मुस्लिम से नफरत करना कोई देशभक्त नहीं देश में गृह युद्ध की भावना भरना भारतीय संविधान के विरोधी चाहे वह प्राइम मिनिस्टर हो गृहमंत्री हो या मुख्यमंत्री हो सब गुनहगार होते हैं उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए:- गादरे मुस्लिम से ईर्ष्या करने वाले लोग, कभी सच्चे भारतीय नहीं हो सकते—गादरे दिल्ली:-मुस्लिम से नफरत करने वाले हिंदू संगठन या दल वाले भारतीय नहीं विदेशी होते हैं। बहुजन मुक्ति पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजुद्दीन गादरे ने महापुरुषों की जंम जयंती पर समाज में बढ़ते हिंदू मुस्लिम दंगों और भारत की गिरती अर्थव्यवस्था पर बुलडोजर चलवाना जंगलराज कायम करने वाले कुछ षड्यंत्रकारी पर कोई कार्रवाई नहीं होने पर निंदा की और कहां की भारतीय संविधान को समझना ही सबसे बड़ा काम है लेकिन आज कुछ षड्यंत्रकारी हमारे देश में वह मनुष्यता नफरत थी माहौल पैदा कर रहे हैं और इस्लामोफोबिया पर काम करके भारत के पिछड़े जाति अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अल्पसंख्यकों के हक अधिकार और सामाजिक न्याय को खत्म करने का काम कर रहे हैं आओ समझते हैं संविधान की प्रस्तावना मानव समाज की सबसे जटिल और गहरी भावनाओं में से एक है — ईर्ष्या। यह एक ऐसी मानसिक अवस्था है, जो व्यक्ति के भीतर असुरक्षा, हीनभावना और तुलना की भावना से जन्म लेती है। जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे की प्रगति, सम्मान, अधिकार या उपलब्धि को देखकर असहज होता है, तो उसके भीतर ईर्ष्या का भाव पैदा होता है। आपकी यह पंक्ति—“हमसे ईर्ष्या करने वाले लोग, कभी हमारे नहीं हो सकते” केवल एक व्यक्तिगत अनुभव नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और संवैधानिक दृष्टिकोण से भी एक गहरा सत्य प्रस्तुत करती है। हम भारत के संविधान, समानता, स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों के संदर्भ में विस्तार से समझेंगे। ईर्ष्या का स्वभाव और उसका सामाजिक प्रभाव। ईर्ष्या एक ऐसी भावना है, जो व्यक्ति को अंदर से खोखला कर देती है। यह न केवल व्यक्ति के सोचने की क्षमता को प्रभावित करती है, बल्कि उसके व्यवहार को भी विषाक्त बना देती है। तख्त बदल दो ताज बदल दो बेईमानों का राज बदल दो। ईर्ष्या रखने वाला व्यक्ति:दूसरों की सफलता से खुश नहीं होता। दूसरों की असफलता में संतोष खोजता है। समाज में नकारात्मकता फैलाता है। संबंधों को कमजोर करता है। ऐसे लोग कभी भी सच्चे अर्थों में किसी के “अपने” नहीं हो सकते, क्योंकि उनका संबंध प्रेम, विश्वास और सम्मान पर नहीं, बल्कि तुलना और द्वेष पर आधारित होता है। संविधान और समानता का सिद्धांत भारत का संविधान हमें यह सिखाता है कि हर व्यक्ति को समान अधिकार प्राप्त हैं। अनुच्छेद 14 कहता है — सभी व्यक्ति कानून के समक्ष समान हैं। अनुच्छेद 15 — धर्म, जाति, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव को निषिद्ध करता है। अनुच्छेद 16 — समान अवसर का अधिकार देता है। अब सोचिए — जब संविधान हर व्यक्ति को समान अधिकार देता है, तो फिर ईर्ष्या क्यों? आज शासन सप्ताह में बैठकर नफरतें बयान देकर खुद को देशभक्ति खाने वाले कुछ षड्यंत्रकारी देश को बर्बाद करके और आर्थिक कमजोर करके देश को बेचने का काम कर रहे हैं। ईर्ष्या का जन्म तब होता है जब: समाज में असमानता होती है। अवसरों का समान वितरण नहीं