कल भारत ने कुछ असाधारण हासिल कर लिया है..... जिसके बारे में ज्यादा लोगों को पता नहीं.... इस उपलब्धि की अहमियत का पता नहीं. कलपक्कम न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स में प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने “क्रिटिकलिटी” प्राप्त कर ली है। कल रात 8:25 बजे भारत ने वो कर दिखाया, जिसकी दुनिया सालों से इंतजार कर रही थी। मतलब? रिएक्टर अब खुद-ब-खुद न्यूट्रॉन पैदा करके परमाणु विखंडन की आग को जलाए रख सकता है। बिना किसी बाहरी मदद के! ये कोई साधारण घटना नहीं... ये भारत के तीन चरणीय परमाणु कार्यक्रम का दूसरा चरण आधिकारिक तौर पर सक्रिय होने का ऐलान है। PM मोदी ने खुद इसे “defining step” बताया और कहा — ये गर्व का पल है! अब समझिए इसकी भयंकर ताकत: 1 किलो कोयला जलाओ → सिर्फ 8 kWh बिजली 1 किलो यूरेनियम-235 → 2 करोड़ 40 लाख kWh बिजली लेकिन 1 किलो थोरियम... वो देगा जितनी बिजली 200 टन यूरेनियम या 3500 टन कोयला से मिलती है! भारत के पास दुनिया का 25% थोरियम भंडार है — यानी 10 लाख टन से ज्यादा! अगर हम इसे पूरा इस्तेमाल कर लें, तो 3,58,000 गीगावॉट ईयर बिजली पैदा कर सकते हैं। तुलना करो: भारत अभी पूरे साल में जितनी बिजली बनाता है — वो सिर्फ 170-190 गीगावॉट ईयर है। यानी थोरियम पर चलते हुए हम कई सौ सालों तक स्वच्छ, सस्ती और आत्मनिर्भर ऊर्जा में तैर सकते हैं! ये कोई साधारण रिएक्टर नहीं है। ये भारतीय डिजाइन, भारतीय वैज्ञानिकों और BHAVINI + IGCAR की दशकों की रात-दिन की मेहनत का नतीजा है। डॉ. होमी भाभा ने 1950-60 के दशक में जो सपना देखा था — थोरियम से ऊर्जा का अमृत — वो आज हकीकत बन रहा है। जब पूरी दुनिया कोयला, गैस और यूरेनियम के लिए लड़ रही है, तब भारत चुपचाप अपना भविष्य गढ़ रहा है। इस उपलब्धि के पीछे वो अनाम हीरो हैं — वैज्ञानिक, इंजीनियर और टेक्नीशियन — जिन्होंने सालों तक बिना सुर्खियों के, बिना थके, असंभव को संभव बनाया। भारत अब सिर्फ ऊर्जा आत्मनिर्भर नहीं... ऊर्जा का साम्राज्य बनाने की राह पर है! ये पल गर्व का है। ये पल इतिहास रचने का है। सभी उन वैज्ञानिकों को सलाम, जिन्होंने सिर्फ रिएक्टर नहीं... भारत के आने वाले सैकड़ों सालों को रोशन कर दिया है।
कल भारत ने कुछ असाधारण हासिल कर लिया है..... जिसके बारे में ज्यादा लोगों को पता नहीं.... इस उपलब्धि की अहमियत का पता नहीं. कलपक्कम न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स में प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने “क्रिटिकलिटी” प्राप्त कर ली है। कल रात 8:25 बजे भारत ने वो कर दिखाया, जिसकी दुनिया सालों से इंतजार कर रही थी। मतलब? रिएक्टर अब खुद-ब-खुद न्यूट्रॉन पैदा करके परमाणु विखंडन की आग को जलाए रख सकता है। बिना किसी बाहरी मदद के! ये कोई साधारण घटना नहीं... ये भारत के तीन चरणीय परमाणु कार्यक्रम का दूसरा चरण आधिकारिक तौर पर सक्रिय होने का ऐलान है। PM मोदी ने खुद इसे “defining step” बताया और कहा — ये गर्व का पल है! अब समझिए इसकी भयंकर ताकत: 1 किलो कोयला जलाओ → सिर्फ 8 kWh बिजली 1 किलो यूरेनियम-235 → 2 करोड़ 40 लाख kWh बिजली लेकिन 1 किलो थोरियम... वो देगा जितनी बिजली 200 टन यूरेनियम या 3500 टन कोयला से मिलती है! भारत के पास दुनिया