पाली विकासखंड स्थित माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर के सभाकक्ष में ग्राम स्तरीय वन अधिकार समिति के लिए दो दिवसीय क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन के अधिकारों को मान्यता प्रदान करने से संबंधित था। प्रशिक्षण के दूसरे दिन मास्टर ट्रेनर सुश्री पुष्पा तेकाम और श्री संजय पांडेय ने पहले दिन के विषयों की पुनरावृत्ति की और प्रशिक्षणार्थियों के सभी सवालों के जवाब दिए। इसमें वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रावधानों, सामुदायिक वन अधिकारों और धारा 3(1)(i) के अंतर्गत सामुदायिक वन संसाधन संरक्षण एवं प्रबंधन के अधिकारों को मान्यता देने की प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारी दी गई। मास्टर ट्रेनर श्री संजय पांडेय ने पटवारियों, वनरक्षकों और सचिव/जीआरएस प्रशिक्षणार्थियों के 10 मिश्रित समूह बनाकर प्रायोगिक अभ्यास और प्रस्तुतीकरण करवाया। यह प्रायोगिक अभ्यास दो चरणों में संपन्न हुआ। पहले चरण में सामुदायिक अधिकारों के लिए दावा प्रपत्र (प्रारूप-ख) भरने और सभी आवश्यक दस्तावेजों को पूरा करने का अभ्यास कराया गया। प्रत्येक समूह ने आवेदन जमा करने से लेकर ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कराने और उसे उपखंड स्तरीय समिति को भेजने तक की पूरी प्रक्रिया का रोल प्ले के माध्यम से प्रदर्शन किया। दूसरे चरण में प्रशिक्षणार्थियों ने सामुदायिक वन संसाधन संरक्षण और प्रबंधन से संबंधित दावों के लिए प्रारूप-ग भरने, आवश्यक एवं अनावश्यक दस्तावेजों की पहचान करने और पूरी प्रक्रिया को समझने हेतु रोल प्ले आधारित प्रस्तुति दी। प्रशिक्षणार्थियों ने इन प्रायोगिक गतिविधियों और रोल प्ले को बेहद रोचक और उपयोगी बताया। प्रतिभागियों ने कहा कि इस व्यावहारिक अभ्यास से उनकी अधिकतर शंकाएं दूर हो गई हैं और अब वे अपने-अपने क्षेत्रों में पात्र समितियों के माध्यम से दावों की तैयारी, आवश्यक अनुशंसाएं और दस्तावेजों पर सटीक टिप्पणियों के साथ मामलों को उपखंड स्तरीय समिति को भेजने में सक्षम हैं।
पाली विकासखंड स्थित माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर के सभाकक्ष में ग्राम स्तरीय वन अधिकार समिति के लिए दो दिवसीय क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन के अधिकारों को मान्यता प्रदान करने से संबंधित था। प्रशिक्षण के दूसरे दिन मास्टर ट्रेनर सुश्री पुष्पा तेकाम और श्री संजय पांडेय ने पहले दिन के विषयों की पुनरावृत्ति की और प्रशिक्षणार्थियों के सभी सवालों के जवाब दिए। इसमें वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रावधानों, सामुदायिक वन अधिकारों और धारा 3(1)(i) के अंतर्गत सामुदायिक वन संसाधन संरक्षण एवं प्रबंधन के अधिकारों को मान्यता देने की प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारी दी गई। मास्टर ट्रेनर श्री संजय पांडेय ने पटवारियों, वनरक्षकों और सचिव/जीआरएस प्रशिक्षणार्थियों के 10 मिश्रित समूह बनाकर प्रायोगिक अभ्यास और प्रस्तुतीकरण करवाया। यह प्रायोगिक अभ्यास दो चरणों में संपन्न हुआ। पहले चरण में सामुदायिक अधिकारों के लिए दावा प्रपत्र (प्रारूप-ख) भरने और सभी आवश्यक दस्तावेजों को पूरा करने का अभ्यास कराया गया। प्रत्येक समूह ने आवेदन जमा करने से लेकर ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कराने और उसे उपखंड स्तरीय समिति को भेजने तक की पूरी प्रक्रिया का रोल प्ले के माध्यम से प्रदर्शन किया। दूसरे चरण में प्रशिक्षणार्थियों ने सामुदायिक वन संसाधन संरक्षण और प्रबंधन से संबंधित दावों के लिए प्रारूप-ग भरने, आवश्यक एवं अनावश्यक दस्तावेजों की पहचान करने और पूरी प्रक्रिया को समझने हेतु रोल प्ले आधारित प्रस्तुति दी। प्रशिक्षणार्थियों ने इन प्रायोगिक गतिविधियों और रोल प्ले को बेहद रोचक और उपयोगी बताया। प्रतिभागियों ने कहा कि इस व्यावहारिक अभ्यास से उनकी अधिकतर शंकाएं दूर हो गई हैं और अब वे अपने-अपने क्षेत्रों में पात्र समितियों के माध्यम से दावों की तैयारी, आवश्यक अनुशंसाएं और दस्तावेजों पर सटीक टिप्पणियों के साथ मामलों को उपखंड स्तरीय समिति को भेजने में सक्षम हैं।
- उमरिया जिले के घुलघुली क्षेत्र में आज, 21 जून 2026 को, लगातार दूसरे दिन तेज आंधी-तूफान के साथ झमाझम बारिश दर्ज की गई है। इस बारिश के चलते आम जनता को भीषण गर्मी और उमस से बड़ी राहत मिली है, वहीं खेतों में भी रौनक लौट आई है। ग्रामीण इलाकों में खेती-किसानी की गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ ली है, जिससे पूरे क्षेत्र के किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे हैं और उनमें भारी उत्साह की लहर देखी जा रही है।1
- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने योग के महत्व पर प्रकाश डाला है। अपने संदेश में, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि योग सभी को जोड़ने और साथ लाने का कार्य करता है।1
