तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार जताई आपत्ति, चुनाव आयोग में अंदरूनी मतभेद की रिपोर्ट से सियासत गरम नई दिल्ली। चुनाव आयोग को लेकर एक रिपोर्ट सामने आने के बाद देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। द इंडियन एक्सप्रेस की जांच रिपोर्ट के अनुसार तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में शामिल चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के कई फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई। रिपोर्ट के मुताबिक एक ही दिन में चार आपत्तियां दर्ज की गई थीं।रिपोर्ट के अनुसार दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR, नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाताओं के नाम हटाने और बहाल करने, फॉर्म 6 में बदलाव, मतदाता डेटा और चुनावी सॉफ्टवेयर के नियंत्रण से जुड़े मामलों को लेकर थीं। दोनों अधिकारियों ने कुछ प्रक्रियाओं पर सवाल उठाते हुए उन्हें अनधिकृत और कानून के अनुरूप नहीं बताया तथा मतदाता डेटाबेस और आईटी व्यवस्था के अधिक केंद्रीकरण को लेकर भी चिंता जताई। रिपोर्ट के अनुसार चुनावी सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली और उसके नियंत्रण को लेकर दोनों आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव तक अपनी चिंता पहुंचाई। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी नेताओं ने इसे चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर मामला बताया है। राहुल गांधी लंबे समय से चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाते रहे हैं। 23 सितंबर 2026 को भी उन्होंने 'वोट चोरी' के आरोपों को दोहराते हुए चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि ये आरोप राजनीतिक दावे हैं, जिन्हें चुनाव आयोग और भाजपा खारिज करते रहे हैं। वहीं चुनाव आयोग ने द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद अपना पक्ष रखते हुए कहा कि SIR सहित आयोग के सभी महत्वपूर्ण फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए। आयोग के अधिकारियों के अनुसार संधू और जोशी ने कुछ मुद्दों पर चिंताएं जरूर उठाईं, लेकिन अंतिम निर्णयों पर तीनों की सहमति थी। चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार जहां संभव हो, फैसले सर्वसम्मति से लिए जाते हैं और सर्वसम्मति न बनने की स्थिति में बहुमत का निर्णय लागू होता है।इस पूरे विवाद का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि राहुल गांधी पहले भी सत्ता परिवर्तन की स्थिति में कार्रवाई की बात सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं। मार्च 2024 में उन्होंने कहा था कि भाजपा सरकार बदलेगी तो लोकतंत्र को कमजोर करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और ऐसी कार्रवाई होगी कि दोबारा लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश न हो।
तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार जताई आपत्ति, चुनाव आयोग में अंदरूनी मतभेद की रिपोर्ट से सियासत गरम नई दिल्ली। चुनाव आयोग को लेकर एक रिपोर्ट सामने आने के बाद देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। द इंडियन एक्सप्रेस की जांच रिपोर्ट के अनुसार तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में शामिल चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के कई फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई। रिपोर्ट के मुताबिक एक ही दिन में चार आपत्तियां दर्ज की गई थीं।