*प्रशासनिक लापरवाही की कीमत चुकाती आस्था देवी मंदिर प्रकरण पर गंभीर सवाल* मैहर प्रदेश के मुख्य सचिव श्री जैन जी द्वारा पूर्व में दिए गए वक्तव्य आज एक बार फिर कसौटी पर खरे उतरते प्रतीत होते हैं। यह प्रकरण दर्शाता है कि किस प्रकार कुछ जिलों में कलेक्टरों के निरंकुश एवं गैर-जवाबदेह व्यवहार के कारण प्रशासन स्वयं सवालों के घेरे में आ जाता है। मैहर के समाजसेवी आनंद कुमार श्रीवास्तव ने पूर्व में माँ शारदा देवी मंदिर के गर्भगृह में अस्त्र-पूजा की घटना को लेकर स्पष्ट रूप से कहा था कि संपूर्ण घटना का ठीकरा केवल पुजारी पर फोड़ देना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ने का प्रयास भी है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि— मंदिर के गर्भगृह में कौन पुजारी नियुक्त होगा, वह कौन-सी गतिविधियाँ करेगा, तथा मंदिर व्यवस्था का संचालन कैसे होगा, इन सभी का निर्धारण कलेक्टर स्तर पर किया जाना था। यदि प्रशासन ने अपनी मूल जिम्मेदारियों का विधिवत निर्वहन किया होता, तो यह घटना कतई घटित न होती। ऐसे में केवल पुजारी को दोषी ठहराना कैसे न्यायसंगत माना जा सकता है? इससे भी अधिक गंभीर पहलू यह है कि जब मंदिर परिसर में अस्त्र-शस्त्र पूर्णतः प्रतिबंधित थे, तो उन्हें प्रवेश द्वार अथवा रोपवे परिसर में ही जब्त किया जाना चाहिए था। किंतु ऐसा नहीं किया गया। इसका सीधा अर्थ है कि प्रथमतः जवाबदेही रोपवे व्यवस्था और उसके संचालन तंत्र की बनती है। यह अत्यंत चिंताजनक है कि आज दिनांक तक रोपवे संचालक को न तो कोई नोटिस जारी किया गया और न ही स्पष्टीकरण माँगा गया। यह स्थिति संकेत देती है कि प्रशासनिक तंत्र जवाबदेही की अपेक्षा रसूख और संरक्षण की मानसिकता पर संचालित हो रहा है। समाजसेवी श्रीवास्तव ने कटाक्ष करते हुए कहा कि यह स्थिति मैहर के कलेक्टर के लिए कोई नई बात नहीं है— जब राज्य के कानून को व्यक्तिगत आदेशों से नीचे समझा जाने लगे, और प्रशासनिक निर्णय ही “कानून” मान लिए जाएँ, तब ऐसी घटनाएँ असामान्य नहीं रह जातीं। यह प्रकरण केवल एक धार्मिक स्थल की मर्यादा का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही, कानून के समान अनुपालन और संभावित सत्ता-दुरुपयोग से जुड़ा गंभीर विषय है। अब समय आ गया है कि निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जाँच सुनिश्चित की जाए तथा दोषियों के विरुद्ध स्पष्ट एवं दृश्यमान कार्यवाही की जाए—ताकि आस्था और कानून दोनों की गरिमा अक्षुण्ण रह सके
*प्रशासनिक लापरवाही की कीमत चुकाती आस्था देवी मंदिर प्रकरण पर गंभीर सवाल* मैहर प्रदेश के मुख्य सचिव श्री जैन जी द्वारा पूर्व में दिए गए वक्तव्य आज एक बार फिर कसौटी पर खरे उतरते प्रतीत होते हैं। यह प्रकरण दर्शाता है कि किस प्रकार कुछ जिलों में कलेक्टरों के निरंकुश एवं गैर-जवाबदेह व्यवहार के कारण प्रशासन स्वयं सवालों के घेरे में आ जाता है। मैहर के समाजसेवी आनंद कुमार श्रीवास्तव ने पूर्व में माँ शारदा देवी मंदिर के गर्भगृह में अस्त्र-पूजा की घटना को लेकर स्पष्ट रूप से कहा था कि संपूर्ण घटना का ठीकरा केवल पुजारी पर फोड़ देना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ने का प्रयास भी है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि— मंदिर के गर्भगृह में कौन पुजारी नियुक्त होगा, वह कौन-सी