चन्द्रायण रेफरल अस्पताल में फर्जी उपस्थिति का बड़ा खेल उजागर सहरसा जिले के नवहट्टा प्रखंड क्षेत्र के चन्द्रायण रेफरल अस्पताल में लापरवाही और मनमानी का बड़ा खेल सामने आया है। यहां तैनात चिकित्सक डॉ. संतोष कुमार पर गंभीर आरोप लगे हैं कि वे अस्पताल में नियमित रूप से ड्यूटी नहीं करते, फिर भी पूरे सप्ताह और महीने की उपस्थिति दर्ज कर लेते हैं। स्थानीय सूत्रों और अस्पताल कर्मियों के अनुसार, डॉक्टर संतोष कुमार कभी सप्ताह में एक दिन तो कभी महीने में एक बार ही अस्पताल पहुंचते हैं। इतना ही नहीं, कई बार तो वे अस्पताल आए बिना ही उपस्थिति पंजी अपने पास मंगाकर हस्ताक्षर कर लेते हैं। इस पूरे मामले में सवाल उठता है कि क्या स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पूरी तरह फेल हो चुकी है, या फिर पैसों के खेल में नियम-कानून को दरकिनार किया जा रहा है। वहीं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नवहट्टा और रेफरल अस्पताल चन्द्रायण के प्रभारी डॉ. संजीव कुमार सिंह पर भी मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं, जिससे यह फर्जीवाड़ा लगातार जारी है। अस्पताल में तैनात डॉक्टर बुद्धदेव टुड्डू ने भी पुष्टि की है कि डॉ. संतोष कुमार कभी-कभार ही अस्पताल आते हैं और औपचारिकता पूरी कर चले जाते हैं।
चन्द्रायण रेफरल अस्पताल में फर्जी उपस्थिति का बड़ा खेल उजागर सहरसा जिले के नवहट्टा प्रखंड क्षेत्र के चन्द्रायण रेफरल अस्पताल में लापरवाही और मनमानी का बड़ा खेल सामने आया है। यहां तैनात चिकित्सक डॉ. संतोष कुमार पर गंभीर आरोप लगे हैं कि वे अस्पताल में नियमित रूप से ड्यूटी नहीं करते, फिर भी पूरे सप्ताह और महीने की उपस्थिति दर्ज कर लेते हैं। स्थानीय सूत्रों और अस्पताल कर्मियों के अनुसार, डॉक्टर संतोष कुमार कभी सप्ताह में एक दिन तो कभी महीने में एक बार ही अस्पताल पहुंचते हैं। इतना ही नहीं, कई बार तो वे अस्पताल आए बिना ही उपस्थिति पंजी अपने पास मंगाकर हस्ताक्षर कर लेते हैं। इस पूरे मामले में सवाल उठता है कि क्या स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पूरी तरह फेल हो चुकी है, या फिर पैसों के खेल में नियम-कानून को दरकिनार किया जा रहा है। वहीं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नवहट्टा और रेफरल अस्पताल चन्द्रायण के प्रभारी डॉ. संजीव कुमार सिंह पर भी मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं, जिससे यह फर्जीवाड़ा लगातार जारी है। अस्पताल में तैनात डॉक्टर बुद्धदेव टुड्डू ने भी पुष्टि की है कि डॉ. संतोष कुमार कभी-कभार ही अस्पताल आते हैं और औपचारिकता पूरी कर चले जाते हैं।
- सहरसा जिले के नवहट्टा प्रखंड क्षेत्र के चन्द्रायण रेफरल अस्पताल में लापरवाही और मनमानी का बड़ा खेल सामने आया है। यहां तैनात चिकित्सक डॉ. संतोष कुमार पर गंभीर आरोप लगे हैं कि वे अस्पताल में नियमित रूप से ड्यूटी नहीं करते, फिर भी पूरे सप्ताह और महीने की उपस्थिति दर्ज कर लेते हैं। स्थानीय सूत्रों और अस्पताल कर्मियों के अनुसार, डॉक्टर संतोष कुमार कभी सप्ताह में एक दिन तो कभी महीने में एक बार ही अस्पताल पहुंचते हैं। इतना ही नहीं, कई बार तो वे अस्पताल आए बिना ही उपस्थिति पंजी अपने पास मंगाकर हस्ताक्षर कर लेते हैं। इस पूरे मामले में सवाल उठता है कि क्या स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पूरी तरह फेल हो चुकी है, या फिर पैसों के खेल में नियम-कानून को दरकिनार किया जा रहा है। वहीं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नवहट्टा और रेफरल अस्पताल चन्द्रायण के प्रभारी डॉ. संजीव कुमार सिंह पर भी मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं, जिससे यह फर्जीवाड़ा लगातार जारी है। अस्पताल में तैनात डॉक्टर बुद्धदेव टुड्डू ने भी पुष्टि की है कि डॉ. संतोष कुमार कभी-कभार ही अस्पताल आते हैं और औपचारिकता पूरी कर चले जाते हैं।1