रिपोर्ट के अनुसार दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR, नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाताओं के नाम हटाने और बहाल करने, फॉर्म 6 में बदलाव, मतदाता डेटा और चुनावी सॉफ्टवेयर के नियंत्रण से जुड़े मामलों को लेकर थीं। दोनों अधिकारियों ने कुछ प्रक्रियाओं पर सवाल उठाते हुए उन्हें अनधिकृत और कानून के अनुरूप नहीं बताया तथा मतदाता डेटाबेस और आईटी व्यवस्था के अधिक केंद्रीकरण को लेकर भी चिंता जताई। रिपोर्ट के अनुसार चुनावी सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली और उसके नियंत्रण को लेकर दोनों आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव तक अपनी चिंता पहुंचाई। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी नेताओं ने इसे चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर मामला बताया है। राहुल गांधी लंबे समय से चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाते रहे हैं। 23 सितंबर 2026 को भी उन्होंने 'वोट चोरी' के आरोपों को दोहराते हुए चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि ये आरोप राजनीतिक दावे हैं, जिन्हें चुनाव आयोग और भाजपा खारिज करते रहे हैं। वहीं चुनाव आयोग ने द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद अपना पक्ष रखते हुए कहा कि SIR सहित आयोग के सभी महत्वपूर्ण फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए। आयोग के अधिकारियों के अनुसार संधू और जोशी ने कुछ मुद्दों पर चिंताएं जरूर उठाईं, लेकिन अंतिम निर्णयों पर तीनों की सहमति थी। चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार जहां संभव हो, फैसले सर्वसम्मति से लिए जाते हैं और सर्वसम्मति न बनने की स्थिति में बहुमत का निर्णय लागू होता है।इस पूरे विवाद का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि राहुल गांधी पहले भी सत्ता परिवर्तन की स्थिति में कार्रवाई की बात सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं। मार्च 2024 में उन्होंने कहा था कि भाजपा सरकार बदलेगी तो लोकतंत्र को कमजोर करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और ऐसी कार्रवाई होगी कि दोबारा लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश न हो।
- जमुई के वायरल वीडियो पर राहुल गांधी का हमला, पूछा19 सितंबर की घटना में गुनहगार अब तक सलाखों के पीछे क्यों नहीं बिहार के जमुई जिले में 19 सितंबर की शाम 10वीं कक्षा के नाबालिग छात् छात्रा को रास्ते में रोककर उनके साथ कथित मारपीट, अभद्रता और छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न का वीडियो वायरल होने के बाद मामला राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है। वायरल वीडियो में छात्रा हाथ जोड़कर उन्हें छोड़ देने की गुहार लगाती दिखाई देती है, जबकि कुछ लोग उसके साथ कथित तौर पर गलत तरीके से छूने और खींचतान करते नजर आते हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मामले को लेकर बिहार सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जमुई का वीडियो बेहद बेचैन करने वाला है। राहुल गांधी के अनुसार 10वीं कक्षा के छात्र और छात्रा को रास्ते में जबरदस्ती रोककर प्रताड़ित और अपमानित किया गया तथा छात्रा के साथ उत्पीड़न किया गया। उन्होंने कहा कि वीडियो में दिखाई दे रहे प्रत्येक व्यक्ति की पहचान होनी चाहिए और आरोपियों के खिलाफ POCSO के तहत कार्रवाई कर उन्हें जल्द सजा दिलाई जानी चाहिए। राहुल गांधी ने इसे केवल कानून व्यवस्था का मामला नहीं बल्कि महिलाओं की स्वतंत्रता और सामाजिक सोच से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि किसी लड़की के शरीर, उसके आने-जाने और उसकी पसंद-नापसंद पर किसी पुरुष का नियंत्रण