होता। जिन लोगों के बीवी ना बच्चे वह कभी नहीं होते अच्छे समाज में वह भला नहीं कर सकते लूटने के अलावा आज बलात्कार सामूहिक बलात्कार बढ़ते जा रहे हैं लेकिन कोई कानून नहीं उनका फूल बालों से उत्साहित करके उनका स्वागत करते हैं अफसोस! उनकी मानसिकता संकीर्ण होती है। इसलिए, संविधान केवल कानून नहीं है, बल्कि यह ईर्ष्या जैसी नकारात्मक भावनाओं के विरुद्ध एक नैतिक मार्गदर्शक भी है। ईर्ष्या बनाम संवैधानिक नैतिकता संवैधानिक नैतिकता का अर्थ है — संविधान के मूल्यों के अनुसार आचरण करना। राज़ुद्दीन गादरे ने कहा की बहुत लोगों को नशा होता है लेकिन मुझे एक नशा है समाज में फिर से को खत्म करना और प्रेम भावना हर दिल में जागृत कर देना ही मानवता का पहला मेरी उपलब्धि होगी। इसमें शामिल हैं:समानता बंधुता (भाईचारा) न्याय व्यक्ति की गरिमा ईर्ष्या इन सभी मूल्यों के विपरीत है। जहां ईर्ष्या होती है, वहां:भाईचारा समाप्त हो जाता है। सम्मान खत्म हो जाता है। न्याय की भावना कमजोर हो जाती है। इसलिए, जो व्यक्ति ईर्ष्या करता है, वह न केवल व्यक्तिगत स्तर पर गलत है, बल्कि वह संवैधानिक मूल्यों के भी विरुद्ध खड़ा होता है। बंधुता (Fraternity) और उसका महत्व संविधान की उद्देशिका में बंधुता (Fraternity) का विशेष उल्लेख है। बंधुता का अर्थ है: एक-दूसरे के प्रति सम्मान सहयोग अपनापन अब सवाल यह है कि क्या ईर्ष्या रखने वाला व्यक्ति बंधुता निभा सकता है? उत्तर है—नहीं। क्योंकि: ईर्ष्या व्यक्ति को अलग करती है। बंधुता व्यक्ति को जोड़ती है। इसलिए, यह बात बिल्कुल सटीक है कि ईर्ष्यालु व्यक्ति कभी अपना नहीं हो सकता। ईर्ष्या और सामाजिक विघटन ईर्ष्या केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं है, यह एक सामाजिक समस्या भी है। जब समाज में ईर्ष्या बढ़ती है, तो:जातीय संघर्ष बढ़ते हैं। वर्ग संघर्ष उत्पन्न होता है। सामाजिक एकता टूटती है। भारत जैसे विविधता वाले देश में, जहां अनेक धर्म, जाति और भाषाएं हैं, वहां ईर्ष्या समाज को तोड़ने का काम करती है। इसलिए संविधान हमें सिखाता है: एकता में शक्ति है। समानता ही स्थिरता का आधार है।ईर्ष्या और लोकतंत्र। लोकतंत्र केवल वोट देने का अधिकार नहीं है, बल्कि यह एक जीवन पद्धति है। लोकतंत्र में:सभी को समान अवसर मिलते हैं। सभी को अपनी बात रखने का अधिकार होता है। हर व्यक्ति की गरिमा का सम्मान होता है। लेकिन ईर्ष्या:लोकतंत्र को कमजोर करती है। दूसरों के अधिकारों को नकारती है। नफरत और विभाजन को बढ़ावा देती है। इसलिए, ईर्ष्या रखने वाला व्यक्ति लोकतांत्रिक नहीं हो सकता। व्यक्तिगत विकास और ईर्ष्या। ईर्ष्या व्यक्ति को आगे बढ़ने से रोकती है। जब व्यक्ति दूसरों से जलता है, तो:वह खुद पर ध्यान नहीं देता। अपनी कमियों को सुधारने की कोशिश नहीं करता। दूसरों को गिराने की सोचता है। इसके विपरीत, जो व्यक्ति सकारात्मक सोच रखता है: वह दूसरों से प्रेरणा लेता है। खुद को बेहतर बनाता है। समाज के लिए उपयोगी बनता है। इसलिए, ईर्ष्या का त्याग करना ही विकास का पहला कदम है। संवैधानिक चेतना और जागरूकता आज भारत में एक बड़ी समस्या यह है कि लोगों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी नहीं है। जब जागरूकता की कमी होती है, तो: लोग दूसरों की प्रगति से डरते हैं। तुलना करते हैं। ईर्ष्या करते हैं। यदि हर व्यक्ति को संविधान की सही समझ हो जाए, तो:वह दूसरों की सफलता को स्वीकार करेगा। समानता को अपनाएगा। समाज में सकारात्मक योगदान देगा। सच्चे संबंधों की पहचान आपका कथन हमें यह भी सिखाता है कि सच्चे और झूठे संबंधों की पहचान कैसे करें। सच्चे लोग: आपकी सफलता में खुश होते हैं।आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। आपके साथ खड़े रहते हैं। ईर्ष्यालु लोग: हमारी आपकी आलोचना करते हैं। हमारी आपकी उपलब्धियों को कम आंकते हैं।आपको पीछे खींचने की कोशिश करते हैं। इसलिए, जीवन में यह समझना बहुत जरूरी है कि कौन अपना है और कौन नहीं। समाधान: ईर्ष्या से मुक्ति का मार्ग नफरत ईर्ष्या से मुक्त होने के लिए हमें: आत्मविश्वास बढ़ाना होगा। सकारात्मक सोच अपनानी होगी। संविधान के मूल्यों को जीवन में उतारना होगा। मूल निवासियों यह समझना होगा कि हर व्यक्ति की अपनी यात्रा है। हर व्यक्ति की अपनी पहचान है।तुलना करना ही ईर्ष्या की जड़ है। युवा पीढ़ी और संवैधानिक सोच आज की युवा पीढ़ी देश का भविष्य है। आज हमारा युवा: ईर्ष्या छोड़कर सहयोग अपनाएंगे। संविधान के मूल्यों को समझेंगे। समानता और बंधुता को अपनाएंगे तो भारत एक मजबूत, समृद्ध और न्यायपूर्ण राष्ट्र बन सकता है। याद रखें “हमसे नफरत जलैशी ईर्ष्या करने वाले लोग, कभी हमारे नहीं हो सकते” केवल एक व्यक्तिगत अनुभव नहीं, बल्कि एक सामाजिक और संवैधानिक सत्य है। ईर्ष्या: विद्वेष किरन संबंधों को तोड़ती है। समाज को कमजोर करती है। लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाती है। जबकि संविधान: हमें जोड़ता है। समानता सिखाता है। भाईचारा बढ़ाता है। इसलिए, हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि: हम ईर्ष्या घृणा वैमनस्यता नहीं, प्रेरणा अपनाएंगे हम नफरत नहीं, भाईचारा बढ़ाएंगे हम संविधान के मूल्यों को अपने जीवन में उतारेंगे संदेश जो लोग आपकी प्रगति से जलते हैं, वे आपके साथ नहीं, बल्कि आपके खिलाफ खड़े होते हैं। लेकिन जो लोग आपके साथ खड़े होते हैं, वे आपकी सफलता में अपना भविष्य देखते हैं। इसलिए पहचानिए, समझिए और आगे बढ़िए—संविधान के मार्ग पर, समानता के साथ, और आत्मसम्मान के साथ। जय संविधान — जय लोकतंत्र जय इंसान जय विज्ञान जय भारत जय संविधान ✊
मुस्लिम से नफरत करना कोई देशभक्त नहीं देश में गृह युद्ध की भावना भरना भारतीय संविधान के विरोधी चाहे वह प्राइम मिनिस्टर हो गृहमंत्री हो या मुख्यमंत्री हो सब गुनहगार होते हैं उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए:- गादरे मुस्लिम से ईर्ष्या करने वाले लोग, कभी सच्चे भारतीय नहीं हो सकते—गादरे दिल्ली:-मुस्लिम से नफरत करने वाले हिंदू संगठन या दल वाले भारतीय नहीं विदेशी होते हैं। बहुजन मुक्ति पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजुद्दीन गादरे ने महापुरुषों की जंम जयंती पर समाज में बढ़ते हिंदू मुस्लिम दंगों और भारत की गिरती अर्थव्यवस्था पर बुलडोजर चलवाना जंगलराज कायम करने वाले कुछ षड्यंत्रकारी पर कोई कार्रवाई नहीं होने पर निंदा की और कहां की भारतीय संविधान को समझना ही सबसे बड़ा काम है लेकिन आज कुछ षड्यंत्रकारी हमारे देश में वह मनुष्यता नफरत थी माहौल पैदा कर रहे हैं और इस्लामोफोबिया पर काम करके भारत के पिछड़े जाति अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अल्पसंख्यकों के हक अधिकार और सामाजिक न्याय को खत्म करने का काम कर रहे हैं आओ समझते हैं संविधान की प्रस्तावना मानव