराने, संपादित या भ्रामक भी हो सकते हैं। ऐसे में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों की जांच करना आवश्यक है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के दृश्य आम जनता के बीच नेताओं की छवि को प्रभावित करते हैं। सादगी और आम लोगों के बीच उपस्थिति लोगों को आकर्षित करती है, लेकिन इसका वास्तविक राजनीतिक प्रभाव कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है। फिलहाल, यह वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।1
- @नवादा #जन सुराज के जिलाध्यक्ष बने त्रिवेणी सिंह, महिलाध्यक्ष बनीं सुलेखा #मिथिलेश सिंह #सरस्वती देवी को मुख्य प्रवक्ता की जिम्मेदारी नए अध्यक्ष ने कहा : जिले में जन सुराज को पंचायत स्तर पर मजबूत करेंगे नवादा लाइव नेटवर्क। जिले के मॉडर्न इंग्लिश स्कूल सभागार में रविवार को जन सुराज पार्टी के जिला सलाहकार समिति और जिला एकल पदाधिकारियों के नामों की घोषणा की गई। जन सुराज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने नव नियुक्त पदाधिकारियों की सूची जारी की। इस दौरान मनोज भारती ने नवादा के नए जिलाध्यक्ष के रूप में त्रिवेणी सिंह, महामंत्री सरयू प्रसाद कुशवाहा, कोषाध्यक्ष ललन शर्मा, महिला अध्यक्ष सुलेखा कुमारी, मुख्य प्रवक्ता मिथिलेश प्रसाद सिंह, सरस्वती देवी सहित अन्य पदाधिकारियों के नामों की घोषणा की। नवनियुक्त पदाधिकारियों को पुष्प माला पहनाकर पदभार ग्रहण करवाया गया। जिलाध्यक्ष त्रिवेणी सिंह ने कहा कि जिले में जन सुराज को गांव-गांव, पंचायत स्तर पर मजबूत करेंगे। वर्तमान में जन सुराज ही विपक्ष के रूप में जनता के सामने दिख रही है, हम जनता के दिलों में जरूर हैं, हम जनता के बीच रहकर जनता के मुद्दों को उठाएंगे। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने कहा कि नालंदा क्षेत्रीय कोर कमिटी की अनुशंसा के आधार पर नवादा जिला की सलाहकार समिति एवं जिला एकल पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई है। वहीं, प्रदेश अध्यक्ष ने नियुक्त तमाम पदाधिकारियों को बधाई दी। साथ ही सभी जिला एकल पदाधिकारियों को जिम्मेदारी भी दी कि पार्टी के विस्तार के लिए 15 दिनों में अपनी जिला कमिटी की सूची क्षेत्रीय कमिटी को सौंपे। कार्यक्रम में प्रदेश प्रवक्ता सैयद मसीह उद्दीन, डॉ मधुकर कुमार, अजय कुमार सहित अन्य लोग मौजूद रहे। जिला सलाहकार समिति पर एक नजर.... कमल किशोर बिंदु, अशोक कुमार सिंह, राधा देवी, पृथ्वीराज बसंत, मो. हैदर साकिब को जिला सलाहकार समिति का सदस्य बनाया गया है। जिला पदाधिकारियों की सूची पर एक नजर... जिलाध्यक्ष त्रिवेणी सिंह, महामंत्री सरयू प्रसाद कुशवाहा, कोषाध्यक्ष सह कार्यालय प्रभारी ललन शर्मा, महिला अध्यक्ष सुलेखा कुमारी, युवा अध्यक्ष नीरज कुमार, किसान अध्यक्ष मुकेश कुमार बब्लू, बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ अध्यक्ष डॉक्टर रविन्द्र प्रसाद सिंह, व्यावसायिक प्रकोष्ठ अध्यक्ष राहुल कुमार,ओबीसी प्रकोष्ठ अध्यक्ष सुरेंद्र यादव, अंबेडकर मंच अध्यक्ष देवराज पासवान, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ अध्यक्ष हाजी ज़ुबैर आलम, मुख्य प्रवक्ता मिथिलेश प्रसाद सिंह और सरस्वती देवी।4
- जय जय परशुराम के उद्घोष से गूंज उठा दखिनगाँव, चौक का हुआ नामकरण! वज़ीरगंज प्रखंड अंतर्गत दखिनगाँव में उस समय भक्ति और उत्साह का अद्भुत माहौल देखने को मिला, जब पूरे गाँव के लोग एक स्वर में जय जय परशुराम के जयघोष से दखिनगाँव चौक को गूंजयमान कर दिए । आपको बता दे की वज़ीरगंज के दखिनगाँव चौक का विधिवत नामकरण हुआ अब उसे परशुराम चौक के नाम से जाना जाएगा। इस ऐतिहासिक पहल से ग्रामीणों में खासा उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम का आयोजन स्थानीय ग्रामीणों एवं समाज के गणमान्य लोगों के सहयोग से किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु और युवा वर्ग उपस्थित रहे। चौक पर भगवान परशुराम के आदर्शों, उनके जीवन और पराक्रम का विस्तार से वर्णन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि भगवान परशुराम केवल एक योद्धा ही नहीं, बल्कि धर्म और न्याय के प्रतीक थे। भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। उनका जन्म ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के घर हुआ था। वे बचपन से ही अत्यंत तेजस्वी, विद्वान और पराक्रमी थे। उन्हें भगवान शिव से फरसा प्राप्त हुआ, जिसके कारण उनका नाम परशुराम पड़ा। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब पृथ्वी पर अत्याचार और अधर्म बढ़ गया था, तब भगवान परशुराम ने अन्यायी और अत्याचारी क्षत्रियों के खिलाफ युद्ध किया और इक्कीस बार पृथ्वी को अत्याचार से मुक्त कराया। उनका जीवन सत्य, धर्म और न्याय की रक्षा के लिए समर्पित रहा। कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि भगवान परशुराम ने समाज को यह संदेश दिया कि अन्याय के खिलाफ खड़े होना ही सच्चा धर्म है। उनका जीवन संघर्ष, साहस और धर्म की रक्षा का प्रतीक है।चौक के नामकरण के अवसर पर पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल रहा। युवाओं ने झंडा, बैनर के साथ जुलूस निकाला, वहीं बुजुर्गों ने इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। कई लोगों ने कहा कि परशुराम चौक नाम से नई पीढ़ी को अपने धर्म और संस्कृति के प्रति जागरूकता मिलेगी। अंत में उपस्थित लोगों ने एक स्वर में भगवान परशुराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक भावना को मजबूत किया, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक जागरूकता का भी संदेश दिया।1