Shuru
Apke Nagar Ki App…
पलेरा जमीनी विवाद में पथराव हुआ जिसमें कई लोग घायल हुए पलेरा जमीनी विवाद मारपीट
मो.आदम कादरी
पलेरा जमीनी विवाद में पथराव हुआ जिसमें कई लोग घायल हुए पलेरा जमीनी विवाद मारपीट
More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
- लिधौरा राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई, पूर्व विधायक स्वामी प्रसाद पश्तोर का निधन जतारा। क्षेत्र के वरिष्ठ नेता, पूर्व विधायक एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वामी प्रसाद पश्तोर का 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। स्वामी प्रसाद पश्तोर ने अपने जीवनकाल में समाज सेवा, राजनीति और देश की आज़ादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे सरल स्वभाव, ईमानदारी और जनसेवा के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। उनके अंतिम संस्कार में प्रशासन की ओर से राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी गई। इस दौरान पुलिस बल द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और कई जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं स्थानीय नागरिकों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। क्षेत्र के लोगों ने उन्हें एक ऐसे जननायक के रूप में याद किया, जिन्होंने हमेशा जनता की आवाज़ उठाई और समाज के हर वर्ग के लिए कार्य किया। उनके निधन को क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया जा रहा है।4
- पुलिस के द्वारा किया गया जन जागरूकता अभियान आयोजित1
- टीकमगढ़ जिले के थाना पलेरा के अंतर्गत ग्राम खुमानगंज के एक युवक की संदिग्ध हालत में मौत परिवार जनों ने लगाए हत्या के आरोप देखिए खास रिपोर्ट क्या कुछ कहा पीड़ितो ने1
- टीकमगढ़ अस्पताल का एक वीडियो जमकर हो रहा है वायरल एक व्यक्ति की मारपीट करते हुए1
- 🎤 रितेश रावत रिपोर्ट – स्पेशल स्टोरी “नमस्कार… मैं हूँ रितेश रावत… और आप देख रहे हैं रितेश रावत रिपोर्ट। आज हम आपको लेकर चल रहे हैं एक ऐसी दिलचस्प कहानी की ओर… जो सिर्फ स्वाद की नहीं… बल्कि इतिहास, परंपरा और पहचान की कहानी है। जब आम के पैर ही नहीं होते… तो फिर उसका नाम ‘लंगड़ा’ कैसे पड़ा…? 🤔 जी हां… हम बात कर रहे हैं के मशहूर लंगड़ा आम की… जिसका स्वाद जितना मीठा है, उसकी कहानी उतनी ही अनोखी है। 📍 कहानी की शुरुआत कहा जाता है कि सैकड़ों साल पहले में एक साधु रहा करते थे… जो चलने में लंगड़े थे। उनके पास एक छोटा सा बगीचा था… जहां एक आम का पेड़ लगा हुआ था। लेकिन ये कोई साधारण पेड़ नहीं था… उस पर लगने वाले आम बेहद स्वादिष्ट, खुशबूदार और रसीले होते थे। धीरे-धीरे आस-पास के लोग उस पेड़ के आम खाने आने लगे… और हर कोई बस एक ही बात कहता— “ऐसा आम पहले कभी नहीं खाया!” 📍 नाम कैसे पड़ा? अब यहां से कहानी लेती है एक दिलचस्प मोड़… क्योंकि उस साधु का असली नाम किसी को नहीं पता था… लोग उन्हें बस “लंगड़ा बाबा” कहकर बुलाते थे। और फिर… वही नाम उस आम के साथ जुड़ गया। 👉 लोग कहने लगे— “लंगड़ा बाबा के बगीचे का आम”… और धीरे-धीरे वो बन गया— 👉 “लंगड़ा आम” 📍 समय बदला, नाम नहीं बदला समय बीतता गया… साधु इस दुनिया में नहीं रहे… लेकिन उनका नाम आज भी हर उस आम में जिंदा है… जिसे हम ‘लंगड़ा आम’ के नाम से जानते हैं। 📍 क्या है इसकी खासियत? अब सवाल ये उठता है कि आखिर ये आम इतना खास क्यों है…? तो आपको बता दें— ✔ इसका गूदा बेहद मुलायम और मीठा होता है ✔ इसमें रेशा बहुत कम होता है ✔ खुशबू इतनी तेज कि दूर से ही पहचान में आ जाए ✔ और स्वाद… ऐसा कि एक बार खाओ, तो भूलना मुश्किल! 