- नौरोजाबाद नगर परिषद में उस समय माहौल गरमा गया जब जनप्रतिनिधियों ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) की कार्यशैली को लेकर खुलकर नाराजगी जताई। पार्षदों ने मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए सीएमओ पर गंभीर आरोप लगाए। पार्षदों का आरोप है कि सीएमओ नियमित रूप से समय पर कार्यालय नहीं पहुंचते और कई बार कार्यालय से भी अनुपस्थित रहते हैं, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।3
- शहडोल में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 'स्वस्थ आयु के लिए योग' थीम के तहत धूमधाम से आयोजित किया गया। इस गरिमामय कार्यक्रम में सांसद ने मुख्य अतिथि के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।2
- सोशल मीडिया पर भगवान श्रीराम के विरुद्ध आपत्तिजनक चित्र और अभद्र टिप्पणी युक्त पोस्ट करने के मामले में प्रबोध पांडे के खिलाफ थाना में एक शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ताओं ने बताया है कि इस पोस्ट से करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं तथा समाज में वैमनस्य एवं तनाव की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है। उन्होंने प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी व्यक्ति के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई किए जाने की मांग की है। शिकायत दर्ज कराते समय सिल्लू रजक, अविनाश मिश्रा, धीरू मिश्रा, मुकेश दुवेदी, विकाश जोतवानी, अमन यादव, देव केवट, मोनु सेन, अमित धुर्वे, शनि रिशु पनिका, नितिन सूरी, रज्जन रजक एवं अन्य लोग उपस्थित थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी भी धर्म, देवी-देवता अथवा धार्मिक प्रतीकों का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता। इन सभी ने कहा कि सभी धर्मों एवं आस्थाओं का सम्मान बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। प्रशासन से यह भी मांग की गई है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।3
- Post by पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार1
- बड़वारा क्षेत्र की पुलिस और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि वे क्षेत्र के दलित और आदिवासी बच्चों को नशे की आग में धकेल रहे हैं। आरोप है कि लगातार विरोध प्रदर्शनों के बावजूद, पुलिस और प्रशासन शराब माफियाओं पर लगाम लगाने में पूरी तरह असमर्थ हैं। इस स्थिति पर यह सवाल भी उठाया गया है कि आखिर किसके इशारे पर यह सब हो रहा है।1
- कुछ लोगों द्वारा भरत तिवारी के एनकाउंटर पर हो रहे विरोध-प्रदर्शन पर सवाल उठाने के बीच, उनकी कहानी रोंगटे खड़े कर देने वाली है, जो किसी फिल्म की पटकथा सी लगती है। एक गांव, जो गंगा की बाढ़ में समा गया था, वहां के अधिकतर पिछड़े और दलित आबादी वाले लोगों ने दोबारा बसना शुरू किया। भरत तिवारी ने इन लोगों की बुनियादी जरूरतों के लिए आवाज उठाना शुरू किया, जिसमें नई बस्ती तक सड़क, बिजली, चापाकल और राशन जैसी सुविधाएं शामिल थीं। जिस जगह पर लोग बसे थे, वह काफी नीचे थी और पानी भरने की समस्या थी, जिसके लिए भरत तिवारी लगातार अधिकारियों से मिट्टी भराव की गुहार लगा रहे थे ताकि लोगों को बाढ़ से बचाया जा सके। पिछले एक साल से वह स्थानीय प्रशासन और अधिकारियों से ज्ञापन, बातचीत, दबाव और विरोध प्रदर्शन सहित सभी माध्यमों से लगातार प्रयास कर रहे थे। धीरे-धीरे, प्रशासन ने उन्हें मानसिक रूप से परेशान करना शुरू किया, जिससे वह व्यवस्था से निराश होने लगे और बाद में उन्हें 'मानसिक विक्षिप्त' करार दिया गया। भरत तिवारी को एक सच्चा हिन्दुस्तानी, देशभक्त और राष्ट्रवादी बताया गया, जो जनता के लिए काम करता था और देश से प्रेम करता था। लेकिन जब वह व्यवस्था से हार गया, और "काले अंग्रेजों वाले सिस्टम" ने उसे मजबूर कर दिया, तो इस नौजवान को लगा कि "बहरों को सुनाने के लिए धमाके की जरूरत है।" उसने अपने गले का महावीरी बेचकर हथियार खरीदा और पुलिस वालों को इस बात का आश्वासन देने के लिए मजबूर करने की कोशिश की कि वे झूठे वादे नहीं करेंगे और लोगों का काम पूरा करेंगे। पुलिस ने पहले आश्वासन दिया कि हथियार डालने पर उसके वादे पूरे किए जाएंगे। हालांकि, जैसे ही भरत तिवारी ने हथियार डाला, उन्हें गोली मार दी गई। भरत तिवारी को एक क्रांतिकारी बताया गया है, जिसके अंतिम संस्कार में उमड़ी भारी भीड़ का वीडियो और उन लोगों की बातें, जिनके लिए उन्होंने काम किया, उन्हें 'भगवान' मानती हैं। यह दावा किया जा रहा है कि एनकाउंटर वैसे भी कानूनी रास्ता नहीं है, और एक ऐसे समाजसेवी नौजवान का एनकाउंटर, जिसका कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं था, जो व्यवस्था से निराश होकर भटक गया और जिसने सरेंडर भी कर दिया था, "एक सरकारी हत्या" है।1