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डेढ़ करोड़ की गौशाला बनी जलाशय, गोवंश बेहाल और किसान हलकान; व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल नरैनी, बांदा | 27 अगस्त 2026 बारिश ने रगौली-भटपुरा की डेढ़ करोड़ रुपये की स्थाई गौशाला की वह तस्वीर सामने ला दी है, जिसे शायद फाइलों में देखने की जरूरत नहीं पड़ती। गौशाला के नाम पर बना परिसर पानी और कीचड़ का तालाब बन गया है और उसमें संरक्षण के नाम पर रखे गए गोवंश घुटने भर पानी में खड़े नजर आ रहे हैं। टीन शेड, नांद और रास्ते जलमग्न हैं, जबकि भूसा लदा ट्रैक्टर और जेसीबी तक कीचड़ में फंसने की स्थिति बताई जा रही है।यह सिर्फ बारिश का संकट नहीं है। यह करोड़ों की योजनाओं में दूरदर्शिता, निर्माण की गुणवत्ता और जिम्मेदारी के दावों पर सीधा सवाल है। अगर एक स्थाई गौशाला में बारिश का पानी निकालने तक का इंतजाम नहीं है तो फिर ‘स्थाई’ शब्द किस उपलब्धि का प्रमाण है? पानी से बचाने के नाम पर सड़क पर पहुंचा दिए गए गोवंश?मामले का सबसे गंभीर पहलू ग्रामीणों के उस आरोप से जुड़ा है, जिसमें क्षेत्रीय पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अभिषेक कुमार पर गौशाला का गेट खुलवाकर गोवंश बाहर निकलवाने की बात कही गई है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, इसलिए जांच के बाद ही सच्चाई स्पष्ट होगी। लेकिन सवाल इतना जरूर है कि यदि गोवंश को गौशाला से बाहर निकाला गया, तो उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की व्यवस्था किसकी जिम्मेदारी थी?क्योंकि गौशाला से बाहर निकला गोवंश अब खेतों तक पहुंच रहा है और किसानों की खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने की शिकायत सामने आ रही है। यानी एक तरफ गौशाला में गोवंश पानी में फंसा है और दूसरी तरफ बाहर निकलने पर किसान की मेहनत की फसल संकट में है।समाधान यदि यही है कि पानी बढ़े तो गायें निकाल दो, तो फिर गौशाला बनाने और उसके रखरखाव पर खर्च की गई रकम का औचित्य क्या है?डेढ़ करोड़ रुपये और नतीजा—जलभराव! सबसे तीखा सवाल निर्माण व्यवस्था से है। डेढ़ करोड़ रुपये की लागत वाली गौशाला में जलनिकासी, पर्याप्त ऊंचाई और बारिश के पानी से बचाव की व्यवस्था क्यों नहीं दिखाई दे रही? विकास की फाइलों में रकम बढ़ती रही, योजनाओं के नाम चमकते रहे, लेकिन पहली बड़ी बारिश ने जमीन पर व्यवस्था की असलियत खोल दी। जहां गोवंश को छत, चारा और सुरक्षा मिलनी चाहिए थी, वहां पानी, कीचड़ और अव्यवस्था का साम्राज्य दिखाई दे रहा है।यह तस्वीर केवल पशु संरक्षण की विफलता नहीं, बल्कि सरकारी धन के इस्तेमाल पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।NGO और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की हो जांच विश्व हिंदू महासंघ के जिला अध्यक्ष महेश कुमार प्रजापति ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि ग्रामीणों ने डॉ. अभिषेक कुमार द्वारा गेट खुलवाकर गोवंश बाहर निकलवाने की जानकारी दी है। उन्होंने अधिकारी और NGO संचालक की भूमिका की जांच तथा दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। मामला आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित न रहे, बल्कि गौशाला की निर्माण लागत, तकनीकी स्वीकृति, जलनिकासी व्यवस्था, NGO के संचालन, गोवंश की संख्या और उनके बाहर जाने की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।अब कागज नहीं, जमीन पर चाहिए जवाब जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी को इस मामले को महज एक स्थानीय शिकायत मानकर टालना नहीं चाहिए। स्थलीय निरीक्षण हो, पानी की निकासी तत्काल कराई जाए, गोवंश को सुरक्षित किया जाए और किसानों की फसल क्षति का वास्तविक आकलन कराया जाए।साथ ही नरैनी ब्लॉक की अन्य गौशालाओं का भी भौतिक सत्यापन जरूरी है, क्योंकि यदि एक गौशाला की पहली बारिश में ऐसी दुर्दशा है तो बाकी व्यवस्थाओं की हकीकत जानना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।आखिर सवाल सिर्फ गायों का नहीं है। सवाल उस पैसे का भी है जो जनता से लिया गया और संरक्षण के नाम पर खर्च किया गया। बारिश का पानी कुछ दिनों में उतर जाएगा, लेकिन डेढ़ करोड़ की गौशाला के जलभराव ने जो सवाल खड़े किए हैं, उनका पानी जवाबदेही के बिना नहीं उतरने वाला।

