गरियाबंद के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (यूएसटीआर) के कुल्हाड़ीघाट परिक्षेत्र से हाल ही में एक हृदयस्पर्शी ट्रैप कैमरा वीडियो सामने आया है, जिसमें हाथियों का एक झुंड अपने नन्हे शावकों के साथ लगभग 3,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित एक छोटी झिरिया में पानी पीते और स्नान करते दिख रहा है। यह दृश्य भीषण गर्मी और जल संकट के दौरान प्रकृति-आधारित छोटे हस्तक्षेपों की जीवनदायिनी भूमिका को स्पष्ट करता है। 'झिरिया' रेतीली परतों को खोदकर प्राप्त होने वाला भूमिगत जल प्रवाह का एक पारंपरिक स्रोत है। जलवायु परिवर्तन, लंबे शुष्क काल और बढ़ते तापमान की चुनौतियों के मद्देनजर, यूएसटीआर ने अपने क्षेत्र में जल संवर्धन का व्यापक अभियान चलाकर 800 से अधिक झिरियाओं का निर्माण किया है, साथ ही वर्षभर जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 34 सौर ऊर्जा संचालित पंप भी स्थापित किए हैं। मौसम वैज्ञानिकों ने 'सुपर एल-नीनो' या 'गॉडज़िला एल-नीनो' की आशंका व्यक्त की है, जिससे असामान्य रूप से उच्च तापमान, अनियमित वर्षा, दीर्घकालीन सूखा और भीषण गर्मी हो सकती है। ऐसी चरम परिस्थितियों में जल और चारे की कमी से वन्यजीवों के मानव बस्तियों की ओर आने की संभावना बढ़ती है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष में वृद्धि हो सकती है। यूएसटीआर की एक अनूठी विशेषता यह है कि यह हाथियों, बाघों, तेंदुओं और अन्य वन्य प्रजातियों के साथ-साथ 100 से अधिक गाँवों का भी आश्रय स्थल है, इसलिए यहाँ वन्यजीवों और स्थानीय समुदायों दोनों का संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए यूएसटीआर दूरस्थ वन क्षेत्रों में 800 से अधिक झिरियाओं का निर्माण व रख-रखाव, 34 सौर ऊर्जा संचालित जल पंपों का संचालन, जल उपलब्धता और वन्यजीव गतिविधियों की निरंतर निगरानी, हाथियों की आवाजाही के लिए प्रारंभिक चेतावनी व संघर्ष न्यूनीकरण तंत्र को सुदृढ़ करना तथा वन क्षेत्र के भीतर पर्याप्त जल एवं चारे की उपलब्धता सुनिश्चित कर वन्यजीवों के गाँवों की ओर आने की संभावना को कम करने जैसे सक्रिय उपाय कर रहा है। इन महत्वपूर्ण जल स्रोतों की सुरक्षा के लिए टाइगर रिजर्व ने संरक्षण और गश्त को भी मजबूत किया है। इसी क्रम में, यूएसटीआर के कर्मचारियों ने हाल ही में ओडिशा के कटफाड़, कुसुमखुंटा और खिपरीमाल गाँवों के सात शिकारियों को झिरियाओं में जहरीले पदार्थ डालने की कोशिश करते हुए पकड़ा। यदि यह कृत्य सफल हो जाता, तो हाथियों, मांसाहारियों और शाकाहारी वन्यजीवों सहित अनेक प्रजातियों की सामूहिक मृत्यु हो सकती थी, जो इन जल स्रोतों के पारिस्थितिक महत्व और उनकी सतत सुरक्षा की आवश्यकता को रेखांकित करता है। कुल्हाड़ीघाट की झिरिया में हाथियों और उनके शावकों का आनंद लेते हुए यह दृश्य साफ दर्शाता है कि समय पर किए गए आवास प्रबंधन के प्रयास वन क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन की चरम परिस्थितियों के प्रति अधिक सक्षम और लचीला बनाते हैं। जैसा कि कहा गया है, "गर्मी के चरम समय में जल से भरी प्रत्येक झिरिया केवल एक जलस्रोत नहीं, बल्कि वन्यजीवों के लिए जीवनरेखा है। ये झिरियाएँ मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावनाओं को कम करने, जैव विविधता के संरक्षण तथा स्थानीय समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक प्रभावी माध्यम हैं।'' उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व अपनी समृद्ध प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ इसके भीतर एवं आसपास निवास करने वाले लोगों की सुरक्षा और कल्याण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