समाज की सबसे जटिल और गहरी भावनाओं में से एक है — ईर्ष्या। यह एक ऐसी मानसिक अवस्था है, जो व्यक्ति के भीतर असुरक्षा, हीनभावना और तुलना की भावना से जन्म लेती है। जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे की प्रगति, सम्मान, अधिकार या उपलब्धि को देखकर असहज होता है, तो उसके भीतर ईर्ष्या का भाव पैदा होता है। आपकी यह पंक्ति—“हमसे ईर्ष्या करने वाले लोग, कभी हमारे नहीं हो सकते” केवल एक व्यक्तिगत अनुभव नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और संवैधानिक दृष्टिकोण से भी एक गहरा सत्य प्रस्तुत करती है। हम भारत के संविधान, समानता, स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों के संदर्भ में विस्तार से समझेंगे। ईर्ष्या का स्वभाव और उसका सामाजिक प्रभाव। ईर्ष्या एक ऐसी भावना है, जो व्यक्ति को अंदर से खोखला कर देती है। यह न केवल व्यक्ति के सोचने की क्षमता को प्रभावित करती है, बल्कि उसके व्यवहार को भी विषाक्त बना देती है। तख्त बदल दो ताज बदल दो बेईमानों का राज बदल दो। ईर्ष्या रखने वाला व्यक्ति:दूसरों की सफलता
से खुश नहीं होता। दूसरों की असफलता में संतोष खोजता है। समाज में नकारात्मकता फैलाता है। संबंधों को कमजोर करता है। ऐसे लोग कभी भी सच्चे अर्थों में किसी के “अपने” नहीं हो सकते, क्योंकि उनका संबंध प्रेम, विश्वास और सम्मान पर नहीं, बल्कि तुलना और द्वेष पर आधारित होता है। संविधान और समानता का सिद्धांत भारत का संविधान हमें यह सिखाता है कि हर व्यक्ति को समान अधिकार प्राप्त हैं। अनुच्छेद 14 कहता है — सभी व्यक्ति कानून के समक्ष समान हैं। अनुच्छेद 15 — धर्म, जाति, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव को निषिद्ध करता है। अनुच्छेद 16 — समान अवसर का अधिकार देता है। अब सोचिए — जब संविधान हर व्यक्ति को समान अधिकार देता है, तो फिर ईर्ष्या क्यों? आज शासन सप्ताह में बैठकर नफरतें बयान देकर खुद को देशभक्ति खाने वाले कुछ षड्यंत्रकारी देश को बर्बाद करके और आर्थिक कमजोर करके देश को बेचने का काम कर रहे हैं। ईर्ष्या का जन्म तब होता है जब: समाज में असमानता होती है। अवसरों का समान वितरण नहीं होता। जिन लोगों के बीवी ना बच्चे वह कभी नहीं होते अच्छे समाज में वह भला नहीं कर सकते लूटने के अलावा आज बलात्कार सामूहिक बलात्कार बढ़ते जा रहे हैं लेकिन कोई कानून नहीं उनका फूल बालों से उत्साहित करके उनका स्वागत करते हैं अफसोस! उनकी मानसिकता संकीर्ण होती है। इसलिए, संविधान केवल कानून नहीं है, बल्कि यह ईर्ष्या जैसी नकारात्मक भावनाओं के विरुद्ध एक नैतिक मार्गदर्शक भी है। ईर्ष्या बनाम संवैधानिक नैतिकता संवैधानिक नैतिकता का अर्थ है — संविधान के मूल्यों के अनुसार आचरण करना। राज़ुद्दीन गादरे ने कहा की बहुत लोगों को नशा होता है लेकिन मुझे एक नशा है समाज में फिर से को खत्म करना और प्रेम भावना हर दिल में जागृत कर देना ही मानवता का पहला मेरी उपलब्धि होगी। इसमें शामिल हैं:समानता बंधुता (भाईचारा) न्याय व्यक्ति की गरिमा ईर्ष्या इन सभी मूल्यों के विपरीत है। जहां ईर्ष्या होती है, वहां:भाईचारा समाप्त हो जाता है। सम्मान खत्म हो जाता है। न्याय की भावना कमजोर हो जाती है। इसलिए, जो व्यक्ति ईर्ष्या करता