📍 आज की पहचान आज का लंगड़ा आम सिर्फ एक फल नहीं… बल्कि एक ब्रांड, एक परंपरा और एक पहचान बन चुका है। देश ही नहीं… विदेशों तक इसकी मांग है… और गर्मियों के मौसम में ये आम लोगों की पहली पसंद बन जाता है। 📍 एक सीख भी इस कहानी से हमें एक छोटी सी सीख भी मिलती है… कि पहचान सिर्फ नाम या रूप से नहीं बनती… बल्कि काम और खासियत से बनती है। एक साधारण से पेड़ ने… और एक अनजाने साधु ने… इतिहास में अपना नाम दर्ज करा दिया। 🎤 समापन तो ये थी ‘लंगड़ा आम’ की अनोखी कहानी… अगर आपको ये खबर पसंद आई हो… तो वीडियो को लाइक करें, शेयर करें… और ऐसे ही दिलचस्प किस्सों के लिए जुड़े रहें रितेश रावत रिपोर्ट के साथ। मैं हूँ रितेश रावत… कैमरा पर्सन के साथ… नमस्कार!”1
- ब्रेकिंग न्यूज़ | जतारा जनपद से बड़ी खबर ग्राम पंचायत मोहनगढ़ में पदस्थ पंचायत सचिव जयराम सेन का मामला अब गरमाता जा रहा है। सोशल मीडिया पर सचिव द्वारा अपने ऊपर हमले और लूटपाट का आरोप लगाया गया था, जिसमें पंचायत का रिकॉर्ड चोरी होने और ₹18,000 छीने जाने की बात कही गई थी। लेकिन अब इस पूरे मामले पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कथित हमला संदिग्ध है और घटना की सच्चाई पर संदेह जताया जा रहा है। साथ ही, सचिव पर 14वें और 15वें वित्त आयोग सहित अन्य शासकीय योजनाओं में कथित फर्जी भुगतान करने के आरोप भी सामने आ रहे हैं। जयराम सेन दिगौड़ा के निवासी बताए जा रहे हैं, जो मोहनगढ़ से लगभग 15 किमी दूर है—जिससे घटना की परिस्थितियों पर और सवाल उठ रहे हैं। अब यह पूरा मामला जांच के दायरे में है और क्षेत्र में निष्पक्ष जांच की मांग तेज़ हो गई है। क्या है सच्चाई? हमला या कुछ और? जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएगा। Sagar Commissioner Collector Tikamgarh Pro Tikamgarh1
- Post by ललित दुबे (न्यूज दिगौड़ा)1
- खाकी की नाक के नीचे 'रेत माफियाओ' का तांडव जेवर चौकी से महज 1 किमी दूर सुखनई नदी को छलनी कर रहे माफिया क्या प्रशासन सो रहा है? पलेरा। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित ग्राम उपरारा में रेत माफियाओं ने दिन-रात आतंक मचा रखा है। सुखनई नदी, जो इस क्षेत्र की जीवनरेखा है, उसे अवैध उत्खनन के जरिए बेरहमी से लूटा जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह 'लूट' प्रशासन की नाक के बिल्कुल नीचे हो रही है।पुलिस की चुप्पी पर सवाल खड़े हो रहे हैं अवैध उत्खनन का यह काला खेल थाना चंदेरा की पुलिस चौकी जेवर से मात्र 1 किलोमीटर की दूरी पर चल रहा है। क्या पुलिस को दिन-रात गूंजती मशीनों की आवाज सुनाई नहीं देती माफिया उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा का फायदा उठाकर पठगुंवा से सटी सीमा पर बेखौफ होकर नदी का सीना चीर रहे हैं।दिन हो या रात लूट: चिट्ठी के अनुसार, माफियाओं का दुस्साहस इतना बढ़ गया है कि वे बिना किसी डर के दिन-रात उत्खनन कर रहे हैं।स्थानीय स्तर पर चौकी प्रभारी रेवाराम गौंड की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं वहीं उनकी जानकारी में यह सब होने की बात सामने आ रही है। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? नदी के अस्तित्व को खत्म करने वाले इन माफियाओं को किसका संरक्षण प्राप्त है? अगर पुलिस चौकी से 1 किमी दूर यह हाल है, तो प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति क्या होगी यदि समय रहते इस अवैध उत्खनन को नहीं रोका गया, तो न केवल पर्यावरण का अपूरणीय नुकसान होगा, बल्कि प्रशासन की साख भी पूरी तरह मिट्टी में मिल जाएगी।2