नशा तस्करों की संपत्ति हो सकती है अटैच जागरूकता कार्यक्रम से करे नशे पर प्रहार चरखी दादरी, 2 मई। उपयुक्त ड मुनीश नागपाल ने कहा कि न्यायालय के निर्देशों के अनुसार नशा तस्करी के मामले में पकड़े जाने वाले लोगों की संपत्ति को अटैच करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही जिला में नशे के खिलाफ जन जागरूकता अभियान भी चलाया जाए। ताकि इस कुरीति से लोगों को बचाया जा सके। उपायुक्त शनिवार को पुलिस अधीक्षक लोगेश कुमार पी के साथ नाकार्ड कमेटी से जुड़े अधिकारियों की बैठक ले रहे थे। नशा तस्करी के मामले में दोषी लोगों पर सख्त कार्रवाई करके ही काबू पाया जा सकता है। ऐसे में न्यायालय द्वारा नशा तस्करों की संपत्ति को अटैच करने की कार्रवाई पर जोर देना होगा। साथ जिला में विभिन्न माध्यमों से लोगों को नशे के प्रति जागरूक करने की भी जरूरत है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज ही देश की प्रगति का आधार होता है । जिला प्रशासन का दायित्व बनता है कि समाज की मुख्यधारा से भटक कर नशा के एडिक्ट हुए युवाओं को फिर से समाज की मुख्यधारा में शामिल करें। इसके लिए सभी विभागों को मिशन मोड में कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि समाज से नशे की प्रवृति को खत्म करने के लिए पूरी गंभीरता के साथ प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। जिले में मेडिकल स्टोर संचालकों द्वारा बिना डॉक्टर की पर्ची के किसी प्रकार दवाई ना दी जाए। उन्होंने कहा कि नशे के आदी हो चुके युवाओं को नशे की लत से छुटकारा दिलवाने के लिए प्रभावी योजना तैयार करते हुए कार्य करें व पुलिस द्वारा नशा बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे के चंगुल से बाहर निकलना है फिर उनको शिक्षा और रोजगार से जोड़ते हुए बेहतर भविष्य की तरफ अग्रसर करना है। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि पुलिस द्वारा नशे खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। ग्रामीण स्तर पर पंचायतों के साथ मिलकर युवाओं को नशे के खिलाफ जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा मिशन हर गांव को नशा मुक्त बनाना है। नशे के आदी लोगों की पहचान हो रही है। इस अवसर पर एसडीएम डा वीरेंद्र सिंह व आशीष सांगवान सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
नशा तस्करों की संपत्ति हो सकती है अटैच जागरूकता कार्यक्रम से करे नशे पर प्रहार चरखी दादरी, 2 मई। उपयुक्त ड मुनीश नागपाल ने कहा कि न्यायालय के निर्देशों के अनुसार नशा तस्करी के मामले में पकड़े जाने वाले लोगों की संपत्ति को अटैच करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही जिला में नशे के खिलाफ जन जागरूकता अभियान भी चलाया जाए। ताकि इस कुरीति से लोगों को बचाया जा सके। उपायुक्त शनिवार को पुलिस अधीक्षक लोगेश कुमार पी के साथ नाकार्ड कमेटी से जुड़े अधिकारियों की बैठक ले रहे थे। नशा तस्करी के मामले में दोषी लोगों पर सख्त कार्रवाई करके ही काबू पाया जा सकता है। ऐसे में न्यायालय द्वारा नशा तस्करों की संपत्ति को अटैच करने की कार्रवाई पर जोर देना होगा। साथ जिला में विभिन्न माध्यमों से लोगों को नशे के प्रति जागरूक करने की भी जरूरत है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज ही देश की प्रगति का आधार होता है । जिला प्रशासन का दायित्व बनता है कि समाज की मुख्यधारा से भटक कर नशा के एडिक्ट हुए युवाओं को फिर से समाज की मुख्यधारा में शामिल