हादसा या लापरवाही? पेड़ से टकराने या अज्ञात वाहन की टक्कर की आशंका, पुष्टि के पह हादसा या लापरवाही? पेड़ से टकराने या अज्ञात वाहन की टक्कर की आशंका, पुष्टि के पहले ही बुझ गया घर का चिराग दर्दनाक खबर महगामा मोड़ मंगलवार की शाम उस वक्त खामोश गवाह बन गया, जब सड़क किनारे एक गड्ढे में एक युवक जिंदगी और मौत से जूझता मिला। युवक की पहचान सिउड़ी गांव निवासी विवेकानंद चौधरी के पुत्र प्रीतम चौधरी के रूप में हुई, जो अमरपुर शहर में एक निजी प्रतिष्ठान में काम करता था। मंगलवार की सुबह करीब 7 बजे चूड़ा-दालमोट खाकर काम के लिए निकले प्रीतम को क्या पता था कि यह सफर उसका आखिरी सफर बन जाएगा। दोपहर करीब 3 बजे महगामा मोड़ के पास उसकी बाइक क्षतिग्रस्त अवस्था में सड़क किनारे मिली, जबकि प्रीतम गंभीर रूप से जख्मी और बेहोशी की हालत में पड़ा था। स्थानीय लोगों के अनुसार, आशंका जताई जा रही है कि या तो बाइक अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गई, या फिर किसी अज्ञात वाहन ने उसे टक्कर मार दी। हालांकि, हादसे के वास्तविक कारणों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है और पुलिस मामले की जांच कर रही है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि प्रीतम को लंबे समय तक मौके पर ही मदद का इंतजार करना पड़ा। सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक युवक की हालत बेहद नाजुक हो चुकी थी। काफी देर बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां से मायागंज अस्पताल, भागलपुर रेफर किया गया। लेकिन वक्त हाथ से निकल चुका था। मायागंज अस्पताल में इलाज के दौरान प्रीतम चौधरी ने दम तोड़ दिया। उसकी मौत की खबर मिलते ही गांव और शहर में मातम पसर गया। टूट गया परिवार का सहारा प्रीतम की शादी वर्ष 2019 में मड़वा जयरामपुर की काजल देवी से हुई थी। आज पत्नी के सिर से सुहाग उजड़ गया। घर में पांच साल का बेटा प्रतीक और तीन साल की बेटी वैष्णवी हैं, जो अभी यह भी नहीं समझ पा रहे कि उनके पिता अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। बूढ़े माता-पिता बदहवास हैं। एक पल में हंसता-खेलता घर शोक और सन्नाटे में डूब गया। सवाल जो जवाब मांगते हैं स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रीतम को हादसे के तुरंत बाद अस्पताल पहुंचाया जाता, तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी। अब सवाल यह है कि यह मौत सिर्फ एक सड़क हादसा थी या सिस्टम की देरी भी इसकी जिम्मेदार है? फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही हादसे की सच्चाई सामने आ पाएगी।
हादसा या लापरवाही? पेड़ से टकराने या अज्ञात वाहन की टक्कर की आशंका, पुष्टि के पह हादसा या लापरवाही? पेड़ से टकराने या अज्ञात वाहन की टक्कर की आशंका, पुष्टि के पहले ही बुझ गया घर का चिराग दर्दनाक खबर महगामा मोड़ मंगलवार की शाम उस वक्त खामोश गवाह बन गया, जब सड़क किनारे एक गड्ढे में एक युवक जिंदगी और मौत से जूझता मिला। युवक की पहचान सिउड़ी गांव निवासी विवेकानंद चौधरी के पुत्र प्रीतम चौधरी के रूप में हुई, जो अमरपुर शहर में एक निजी प्रतिष्ठान में काम करता था। मंगलवार की सुबह करीब 7 बजे चूड़ा-दालमोट खाकर काम के लिए निकले प्रीतम को क्या पता था कि यह सफर उसका आखिरी सफर बन जाएगा। दोपहर करीब 3 बजे महगामा मोड़ के पास उसकी बाइक क्षतिग्रस्त अवस्था में सड़क किनारे मिली, जबकि प्रीतम गंभीर रूप से जख्मी और बेहोशी की हालत में पड़ा था। स्थानीय लोगों के अनुसार, आशंका जताई जा रही है कि या तो बाइक अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गई, या फिर किसी अज्ञात वाहन ने उसे टक्कर मार दी। हालांकि, हादसे के वास्तविक कारणों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है और पुलिस मामले की जांच कर रही है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि प्रीतम को लंबे समय तक मौके पर ही मदद का इंतजार करना पड़ा। सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक युवक की हालत बेहद नाजुक हो चुकी थी। काफी देर बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां से मायागंज अस्पताल, भागलपुर रेफर किया गया। लेकिन वक्त हाथ से निकल चुका था। मायागंज अस्पताल में इलाज के दौरान प्रीतम चौधरी ने दम तोड़ दिया। उसकी मौत की खबर मिलते ही गांव और शहर में मातम पसर गया। टूट गया परिवार का सहारा प्रीतम की शादी वर्ष 2019 में मड़वा जयरामपुर की काजल देवी से हुई थी। आज पत्नी के सिर से सुहाग उजड़ गया। घर में पांच साल का बेटा प्रतीक और तीन साल की बेटी वैष्णवी हैं, जो अभी यह भी नहीं समझ पा रहे कि उनके पिता अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। बूढ़े माता-पिता बदहवास हैं। एक पल में हंसता-खेलता घर शोक और सन्नाटे में डूब गया। सवाल जो जवाब मांगते हैं स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रीतम को हादसे के तुरंत बाद अस्पताल पहुंचाया जाता, तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी। अब सवाल यह है कि यह मौत सिर्फ एक सड़क हादसा थी या सिस्टम की देरी भी इसकी जिम्मेदार है? फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही हादसे की सच्चाई सामने आ पाएगी।