15 hrs ago
user_Amod Kumar
Amod Kumar
रिपोर्टर बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
15 hrs ago

डेढ़ करोड़ की गौशाला बनी जलाशय, गोवंश बेहाल और किसान हलकान; व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल नरैनी, बांदा | 27 अगस्त 2026 बारिश ने रगौली-भटपुरा की डेढ़ करोड़ रुपये की स्थाई गौशाला की वह तस्वीर सामने ला दी है, जिसे शायद फाइलों में देखने की जरूरत नहीं पड़ती। गौशाला के नाम पर बना परिसर पानी और कीचड़ का तालाब बन गया है और उसमें संरक्षण के नाम पर रखे गए गोवंश घुटने भर पानी में खड़े नजर आ रहे हैं। टीन शेड, नांद और रास्ते जलमग्न हैं, जबकि भूसा लदा ट्रैक्टर और जेसीबी तक कीचड़ में फंसने की स्थिति बताई जा रही है।यह सिर्फ बारिश का संकट नहीं है। यह करोड़ों की योजनाओं में दूरदर्शिता, निर्माण की गुणवत्ता और जिम्मेदारी के दावों पर सीधा सवाल है। अगर एक स्थाई गौशाला में बारिश का पानी निकालने तक का इंतजाम नहीं है तो फिर ‘स्थाई’ शब्द किस उपलब्धि का प्रमाण है? पानी से बचाने के नाम पर सड़क पर पहुंचा दिए गए गोवंश?मामले का सबसे गंभीर पहलू ग्रामीणों के उस आरोप से जुड़ा है, जिसमें क्षेत्रीय पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अभिषेक कुमार पर गौशाला का गेट खुलवाकर गोवंश बाहर निकलवाने की बात कही गई है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, इसलिए जांच के बाद ही सच्चाई स्पष्ट होगी। लेकिन सवाल इतना जरूर है कि यदि गोवंश को गौशाला से बाहर निकाला गया, तो उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की व्यवस्था किसकी जिम्मेदारी थी?क्योंकि गौशाला से बाहर निकला गोवंश अब खेतों तक पहुंच रहा है और किसानों की खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने की शिकायत सामने आ रही है। यानी एक तरफ गौशाला में गोवंश पानी में फंसा है और दूसरी तरफ बाहर निकलने पर किसान की मेहनत की फसल संकट में है।समाधान यदि यही है कि पानी बढ़े तो गायें निकाल दो, तो फिर गौशाला बनाने और उसके रखरखाव पर खर्च की गई रकम का औचित्य क्या है?डेढ़ करोड़ रुपये और नतीजा—जलभराव! सबसे तीखा सवाल निर्माण व्यवस्था से है। डेढ़ करोड़ रुपये की लागत वाली गौशाला में जलनिकासी, पर्याप्त ऊंचाई और बारिश के पानी से बचाव की व्यवस्था क्यों नहीं दिखाई दे रही? विकास की फाइलों में रकम बढ़ती रही, योजनाओं के नाम चमकते रहे, लेकिन पहली बड़ी बारिश ने जमीन पर व्यवस्था की असलियत खोल दी। जहां गोवंश को छत, चारा और सुरक्षा मिलनी चाहिए थी, वहां पानी, कीचड़ और अव्यवस्था का साम्राज्य दिखाई दे रहा है।यह तस्वीर केवल पशु संरक्षण की विफलता नहीं, बल्कि सरकारी धन के इस्तेमाल पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।NGO और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की हो जांच विश्व हिंदू महासंघ के जिला अध्यक्ष महेश कुमार प्रजापति ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि ग्रामीणों ने डॉ. अभिषेक कुमार द्वारा गेट खुलवाकर गोवंश बाहर निकलवाने की जानकारी दी है। उन्होंने अधिकारी और NGO संचालक की भूमिका की जांच तथा दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। मामला आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित न रहे, बल्कि गौशाला की निर्माण लागत, तकनीकी स्वीकृति, जलनिकासी व्यवस्था, NGO के संचालन, गोवंश की संख्या और उनके बाहर जाने की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।अब कागज नहीं, जमीन पर चाहिए जवाब जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी को इस मामले को महज एक स्थानीय शिकायत मानकर टालना नहीं चाहिए। स्थलीय निरीक्षण हो, पानी की निकासी तत्काल कराई जाए, गोवंश को सुरक्षित किया जाए और किसानों की फसल क्षति का वास्तविक आकलन कराया जाए।साथ ही नरैनी ब्लॉक की अन्य गौशालाओं का भी भौतिक सत्यापन जरूरी है, क्योंकि यदि एक गौशाला की पहली बारिश में ऐसी दुर्दशा है तो बाकी व्यवस्थाओं की हकीकत जानना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।आखिर सवाल सिर्फ गायों का नहीं है। सवाल उस पैसे का भी है जो जनता से लिया गया और संरक्षण के नाम पर खर्च किया गया। बारिश का पानी कुछ दिनों में उतर जाएगा, लेकिन डेढ़ करोड़ की गौशाला के जलभराव ने जो सवाल खड़े किए हैं, उनका पानी जवाबदेही के बिना नहीं उतरने वाला।