स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर घटना 19 सितंबर की थी तो आरोपी अब तक सलाखों के पीछे क्यों नहीं हैं और बिहार सरकार को जवाब देना चाहिए कि शाम सात बजे कोई लड़की राज्य की सड़कों पर सुरक्षित क्यों नहीं है। हालांकि पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान शुरू की और सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। तीन आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है तथा बाकी आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया है। बिहार पुलिस ने यह भी कहा है कि घटना 19 सितंबर की शाम करीब 6:25 से 6:30 बजे के बीच हुई थी। पुलिस के अनुसार मामले में BNS की संबंधित धाराओं के साथ POCSO की धाराओं में कार्रवाई की गई है। साथ ही पीड़िता का चेहरा स्पष्ट दिखाई देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। पुलिस ने कई सोशल मीडिया अकाउंट्स को वीडियो हटाने के लिए नोटिस भेजे हैं। इस मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि पीड़ित नाबालिग हैं। इसलिए घटना के वीडियो को शेयर करते समय उनकी पहचान उजागर करना कानूनन और नैतिक दोनों दृष्टि से गंभीर मामला हो सकता है। बिहार पुलिस ने लोगों से ऐसे वीडियो को प्रसारित न करने की चेतावनी दी है। घटना के बाद बिहार में कानून व्यवस्था और महिलाओं तथा नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। बिहार सरकार की ओर से मंत्री रामकृपाल यादव ने घटना की निंदा करते हुए राहुल गांधी पर मामले को राजनीतिक रूप देने का आरोप लगाया और परिवारों में नैतिक मूल्यों पर ध्यान देने की बात कही। मामले का अगला महत्वपूर्ण पहलू अब पुलिस जांच है। वीडियो में दिखाई दे रहे सभी लोगों की पहचान, प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका, पीड़ितों के बयान और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी। इसलिए आरोपियों की अंतिम भूमिका और दोष सिद्ध होने का फैसला जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।1
- 22 सितंबर 2026 की सभी खास खबरें देखें और सुने एकसाथ श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स के वीडियो न्यूज बुलेटिन में:- 22 सितंबर 2026 की सभी खास खबरें देखें और सुने एकसाथ श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स के वीडियो न्यूज बुलेटिन में:-1
- पुलिस थाना खींवसर पर जनसुनवाई का किया गया आयोजन गुमशुदा मोबाइल मालिकों को लौटाए खींवसर ,,राजीव कुमार शर्मा महानिदेशक पुलिस, राजस्थान, जयपुर के निर्देशानुसार आमजन की शिकायतों के त्वरित, पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण एवं नागरिक - केन्द्रित निस्तारण के क्रम में आशा राम चौधरी, पुलिस अधीक्षक, जिला नागौर द्वारा दिनांक 23 सितंबर 2026 को पुलिस थाना खींवसर पर जनसुनवाई का आयोजन किया गया। उक्त जनसुनवाई में जतिन जैन,(आई.पी.एस.) सहायक पुलिस अधीक्षक, वृत्त नागौर, सुरेश कुमार नि.पु. थानाधिकारी खींवसर मय जाब्ता उपस्थित रहे। जनसुनवाई में सुनी गई आमजन की समस्याएं :- जनसुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में परिवादी अपनी-अपनी समस्याओं एवं शिकायतों के निराकरण हेतु उपस्थित हुए। जनसुनवाई के दौरान जमीनी विवाद, पारिवारिक विवाद, अतिक्रमण, मारपीट, धोखाधड़ी, साइबर ठगी व अन्य प्रकरणों से संबंधित परिवाद प्राप्त हुए। सभी परिवादियों की समस्याओं एवं शिकायतों को जिला पुलिस अधीक्षक एवं वृत्ताधिकारी द्वारा गंभीरता, संवेदनशीलता एवं प्राथमिकता के आधार पर सुना गया। जनसुनवाई के उपरांत प्राप्त आवेदनों एवं शिकायतों के त्वरित, निष्पक्ष एवं प्रभावी निष्पादन को सुनिश्चित करने