का 25% थोरियम भंडार है — यानी 10 लाख टन से ज्यादा! अगर हम इसे पूरा इस्तेमाल कर लें, तो 3,58,000 गीगावॉट ईयर बिजली पैदा कर सकते हैं। तुलना करो: भारत अभी पूरे साल में जितनी बिजली बनाता है — वो सिर्फ 170-190 गीगावॉट ईयर है। यानी थोरियम पर चलते हुए हम कई सौ सालों तक स्वच्छ, सस्ती और आत्मनिर्भर ऊर्जा में तैर सकते हैं! ये कोई साधारण रिएक्टर नहीं है। ये भारतीय डिजाइन, भारतीय वैज्ञानिकों और BHAVINI + IGCAR की दशकों की रात-दिन की मेहनत का नतीजा है। डॉ. होमी भाभा ने 1950-60 के दशक में जो सपना देखा था — थोरियम से ऊर्जा का अमृत — वो आज हकीकत बन रहा है। जब पूरी दुनिया कोयला, गैस और यूरेनियम के लिए लड़ रही है, तब भारत चुपचाप अपना भविष्य गढ़ रहा है। इस उपलब्धि के पीछे वो अनाम हीरो हैं — वैज्ञानिक, इंजीनियर और टेक्नीशियन — जिन्होंने सालों तक बिना सुर्खियों के, बिना थके, असंभव को संभव बनाया। भारत अब सिर्फ ऊर्जा आत्मनिर्भर नहीं... ऊर्जा का साम्राज्य बनाने की राह पर है! ये पल गर्व का है। ये पल इतिहास रचने का है। सभी उन वैज्ञानिकों को सलाम, जिन्होंने सिर्फ रिएक्टर नहीं... भारत के आने वाले सैकड़ों सालों को रोशन कर दिया है।
- *पूर्व विधायक यादवेंद्र सिंह को श्रधांजलि देने अग्रवाल धर्मशाला उमड़ा क्षेत्र वासियो का हुजूम।* सतना जिले की राजनीति में संर्घष के नाम से अलग पहचान रखने वाले पूर्व विधायक यादवेन्द्र सिंह सच्चे मायनो में जन जन नायक से कम नही थे।नागौद विधान सभा जैसे विधान सभा क्षेत्र उन्हों दो तरफा संघर्ष कर राजनीति में अलग मुकाम हासिल किया था।अंतिम सांस तक उन्हों ने विपक्ष के नेता के रूप में आम जनता के लिए संघर्ष किया सदैव कांग्रेस के बैनर तले राजनीति की अलग विषाद बिछाई थी।उनके नही रहने पर लोग उनके संघर्ष को आज भी अपने दिनों में जिंदा किए हुए है।उसी का परिणाम है कि नगर वासियो ने अग्रवाल धर्मशाला में एकत्रित हो उनके छायाचित्र में पुष्पअर्पित कर नम आंखों से उन्हें श्रधांजलि दी।उनके द्वारा किए गए संघर्ष व कार्यो को लेकर भाव के साथ मौजूद कार्यकर्ताओ ने रखा।साथ ही पूर्व जिला पंचायत सदस्य यातेंद्र सिंह,एवं भतीजे नीरज सिंह के साथ सदैव साथ रहने का वायदा किया।इस दौरान उनके पुत्र पूर्व जिला पंचायत सदस्य यातेंद्र सिंह,भतीजे पूर्व सरपंच नीरज सिंह,जिला पंचायत सदस्य ज्ञानेंद्र ज्ञानू,पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष हरीश कुमार ताम्रकार,महेश शर्मा दाउ,कौशलेंद्र प्रताप सिंह,रंजीत सिंह,उमेश गौतम,मुबारक अली भूरा,दिलीप जैन,सुरेश पाठक,धर्मराज हरबोल,राजेंद्र अग्रवाल,नंदू कुशवाहा,डॉ लक्ष्मण कुशवाहा,रूप कुमार हरबोल,पूर्व पार्षद राजिकिशोर बर्मन,भूपेंद्र तिवारी,विनय ताम्रकार लल्ले,रजनीश शुक्ला,कृष्ण बिहारी मिश्रा,उमेश सोनी,सोनू पांडेय सियासखीं चौधरीं, कैलशियम चौधरी,इंजीनियर ज्ञानेंद्र सिंह कुशवाहा,पूष्पेंद्र ताम्रकार,कैलाश ताम्रकार, मनोज वर्मा,रामलखन दुवेदी के साथ काफी संख्या में क्षेत्रीय जन रहे मौजूद।1
- Post by Neeraj Ravi1