है, वह न केवल व्यक्तिगत स्तर पर गलत है, बल्कि वह संवैधानिक मूल्यों के भी विरुद्ध खड़ा होता है। बंधुता (Fraternity) और उसका महत्व संविधान की उद्देशिका में बंधुता (Fraternity) का विशेष उल्लेख है। बंधुता का अर्थ है: एक-दूसरे के प्रति सम्मान सहयोग अपनापन अब सवाल यह है कि क्या ईर्ष्या रखने वाला व्यक्ति बंधुता निभा सकता है? उत्तर है—नहीं। क्योंकि: ईर्ष्या व्यक्ति को अलग करती है। बंधुता व्यक्ति को जोड़ती है। इसलिए, यह बात बिल्कुल सटीक है कि ईर्ष्यालु व्यक्ति कभी अपना नहीं हो सकता। ईर्ष्या और सामाजिक विघटन ईर्ष्या केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं है, यह एक सामाजिक समस्या भी है। जब समाज में ईर्ष्या बढ़ती है, तो:जातीय संघर्ष बढ़ते हैं। वर्ग संघर्ष उत्पन्न होता है। सामाजिक एकता टूटती है। भारत जैसे विविधता वाले देश में, जहां अनेक धर्म, जाति और भाषाएं हैं, वहां ईर्ष्या समाज को तोड़ने का काम करती है। इसलिए संविधान हमें सिखाता है: एकता में शक्ति है। समानता ही स्थिरता का आधार है।ईर्ष्या और लोकतंत्र। लोकतंत्र केवल वोट देने का अधिकार नहीं है, बल्कि यह एक जीवन पद्धति है। लोकतंत्र में:सभी को समान अवसर मिलते हैं। सभी को अपनी बात रखने का अधिकार होता है। हर व्यक्ति की गरिमा का सम्मान होता है। लेकिन ईर्ष्या:लोकतंत्र को कमजोर करती है। दूसरों के अधिकारों को नकारती है। नफरत और विभाजन को बढ़ावा देती है। इसलिए, ईर्ष्या रखने वाला व्यक्ति लोकतांत्रिक नहीं हो सकता। व्यक्तिगत विकास और ईर्ष्या। ईर्ष्या व्यक्ति को आगे बढ़ने से रोकती है। जब व्यक्ति दूसरों से जलता है, तो:वह खुद पर ध्यान नहीं देता। अपनी कमियों को सुधारने की कोशिश नहीं करता। दूसरों को गिराने की सोचता है। इसके विपरीत, जो व्यक्ति सकारात्मक सोच रखता है: वह दूसरों से प्रेरणा लेता है। खुद को बेहतर बनाता है। समाज के लिए उपयोगी बनता है। इसलिए, ईर्ष्या का त्याग करना ही विकास का पहला कदम है। संवैधानिक चेतना और जागरूकता आज भारत में एक बड़ी समस्या यह है कि लोगों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी नहीं है। जब जागरूकता की कमी होती है, तो: लोग दूसरों की प्रगति से डरते हैं। तुलना करते हैं। ईर्ष्या करते हैं।
यदि हर व्यक्ति को संविधान की सही समझ हो जाए, तो:वह दूसरों की सफलता को स्वीकार करेगा। समानता को अपनाएगा। समाज में सकारात्मक योगदान देगा। सच्चे संबंधों की पहचान आपका कथन हमें यह भी सिखाता है कि सच्चे और झूठे संबंधों की पहचान कैसे करें। सच्चे लोग: आपकी सफलता में खुश होते हैं।आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। आपके साथ खड़े रहते हैं। ईर्ष्यालु लोग: हमारी आपकी आलोचना करते हैं। हमारी आपकी उपलब्धियों को कम आंकते हैं।आपको पीछे खींचने की कोशिश करते हैं। इसलिए, जीवन में यह समझना बहुत जरूरी है कि कौन अपना है और कौन नहीं। समाधान: ईर्ष्या से मुक्ति का मार्ग नफरत ईर्ष्या से मुक्त होने के लिए हमें: आत्मविश्वास बढ़ाना होगा। सकारात्मक सोच अपनानी होगी। संविधान के मूल्यों को जीवन में उतारना होगा। मूल निवासियों यह समझना होगा कि हर व्यक्ति की अपनी यात्रा है। हर व्यक्ति की अपनी पहचान है।