हेतु संबंधित थानाधिकारी एवं पुलिस पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये। साथ ही प्रत्येक मामले में नियमानुसार गुणवत्तापूर्ण कार्रवाई सुनिश्चित करने एवं परिवादियों को समयबद्ध रूप से राहत प्रदान करने हेतु निर्देशित किया गया । थाना खींवसर पुलिस की सराहनीय पहल - गुमशुदा मोबाइल मालिकों को लौटाए :- जनसुनवाई के दौरान एक सराहनीय पहल करते हुए थाना खींवसर पुलिस टीम द्वारा CEIR पोर्टल व तकनीकी सहायता से बरामद किए गए कुल 10 गुमशुदा मोबाइल फोन, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 2 लाख रुपये है, उनके वास्तविक मालिकों को आशा राम चौधरी जिला पुलिस अधीक्षक, नागौर द्वारा सुपुर्द किए गए। अपने खोए हुए मोबाइल फोन वापस पाकर परिवादियों के चेहरे पर खुशी देखने को मिली तथा उन्होंने नागौर पुलिस का आभार व्यक्त किया । सम्पत्ति अपराधों पर अंकुश लगाने पर ग्रामीणों ने किया स्वागत :- जनसुनवाई के दौरान थाना खींवसर क्षेत्र के ग्रामीणों, सरपंचगण सीएलजी सदस्य, ग्राम रक्षक, पुलिस मित्र, महिला सुरक्षा सखी एवं गणमान्य नागरिकों द्वारा हाल ही में क्षेत्र में बढ़ते सम्पत्ति संबंधी अपराधों ( नकबजनी चोरी) पर प्रभावी अंकुश लगाने, अपराधियों की धरपकड़ करने तथा रात्रि गश्त को सुदृढ़ करने पर जिला पुलिस अधीक्षक, वृत्ताधिकारी एवं थाना खींवसर पुलिस टीम का माला व साफा पहनाकर स्वागत एवं आभार व्यक्त किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि पुलिस की सक्रियता से क्षेत्र में चोरी की वारदातों में कमी आई है तथा आमजन में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है। इस अवसर पर आशा राम चौधरी एसपी नागौर ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि सम्पत्ति संबंधी अपराधों के विरुद्ध नागौर पुलिस का विशेष अभियान लगातार जारी रहेगा तथा आमजन की सुरक्षा सर्वोपरि है । आमजन ने राजस्थान पुलिस की इस जनसुनवाई पहल की सराहना की ।3
- राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बाबा रामदेव जी के दर्शन किए राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बाबा रामदेवरा के हेलीपोर्ट से उतरकर पैदल चलकर दर्शन कीए सुरक्षा के बहुत सुरक्षाकर्मी लगाए गए भारी पुलिस बल तैनात था1
- गाँव भाकरां में सादुलपुर तहसील के हरियाणा सीमावर्ती गाँव भाकरां में गाँव भाकरां में बाबा श्योपुरी जी महाराज का भव्य मन्दिर1
- श्रीमाली समाज की महा बैठक आयोजित #newsjanawaz ##jodhpurnews श्रीमाली समाज की महा बैठक आयोजित भीनमाल। श्रीमाली ब्राह्मणों की आदि उत्पत्ति स्थली भीनमाल में श्रीमाली ब्राह्मण सर्वगौरव भवनम् हेतु ऐतिहासिक राष्ट्रीय महाबैठक सम्पन्न हुई। बैठक कीअध्यक्षता ठाकुर शेखर व्यास ने की। जबकि मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय ज्योतिषाचार्य पंडित घनश्याम जोशी (मूल कालन्द्री, हाल मुंबई) रहे। विशेष प्रणेता प्रवर्तक विधु शेखर दवे, जोधपुर (पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष), सुकनलाल जी दवे (मूल खीमेल, हाल मुंबई), कांतिलाल ठाकुर केशवना (पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता, राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर), पंडित बालकृष्ण शास्त्री श्रीमाली (गायत्री पंचांग, गुजरात) थे। इस अवसर पर सर्वसम्मति से गठित नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी गठित की गई। अध्यक्ष पंडित घनश्याम जोशी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुकनलाल दवे, सुरेन्द्र त्रिवेदी, भीनमाल, कांतिलाल ठाकुर, विधु शेखर दवे, जोधपुर, किशोरभाई मोतीवाला, जयपुर, बालकृष्ण शास्त्री, गायत्री पंचाग