गरियाबंद के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (यूएसटीआर) के कुल्हाड़ीघाट परिक्षेत्र से हाल ही में एक हृदयस्पर्शी ट्रैप कैमरा वीडियो सामने आया है, जिसमें हाथियों का एक झुंड अपने नन्हे शावकों के साथ लगभग 3,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित एक छोटी झिरिया में पानी पीते और स्नान करते दिख रहा है। यह दृश्य भीषण गर्मी और जल संकट के दौरान प्रकृति-आधारित छोटे हस्तक्षेपों की जीवनदायिनी भूमिका को स्पष्ट करता है। 'झिरिया' रेतीली परतों को खोदकर प्राप्त होने वाला भूमिगत जल प्रवाह का एक पारंपरिक स्रोत है। जलवायु परिवर्तन, लंबे शुष्क काल और बढ़ते तापमान की चुनौतियों के मद्देनजर, यूएसटीआर ने अपने क्षेत्र में जल संवर्धन का व्यापक अभियान चलाकर 800 से अधिक झिरियाओं का निर्माण किया है, साथ ही वर्षभर जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 34 सौर ऊर्जा संचालित पंप भी स्थापित किए हैं। मौसम वैज्ञानिकों ने 'सुपर एल-नीनो' या 'गॉडज़िला एल-नीनो' की आशंका व्यक्त की है, जिससे असामान्य रूप से उच्च तापमान, अनियमित वर्षा, दीर्घकालीन सूखा और भीषण गर्मी हो सकती है। ऐसी चरम परिस्थितियों में जल और चारे की कमी से वन्यजीवों के मानव बस्तियों की ओर आने की संभावना बढ़ती है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष में वृद्धि हो सकती है। यूएसटीआर की एक अनूठी विशेषता यह है कि यह हाथियों, बाघों, तेंदुओं और अन्य वन्य प्रजातियों के साथ-साथ 100 से अधिक गाँवों का भी आश्रय स्थल है, इसलिए यहाँ वन्यजीवों और स्थानीय समुदायों दोनों का संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए यूएसटीआर दूरस्थ वन क्षेत्रों में 800 से अधिक झिरियाओं का निर्माण व रख-रखाव, 34 सौर ऊर्जा संचालित जल पंपों का संचालन, जल उपलब्धता और वन्यजीव गतिविधियों की निरंतर निगरानी, हाथियों की आवाजाही के लिए प्रारंभिक चेतावनी व संघर्ष न्यूनीकरण तंत्र को सुदृढ़ करना तथा वन क्षेत्र के भीतर पर्याप्त जल एवं चारे की उपलब्धता सुनिश्चित कर वन्यजीवों के गाँवों की ओर आने की संभावना को कम करने जैसे सक्रिय उपाय कर रहा है। इन महत्वपूर्ण जल स्रोतों की सुरक्षा के लिए टाइगर रिजर्व ने संरक्षण और गश्त को भी मजबूत किया है। इसी क्रम में, यूएसटीआर के कर्मचारियों ने हाल ही में ओडिशा के कटफाड़, कुसुमखुंटा और खिपरीमाल गाँवों के सात शिकारियों को झिरियाओं में जहरीले पदार्थ डालने की कोशिश करते हुए पकड़ा। यदि यह कृत्य सफल हो जाता, तो हाथियों, मांसाहारियों और शाकाहारी वन्यजीवों सहित अनेक प्रजातियों की सामूहिक मृत्यु हो सकती थी, जो इन जल स्रोतों के पारिस्थितिक महत्व और उनकी सतत सुरक्षा की आवश्यकता को रेखांकित करता है। कुल्हाड़ीघाट की झिरिया में हाथियों और उनके शावकों का आनंद लेते हुए यह दृश्य साफ दर्शाता है कि समय पर किए गए आवास प्रबंधन के प्रयास वन क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन की चरम परिस्थितियों के प्रति अधिक सक्षम और लचीला बनाते हैं। जैसा कि कहा गया है, "गर्मी के चरम समय में जल से भरी प्रत्येक झिरिया केवल एक जलस्रोत नहीं, बल्कि वन्यजीवों के लिए जीवनरेखा है। ये झिरियाएँ मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावनाओं को कम करने, जैव विविधता के संरक्षण तथा स्थानीय समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक प्रभावी माध्यम हैं।'' उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व अपनी समृद्ध प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ इसके भीतर एवं आसपास निवास करने वाले लोगों की सुरक्षा और कल्याण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