More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • बांदा - रक्षाबंधन पर बिसंडा पुलिस का महिलाओं एवं बालिकाओं को विशेष उपहार ,उन्नत मिशन शक्ति केंद्र का बालिकाओं के हाथों हुआ शुभारंभ विवरण- उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान, स्वावलंबन एवं सशक्तिकरण के लिए संचालित मिशन शक्ति अभियान को और प्रभावी बनाने की दिशा में पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल के निर्देशन में, अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज के मार्गदर्शन में थाना बिसंडा पुलिस द्वारा रक्षाबंधन के पावन अवसर पर एक सराहनीय पहल की गई । रक्षाबंधन के अवसर पर थाना बिसंडा परिसर में उन्नत मिशन शक्ति केंद्र का शुभारंभ विशेष रूप से पहुंची बालिकाओं के हाथों कराया गया। बालिकाओं द्वारा केंद्र का उद्घाटन कर महिला एवं बालिका सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण का संदेश दिया गया । महिला सुरक्षा के लिए तैयार हुआ उन्नत मिशन शक्ति केंद्र उन्नत मिशन शक्ति केंद्र को महिलाओं एवं बालिकाओं की समस्याओं के समाधान, सुरक्षा संबंधी जागरूकता तथा आवश्यक सहायता एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। केंद्र के माध्यम से महिलाओं एवं बालिकाओं को उनके अधिकारों, सुरक्षा उपायों तथा शासन द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं एवं सेवाओं के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जाएगा ।बालिकाओं के हाथों उद्घाटन बना खास संदेश उन्नत मिशन शक्ति केंद्र का उद्घाटन बालिकाओं से कराया जाना कार्यक्रम की सबसे खास बात रही। इस पहल के माध्यम से बालिकाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने, उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने तथा पुलिस के प्रति विश्वास और अपनत्व की भावना मजबूत करने का संदेश दिया गया।कार्यक्रम के दौरान बालिकाओं एवं महिलाओं को महिला सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण हेल्पलाइन एवं पुलिस सहायता के बारे में जानकारी दी गई तथा किसी भी प्रकार की समस्या होने पर बिना संकोच पुलिस से संपर्क करने के लिए प्रेरित किया गया।*“सुरक्षित नारी—सशक्त नारी, यही मिशन शक्ति का संकल्प।”*
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    बांदा - रक्षाबंधन पर बिसंडा पुलिस का महिलाओं एवं बालिकाओं को विशेष उपहार ,उन्नत मिशन शक्ति केंद्र का बालिकाओं के हाथों हुआ शुभारंभ
विवरण- उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान, स्वावलंबन एवं सशक्तिकरण के लिए संचालित मिशन शक्ति अभियान को और प्रभावी बनाने की दिशा में पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल के निर्देशन में, अपर पुलिस  अधीक्षक शिवराज के मार्गदर्शन में थाना बिसंडा पुलिस द्वारा रक्षाबंधन के पावन अवसर पर एक सराहनीय पहल की गई । रक्षाबंधन के अवसर पर थाना बिसंडा परिसर में उन्नत मिशन शक्ति केंद्र का शुभारंभ विशेष रूप से पहुंची बालिकाओं के हाथों कराया गया। बालिकाओं द्वारा केंद्र का उद्घाटन कर महिला एवं बालिका सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण का संदेश दिया गया । महिला सुरक्षा के लिए तैयार हुआ उन्नत मिशन शक्ति केंद्र उन्नत मिशन शक्ति केंद्र को महिलाओं एवं बालिकाओं की समस्याओं के समाधान, सुरक्षा संबंधी जागरूकता तथा आवश्यक सहायता एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। केंद्र के माध्यम से महिलाओं एवं बालिकाओं को उनके अधिकारों, सुरक्षा उपायों तथा शासन द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं एवं सेवाओं के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जाएगा ।बालिकाओं के हाथों उद्घाटन बना खास संदेश उन्नत मिशन शक्ति केंद्र का उद्घाटन बालिकाओं से कराया जाना कार्यक्रम की सबसे खास बात रही। इस पहल के माध्यम से बालिकाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने, उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने तथा पुलिस के प्रति विश्वास और अपनत्व की भावना मजबूत करने का संदेश दिया गया।कार्यक्रम के दौरान बालिकाओं एवं महिलाओं को महिला सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण हेल्पलाइन एवं पुलिस सहायता के बारे में जानकारी दी गई तथा किसी भी प्रकार की समस्या होने पर बिना संकोच पुलिस से संपर्क करने के लिए प्रेरित किया गया।*“सुरक्षित नारी—सशक्त नारी, यही मिशन शक्ति का संकल्प।”*