करें। इसके लिए सभी विभागों को मिशन मोड में कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि समाज से नशे की प्रवृति को खत्म करने के लिए पूरी गंभीरता के साथ प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। जिले में मेडिकल स्टोर संचालकों द्वारा बिना डॉक्टर की पर्ची के किसी प्रकार दवाई ना दी जाए। उन्होंने कहा कि नशे के आदी हो चुके युवाओं को नशे की लत से छुटकारा दिलवाने के लिए प्रभावी योजना तैयार करते हुए कार्य करें व पुलिस द्वारा नशा बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे के चंगुल से बाहर निकलना है फिर उनको शिक्षा और रोजगार से जोड़ते हुए बेहतर भविष्य की तरफ अग्रसर करना है। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि पुलिस द्वारा नशे खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। ग्रामीण स्तर पर पंचायतों के साथ मिलकर युवाओं को नशे के खिलाफ जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा मिशन हर गांव को नशा मुक्त बनाना है। नशे के आदी लोगों की पहचान हो रही है। इस अवसर पर एसडीएम डा वीरेंद्र सिंह व आशीष सांगवान सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
- प्रेस नोट जिला पुलिस भिवानी दिनांक: 02 मई 2026 सीआईए स्टाफ प्रथम भिवानी द्वारा संगठित गिरोह बनाकर आपराधिक वारदातों को अंजाम देने वाले सरगना सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर दो दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में जिला पुलिस द्वारा अपराधियों के खिलाफ लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में सीआईए स्टाफ प्रथम भिवानी की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फरार चल रहे मुख्य आरोपी सहित अन्य आरोपियों को काबू करने में सफलता हासिल की। मामले में सेवा नगर निवासी जतिन ने थाना शहर भिवानी में शिकायत दर्ज करवाई थी कि 28 अप्रैल 2026 को वह अपनी किराना दुकान पर मौजूद था। इसी दौरान आरोपी राजन अपने साथियों के साथ जबरदस्ती दुकान में घुस आया और शिकायतकर्ता को खींचकर बाहर सड़क पर ले गया, जहां अन्य साथियों के साथ मिलकर उस पर लाठी-डंडों से हमला किया गया। आरोपियों ने जाते समय उसे जान से मारने की धमकी दी और मौके से फरार हो गए। शिकायत के आधार पर थाना शहर भिवानी में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राजन पुत्र बलबीर निवासी सेवा नगर कॉलोनी भिवानी, चांद पुत्र परमानंद निवासी विद्यानगर भिवानी तथा सौरव उर्फ सैंडी पुत्र अश्वनी कुमार निवासी हलवास गेट भिवानी के रूप में हुई है। मुख्य आरोपी राजन को बस अड्डा खरड़, मोहाली पंजाब से गिरफ्तार किया गया। तीनों आरोपियों को माननीय न्यायालय में पेश कर दो दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी राजन थाना शहर भिवानी का हिस्ट्रीशीटर है, जो 16 अप्रैल 2026 को जमानत पर जेल से बाहर आया था। उसके खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत करीब 15 मुकदमे दर्ज हैं। वहीं आरोपी चांद और सौरव के खिलाफ भी चार-चार आपराधिक मामले दर्ज बताए गए हैं। रिमांड अवधि के दौरान आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है तथा वारदात में प्रयुक्त डंडों और वाहनों की बरामदगी के प्रयास जारी हैं। इसके अलावा मामले में शामिल अन्य फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है, जिन्हें जल्द गिरफ्तार किए जाने की संभावना है। — पुलिस प्रवक्ता,1