- गरियाबंद के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (यूएसटीआर) के कुल्हाड़ीघाट परिक्षेत्र से हाल ही में एक हृदयस्पर्शी ट्रैप कैमरा वीडियो सामने आया है, जिसमें हाथियों का एक झुंड अपने नन्हे शावकों के साथ लगभग 3,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित एक छोटी झिरिया में पानी पीते और स्नान करते दिख रहा है। यह दृश्य भीषण गर्मी और जल संकट के दौरान प्रकृति-आधारित छोटे हस्तक्षेपों की जीवनदायिनी भूमिका को स्पष्ट करता है। 'झिरिया' रेतीली परतों को खोदकर प्राप्त होने वाला भूमिगत जल प्रवाह का एक पारंपरिक स्रोत है। जलवायु परिवर्तन, लंबे शुष्क काल और बढ़ते तापमान की चुनौतियों के मद्देनजर, यूएसटीआर ने अपने क्षेत्र में जल संवर्धन का व्यापक अभियान चलाकर 800 से अधिक झिरियाओं का निर्माण किया है, साथ ही वर्षभर जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 34 सौर ऊर्जा संचालित पंप भी स्थापित किए हैं। मौसम वैज्ञानिकों ने 'सुपर एल-नीनो' या 'गॉडज़िला एल-नीनो' की आशंका व्यक्त की है, जिससे असामान्य रूप से उच्च तापमान, अनियमित वर्षा, दीर्घकालीन सूखा और भीषण गर्मी हो सकती है। ऐसी चरम परिस्थितियों में जल और चारे की कमी से वन्यजीवों के मानव बस्तियों की ओर आने की संभावना बढ़ती है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष में वृद्धि हो सकती है। यूएसटीआर की एक अनूठी विशेषता यह है कि यह हाथियों, बाघों, तेंदुओं और अन्य वन्य प्रजातियों के साथ-साथ 100 से अधिक गाँवों का भी आश्रय स्थल है, इसलिए यहाँ वन्यजीवों और स्थानीय समुदायों दोनों का संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए यूएसटीआर दूरस्थ वन क्षेत्रों में 800 से अधिक झिरियाओं का निर्माण व रख-रखाव, 34 सौर ऊर्जा संचालित जल पंपों का संचालन, जल उपलब्धता और वन्यजीव गतिविधियों की निरंतर निगरानी, हाथियों की आवाजाही के लिए प्रारंभिक चेतावनी व संघर्ष न्यूनीकरण तंत्र को सुदृढ़ करना तथा वन क्षेत्र के भीतर पर्याप्त जल एवं चारे की उपलब्धता सुनिश्चित कर वन्यजीवों के गाँवों की ओर आने की संभावना को कम करने जैसे सक्रिय उपाय कर रहा है। इन महत्वपूर्ण जल स्रोतों की सुरक्षा के लिए टाइगर रिजर्व ने संरक्षण और गश्त को भी मजबूत किया है। इसी क्रम में, यूएसटीआर के कर्मचारियों ने हाल ही में ओडिशा के कटफाड़, कुसुमखुंटा और खिपरीमाल गाँवों के सात शिकारियों को झिरियाओं में जहरीले पदार्थ डालने की कोशिश करते हुए पकड़ा। यदि यह कृत्य सफल हो जाता, तो हाथियों, मांसाहारियों और शाकाहारी वन्यजीवों सहित अनेक प्रजातियों की सामूहिक मृत्यु हो सकती थी, जो इन जल स्रोतों के पारिस्थितिक महत्व और उनकी सतत सुरक्षा की आवश्यकता को रेखांकित करता है। कुल्हाड़ीघाट की झिरिया में हाथियों और उनके शावकों का आनंद लेते हुए यह दृश्य साफ दर्शाता है कि समय पर किए गए आवास प्रबंधन के प्रयास वन क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन की चरम परिस्थितियों के प्रति अधिक सक्षम और लचीला बनाते हैं। जैसा कि कहा गया है, "गर्मी के चरम समय में जल से भरी प्रत्येक झिरिया केवल एक जलस्रोत नहीं, बल्कि वन्यजीवों के लिए जीवनरेखा है। ये झिरियाएँ मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावनाओं को कम करने, जैव विविधता के संरक्षण तथा स्थानीय समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक प्रभावी माध्यम हैं।'' उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व अपनी समृद्ध प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ इसके भीतर एवं आसपास निवास करने वाले लोगों की सुरक्षा और कल्याण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।1
- योग दिवस के अवसर पर अधिक से अधिक लोगों से भागीदारी निभाने की अपील की गई है। यह अपील गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के प्रयास के तहत की गई है। इस पहल के लिए, इच्छुक व्यक्ति एक टोल फ्री नंबर पर मिस्ड कॉल देकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं।1