गतिविधियाँ करेगा, तथा मंदिर व्यवस्था का संचालन कैसे होगा, इन सभी का निर्धारण कलेक्टर स्तर पर किया जाना था। यदि प्रशासन ने अपनी मूल जिम्मेदारियों का विधिवत निर्वहन किया होता, तो यह घटना कतई घटित न होती। ऐसे में केवल पुजारी को दोषी ठहराना कैसे न्यायसंगत माना जा सकता है? इससे भी अधिक गंभीर पहलू यह है कि जब मंदिर परिसर में अस्त्र-शस्त्र पूर्णतः प्रतिबंधित थे, तो उन्हें प्रवेश द्वार अथवा रोपवे परिसर में ही जब्त किया जाना चाहिए था। किंतु ऐसा नहीं किया गया। इसका सीधा अर्थ है कि प्रथमतः जवाबदेही रोपवे व्यवस्था और उसके संचालन तंत्र की बनती है। यह अत्यंत चिंताजनक है कि आज दिनांक तक रोपवे संचालक को न तो कोई नोटिस जारी किया गया और न ही स्पष्टीकरण माँगा गया। यह स्थिति संकेत देती है कि प्रशासनिक तंत्र जवाबदेही की अपेक्षा रसूख और संरक्षण की मानसिकता पर संचालित हो रहा है। समाजसेवी श्रीवास्तव ने कटाक्ष करते हुए कहा कि यह स्थिति मैहर के कलेक्टर के लिए कोई नई बात नहीं है— जब राज्य के कानून को व्यक्तिगत आदेशों से नीचे समझा जाने लगे, और प्रशासनिक निर्णय ही “कानून” मान लिए जाएँ, तब ऐसी घटनाएँ असामान्य नहीं रह जातीं। यह प्रकरण केवल एक धार्मिक स्थल की मर्यादा का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही, कानून के समान अनुपालन और संभावित सत्ता-दुरुपयोग से जुड़ा गंभीर विषय है। अब समय आ गया है कि निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जाँच सुनिश्चित की जाए तथा दोषियों के विरुद्ध स्पष्ट एवं दृश्यमान कार्यवाही की जाए—ताकि आस्था और कानून दोनों की गरिमा अक्षुण्ण रह सके
- रईसजादे ने Scorpio-N से उड़ा दिया। ना उसके पास लाइसेंस था, ना कार चलाने आती थी। लेकिन 19 साल के लड़के के पास SUV थी, क्योंकि बाप का बड़ा बिजनेस है। पहले Sahil Dhaneshr की बाइक में टक्कर मारी, फिर Dzire में भी भिड़ा दिया। साहिल की on the spot डेथ हो गई। अब मां, न्याय मांग रही है।1
- *कमिश्नर के आदेशों को ठेंगा दिखाते लॉव लशकर के साथ जनसुनवाई करने पहुंचे कलेक्टर व प्रशासनिक अधिकारी* MAIHAR :- रीवा संभाग के कमिश्नर बीएस जामोद के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए अपने लाव लश्कर से सजे वाहन मैं बैठकर जनसुनवाई करने कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे मैहर जिले के प्रशासनिक अधिकारी व कर्मचारी, रीवा संभाग के कमिश्नर ने पूर्व में आदेश जारी किया था कि संभाग के सभी अधिकारी कर्मचारी अपने डीजल पेट्रोल वाले शासकीय वाहन को छोड़कर पैदल स्कूटी या इलेक्ट्रॉनिक वाहन का उपयोग कार्यालय आने के लिए प्रत्येक मंगलवार को करेंगे, मगर इन सब बातों को दरकिनार करते हुए मैहर जिले के प्रशासनिक अधिकारी संभाग के उच्च अधिकारी के आदेशों की आज मंगलवार को खुलेआम धज्जियां उड़ाते देखे गए जब जिले के कलेक्टर ही उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करेंगी तो जिले की अन्य अधिकारी कर्मचारी से क्या उम्मीद की जाए !1