तुलना करना ही ईर्ष्या की जड़ है। युवा पीढ़ी और संवैधानिक सोच आज की युवा पीढ़ी देश का भविष्य है। आज हमारा युवा: ईर्ष्या छोड़कर सहयोग अपनाएंगे। संविधान के मूल्यों को समझेंगे। समानता और बंधुता को अपनाएंगे तो भारत एक मजबूत, समृद्ध और न्यायपूर्ण राष्ट्र बन सकता है। याद रखें “हमसे नफरत जलैशी ईर्ष्या करने वाले लोग, कभी हमारे नहीं हो सकते” केवल एक व्यक्तिगत अनुभव नहीं, बल्कि एक सामाजिक और संवैधानिक सत्य है। ईर्ष्या: विद्वेष किरन संबंधों को तोड़ती है। समाज को कमजोर करती है। लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाती है। जबकि संविधान: हमें जोड़ता है। समानता सिखाता है। भाईचारा बढ़ाता है। इसलिए, हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि: हम ईर्ष्या घृणा वैमनस्यता नहीं, प्रेरणा अपनाएंगे हम नफरत नहीं, भाईचारा बढ़ाएंगे हम संविधान के मूल्यों को अपने जीवन में उतारेंगे संदेश जो लोग आपकी प्रगति से जलते हैं, वे आपके साथ नहीं, बल्कि आपके खिलाफ खड़े होते हैं। लेकिन जो लोग आपके साथ खड़े होते हैं, वे आपकी सफलता में अपना भविष्य देखते हैं। इसलिए पहचानिए, समझिए और आगे बढ़िए—संविधान के मार्ग पर, समानता के साथ, और आत्मसम्मान के साथ। जय संविधान — जय लोकतंत्र जय इंसान जय विज्ञान जय भारत जय संविधान ✊
- भीषण गर्मी के बीच थाना हापुड़ देहात क्षेत्र के कोटला सादात फूलगढ़ी में बिजली ट्रांसफार्मर में अचानक भीषण आग लग गई। बताया जा रहा है कि तेज गर्मी के चलते ट्रांसफार्मर में चिंगारी उठी और देखते ही देखते आग भड़क गई। आग लगते ही इलाके में हड़कंप मच गया और लोग घरों से बाहर निकल आए। स्थानीय लोगों ने तुरंत बाल्टियों से पानी डालकर आग पर काबू पाने की कोशिश की और बड़ी मशक्कत के बाद आग को नियंत्रित किया। हालांकि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन आग लगने से इलाके की विद्युत सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।1
- हापुड़ में 24 अप्रैल को ई-रिक्शा हड़ताल, चालक बोले- अब सहन की सीमा पार रूट छोटे, स्टैंड नहीं, पुलिस उत्पीड़न और रेलवे पर अवैध पर्ची; विशाल कौशिक ने दी चेतावनी हापुड़ सिटी कोतवाली क्षेत्र में ई-रिक्शा चालक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विशाल कौशिक ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर ई-रिक्शा चालकों की समस्याओं को लेकर 24 अप्रैल को पूरे हापुड़ जिले में हड़ताल की घोषणा कर दी। विशाल कौशिक ने बताया कि पहले भी डीएम को ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। उन्होंने कहा कि अब चालकों की धैर्य की सीमा टूट चुकी है। मुख्य समस्याएं बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा बनाए गए रूट बेहद छोटे हैं, जिससे चालकों को घूम-घूमकर चलना पड़ता है और आय में भारी कमी आई है। हापुड़ शहर में ई-रिक्शा चालकों के लिए कोई स्टैंड नहीं है, जिस कारण बाजारों में जाम की स्थिति बनती है और चालकों को खड़े होने की भी जगह नहीं मिलती। इसके अलावा रेलवे स्टेशन पर अवैध रूप से जबरन पर्ची कटाई जाती है। पुलिस का व्यवहार भी चालकों के साथ बेहद खराब रहता है। इन सभी मुद्दों पर विचार-विमर्श के बाद सभी ई-रिक्शा चालकों की सहमति से 24 अप्रैल शुक्रवार को सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक पूर्ण हड़ताल रहेगी। इस दिन हापुड़ जिले में कोई भी ई-रिक्शा नहीं चलेगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरधना के अध्यक्ष तेजकरण, हापुड़ के अध्यक्ष वरुण त्यागी, क्षेत्रीय अध्यक्ष सोनू, पप्पू यादव, रजत, वकील सहित सैकड़ों ई-रिक्शा चालक मौजूद रहे। चालकों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर तुरंत ध्यान नहीं दिया तो आगे और बड़ी आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।2