- अमरपुर में अवैध बूचड़खानों पर नगर पंचायत का सख्त एक्शन, बिना ट्रेड लाइसेंस मांस-मछली बिक्री पर छापेमारी शुरू खुले में कट रहा मांस-मुर्गा, गंदगी और बीमारी का खतरा बढ़ा, ईओ ने दी कड़ी चेतावनी अमरपुर नगर पंचायत क्षेत्र में अवैध बूचड़खानों और बिना ट्रेड लाइसेंस मांस-मछली व खान-पान सामग्री अन्य सामग्री बेचने वालों के खिलाफ प्रशासन सख्त हो गया है। ईओ अनुराग कुमार के निर्देश पर लगातार छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है। खुले में मांस-मुर्गा काटने, गंदगी फैलाने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना और कार्रवाई तय है। नगर पंचायत ने साफ संदेश दिया है—ट्रेड लाइसेंस नहीं, तो दुकान नहीं।” अमरपुर नगर पंचायत क्षेत्र में मांस, मछली और मुर्गा की बिक्री से जुड़े नियम-कानूनों की खुलेआम अनदेखी सामने आ रही है। शहर के मुख्य बाजार, बस स्टैंड चौक से लेकर रेफरल अस्पताल तक करीब बीस से अधिक दुकानें बिना किसी वैध ट्रेड लाइसेंस के संचालित हो रही हैं। इन दुकानों पर खुले में मांस, मछली और मुर्गे काटे जा रहे हैं, साथ ही अन्य सामग्री बेचा जाता है जिससे भारी गंदगी फैल रही है और पर्यावरण प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। जहां-जहां अवैध बूचड़खाने संचालित हैं, वहां न तो पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था है और न ही साफ-सफाई। खून मिला गंदा पानी सीधे नालियों में बहाया जा रहा है, जिससे दुर्गंध के साथ-साथ संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। समाजसेवी ने बताया कि इन इलाकों में मच्छर, मक्खी और कीड़ों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे आम नागरिकों का स्वास्थ्य गंभीर खतरे में है। लोगों का कहना है कि अवैध बूचड़खानों पर प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने से दुकानदारों के हौसले बुलंद हैं। इस पूरे मामले पर नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) अनुराग कुमार ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा कि मांस-मछली और खान-पान सामग्री की बिक्री के लिए ट्रेड लाइसेंस अनिवार्य है। बिना लाइसेंस खुले में मांस, मछली और मुर्गा बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ईओ ने बताया कि एक विशेष टीम का गठन कर लगातार छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है और ट्रेड लाइसेंस नहीं होने पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।1
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- नये प्रखंड कार्यालय भवन निर्माण की जमीन का प्रखंड प्रमुख की उपस्थिति में भवन निर्माण विभाग के अभियंता ने किया निरीक्षण1
- BSSC चेयरमैन आलोक राज का इस्तीफा, माफिया दबाव का आरोप इस्तीफे के पीछे ‘सेटिंग–धांधली’ का डर? छात्र नेता का बड़ा दावा बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) के चेयरमैन आलोक राज के इस्तीफे को लेकर सियासी और छात्र राजनीति में हलचल तेज हो गई है। छात्र नेता दिलीप कुमार ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि यह इस्तीफा माफियाओं के दबाव में दिया गया है। दिलीप कुमार का आरोप है कि BSSC में बड़ी धांधली और सेटिंग की आशंका थी, और पूरे मामले के उजागर होने के डर से चेयरमैन ने पद छोड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो कई प्रभावशाली चेहरे बेनकाब हो सकते हैं। हालांकि, इस पूरे मामले में BSSC या आलोक राज की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस्तीफे के कारणों को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन छात्र संगठनों ने निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग तेज कर दी है।1
- Post by Anilpaswan pair k1
- बहुजन नायक बड़े भाई चंद्रशेखर आजाद सांसद नगीना लोकसभा1
- Post by THE LIVE1
- बांका नगर परिषद वार्ड 8 में जल-नल योजना की खुली पोल, वार्ड प्रतिनिधि ने किया घर-घर निरीक्षण #Banka #BankaNews #BiharNews #NagarParishad #Ward8 #JalNalYojana #WaterSupply #AnujYadav #LocalNews #JanSamasya #CivicIssue #SamvadData1