    user_दुर्गेश कश्यप
    दुर्गेश कश्यप
    बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • 12 साल से लापता असम के शख्स को बांदा पुलिस ने परिजनों से मिलाया शुभम सिंह उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के थाना बदौसा क्षेत्र में पुलिस चेकिंग के दौरान एक मंदबुद्धि शख्स संदिग्ध अवस्था में मिला। शुरुआती पूछताछ में भाषा स्पष्ट न होने के कारण पुलिस ने इंटरनेट और असम के संबंधित थाना क्षेत्र से संपर्क स्थापित किया। व्यक्ति की पहचान मो0 सफीउर्रहमान (45 वर्ष), निवासी बोंगाईगांव (असम) के रूप में हुई। ​वीडियो कॉल और दस्तावेजों के मिलान से उसके भाई शुजाउल हक ने पुष्टि की कि सफीउर्रहमान 12 वर्ष पूर्व घर से नाराज होकर लापता हो गया था। पुलिस ने परिजनों को सूचना दे दी है, जो उसे लेने आ रहे हैं। नियमानुसार अग्रिम कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
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    12 साल से लापता असम के शख्स को बांदा पुलिस ने परिजनों से मिलाया

शुभम सिंह
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के थाना बदौसा क्षेत्र में पुलिस चेकिंग के दौरान एक मंदबुद्धि शख्स संदिग्ध अवस्था में मिला। शुरुआती पूछताछ में भाषा स्पष्ट न होने के कारण पुलिस ने इंटरनेट और असम के संबंधित थाना क्षेत्र से संपर्क स्थापित किया। व्यक्ति की पहचान मो0 सफीउर्रहमान (45 वर्ष), निवासी बोंगाईगांव (असम) के रूप में हुई।
​वीडियो कॉल और दस्तावेजों के मिलान से उसके भाई शुजाउल हक ने पुष्टि की कि सफीउर्रहमान 12 वर्ष पूर्व घर से नाराज होकर लापता हो गया था। पुलिस ने परिजनों को सूचना दे दी है, जो उसे लेने आ रहे हैं। नियमानुसार अग्रिम कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
    user_Shubham Singh
    Shubham Singh
    Local News Reporter बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • डेढ़ करोड़ की गौशाला बनी जलाशय, गोवंश बेहाल और किसान हलकान; व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल नरैनी, बांदा | 27 अगस्त 2026 बारिश ने रगौली-भटपुरा की डेढ़ करोड़ रुपये की स्थाई गौशाला की वह तस्वीर सामने ला दी है, जिसे शायद फाइलों में देखने की जरूरत नहीं पड़ती। गौशाला के नाम पर बना परिसर पानी और कीचड़ का तालाब बन गया है और उसमें संरक्षण के नाम पर रखे गए गोवंश घुटने भर पानी में खड़े नजर आ रहे हैं। टीन शेड, नांद और रास्ते जलमग्न हैं, जबकि भूसा लदा ट्रैक्टर और जेसीबी तक कीचड़ में फंसने की स्थिति बताई जा रही है।यह सिर्फ बारिश का संकट नहीं है। यह करोड़ों की योजनाओं में दूरदर्शिता, निर्माण की गुणवत्ता और जिम्मेदारी के दावों पर सीधा सवाल है। अगर एक स्थाई गौशाला में बारिश का पानी निकालने तक का इंतजाम नहीं है तो फिर ‘स्थाई’ शब्द किस उपलब्धि का प्रमाण है? पानी से बचाने के नाम पर सड़क पर पहुंचा दिए गए गोवंश?मामले का सबसे गंभीर पहलू ग्रामीणों के उस आरोप से जुड़ा है, जिसमें क्षेत्रीय पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अभिषेक कुमार पर गौशाला का गेट खुलवाकर गोवंश बाहर निकलवाने की बात कही गई है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, इसलिए जांच के बाद ही सच्चाई स्पष्ट होगी। लेकिन सवाल इतना जरूर है कि यदि गोवंश को गौशाला से बाहर निकाला गया, तो उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की व्यवस्था किसकी जिम्मेदारी थी?क्योंकि गौशाला से बाहर निकला गोवंश अब खेतों तक पहुंच रहा है और किसानों की खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने की शिकायत सामने आ रही है। यानी एक तरफ गौशाला में गोवंश पानी में फंसा है और दूसरी तरफ बाहर निकलने पर किसान की मेहनत की फसल संकट में है।समाधान यदि यही है कि पानी बढ़े तो गायें निकाल दो, तो फिर गौशाला बनाने और उसके रखरखाव पर खर्च की गई रकम का औचित्य क्या है?