- हापुड थाना धौलाना पुलिस ने ग्राम शौलाना में घटित फायरिंग की घटना में संलिप्त 02 अभियुक्तों को किया गिरफ्तार, जिनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त एक अवैध पिस्टल, एक अवैध तमंचा व एक बुलेट मोटर साइकिल बरामद।1
- बड़ी खबर उत्तर प्रदेश के जनपद हापुड़ स्मार्ट मीटर के विरोध में हाईवे जाम किया जोरदार प्रदर्शन अधिकारियों औरप्रदर्शनकारियों के बीच नोक झोंक हुई समस्या का समाधान न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी हापुड़ जिले के पिलखुआ में नगर क्षेत्र में स्मार्ट मीटर के विरोध में सोमवार को महिलाओं ने जोरदार प्रदर्शन किया और बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बड़ी संख्या में एकत्रित महिलाओं ने पुराने मीटर बहाल करने और स्मार्ट मीटर हटाने की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान कुछ समय के लिए नेशनल हाईवे भी जाम कर दिया गया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक मनीष चौहान पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर महिलाओं को समझा कर रास्ता खुलवाया प्रदर्शन कर रही महिलाओं का आरोप है कि स्मार्ट मीटर में बकाया राशि होने पर बिना किसी पूर्व सूचना के तुरंत बिजली आपूर्ति काट दी जाती है, जिससे भीषण गर्मी में छोटे बच्चों और बुजुर्गों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पहले की व्यवस्था में कुछ समय की राहत मिल जाती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा।महिलाओं ने यह भी बताया कि स्मार्ट मीटर लगाने के दौरान छोड़ी गई बिजली की तारें आज भी गली-मोहल्लों में लटक रही हैं, जो किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही हैं। कई बार विभागीय अधिकारियों को इस संबंध में शिकायत दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।महिलाओं ने प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब कुछ महिला प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। मौके पर पहुंची पुलिस क्षेत्राअधिकारी अनीता चौहान ने महिलाओं कोसमझा-बुझाकर शांत कराया और स्थिति को नियंत्रण में लिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अधिशासी अभियंता अरविंद कुशवाहा को घेर लिया, महिलाओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगी। उन्होंने बिजली विभाग के अधिकारियों के घेराव और उग्र प्रदर्शन करने की चेतावनी दी प्रदर्शन में शामिल कमलेश अत्रि, सरिता, सुमन सहित सैकड़ों महिलाएं शामिल रहीं। क्षेत्रवासियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, उनका आंदोलन जारी रहेगा।। पंडित मुरलीधर शर्मा पत्रकार3
- BAGHPAT DESK :- सड़क पर स्टंट और लापरवाही का खतरनाक खेल एक बार फिर सामने आया है। बागपत में शुगर मिल के पास हाइवे पर एक बाइक पर छह युवक और एक किशोर सवार होकर तेज रफ्तार में दौड़ते नजर आए। इस खतरनाक करतब का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही लोगों में आक्रोश और चिंता बढ़ गई है। एक बाइक पर सात लोग, नियमों की खुली धज्जियां वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक ही मोटरसाइकिल पर सात लोग सवार हैं। कुछ युवक बाइक की टंकी पर बैठे हैं, जबकि अन्य पीछे लटके हुए हैं, जो सड़क सुरक्षा नियमों की खुलेआम अनदेखी को