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पश्चिम बंगाल ने देश और प्रदेश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक अति महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके तहत सिर्फ 2 महीने के भीतर ही बॉर्डर फेंसिंग का काम किया गया है और BSF को 1,000 एकड़ जमीन सौंपी गई है। सीमा सुरक्षा को सुदृढ़ करने वाले इस कदम पर बल देते हुए कहा गया है कि सेना का काम आखिरकार सेना का ही काम होता है।
Patrkar Sarvesh singh rajpoot
पश्चिम बंगाल ने देश और प्रदेश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक अति महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके तहत सिर्फ 2 महीने के भीतर ही बॉर्डर फेंसिंग का काम किया गया है और BSF को 1,000 एकड़ जमीन सौंपी गई है। सीमा सुरक्षा को सुदृढ़ करने वाले इस कदम पर बल देते हुए कहा गया है कि सेना का काम आखिरकार सेना का ही काम होता है।
- User6391Akaltara, Janjgir-Champa👏14 hrs ago
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- शिवपुरी के सतनवाड़ा कलां में 'नेकी कर दरिया में डाल' वाली कहावत सच साबित हुई है, जहां लोगों को मुफ्त पानी पिलाने वाले एक किसान को बिजली का भारी-भरकम बिल थमा दिया गया है। सतनवाड़ा कलां निवासी किसान हरिवल्लभ धाकड़ ग्रामीणों के साथ जनसुनवाई में पहुंचे। उन्होंने बताया कि पेयजल संकट के दौरान उन्होंने अपने निजी कृषि विद्युत कनेक्शन से गांव के लोगों को निःशुल्क पानी उपलब्ध कराया था, लेकिन इसके बावजूद बिजली विभाग ने उनके खिलाफ ही कार्रवाई कर दी। बिजली विभाग के कनिष्ठ अभियंता ने किसान के खिलाफ 1 लाख 82 हजार 716 रुपए का विद्युत प्रकरण बना दिया। हरिवल्लभ धाकड़ ने इस कार्रवाई को निरस्त करने और संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने भी किसान का समर्थन करते हुए कहा कि गांव के कई परिवार हरिवल्लभ धाकड़ के ही बोरवेल के पानी पर निर्भर हैं।3
- शिवपुरी जिले के करैरा क्षेत्र के ग्राम दिदावली में स्थित शासकीय विद्यालय के समय पर न खुलने के कारण छात्र-छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों और अभिभावकों का आरोप है कि यह विद्यालय निर्धारित समय पर संचालित नहीं होता है। छात्र-छात्राएं तो रोजाना समय पर स्कूल पहुंच जाते हैं, लेकिन स्कूल का मुख्य द्वार बंद मिलने के कारण उन्हें बाहर ही इंतजार करना पड़ता है। स्थानीय लोगों द्वारा साझा किए गए फोटो और वीडियो में भी कुछ बच्चे विद्यालय परिसर के बाहर धूप में बैठे हुए नजर आ रहे हैं। इसके साथ ही अभिभावकों ने विद्यालय की शिक्षण व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि स्कूल में पढ़ाई की स्थिति संतोषजनक नहीं है और इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसके अतिरिक्त, विद्यालय परिसर में साफ-सफाई का स्तर भी बेहतर नहीं है। ग्रामीणों का मानना है कि बच्चों की शिक्षा से जुड़े मामलों में इस तरह की लापरवाही उनके भविष्य पर बुरा असर डाल सकती है। इस अव्यवस्था से नाराज ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि संबंधित अधिकारी इस गंभीर लापरवाही का संज्ञान लें और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएं। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग के अधिकारी इस मामले की जांच कर आगे क्या कार्रवाई करते हैं।1
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