गाजियाबाद घटना के बाद महिला आयोग सख्त, ऑनलाइन पढ़ाई और मोबाइल उपयोग पर उठे सवाल गाजियाबाद की दर्दनाक घटना में तीन नाबालिग बच्चियों की आत्महत्या के बाद राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता चौहान ने कड़ा रुख अपनाया है। अध्यक्ष ने इस घटना को पूरे समाज के लिए गंभीर चेतावनी बताते हुए बच्चों पर बढ़ते डिजिटल दबाव और मोबाइल की लत को चिंताजनक बताया है। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने कहा कि कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई एक मजबूरी थी, लेकिन अब परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं। ऐसे में बच्चों के हाथ में लगातार मोबाइल देना उनकी मानसिक सेहत के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ता दबाव और अनियंत्रित ऑनलाइन कंटेंट बच्चों में तनाव और अवसाद जैसी समस्याएँ पैदा कर रहा है। आयोग अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि स्कूलों को नोटिस भेजने की तैयारी की जा रही है, जिसमें मोबाइल के जरिए होमवर्क देने की व्यवस्था पर रोक लगाने पर जोर होगा। उन्होंने स्कूलों से पढ़ाई के लिए सुरक्षित और वैकल्पिक माध्यम अपनाने की अपील की, ताकि बच्चों पर डिजिटल निर्भरता कम की जा सके। बबीता चौहान ने अभिभावकों से भी बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने की अपील करते हुए कहा कि बच्चों का भविष्य सुरक्षित रखना स्कूल और माता-पिता दोनों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि गाजियाबाद की घटना से सबक लेते हुए आयोग ठोस कदम उठाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
गाजियाबाद घटना के बाद महिला आयोग सख्त, ऑनलाइन पढ़ाई और मोबाइल उपयोग पर उठे सवाल गाजियाबाद की दर्दनाक घटना में तीन नाबालिग बच्चियों की आत्महत्या के बाद राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता चौहान ने कड़ा रुख अपनाया है। अध्यक्ष ने इस घटना को पूरे समाज के लिए गंभीर चेतावनी बताते हुए बच्चों पर बढ़ते डिजिटल दबाव और मोबाइल की लत को चिंताजनक बताया है। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने कहा कि कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई एक मजबूरी थी, लेकिन अब परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं। ऐसे में बच्चों के हाथ में लगातार मोबाइल देना उनकी मानसिक सेहत के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ता दबाव और अनियंत्रित ऑनलाइन कंटेंट बच्चों में तनाव और अवसाद जैसी समस्याएँ पैदा कर रहा है। आयोग अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि स्कूलों को नोटिस भेजने की तैयारी की जा रही है, जिसमें मोबाइल के जरिए होमवर्क देने की व्यवस्था पर रोक लगाने पर जोर होगा। उन्होंने स्कूलों से पढ़ाई के लिए सुरक्षित और वैकल्पिक माध्यम अपनाने की अपील की, ताकि बच्चों पर डिजिटल निर्भरता कम की जा सके। बबीता चौहान ने अभिभावकों से भी बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने की अपील करते हुए कहा कि बच्चों का भविष्य सुरक्षित रखना स्कूल और माता-पिता दोनों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि गाजियाबाद की घटना से सबक लेते हुए आयोग ठोस कदम उठाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
- ऑनलाइन पढ़ाई पर रोक के लिए भेजेंगे नोटिस महिला आयोग शक्त1
- Post by Khachera Aadiwasi1
- # Mere Ghar Ki Raunak hai Social Media news#1
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- गाजियाबाद की दर्दनाक घटना में तीन नाबालिग बच्चियों की आत्महत्या के बाद राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता चौहान ने कड़ा रुख अपनाया है। अध्यक्ष ने इस घटना को पूरे समाज के लिए गंभीर चेतावनी बताते हुए बच्चों पर बढ़ते डिजिटल दबाव और मोबाइल की लत को चिंताजनक बताया है। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने कहा कि कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई एक मजबूरी थी, लेकिन अब परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं। ऐसे में बच्चों के हाथ में लगातार मोबाइल देना उनकी मानसिक सेहत के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ता दबाव और अनियंत्रित ऑनलाइन कंटेंट बच्चों में तनाव और अवसाद जैसी समस्याएँ पैदा कर रहा है। आयोग अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि स्कूलों को नोटिस भेजने की तैयारी की जा रही है, जिसमें मोबाइल के जरिए होमवर्क देने की व्यवस्था पर रोक लगाने पर जोर होगा। उन्होंने स्कूलों से पढ़ाई के लिए सुरक्षित और वैकल्पिक माध्यम अपनाने की अपील की, ताकि बच्चों पर डिजिटल निर्भरता कम की जा सके। बबीता चौहान ने अभिभावकों से भी बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने की अपील करते हुए कहा कि बच्चों का भविष्य सुरक्षित रखना स्कूल और माता-पिता दोनों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि गाजियाबाद की घटना से सबक लेते हुए आयोग ठोस कदम उठाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।1
- क्या बोली राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष1
- गाजियाबाद में तीन नाबालिग बच्चियों की आत्महत्या की दर्दनाक घटना के बाद राज्य महिला आयोग सख्त हो गया है। आयोग अध्यक्ष बबीता चौहान ने इस घटना को पूरे समाज के लिए चेतावनी बताया है। महिला आयोग ने ऑनलाइन पढ़ाई और मोबाइल से दिए जा रहे होमवर्क पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आयोग का कहना है कि बच्चों के हाथ में मोबाइल उनकी मानसिक सेहत के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। स्कूलों को नोटिस भेजने की तैयारी है और मोबाइल आधारित पढ़ाई पर रोक लगाने के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। अध्यक्ष ने कहा कि कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई मजबूरी थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। डिजिटल दबाव, ऑनलाइन कंटेंट और मोबाइल की लत बच्चों को तनाव और अवसाद की ओर धकेल रही है। महिला आयोग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें। आयोग ने साफ किया कि बच्चों का भविष्य सुरक्षित रखना स्कूल और माता-पिता — दोनों की साझा जिम्मेदारी है।1