- गरियाबंद पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में, गरियाबंद पुलिस और ग्राम सीनापाली के ग्रामीणों ने अवैध शराब के खिलाफ एक जनमोर्चा का गठन किया है। थाना देवभोग द्वारा ग्राम सीनापाली में सामाजिक सुधार और नशामुक्ति की दिशा में पहल करते हुए, अवैध शराब की बिक्री और बढ़ते नशे पर पूरी तरह से अंकुश लगाने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की एक बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में सर्वसम्मति से अवैध शराब के कारोबार को रोकने हेतु एक विशेष महिला समूह, जिसे 'महिला कमांडो' नाम दिया गया है, का गठन किया गया। बैठक के समापन के बाद, गठित महिला समूह, जनप्रतिनिधियों और जागरूक ग्रामीणों ने पूरे गांव में एक जागरूकता रैली निकाली। इस दौरान हाथों में तख्तियां लेकर गांव का भ्रमण किया गया और लोगों से नशे से दूर रहने की अपील की गई। रैली में "नशा एक बीमारी है, इसे मिटाना हमारी जिम्मेदारी है" और "अवैध शराब बंद करो" जैसे नारे लगाए गए। इस पहल के तहत, अवैध शराब बेचने वालों की जानकारी तत्काल पुलिस को दी जाएगी, ताकि दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। जनप्रतिनिधियों ने इस अवसर पर कहा कि नशा समाज को खोखला कर रहा है, जिससे कई परिवार तबाह हो रहे हैं और गांव का माहौल बिगड़ रहा है। इसे रोकने के लिए कानून के साथ-साथ सामाजिक एकजुटता की भी नितांत आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महिला समूह का यह गठन गांव को नशामुक्त और सुरक्षित बनाने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। इस बैठक और रैली में ग्राम पंचायत के सरपंच, पंचगण, महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्य, युवा वर्ग सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण जन उपस्थित रहे।1
- संत रामपाल जी महाराज 'सनातनी पूजा के पतन की कहानी' के छठे भाग के रूप में एक विशेष वीडियो प्रस्तुत करने जा रहे हैं। यह प्रस्तुति 'गोवर्धन परिक्रमा के अनसुने रहस्य' पर केंद्रित होगी, जिसमें सनातनी पूजा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को संत रामपाल जी महाराज की जुबानी उजागर किया जाएगा। यह विशेष वीडियो 20 जून 2026, शनिवार को दोपहर 12:00 बजे से 'Factful Debates' YouTube Channel पर अवश्य देखा जा सकता है।1
- थाना आमाबेड़ा पुलिस ने हाल ही में एक व्यक्ति को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान आरोपी के पास से 7.94 लीटर शराब के साथ-साथ नकदी भी जब्त की है।1
- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के तिल्दा इलाके से एक बेहद रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। सासाहोली गांव के सरस्वती स्कूल के बाहर मामूली सी बात पर दो नाबालिग छात्रों के बीच खूनी संघर्ष हो गया। महज 'मोटा' कहने के विवाद में हुए इस हमले में 16 वर्षीय एक छात्र की मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई, जबकि दूसरा छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया है। मिली जानकारी के अनुसार, मृतक छात्र अमन यदु (16 वर्ष) और 15 वर्षीय आरोपी छात्र एक ही स्कूल में पढ़ते थे। कुछ दिनों पहले एक छात्र ने दूसरे को 'मोटा' कहकर चिढ़ाया था, जो बात दूसरे छात्र के दिल में गहरी चुभ गई और उसने मन में बदले की भावना पाल ली थी। किसे पता था कि बच्चों का यह आपसी मनमुटाव एक दिन खूनी अंजाम तक पहुंच जाएगा। स्कूल की छुट्टी होते ही दोनों छात्र गेट के बाहर आमने-सामने आ गए। उनके बीच पहले तीखी बहस हुई और देखते ही देखते वे गाली-गलौज पर उतर आए। विवाद इतना बढ़ गया कि गुस्साए एक छात्र ने घर से छिपाकर लाया सब्जी काटने