- सहरसा जिले के नौहट्टा प्रखंड अंतर्गत मोहनपुर स्थित प्रसिद्ध काली मंदिर में चोरी की एक सनसनीखेज घटना सामने आई है। मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरे में एक चोर की सारी करतूत कैद हो गई है, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया है। सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, यह घटना 25 अप्रैल 2026 की सुबह लगभग 10:18 बजे की है। वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि एक युवक, जिसने काले रंग की टी-शर्ट पहनी हुई है, मंदिर परिसर में दाखिल होता है। पहले वह मंदिर के मुख्य द्वार के सामने हाथ जोड़कर प्रार्थना करने का नाटक करता है ताकि किसी को उस पर शक न हो। इसके बाद, वह मौका देखकर मंदिर के दान पात्र या कीमती सामान की ओर बढ़ता है। चोर ने बड़ी ही चालाकी से मंदिर में हाथ साफ किया और वहां से फरार हो गया। मंदिर प्रशासन को चोरी का पता तब चला जब उन्होंने सामान गायब देखा और सीसीटीवी फुटेज की जांच की। दिनदहाड़े मंदिर जैसी पवित्र जगह पर हुई इस चोरी से स्थानीय ग्रामीणों में काफी आक्रोश है। मंदिर की सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएं।1
- Post by मिथिलेश कुमार1
- Sanjay tigariyami ke pass1
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- सहरसा सदर अस्पताल एक बार फिर सवालों के घेरे में है… जहां एक प्रसूता की मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतका की पहचान महिषी प्रखंड के उत्तरी महिषी पंचायत, वार्ड संख्या 10 निवासी 30 वर्षीय प्रिया झा के रूप में हुई है… जिन्हें 20 अप्रैल को प्रसव के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बताया जा रहा है कि ऑपरेशन के जरिए उन्होंने एक स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया… और शुरुआत में जच्चा-बच्चा दोनों की हालत सामान्य थी। लेकिन परिजनों के अनुसार, सोमवार रात करीब 8 बजे तक सब कुछ ठीक था… इसके बाद जब मंगलवार सुबह करीब 6 बजे अस्पताल से फोन आया, तो उन्हें बताया गया कि मरीज की हालत अचानक बिगड़ गई है। परिजन जब अस्पताल पहुंचे, तो हालात बेहद गंभीर हो चुके थे… आरोप है कि तबीयत बिगड़ने के बावजूद समय पर न तो डॉक्टर मौजूद थे और न ही इमरजेंसी में समुचित इलाज मिल सका। परिजनों का कहना है कि अगर समय रहते डॉक्टर पहुंच जाते… तो मरीज को बड़े अस्पताल रेफर कर उसकी जान बचाई जा सकती थी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि रात की ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर सुबह तक आखिर कहां थे…? इलाज में कथित लापरवाही के कारण प्रिया की हालत लगातार बिगड़ती गई… और अंततः उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों में आक्रोश है… और अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। गौरतलब है कि इसी महीने सहरसा सदर अस्पताल को कायाकल्प योजना के तहत बिहार में प्रथम स्थान मिला था… लेकिन ताजा घटना ने इन दावों की जमीनी हकीकत पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।1