पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एक अनोखे वैवाहिक गठबंधन की खूब चर्चा हो रही है, जिसने समाज को एक सकारात्मक संदेश दिया है। यह गठबंधन बहुजन समाज पार्टी के पूर्व विधायक प्रदीप जाटव के पुत्र और पूर्व कैबिनेट मंत्री धर्मवीर अशोक की पौत्री के बीच तय हुआ है। यह रिश्ता केवल दो प्रभावशाली परिवारों का मिलन नहीं, बल्कि दहेज प्रथा के खिलाफ एक प्रेरणादायक पहल के रूप में देखा जा रहा है। सगाई समारोह के दौरान, वधू पक्ष ने परंपरा के अनुसार नकद धनराशि और अन्य उपहार भेंट करने का प्रयास किया। हालांकि, पूर्व विधायक प्रदीप जाटव ने स्पष्ट रूप से दहेज लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे अपनी बहू को अपनी बेटी के समान सम्मान देंगे और उन्हें किसी भी प्रकार के धन, दहेज या भौतिक उपहार की आवश्यकता नहीं है। प्रदीप जाटव ने यह भी कहा कि वे अपनी बहू को केवल उसके पहने हुए वस्त्रों में ही सम्मानपूर्वक अपने घर लाएंगे। पूर्व कैबिनेट मंत्री धर्मवीर अशोक के परिवार ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे सामाजिक सरोकारों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम बताया। दोनों परिवारों ने आपसी सहमति से दहेज-मुक्त विवाह का संकल्प लिया है, जिससे समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत हुआ है। प्रदीप जाटव के राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहने के कारण, दोनों प्रतिष्ठित परिवारों द्वारा लिया गया यह निर्णय आमजन के बीच चर्चा का विषय बन गया है। सामाजिक संगठनों और क्षेत्रीय लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे दहेज प्रथा के खिलाफ एक सकारात्मक संदेश करार दिया है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एक अनोखे वैवाहिक गठबंधन की खूब चर्चा हो रही है, जिसने समाज को एक सकारात्मक संदेश दिया है। यह गठबंधन बहुजन समाज पार्टी के पूर्व विधायक प्रदीप जाटव के पुत्र और पूर्व कैबिनेट मंत्री धर्मवीर अशोक की पौत्री के बीच तय हुआ है। यह रिश्ता केवल दो प्रभावशाली परिवारों का मिलन नहीं, बल्कि दहेज प्रथा के खिलाफ एक प्रेरणादायक पहल के रूप में देखा जा रहा है। सगाई समारोह के दौरान, वधू पक्ष ने परंपरा के अनुसार नकद धनराशि और अन्य उपहार भेंट करने का प्रयास किया। हालांकि, पूर्व विधायक प्रदीप जाटव ने स्पष्ट रूप से दहेज लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे अपनी बहू को अपनी बेटी के समान सम्मान देंगे और उन्हें किसी भी प्रकार के धन, दहेज या भौतिक उपहार की आवश्यकता नहीं है। प्रदीप जाटव ने यह भी कहा कि वे अपनी बहू को केवल उसके पहने हुए वस्त्रों में ही सम्मानपूर्वक अपने घर लाएंगे। पूर्व कैबिनेट मंत्री धर्मवीर अशोक के परिवार ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे सामाजिक सरोकारों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम बताया। दोनों परिवारों ने आपसी सहमति से दहेज-मुक्त विवाह का संकल्प लिया है, जिससे समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत हुआ है। प्रदीप जाटव के राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहने के कारण, दोनों प्रतिष्ठित परिवारों द्वारा लिया गया यह निर्णय आमजन के बीच चर्चा का विषय बन गया है। सामाजिक संगठनों और क्षेत्रीय लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे दहेज प्रथा के खिलाफ एक सकारात्मक संदेश करार दिया है।
- पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एक अनोखे वैवाहिक गठबंधन की खूब चर्चा हो रही है, जिसने समाज को एक सकारात्मक संदेश दिया है। यह गठबंधन बहुजन समाज पार्टी के पूर्व विधायक प्रदीप जाटव के पुत्र और पूर्व कैबिनेट मंत्री धर्मवीर अशोक की पौत्री के बीच तय हुआ है। यह रिश्ता केवल दो प्रभावशाली परिवारों का मिलन नहीं, बल्कि दहेज प्रथा के खिलाफ एक प्रेरणादायक पहल के रूप में देखा जा रहा है। सगाई समारोह के दौरान, वधू पक्ष ने परंपरा के अनुसार नकद धनराशि और अन्य उपहार भेंट करने का प्रयास किया। हालांकि, पूर्व विधायक प्रदीप जाटव ने स्पष्ट रूप से दहेज लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे अपनी बहू को अपनी बेटी के समान सम्मान देंगे और उन्हें किसी भी प्रकार के धन, दहेज या भौतिक उपहार की आवश्यकता नहीं है। प्रदीप जाटव ने यह भी कहा कि वे अपनी बहू को केवल उसके पहने हुए वस्त्रों में ही सम्मानपूर्वक अपने घर लाएंगे। पूर्व कैबिनेट मंत्री धर्मवीर अशोक के परिवार ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे सामाजिक सरोकारों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम बताया। दोनों परिवारों ने आपसी सहमति से दहेज-मुक्त विवाह का संकल्प लिया है, जिससे समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत हुआ है। प्रदीप जाटव के राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहने के कारण, दोनों प्रतिष्ठित परिवारों द्वारा लिया गया यह निर्णय आमजन के बीच चर्चा का विषय बन गया है। सामाजिक संगठनों और क्षेत्रीय लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे दहेज प्रथा के खिलाफ एक सकारात्मक संदेश करार दिया है।1
- मैनपुरी पुलिस ने हाल ही में लूट की घटनाओं का सफलतापूर्वक खुलासा किया है। पुलिस ने कुल चार वारदातों में शामिल अनूप उर्फ ऋषि और नव्यांशु उर्फ बिट्टू नामक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से दो ई-रिक्शा और कुछ नगदी भी बरामद की गई है। इस पूरे ऑपरेशन को एसओजी और घिरोर पुलिस ने संयुक्त रूप से अंजाम दिया।1
- मैनपुरी में एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर ले जाने के मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। पीड़ित परिवार ने इस संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को एक शिकायती पत्र सौंपकर आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और नाबालिग की सकुशल बरामदगी की मांग की है। शिकायत के अनुसार, मोहल्ला अग्रवाल निवासी 25 वर्षीय नितिन गुप्ता पुत्र अनिल गुप्ता पर 18 जून 2026 को नाबालिग लड़की को लेकर फरार होने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में कोतवाली मैनपुरी में मुकदमा दर्ज किया जा चुका है, लेकिन परिजनों का आरोप है कि अब तक न तो आरोपी नितिन गुप्ता की गिरफ्तारी हुई है और न ही नाबालिग लड़की को बरामद किया जा सका है। परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि मोहल्ला छप्पटी निवासी अंशु गुप्ता द्वारा आरोपी का समर्थन किया जा रहा है, जिससे पीड़ित परिवार में गहरा आक्रोश व्याप्त है। पीड़ित परिवार ने पुलिस प्रशासन से नाबालिग की शीघ्र बरामदगी और सभी आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल, पुलिस इस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।1
- मैनपुरी में थाना घिरोर पुलिस, SOG और सर्विलांस टीम ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस अधीक्षक गणेश प्रसाद साहा के निर्देशन में कार्य करते हुए, टीम ने क्षेत्र में सक्रिय एक शातिर ई-रिक्शा लुटेरा गिरोह के दो मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह पिछले डेढ़ महीने के भीतर लूट की चार बड़ी वारदातों को अंजाम दे चुका था। गिरफ्तारी के समय, एक आरोपी अनूप ने पुलिस को गलत नाम बताकर गुमराह करने का प्रयास किया। लेकिन, उत्तर प्रदेश पुलिस के अत्याधुनिक 'Yaksha App' ने मात्र चंद सेकंड में उसका पूरा आपराधिक इतिहास सामने ला दिया। पुलिस ने इन आरोपियों के पास से लूटे गए ई-रिक्शा के पुर्जे, लिथियम बैटरियां, अवैध असलाह और नकदी बरामद की है।1