अहमदाबाद, जयन्तिलाल दवे, बैंगलोर, कमलेश त्रिवेदी, राजकोट, महासचिव दिनेशकुमार दवे, भीनमाल, कोषाध्यक्ष चेतनभाई अवस्थी, अहमदाबाद, राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. घनश्याम व्यास, भीनमाल, युवा अध्यक्ष महिपाल अवस्थी, अहमदाबाद, संगठन मंत्री ललित शर्मा (रेलवे), जोधपुर। कार्यकारिणी सदस्य वणधर, विजयराज जोशी चन्द्रशेखर, अश्विनी व्यास, हितेन्द्र सोजत, ओमप्रकाश दवे महामंदिर जोधपुर। विशेष उपस्थिति के रूप में मुकेश ओझा, अहमदाबाद, विमलभाई, हर्षदभाई, अमृतभाई, डीसा, प्रवीणभाई ओझा, दिलीप त्रिवेदी, झुमरलाल करडा, माधव ठाकुर, दिनदयाल ठाकुर, रवि श्रीमाली, वासुदेव अवस्थी, मनोहर, अशोक, किशोर, नरेन्द्र, महेशचंद्र, सुखदेव, जयनारायण, दिवाकर, कुणाल ठाकुर सहित सैकड़ों बंधु उपस्थित रहे।1
- लाडपुरा के प्राचीन महादेव मठ में दक्षिण भारत के चेन्नई से शिव परिवार लाया गया है। इसमें भगवान शिव की प्रतिमा, नंदी और शिवलिंग शामिल हैं। इनके गांव पहुंचने पर ग्रामीणों में खुशी और उत्साह का माहौल है। अब मंदिर परिसर में विधि-विधान से पूजा के बाद शिव परिवार को स्थापित किया जाएगा। ग्रामीणों ने शिव परिवार के आगमन को गांव के लिए सौभाग्य का अवसर बताया है। उनका कहना है कि महादेव मठ में शिव परिवार की स्थापना से मंदिर की धार्मिक अहमियत और बढ़ेगी। प्रतिमाओं के आने के बाद से मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ी है। स्थापना से पहले मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान और पूजा की तैयारियां चल रही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि भगवान शिव की प्रतिमा, नंदी और शिवलिंग को चेन्नई से लाडपुरा लाया गया है। अब शुभ मुहूर्त में पंडितों और पुजारी की मौजूदगी में वैदिक मंत्रों के साथ पूजा कर प्रतिमाओं को मंदिर में स्थापित किया जाएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों के मौजूद रहने की संभावना है। इस आयोजन को लेकर ग्रामीणों में खास उत्साह है। मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं में पुजारी श्याम पुरी, लाडू राम, जेठु सिंह चारण, रामदेव सैन, दिनेश चौधरी, कैलाश सिंह राजपुरोहित, कैलाश शर्मा, बाबूलाल चौकीदार, महावीर पुरी, सुरेश पुरी और इकबाल खान सहित कई ग्रामीण सहयोग कर रहे हैं। शिव परिवार की स्थापना को लेकर महिलाएं भी सक्रिय रूप से सहयोग कर रही हैं। इनमें शकुंतला शर्मा, काजू बडियासर, गायत्री राठौड़, विमला चौकीदार और मोनिका गोस्वामी शामिल हैं। लाडपुरा के सभी ग्रामीणों ने शिव परिवार के आगमन को धार्मिक और शुभ अवसर बताते हुए खुशी जताई है। लाडपुरा के प्राचीन महादेव मठ में दक्षिण भारत के चेन्नई से शिव परिवार लाया गया है। इसमें भगवान शिव की प्रतिमा, नंदी और शिवलिंग शामिल हैं। इनके गांव पहुंचने पर ग्रामीणों में खुशी और उत्साह का माहौल है। अब मंदिर परिसर में विधि-विधान से पूजा के बाद शिव परिवार को स्थापित किया जाएगा। ग्रामीणों ने शिव परिवार के आगमन को गांव के लिए सौभाग्य का अवसर बताया है। उनका कहना है कि महादेव मठ में शिव परिवार की स्थापना से मंदिर की धार्मिक अहमियत और बढ़ेगी। प्रतिमाओं के आने के बाद से मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ी है। स्थापना से पहले मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान और पूजा की तैयारियां चल रही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि भगवान शिव की प्रतिमा, नंदी और शिवलिंग को चेन्नई से लाडपुरा लाया गया है। अब शुभ मुहूर्त में पंडितों और पुजारी की मौजूदगी में वैदिक मंत्रों के साथ पूजा कर प्रतिमाओं को मंदिर में स्थापित किया जाएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों के मौजूद रहने की संभावना है। इस आयोजन को लेकर ग्रामीणों में खास उत्साह है। मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं में पुजारी श्याम पुरी, लाडू राम, जेठु सिंह चारण, रामदेव सैन, दिनेश चौधरी, कैलाश सिंह राजपुरोहित, कैलाश शर्मा, बाबूलाल चौकीदार, महावीर पुरी, सुरेश पुरी और इकबाल खान सहित कई ग्रामीण सहयोग कर रहे हैं। शिव परिवार की स्थापना को लेकर महिलाएं भी सक्रिय रूप से सहयोग कर रही हैं। इनमें शकुंतला शर्मा, काजू बडियासर, गायत्री राठौड़, विमला चौकीदार और मोनिका गोस्वामी शामिल हैं। लाडपुरा के सभी ग्रामीणों ने शिव परिवार के आगमन को धार्मिक और शुभ अवसर बताते हुए खुशी जताई है।1
- तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार जताई आपत्ति, चुनाव आयोग में अंदरूनी मतभेद की रिपोर्ट से सियासत गरम नई दिल्ली। चुनाव आयोग को लेकर एक रिपोर्ट सामने आने के बाद देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। द इंडियन एक्सप्रेस की जांच रिपोर्ट के अनुसार तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में शामिल चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के कई फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई। रिपोर्ट के मुताबिक एक ही दिन में चार आपत्तियां दर्ज की गई थीं।रिपोर्ट के अनुसार दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR, नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाताओं के नाम हटाने और बहाल करने, फॉर्म 6 में बदलाव, मतदाता डेटा और चुनावी सॉफ्टवेयर के नियंत्रण से जुड़े मामलों को लेकर थीं। दोनों अधिकारियों ने कुछ प्रक्रियाओं पर सवाल उठाते हुए उन्हें अनधिकृत और कानून के अनुरूप नहीं बताया तथा मतदाता डेटाबेस और आईटी व्यवस्था के अधिक केंद्रीकरण को लेकर भी चिंता जताई। रिपोर्ट के अनुसार चुनावी सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली और उसके नियंत्रण को लेकर दोनों आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव तक अपनी चिंता पहुंचाई। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी नेताओं ने इसे चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर मामला बताया है। राहुल गांधी लंबे समय से चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाते रहे हैं। 23 सितंबर 2026 को भी उन्होंने 'वोट चोरी' के आरोपों को दोहराते हुए चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि ये आरोप राजनीतिक दावे हैं, जिन्हें चुनाव आयोग और भाजपा खारिज करते रहे हैं। वहीं चुनाव आयोग ने द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद अपना पक्ष रखते हुए कहा कि SIR सहित आयोग के सभी महत्वपूर्ण फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए। आयोग के अधिकारियों के अनुसार संधू और जोशी ने कुछ मुद्दों पर चिंताएं जरूर उठाईं, लेकिन अंतिम निर्णयों पर तीनों की सहमति थी। चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार जहां संभव हो, फैसले सर्वसम्मति से लिए जाते हैं और सर्वसम्मति न बनने की स्थिति में बहुमत का निर्णय लागू होता है।इस पूरे विवाद का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि राहुल गांधी पहले भी सत्ता परिवर्तन की स्थिति में कार्रवाई की बात सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं। मार्च 2024 में उन्होंने कहा था कि भाजपा सरकार बदलेगी तो लोकतंत्र को कमजोर करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और ऐसी कार्रवाई होगी कि दोबारा लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश न हो।1