- सीआईए स्टाफ प्रथम भिवानी के द्वारा आरोपी को मोटरसाइकिल चोरी करने के मामले में गिरफ्तार किया गया था1
- बवानी खेड़ा क्षेत्र में गरीब बस्ती को हटाने को लेकर प्रशासन द्वारा अल्टीमेटम दिए जाने से बस्तीवासियों में रोष है। लोगों ने अपनी मांगों को लेकर अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा और कार्रवाई रोकने की अपील की।1
- भिवानी के बवानीखेड़ा वासियों ने घर बचाने के लिए सौंपा ज्ञापन1
- 🔥 भोपालगढ़ में जल संकट बना बड़ा मुद्दा – जनता का सब्र अब जवाब दे रहा है! 🔥 भोपालगढ़ नगर पालिका क्षेत्र में भीषण गर्मी के बीच पानी की भारी किल्लत ने आमजन का जीना मुश्किल कर दिया है। करीब 20 से अधिक मोहल्लों — कुम्हारों का बास, सदर बाजार, दर्जियों का बास, छींपों का बास, आदर्श कॉलोनी, बलदेव कॉलोनी, सुनारों का बास, रेगरों का बास, लुहारों का बास सहित कई क्षेत्रों में 20–25 दिनों से पानी की बराबर सप्लाई नहीं हो रही। 👉 सवाल ये है कि जब रोजाना लगभग 2 लाख लीटर पानी मिल रहा है, तो फिर पानी जा कहाँ रहा है? 👉 क्यों कुछ क्षेत्रों में ही पानी और बाकी जनता प्यास से परेशान? 👉 अवैध कनेक्शनों पर कार्रवाई कब होगी? 💧 महिलाएं दूर-दूर से पानी लाने को मजबूर 💧 गर्मी में बूंद-बूंद के लिए संघर्ष 💧 प्रशासन की ढीली व्यवस्था पर उठ रहे सवाल ⚡ अब भोपालगढ़ की जनता एकजुट हो चुकी है! ⚡ जलदाय विभाग और प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग! 📢 चेतावनी नहीं, सीधी अपील: आज ही व्यवस्था सुधारी जाए — ✔️ हर मोहल्ले में बराबर पानी ✔️ तय समय पर सप्लाई ✔️ अवैध कनेक्शनों पर सख्त एक्शन 👉 अगर अब भी सुनवाई नहीं हुई, तो जनता आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होगी! ✊ “पानी हमारा अधिकार है — इसे छीनने नहीं देंगे!” #भोपालगढ़_जलसंकट #पानी_दो_हक_दो #जनता_की_आवाज़ #तुरंत_कार्रवाई5
- Post by Bhajan Lal1
- हल्का बवानीखेड़ा में तीस साल से रह रहे 16 साल के परिवारों को घर खाली करने मिला नोटिस नगर परिषद से1
- बूंद बूंद को तरसे वार्ड 27 के निवासी समस्या पर भड़के लोगों ने किया प्रदर्शन 6 दिन पहले बेवजह पाइपलाइन काटे जाने का है आरोप1
- 8वें वेतन आयोग में सेना का प्रतिनिधित्व क्यों जरूरी? सैनिकों की आवाज़, सम्मान और भविष्य से जुड़ा बड़ा सवाल भारत सरकार द्वारा 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की तैयारी शुरू होने के साथ ही देशभर के सैनिकों, पूर्व सैनिकों और सैन्य परिवारों के बीच एक बड़ा प्रश्न उठ रहा है — क्या इस बार सेना की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित होगी? सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे पोस्टरों और चर्चाओं में यह मुद्दा प्रमुखता से सामने आ रहा है कि अब तक के वेतन आयोगों में सेना की परिस्थितियों और जरूरतों को पर्याप्त गंभीरता से नहीं समझा गया। यही कारण है कि सैनिक समुदाय के भीतर असंतोष और उपेक्षा की भावना बढ़ती दिखाई दे रही है। आखिर विवाद क्या है? 8वां केंद्रीय वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू होने की संभावना है। लेकिन सेना से जुड़े कई संगठनों और पूर्व सैनिकों का कहना है कि: आयोग में सैन्य पृष्ठभूमि वाले विशेषज्ञों की भागीदारी स्पष्ट नहीं है। सेना की सेवा-शर्तें बाकी सरकारी नौकरियों से पूरी तरह अलग हैं। पिछले कई वर्षों में सैनिकों से जुड़े मुद्दे अधूरे या विवादित रहे हैं। यही कारण है कि अब मांग उठ रही है कि “बिना सैनिक प्रतिनिधित्व के कोई भी वेतन आयोग अधूरा है।”1