- जनपद मैनपुरी में लगातार हो रही लूट और चोरी की घटनाओं को अंजाम देने वाले पेशेवर अपराधियों का पर्दाफाश किया गया है। घिरोर पुलिस ने सर्विलांस टीम की सहायता से एक ऐसे गिरोह का खुलासा किया है जिसने पिछले डेढ़ महीने के भीतर लूट और चोरी की चार बड़ी वारदातों को अंजाम दिया था। इस अभियान के तहत, पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में एसओजी टीम और सर्विलांस टीम ने 23 जून 2026 की रात 11:15 बजे कपरावली तिराहे से दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए अभियुक्तों की पहचान दन्नाहार निवासी अनूप उर्फ ऋषि और कुरा निवासी 22 वर्षीय नाव्यांशु उर्फ बिट्टू के रूप में हुई है। अभियुक्तों ने बताया कि वे तीन लोग मिलकर घटनाओं को अंजाम देते थे, जिसमें उनका तीसरा साथी बेवर निवासी देवा उर्फ जावेद अभी फरार है। पुलिस ने गिरफ्तार किए गए दोनों अभियुक्तों के कब्जे से लूटे गए मोबाइल फोन, एक ई-रिक्शा, ई-रिक्शा के विभिन्न पुर्जे जैसे बैटरी, टायर, चेसिस, और घटना में प्रयुक्त एक .315 बोर का तमंचा व एक जिंदा कारतूस बरामद किया है।2
- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक विवादित बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस, सपा और बसपा के लोगों पर सीधा निशाना साधा है। मुख्यमंत्री योगी ने इन दलों पर आरोप लगाया है कि वे अंधेरे में रहने के आदी थे, क्योंकि उनका मानना है कि अंधेरे में ही ये दल कुशलतापूर्वक अपनी 'डकैती' को अंजाम दे पाते थे।1
- उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में ब्राह्मण समाज के लोगों ने भरत भूषण तिवारी की मौत के मामले में सीबीआई जांच की मांग उठाई है। अपनी इस मांग के संबंध में, ब्राह्मण समाज के सदस्यों ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा है।1
- उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था और अपराध के खात्मे के सरकारी दावों पर सवाल उठाते हुए, मैनपुरी जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहाँ करहल थाना क्षेत्र के एक गांव में जमीन के एक मामूली टुकड़े को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि लोग इंसानियत और कानून, दोनों को भूल गए। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे यह विवाद अचानक उग्र हो गया और पूरा इलाका एक जंग के मैदान में तब्दील हो गया, जहाँ कानून का कोई खौफ नजर नहीं आया। वीडियो में कई लोग खुलेआम लाठी, डंडे और कुल्हाड़ी जैसे धारदार हथियार लेकर एक-दूसरे की जान लेने के लिए दौड़ते दिखाई दिए। बिना किसी डर या हिचकिचाहट के ये दबंग हथियारों का प्रदर्शन कर रहे थे और दूसरे पक्ष पर हमला करने को आमादा थे। गांव के बीचो-बीच सरेआम हुई इस तरह की गुंडागर्दी और खूनी संघर्ष की कोशिश स्थानीय पुलिस की सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। इस घटना को लेकर स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है और लोग राज्य सरकार की नीतियों पर उंगली उठा रहे हैं। आम जनता का कहना है कि सरकार एक तरफ प्रदेश को गुंडामुक्त और अपराधमुक्त बनाने का ढोल पीटती है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे असामाजिक तत्व आज भी सरेआम हथियारों के साथ घूमकर कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं। इस पूरी घटना के बाद से गांव में दहशत का माहौल है और लोगों के मन में अपनी सुरक्षा को लेकर डर बैठ गया है, क्योंकि दिन-दहाड़े हाथ में कुल्हाड़ी लेकर घूमने वाले लोगों में पुलिस और प्रशासनिक कार्रवाई का कोई डर नहीं दिख रहा है। अब सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय प्रशासन और करहल थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाज़मी है। यह देखना बाकी है कि कानून को अपने हाथ में लेने वाले इन दबंगों पर पुलिस प्रशासन क्या कार्रवाई करता है, और क्या उत्तर प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत इन पर कोई सख्त और मिसाल कायम करने वाला एक्शन लिया जाएगा, या यह मामला भी सिर्फ कागजी कार्रवाई और जांच के आश्वासन तक ही सीमित रह जाएगा।1