वाला चाकू निकाला और दूसरे छात्र पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। खुद पर हमला होते देख दूसरे छात्र ने भी हिम्मत दिखाई और किसी तरह चाकू छीन लिया। इसके बाद उसने भी पलटवार करते हुए पहले छात्र पर बेरहमी से वार करना शुरू कर दिया। दोनों तरफ से हुए इस जानलेवा हमले में 16 वर्षीय अमन यदु, जो राजकुमार यदु का पुत्र था, की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही तिल्दा थाना पुलिस दल-बल के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस ने खून से लथपथ अमन के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं, गंभीर रूप से घायल 15 वर्षीय आरोपी छात्र को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उसका इलाज जारी है। इस वारदात के बाद से सासाहोली गांव और स्कूल के आसपास के इलाके में भारी तनाव और सनसनी का माहौल है, और स्कूल के छोटे-छोटे बच्चे इस खूनी मंजर को देखकर बुरी तरह डरे व सहमे हुए हैं। पुलिस ने मर्ग कायम कर आगे की जांच शुरू कर दी है, लेकिन इस घटना ने स्कूली बच्चों के भीतर पनप रहे गुस्से और हिंसक मानसिकता पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।1
- रायपुर स्थित राज टॉकीज ने दर्शकों के लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग और एक व्हाट्सएप समूह से जुड़ने की जानकारी साझा की है। इच्छुक दर्शक बुक माय शो के माध्यम से अपने टिकट ऑनलाइन बुक कर सकते हैं, जिसके लिए एक सीधा लिंक उपलब्ध कराया गया है। साथ ही, राज टॉकीज के व्हाट्सएप समूह से जुड़ने के लिए भी एक लिंक दिया गया है, और उपयोगकर्ताओं से निवेदन किया गया है कि वे दूसरों को जोड़ने के लिए भी यह लिंक भेजें। किसी भी जानकारी के लिए 0771-2229223 पर संपर्क किया जा सकता है।1
- पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर ने गरियाबंद में 'ऑपरेशन तलाश' के तहत गुमशुदा मामलों की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस दौरान जिले के सभी विवेचकों को गुमशुदा व्यक्तियों की तेजी से खोजबीन के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही, पुलिसिंग को आधुनिक और डिजिटल बनाने के उद्देश्य से ई-साक्ष्य पोर्टल, समाधान ऐप, मेडलैपर और ई-प्रॉसिक्यूशन प्रणाली के संबंध में पीपीटी (PPT) के माध्यम से विस्तृत तकनीकी प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। 'ऑपरेशन तलाश' की समीक्षा करते हुए, पुलिस अधीक्षक ने जिले में दर्ज सभी गुमइंसान (मिसिंग पर्सन) मामलों की फाइलें खोलकर उनकी वर्तमान स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने लंबे समय से लंबित गुमशुदगी के मामलों में विवेचकों को विशेष टीम बनाकर जल्द से जल्द गुमशुदा लोगों की दस्तयाबी (बरामदगी) करने के सख्त निर्देश दिए। एसपी ने इस बात पर जोर दिया कि गुमशुदा लोगों की तलाश में संवेदनशीलता और तेजी पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। प्रशिक्षण सत्र में, विवेचकों को ई-साक्ष्य पोर्टल का उपयोग करके डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रूप से एकत्र करने, उनका रिकॉर्ड रखने और न्यायालय में प्रस्तुत करने की नई तकनीकी प्रक्रिया सिखाई गई। जनता की शिकायतों के त्वरित निवारण और पारदर्शी पुलिसिंग सुनिश्चित करने के लिए समाधान ऐप के प्रभावी उपयोग पर भी बल दिया गया। मेडलैपर के माध्यम से मेडिकल-लीगल मामलों (MLC) और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की ऑनलाइन एंट्री व ट्रैकिंग को सुगम बनाने की विस्तृत ट्रेनिंग दी गई। इसके अतिरिक्त, पुलिस और अभियोजन (Prosecution) विभाग के बीच बेहतर तालमेल के लिए ई-प्रॉसिक्यूशन डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए केस डायरी और चालान पेश करने की प्रक्रिया भी समझाई गई।2