डेढ़ करोड़ रुपये और नतीजा—जलभराव! सबसे तीखा सवाल निर्माण व्यवस्था से है। डेढ़ करोड़ रुपये की लागत वाली गौशाला में जलनिकासी, पर्याप्त ऊंचाई और बारिश के पानी से बचाव की व्यवस्था क्यों नहीं दिखाई दे रही? विकास की फाइलों में रकम बढ़ती रही, योजनाओं के नाम चमकते रहे, लेकिन पहली बड़ी बारिश ने जमीन पर व्यवस्था की असलियत खोल दी। जहां गोवंश को छत, चारा और सुरक्षा मिलनी चाहिए थी, वहां पानी, कीचड़ और अव्यवस्था का साम्राज्य दिखाई दे रहा है।यह तस्वीर केवल पशु संरक्षण की विफलता नहीं, बल्कि सरकारी धन के इस्तेमाल पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।NGO और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की हो जांच विश्व हिंदू महासंघ के जिला अध्यक्ष महेश कुमार प्रजापति ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि ग्रामीणों ने डॉ. अभिषेक कुमार द्वारा गेट खुलवाकर गोवंश बाहर निकलवाने की जानकारी दी है। उन्होंने अधिकारी और NGO संचालक की भूमिका की जांच तथा दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। मामला आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित न रहे, बल्कि गौशाला की निर्माण लागत, तकनीकी स्वीकृति, जलनिकासी व्यवस्था, NGO के संचालन, गोवंश की संख्या और उनके बाहर जाने की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।अब कागज नहीं, जमीन पर चाहिए जवाब जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी को इस मामले को महज एक स्थानीय शिकायत मानकर टालना नहीं चाहिए। स्थलीय निरीक्षण हो, पानी की निकासी तत्काल कराई जाए, गोवंश को सुरक्षित किया जाए और किसानों की फसल क्षति का वास्तविक आकलन कराया जाए।साथ ही नरैनी ब्लॉक की अन्य गौशालाओं का भी भौतिक सत्यापन जरूरी है, क्योंकि यदि एक गौशाला की पहली बारिश में ऐसी दुर्दशा है तो बाकी व्यवस्थाओं की हकीकत जानना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।आखिर सवाल सिर्फ गायों का नहीं है। सवाल उस पैसे का भी है जो जनता से लिया गया और संरक्षण के नाम पर खर्च किया गया। बारिश का पानी कुछ दिनों में उतर जाएगा, लेकिन डेढ़ करोड़ की गौशाला के जलभराव ने जो सवाल खड़े किए हैं, उनका पानी जवाबदेही के बिना नहीं उतरने वाला।
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    डेढ़ करोड़ की गौशाला बनी जलाशय, गोवंश बेहाल और किसान हलकान; व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
नरैनी, बांदा | 27 अगस्त 2026 बारिश ने रगौली-भटपुरा की डेढ़ करोड़ रुपये की स्थाई गौशाला की वह तस्वीर सामने ला दी है, जिसे शायद फाइलों में देखने की जरूरत नहीं पड़ती। गौशाला के नाम पर बना परिसर पानी और कीचड़ का तालाब बन गया है और उसमें संरक्षण के नाम पर रखे गए गोवंश घुटने भर पानी में खड़े नजर आ रहे हैं। टीन शेड, नांद और रास्ते जलमग्न हैं, जबकि भूसा लदा ट्रैक्टर और जेसीबी तक कीचड़ में फंसने की स्थिति बताई जा रही है।यह सिर्फ बारिश का संकट नहीं है। यह करोड़ों की योजनाओं में दूरदर्शिता, निर्माण की गुणवत्ता और जिम्मेदारी के दावों पर सीधा सवाल है। अगर एक स्थाई गौशाला में बारिश का पानी निकालने तक का इंतजाम नहीं है तो फिर ‘स्थाई’ शब्द किस उपलब्धि का प्रमाण है?
पानी से बचाने के नाम पर सड़क पर पहुंचा दिए गए गोवंश?मामले का सबसे गंभीर पहलू ग्रामीणों के उस आरोप से जुड़ा है, जिसमें क्षेत्रीय पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अभिषेक कुमार पर गौशाला का गेट खुलवाकर गोवंश बाहर निकलवाने की बात कही गई है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, इसलिए जांच के बाद ही सच्चाई स्पष्ट होगी। लेकिन सवाल इतना जरूर है कि यदि गोवंश को गौशाला से बाहर निकाला गया, तो उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की व्यवस्था किसकी जिम्मेदारी थी?क्योंकि गौशाला से बाहर निकला गोवंश अब खेतों तक पहुंच रहा है और किसानों की खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने की शिकायत सामने आ रही है। यानी एक तरफ गौशाला में गोवंश पानी में फंसा है और दूसरी तरफ बाहर निकलने पर किसान की मेहनत की फसल संकट में है।समाधान यदि यही है कि पानी बढ़े तो गायें निकाल दो, तो फिर गौशाला बनाने और उसके रखरखाव पर खर्च की गई रकम का औचित्य क्या है?डेढ़ करोड़ रुपये और नतीजा—जलभराव!