- नशे का अड्डा बना अमरपाटन का सिविल अस्पताल की कैंटीन, खुले आम स्कूली छात्राओं को बेची सिगरेट। सतना। मैहर - सिविल अस्पताल अमरपाटन की कैंटीन में बिक रहा नशा , खुले आम बिक रही सिगरेट , अस्पताल परिसर स्थित कैंटीन से नाबालिग स्कूली छात्राओं ने ख़रीदी सिगरेट , खुलेआम बनाए धुँए के छल्ले , कैंटीन से छात्राओं ने खरीदी सिगरेट कैंटीन संचालक ने बिना किसी सवाल के इन नाबालिग छात्राओं को पैसे लेकर सिगरेट दे दी , जबकि अस्पताल परिसर नो नशा जोन घोषित हैं, इसके बावजूद यहाँ नशे का सामान खुले आम बेचा जा रहा , इसके पहले भी सिगरेट गुटखा बेचने का कैंटीन का एक वीडियो वायरल हुआ था , पुलिस ने मौके पर पहुँच अस्पताल कैंटीन से कुछ युवकों को जमघट लगाकर सिगरेट का घुआ उठाते पकड़ा था , अब नाबालिग छात्राओं को सिगरेट बेचते कैंटीन संचालक का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा हैं। #satna #police #news #maihar1
- *ग्राम पंचायत केमार में अवैध उत्खनन: प्रशासन की लापरवाही का एक और उदाहरण* रामपुर बाघेलन- ग्राम पंचायत केमार में अवैध उत्खनन का मामला सामने आया है, जहां सागमन के पेड़ काटकर मुरूम निकाली जा रही है और खाई बना दी गई है। यह मामला मध्य प्रदेश के सतना जिले का है, जहां प्रशासन की लापरवाही के कारण अवैध उत्खनन धड़ल्ले से चल रहा है अवैध उत्खनन के इस मामले में स्थानीय लोगों ने शिकायत की है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यह मामला सिर्फ केमार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में अवैध उत्खनन के मामले सामने आते रहते हैं, खासकर मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में *राइजिंग सतना*1
- भिलसाय मंडलम में कांग्रेस की संगठनात्मक बैठक संपन्न ब्लॉक कांग्रेस कमेटी देवेंद्र नगर के तत्वाधान में मंडलम भिलसाय के फुलदरी मैं बैठक आयोजित की गई जिसमें जिला कांग्रेस कमेटी संगठन प्रभारी राजभान सिंह जिला कांग्रेस कमेटी जिला अध्यक्ष अनीश खान सर प्रभारी अशोक कुमार पूर्व ब्लाक अध्यक्ष आनंद शुक्ला ब्लॉक अध्यक्ष मिलन कुशवाहा के मुख्य अतिथि में एवं हिम्मत बागरी के नेतृत्व में संगठनात्मक बैठक आयोजित की गई जिसमें मनरेगा एवं अन्य योजनाओं के संबंध में चर्चाएं की गई1
- कटनी। महाशिवरात्रि पर महाकाल सरकार सेवा समिति का भव्य आयोजन, सैकड़ों भक्तों ने लिया महाप्रसाद1
- सतना के सिद्धार्थ नगर में हूटर की तेज आवाज के साथ तेज रफ्तार में काली स्कॉर्पियो, पूरे शहर में हूटर वाली गाड़ियों की धमाचौकड़ी, नियम विरुद्ध गाड़ियों में हूटर लगा घूम रहे हर आम और खास।1
- Post by रोहित कुमार पाठक1
- 💥 *_छपडौर आश्रम के पीछे पेड़ पर चढ़ा तेंदुआ,मौके पर उमड़ी ग्रामीणों की भीड़_* छपडौर आश्रम के पीछे एक तेंदुआ पेड़ पर चढ़ा दिखाई दिया है,जिसके बाद मौके पर हड़कम्प मच गया,देखते ही देखते मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई।तेंदुए को पेड़ पर बैठे देख लोगों में दहशत और उत्सुकता दोनों का माहौल बना है।घटना की सूचना मिलते ही बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का पार्क अमला तत्काल मौके पर पहुंच गया। वन अमले द्वारा ग्रामीणों को तेंदुए से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की समझाइश दी जा रही है, साथ ही भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है।वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि तेंदुआ संभवतः भीड़ और शोरगुल के कारण पेड़ पर चढ़ गया है। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना घटित न हो।वन विभाग का कहना है कि सुरक्षा के दृष्टिगत निर्देशों का पालन करें।1