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Ganga prasad choudhary
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- -----------------------------------नमस्कार, आप देख रहे दरभंगा जिले का केवटी प्रखंड आज भ्रष्टाचार के खिलाफ सुलग उठा है। जब 'रक्षक ही भक्षक' बन जाए और जिले के आला अधिकारी आँखें मूंद लें, तो जनता का सड़क पर उतरना तय है। मामला केवटी के बीडीओ चंद्रमोहन पासवान और प्रखंड प्रमुख के महाघोटाले का है। डीएम की रिपोर्ट में लगभग 15 लाख के गबन और 14 सरकारी पेड़ों की चोरी की पुष्टि हो चुकी है, फिर भी भ्रष्ट अधिकारियों पर एफआईआर नहीं हुई। इसी से आक्रोशित होकर आज केवटी की जनता और जनप्रतिनिधियों ने प्रखंड कार्यालय पर बीडीओ और प्रमुख का पुतला फूंका। देखिए हमारी यह एक्सक्लूसिव ग्राउंड रिपोर्ट... ----------------------------------- आग की इन लपटों में जो जल रहा है, वह सिर्फ एक पुतला नहीं, बल्कि केवटी प्रखंड का वह 'भ्रष्ट सिंडिकेट' है जिसने विकास के नाम पर पंचायत को लूट लिया है। दोपहर 12 बजते ही केवटी प्रखंड कार्यालय नारों से गूंज उठा। आक्रोशित जनता और पंचायत समिति सदस्यों ने बीडीओ चंद्रमोहन पासवान और प्रखंड प्रमुख का पुतला दहन कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। ----------------------------------- यह विरोध हवा-हवाई नहीं है, बल्कि इसके पीछे सबूतों का पहाड़ है। जिलाधिकारी दरभंगा के ज्ञापांक 1010 ने साफ कर दिया है कि योजनाओं में लगभग 14 लाख 87 हजार रुपये का सीधा गबन हुआ है। प्रमुख के परिजनों को ही फर्जी मजदूर बनाकर ई-ग्राम स्वराज का पैसा लूट लिया गया। इतना ही नहीं, डीएफओ की रिपोर्ट 855 चीख-चीख कर कह रही है कि प्रखंड परिसर से 14 बहुमूल्य सरकारी पेड़ काट लिए गए हैं। लेकिन विडंबना देखिए, एफआईआर दर्ज करने के बजाय जिला प्रशासन ने 'चोर को ही कोतवाल' बना दिया है और बीडीओ को ही जाँच का जिम्मा सौंप दिया है। ----------------------------------- "डीएम साहब ने खुद माना है कि 14 लाख का गबन हुआ है। डीएफओ कह रहे हैं 14 पेड़ चोरी हुए हैं। बीडीओ साक्ष्य मिटाने के लिए 2 साल पुरानी आंधी का झूठा पत्र थाने में दे रहा है। मानवाधिकार आयोग (BHRC) ने डीएम को नोटिस भेज दिया है। फिर भी बीडीओ अपनी कुर्सी पर बैठकर 'जियो-टैगिंग' रोक रहा है और हमें धमकियां दिलवा रहा है। यह प्रशासन की मिलीभगत नहीं तो और क्या है?" ----------------------------------- आरोप है कि बीडीओ अपने पद का दुरुपयोग कर अब सबूत मिटाने में जुटे हैं। प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे के भीतर नामजद एफआईआर दर्ज कर बीडीओ को निलंबित नहीं किया गया, तो यह आग प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय तक पहुंचेगी। ----------------------------------- "एक तरफ सरकारी फाइलों में गबन का सच दर्ज है, और दूसरी तरफ सड़क पर जनता का गुस्सा। अब देखना यह है कि मानवाधिकार आयोग के डंडे और इस जन-आंदोलन के बाद, क्या दरभंगा का जिला प्रशासन इस भ्रष्ट सिंडिकेट पर एफआईआर दर्ज करने की हिम्मत जुटा पाता है, या फिर फाइलों को यूं ही दबा दिया जाएगा?1
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- बिहार का हालत1
- Post by Md Murshid1
- (रिपोर्टर इंट्रो): दरभंगा जिले के केवटी प्रखंड के केवटी पंचायत के जिब्रा ग्राम से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। केवटी पंचायत के जिब्रा गांव में बीती रात आई तेज आंधी ने दशकों पुरानी एक प्राकृतिक विरासत को उजाड़ दिया। गांव की पहचान माना जाने वाला लगभग 80 वर्ष पुराना विशालकाय नीम का पेड़ तेज हवाओं के दबाव को झेल नहीं सका और जड़ से उखड़ कर गिर गया। (मुख्य समाचार): जिब्रा गांव के मुख्य पथ पर स्थित यह नीम का वृक्ष न केवल पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि गांव के बुजुर्गों और युवाओं के लिए एक यादों का केंद्र भी था। ग्रामीणों के अनुसार, यह पेड़ करीब आठ दशकों से गांव की शोभा बढ़ा रहा था। आंधी के कारण इसके गिरने से रास्ते पर आवागमन भी कुछ समय के लिए बाधित रहा। मामले की गंभीरता और स्थानीय लोगों की सूचना पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा केवटी के अंचलाधिकारी (CO) भास्कर मंडल ने त्वरित संज्ञान लिया। अधिकारियों के समन्वय से वन विभाग की टीम को सूचित किया गया। CO भास्कर मंडल की इस सक्रिय पहल के बाद वन विभाग के कर्मियों ने मौके पर पहुँचकर गिरे हुए पेड़ की नियमानुसार कटिंग शुरू की। वन विभाग द्वारा इस लकड़ी को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है। प्रशासनिक नियमों के तहत, वन विभाग द्वारा इस लकड़ी की विधिवत नीलामी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। नीलामी से प्राप्त होने वाली समस्त राशि को सरकारी खजाने (Government Treasury) में जमा किया जाएगा। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अंचलाधिकारी की इस त्वरित कार्रवाई की ग्रामीणों ने सराहना की है, जिससे न केवल बाधित रास्ता साफ हुआ बल्कि सरकारी संपत्ति का भी पारदर्शी तरीके से निपटारा सुनिश्चित किया गया। हेडलाइन: यादों का साया नहीं होगा ओझल: इकबाल अंसारी का भावुक संकल्प केवटी के जिब्रा गांव में 80 साल पुराने नीम के पेड़ का गिरना केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि एक युग का अंत है। पंचायत समिति प्रतिनिधि इकबाल अंसारी के लिए यह पेड़ उनके बचपन और गांव की अनगिनत सांझी यादों का हिस्सा था। भावुक मन से इकबाल अंसारी ने कहा, "यह नीम हमारे पुरखों की निशानी था, जिसकी छांव में हमारी पीढ़ियां जवान हुईं। इसके गिरने से आज गांव का एक कोना सूना हो गया है।" लेकिन इस विरासत को जीवित रखने के लिए इकबाल अंसारी ने एक सराहनीय पहल की है। उन्होंने संकल्प लिया है कि: 1. ठीक उसी स्थान पर फिर से एक नया 'नीम का पौधा' रोपा जाएगा। 2. वहां एक भव्य 'चबूतरा' बनाया जाएगा, ताकि गांव की चौपाल और वह अपनापन फिर से जीवंत हो सके। यह पहल न केवल पर्यावरण के प्रति प्रेम दर्शाती है, बल्कि गांव की संस्कृति और स्मृतियों को संजोने का एक सुंदर प्रयास है।4