सबसे तीखा सवाल निर्माण व्यवस्था से है। डेढ़ करोड़ रुपये की लागत वाली गौशाला में जलनिकासी, पर्याप्त ऊंचाई और बारिश के पानी से बचाव की व्यवस्था क्यों नहीं दिखाई दे रही?
विकास की फाइलों में रकम बढ़ती रही, योजनाओं के नाम चमकते रहे, लेकिन पहली बड़ी बारिश ने जमीन पर व्यवस्था की असलियत खोल दी। जहां गोवंश को छत, चारा और सुरक्षा मिलनी चाहिए थी, वहां पानी, कीचड़ और अव्यवस्था का साम्राज्य दिखाई दे रहा है।यह तस्वीर केवल पशु संरक्षण की विफलता नहीं, बल्कि सरकारी धन के इस्तेमाल पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।NGO और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की हो जांच विश्व हिंदू महासंघ के जिला अध्यक्ष महेश कुमार प्रजापति ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि ग्रामीणों ने डॉ. अभिषेक कुमार द्वारा गेट खुलवाकर गोवंश बाहर निकलवाने की जानकारी दी है। उन्होंने अधिकारी और NGO संचालक की भूमिका की जांच तथा दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
मामला आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित न रहे, बल्कि गौशाला की निर्माण लागत, तकनीकी स्वीकृति, जलनिकासी व्यवस्था, NGO के संचालन, गोवंश की संख्या और उनके बाहर जाने की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।अब कागज नहीं, जमीन पर चाहिए जवाब
जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी को इस मामले को महज एक स्थानीय शिकायत मानकर टालना नहीं चाहिए। स्थलीय निरीक्षण हो, पानी की निकासी तत्काल कराई जाए, गोवंश को सुरक्षित किया जाए और किसानों की फसल क्षति का वास्तविक आकलन कराया जाए।साथ ही नरैनी ब्लॉक की अन्य गौशालाओं का भी भौतिक सत्यापन जरूरी है, क्योंकि यदि एक गौशाला की पहली बारिश में ऐसी दुर्दशा है तो बाकी व्यवस्थाओं की हकीकत जानना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।आखिर सवाल सिर्फ गायों का नहीं है। सवाल उस पैसे का भी है जो जनता से लिया गया और संरक्षण के नाम पर खर्च किया गया। बारिश का पानी कुछ दिनों में उतर जाएगा, लेकिन डेढ़ करोड़ की गौशाला के जलभराव ने जो सवाल खड़े किए हैं, उनका पानी जवाबदेही के बिना नहीं उतरने वाला।
    user_Amod Kumar
    Amod Kumar
    रिपोर्टर बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
  • यह है हमारा तिलोसा गांव… जहां ग्रामीण आज भी विकास की उम्मीद लगाए बैठे हैं। हमारा सवाल किसी व्यक्ति से नहीं, हमारी मांग सिर्फ अपने गांव के विकास की है। हमें चाहिए अच्छी सड़कें, साफ-सफाई, नालियां, पानी और गांव की जरूरी सुविधाओं पर ध्यान। अगर हमारी समस्याएं जिम्मेदार अधिकारियों तक नहीं पहुंच रही हैं, तो हम अपनी आवाज़ शांतिपूर्ण तरीके से उठाएंगे। तिलोसा की आवाज़ दबेगी नहीं, तिलोसा विकास की मांग करता रहेगा। हमारा आंदोलन किसी के खिलाफ नहीं— अपने गांव के हक और विकास के लिए है। 🇮🇳 #तिलोसा #तिलोसागांव #ग्रामपंचायत #गांवकाविकास #विकासकीमांग #तिलोसाकीआवाज #ग्रामीणविकास यह है हमारा तिलोसा गांव… जहां ग्रामीण आज भी विकास की उम्मीद लगाए बैठे हैं। हमारा सवाल किसी व्यक्ति से नहीं, हमारी मांग सिर्फ अपने गांव के विकास की है। हमें चाहिए अच्छी सड़कें, साफ-सफाई, नालियां, पानी और गांव की जरूरी सुविधाओं पर ध्यान। अगर हमारी समस्याएं जिम्मेदार अधिकारियों तक नहीं पहुंच रही हैं, तो हम अपनी आवाज़ शांतिपूर्ण तरीके से उठाएंगे। तिलोसा की आवाज़ दबेगी नहीं, तिलोसा विकास की मांग करता रहेगा। हमारा आंदोलन किसी के खिलाफ नहीं— अपने गांव के हक और विकास के लिए है। 🇮🇳
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    यह है हमारा तिलोसा गांव…
जहां ग्रामीण आज भी विकास की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

हमारा सवाल किसी व्यक्ति से नहीं,
हमारी मांग सिर्फ अपने गांव के विकास की है।

हमें चाहिए अच्छी सड़कें, साफ-सफाई, नालियां, पानी और गांव की जरूरी सुविधाओं पर ध्यान।

अगर हमारी समस्याएं जिम्मेदार अधिकारियों तक नहीं पहुंच रही हैं,
तो हम अपनी आवाज़ शांतिपूर्ण तरीके से उठाएंगे।

तिलोसा की आवाज़ दबेगी नहीं,
तिलोसा विकास की मांग करता रहेगा।

हमारा आंदोलन किसी के खिलाफ नहीं—
अपने गांव के हक और विकास के लिए है। 🇮🇳

#तिलोसा #तिलोसागांव #ग्रामपंचायत #गांवकाविकास #विकासकीमांग #तिलोसाकीआवाज #ग्रामीणविकास
यह है हमारा तिलोसा गांव…