- *मैहर में जंगलराज की बानगी जरूर देखे जिम्मेवार।* *भदनपुर बराखुर्द मार्ग बना मौत का जाल, ओवरलोड ट्रकों पर भड़के ग्रामीण, दी सीधी चेतावनी!* मैहर के भदनपुर बराखुर्द मार्ग की जर्जर हालत ने अब स्थानीय लोगों का गुस्सा विस्फोटक बना दिया है। सड़क पूरी तरह उखड़ चुकी है, गड्ढों में तब्दील रास्ता हादसों को खुला न्योता दे रहा है। इसके बावजूद बेलगाम ओवरलोड ट्रक धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं, जिससे हालात और भयावह हो गए हैं। आक्रोशित ग्रामीणों ने ट्रक चालकों को लड्डू खिलाकर सख्त संदेश दिया है—इस मार्ग का इस्तेमाल तुरंत बंद करें और निजी रास्तों का उपयोग करें। चेतावनी साफ है, अगर अब भी अनदेखी हुई तो ग्रामीण खुद सड़कों पर उतरकर ट्रकों की आवाजाही पूरी तरह ठप कर देंगे।1
- अमरपाटन श्री एमएम हॉस्पिटल सतना रोड अमरपाटन कृष्णा नगर कॉलोनी के सामने1
- साथियों यह मन्दिर जो आप लोग देख रहे हैं ग्राम पुरवा में है जोकि रीवा से करीब 29 किलो मीटर दूर है यहां सबसे बड़ी बात है धनुष धारी भगवान की अद्भुत मूर्ति जोकि इतनी बड़ी प्रतिमा पूरे भारत में नहीं है ऐसा कहना यह के पुजारी जी का है1
- शुभ रविवार मिनी वृंदावन धाम पन्ना भगवान जुगल किशोर महाराज जी के दर्शन प्राप्त करें।1
- भोपाल मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने सुप्रसिद्ध गायिका स्व. आशा भोसले को दी श्रद्धांजलि.. कहा दोनों बहनों की रही अमर जोड़ी.. 50 का दशक, 60 का, 70 का, 80 का 90 का दशक में उनकी आवाज का जादू... मध्यप्रदेश सरकार ने भी उन्हें किया था सम्मानित.. मध्यप्रदेश से उनका पुराना रहा नाता.. बाबा महाकाल से की मोक्ष की कामना..1
- Post by Neeraj Ravi1
- सांसद विष्णु दत्त शर्मा के प्रयास से संजू आदिवासी की लाश हैदराबाद से पन्ना पहुंची 5 अप्रैल को हैदराबाद में एक्सीडेंट से हो गई थी मौत डेड बॉडी प्राप्त करने परिजन दर-दर भटक रहे थे पन्ना के अमझिरिया निवासी संजू आदिवासी दो वक्त की रोटी के तलाश में हैदराबाद गया हुआ था गांव में ही परिवार को छोड़कर संजू पिता दारा गोड अकेले ही हैदराबाद में मजदूरी कर रहा था, तभी काम से लौटते वक्त एक एक्सीडेंट में उसकी मौत हो गई, तीन मासूम संतानों का पिता संजू आदिवासी की मौत की खबर जब परिजनों को लगी तो गरीब परिजन लाश प्राप्त करने के लिए दर-दर भटक रहे थे लेकिन उन्हें कोई मदद नहीं मिल रही थी तभी सांसद विष्णु दत्त शर्मा रास्ते से गुजरे तब बिलख रहे परिजनों ने अपनी आपबीती बताई तत्काल सांसद विष्णु शर्मा ने हैदराबाद प्रशासन से संपर्क किया तत्काल संजू आदिवासी के शव को पन्ना पहुंचने की व्यवस्था करवाई, 35 घंटे के अंदर एंबुलेंस के माध्यम से संजू की डेड बॉडी अमझिरिया पहुंच गई है जैसे ही शव परिजनों के पास पहुंचा परिजन और गांव के लोग बिलख उठे, संजू अपने पीछे 14 वर्षीय बेटी कांति गोड़,10 वर्षीय पुत्र मीनू और 7 वर्षीय बेटी मनीषा को छोड़ गए है 35 वर्षीय पत्नी वर्षा ने बताया कि हम लोग शव को पन्ना ला पा ने में असमर्थ थे घर में पैसे नहीं थी और कोई संपर्क नहीं हो रहा था पर सांसद विष्णु दत्त शर्मा के प्रयास से हमारे पति की डेड बॉडी हमें प्राप्त हो गया है जिसका विधिवत अंतिम संस्कार कर रहे हैं, सांसद विष्णु दत्त शर्मा ने कहा है कि यह गरीब लोग हैं मैं नियमानुसार आर्थिक मदद भी कर रहा हूं संकट की इस घड़ी में परिवार को अकेला नहीं छोड़ सकते, हम पूरी तरह से परिवार की मदद कर रहे हैं, ग्राम वासियों ने जरूरत के समय पर तत्काल मदद से संसद की कार्य की सराहना की है1