जहां ग्रामीण आज भी विकास की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
हमारा सवाल किसी व्यक्ति से नहीं,
हमारी मांग सिर्फ अपने गांव के विकास की है।
हमें चाहिए अच्छी सड़कें, साफ-सफाई, नालियां, पानी और गांव की जरूरी सुविधाओं पर ध्यान।
अगर हमारी समस्याएं जिम्मेदार अधिकारियों तक नहीं पहुंच रही हैं,
तो हम अपनी आवाज़ शांतिपूर्ण तरीके से उठाएंगे।
तिलोसा की आवाज़ दबेगी नहीं,
तिलोसा विकास की मांग करता रहेगा।
हमारा आंदोलन किसी के खिलाफ नहीं—
अपने गांव के हक और विकास के लिए है। 🇮🇳
    user_राममोहन राजपूत
    राममोहन राजपूत
    Baberu, Banda•
    2 hrs ago
  • यमुना पुल से 18 वर्षीय 12 वीं का छात्रा के नदी में कूदने की सूचना पर मचा हड़कंप कमासिन थाना क्षेत्र के दांदो घाट पर यमुना नदी की बताई जा रही है घटना
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    यमुना पुल से 18 वर्षीय 12 वीं का छात्रा के नदी में कूदने की सूचना पर मचा हड़कंप 
कमासिन थाना क्षेत्र के दांदो घाट पर यमुना नदी की बताई जा रही है घटना
    user_Ramkripal Yadav
    Ramkripal Yadav
    बबेरू, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • बांदा का Handloom Village बना नया आकर्षण | पर्यटकों की संख्या में 49% बढ़ोतरी | Banda News 2026 बांदा उन उत्तर प्रदेश जिलों में शामिल है जहां हैंडलूम गांवों से जुड़े ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है। हाल की रिपोर्ट के अनुसार मई से जुलाई के बीच बांदा में हैंडलूम विलेज से जुड़े पर्यटन में करीब 49 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे स्थानीय बुनकरों और ग्रामीण कारोबार को नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
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    बांदा का Handloom Village बना नया आकर्षण | पर्यटकों की संख्या में 49% बढ़ोतरी | Banda News 2026
बांदा उन उत्तर प्रदेश जिलों में शामिल है जहां हैंडलूम गांवों से जुड़े ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है। हाल की रिपोर्ट के अनुसार मई से जुलाई के बीच बांदा में हैंडलूम विलेज से जुड़े पर्यटन में करीब 49 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे स्थानीय बुनकरों और ग्रामीण कारोबार को नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
    user_Dilip Kumar Bharti
    Dilip Kumar Bharti
    Local News Reporter नरैनी, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    11 hrs ago
  • हमीरपुर :शिहो नाला व चंद्रावल नदी का जलस्तर घटने से ग्रामीणों ने ली राहत की सांस मौदहा क्षेत्र के दर्जनों गांवों में मंडराया था बाढ़ का खतरा, रातभर अलर्ट रहा प्रशासन मौदहा, हमीरपुर। चंद्रावल नदी और शिहो नाला में बढ़े जलस्तर के बाद शुक्रवार को पानी धीरे-धीरे घटने लगा। जलस्तर कम होने से नदी किनारे बसे दर्जनों गांवों के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। हालांकि कई निचले इलाकों में अब भी पानी भरा होने से ग्रामीणों की मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। बीते दिनों डैम से छोड़े गए पानी और लगातार बारिश के कारण चंद्रावल नदी व शिहो नाला उफान पर आ गए थे। इसके चलते पारा, हिमौली, लदार , रतौली, लरौंध, भमौरा, नारायच, खन्ना, भवानी, छिरका, मवैया, मदारपुर और छिमौली समेत कई गांवों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया था। नदी किनारे रहने वाले ग्रामीण पूरी रात जागकर जलस्तर पर नजर बनाए रहे। हालात को देखते हुए प्रशासन और पुलिस भी पूरी तरह अलर्ट रही। उपजिलाधिकारी मौदहा और क्षेत्राधिकारी मौदहा ने प्रभावित गांवों के लोगों से संपर्क बनाए रखा। पुलिस टीमों ने नदी किनारे के गांवों में लगातार निगरानी की और ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की। शुक्रवार को दोनों जलधाराओं का पानी कम होने से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि खेतों में पानी भरने से किसानों की फसलों को नुकसान हुआ है। गांवों का संपर्क पूरी तरह बहाल होने और पानी उतरने के बाद ही नुकसान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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    हमीरपुर :शिहो नाला व चंद्रावल नदी का जलस्तर घटने से ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
मौदहा क्षेत्र के दर्जनों गांवों में मंडराया था बाढ़ का खतरा, रातभर अलर्ट रहा प्रशासन
मौदहा, हमीरपुर। चंद्रावल नदी और शिहो नाला में बढ़े जलस्तर के बाद शुक्रवार को पानी धीरे-धीरे घटने लगा। जलस्तर कम होने से नदी किनारे बसे दर्जनों गांवों के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। हालांकि कई निचले इलाकों में अब भी पानी भरा होने से ग्रामीणों की मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
बीते दिनों डैम से छोड़े गए पानी और लगातार बारिश के कारण चंद्रावल नदी व शिहो नाला उफान पर आ गए थे। इसके चलते पारा, हिमौली, लदार , रतौली, लरौंध, भमौरा, नारायच, खन्ना, भवानी,  छिरका, मवैया, मदारपुर और छिमौली समेत कई गांवों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया था। नदी किनारे रहने वाले ग्रामीण पूरी रात जागकर जलस्तर पर नजर बनाए रहे।
हालात को देखते हुए प्रशासन और पुलिस भी पूरी तरह अलर्ट रही। उपजिलाधिकारी मौदहा और क्षेत्राधिकारी मौदहा ने प्रभावित गांवों के लोगों से संपर्क बनाए रखा। पुलिस टीमों ने नदी किनारे के गांवों में लगातार निगरानी की और ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की।
शुक्रवार को दोनों जलधाराओं का पानी कम होने से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि खेतों में पानी भरने से किसानों की फसलों को नुकसान हुआ है। गांवों का संपर्क पूरी तरह बहाल होने और पानी उतरने के बाद ही नुकसान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
    user_Raj kumar जिला ब्यूरो चीफ
    Raj kumar जिला ब्यूरो चीफ
    मौदहा, हमीरपुर, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • हमीरपुर :घरेलू विवाद के बाद लापता किशोरी का पेड़ पर फंदे से लटका मिला शव, मचा हड़कंप सुमेरपुर, हमीरपुर। कस्बा सुमेरपुर निवासी 15 वर्षीय किशोरी शिवानी पुत्री पप्पू का शव शुक्रवार सुबह पलरा हार फैक्ट्री एरिया में बबूल के पेड़ पर दुपट्टे के फंदे से लटका मिलने से हड़कंप मच गया। किशोरी गुरुवार रात परिजनों से किसी बात को लेकर हुई कहासुनी के बाद बिना बताए घर से चली गई थी। परिजनों ने उसकी काफी तलाश की थी। पिता ने रात में ही किसी अप्रिय घटना की आशंका जताते हुए पुलिस को सूचना दी थी। डायल-112 से सूचना मिलने के बाद सुमेरपुर पुलिस ने भी किशोरी की तलाश शुरू कर दी थी। शुक्रवार सुबह पलरा हार फैक्ट्री एरिया में एक बबूल के पेड़ पर किशोरी का शव फंदे से लटका मिला। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पंचायतनामा की कार्रवाई पूरी की। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है। वहीं, परिजनों ने किशोरी के चचेरे भाई और उसके साले पर हत्या का आरोप लगाया है। घटना की सूचना पर फोरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंची और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। पुलिस की प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।
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    हमीरपुर :घरेलू विवाद के बाद लापता किशोरी का पेड़ पर फंदे से लटका मिला शव, मचा हड़कंप
सुमेरपुर, हमीरपुर। कस्बा सुमेरपुर निवासी 15 वर्षीय किशोरी शिवानी पुत्री पप्पू का शव शुक्रवार सुबह पलरा हार फैक्ट्री एरिया में बबूल के पेड़ पर दुपट्टे के फंदे से लटका मिलने से हड़कंप मच गया। किशोरी गुरुवार रात परिजनों से किसी बात को लेकर हुई कहासुनी के बाद बिना बताए घर से चली गई थी। परिजनों ने उसकी काफी तलाश की थी। पिता ने रात में ही किसी अप्रिय घटना की आशंका जताते हुए पुलिस को सूचना दी थी।
डायल-112 से सूचना मिलने के बाद सुमेरपुर पुलिस ने भी किशोरी की तलाश शुरू कर दी थी। शुक्रवार सुबह पलरा हार फैक्ट्री एरिया में एक बबूल के पेड़ पर किशोरी का शव फंदे से लटका मिला। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पंचायतनामा की कार्रवाई पूरी की। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है।
वहीं, परिजनों ने किशोरी के चचेरे भाई और उसके साले पर हत्या का आरोप लगाया है। घटना की सूचना पर फोरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंची और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। पुलिस की प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।
    user_Raj kumar जिला ब्यूरो चीफ
    Raj kumar जिला ब्यूरो चीफ
    मौदहा, हमीरपुर, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
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