दर्शाता है। हाइवे पर तेज रफ्तार से दौड़ी बाइक बताया जा रहा है कि यह घटना शुगर मिल के पास हाइवे की है, जहां युवक तेज रफ्तार में बाइक दौड़ाते नजर आए। इस दौरान किसी ने उनका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। खुद के साथ दूसरों की जान भी खतरे में इस तरह की लापरवाही न केवल बाइक सवारों के लिए जानलेवा है, बल्कि अन्य वाहन चालकों के लिए भी बड़ा खतरा पैदा करती है। छोटी सी गलती बड़े हादसे में बदल सकती है। स्थानीय लोगों में नाराजगी स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में इस तरह की घटनाएं अक्सर देखने को मिलती हैं। उनका आरोप है कि पुलिस की सख्ती के अभाव में युवाओं में नियमों का डर खत्म हो गया है। सख्त कार्रवाई की उठी मांग लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे लापरवाह वाहन चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर सड़क सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है। लोग इसे गैरजिम्मेदाराना और खतरनाक व्यवहार बता रहे हैं।1
- कल 17तारीख को किसान यूनियन भानु प्रताप की सेना ने जो चुनौती दी कि वो कल गढ़ मुक्तेश्वर में पहुंचेंगे उसको लेकर पहले ही मदन चौहान मीडिया प्रेस कॉम्प्रेश में बोले सुनिएगा जरा1
- क्या आप लोग इतनी ऊंचाई पर जाकर ऐसी वीडियो बना सकते हैं अगर आप बना सकते हैं तो समझो आपका हार्ड बहुत ही मजबूत है और आप इस प्रकार की हुक वीडियो बनाकर लाखों रुपए छाप सकते हैं लेकिन इसमें जान का जोखिम भी होता है तो ऐसी वीडियो बनाने से पहले विशेषज्ञों की जान पहचान विशेषज्ञ का मान सम्मान और विशेषज्ञों की सलाह जरूर ले लेना उसके बाद ही आगे कदम उठाना1
- हापुड़ में शादी के मंडप में बवाल! पहली पत्नी ने रोकी पति की दूसरी शादी | High Voltage Drama हापुड़ के आवास विकास कॉलोनी में उस समय हड़कंप मच गया जब एक व्यक्ति की दूसरी शादी के दौरान उसकी पहली पत्नी अचानक मंडप में पहुंच गई। महिला ने बिना तलाक दिए दूसरी शादी करने का आरोप लगाते हुए शादी रुकवा दी। मौके पर जमकर हाईवोल्टेज ड्रामा हुआ और मेहमानों में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। क्या बिना तलाक दूसरी शादी करना कानूनन सही है? जानिए इस पूरी घटना की सच्चाई इस वीडियो में। 👉 ऐसी ही ताजा और वायरल खबरों के लिए चैनल को Subscribe करें और Bell Icon जरूर दबाएं।1
- हापुड़ में 24 अप्रैल को ई-रिक्शा हड़ताल, चालक बोले- अब सहन की सीमा पार रूट छोटे, स्टैंड नहीं, पुलिस उत्पीड़न और रेलवे पर अवैध पर्ची; विशाल कौशिक ने दी चेतावनी हापुड़ सिटी कोतवाली क्षेत्र में ई-रिक्शा चालक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विशाल कौशिक ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर ई-रिक्शा चालकों की समस्याओं को लेकर 24 अप्रैल को पूरे हापुड़ जिले में हड़ताल की घोषणा कर दी। विशाल कौशिक ने बताया कि पहले भी डीएम को ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। उन्होंने कहा कि अब चालकों की धैर्य की सीमा टूट चुकी है। मुख्य समस्याएं बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा बनाए गए रूट बेहद छोटे हैं, जिससे चालकों को घूम-घूमकर चलना पड़ता है और आय में भारी कमी आई है। हापुड़ शहर में ई-रिक्शा चालकों के लिए कोई स्टैंड नहीं है, जिस कारण बाजारों में जाम की स्थिति बनती है और चालकों को खड़े होने की भी जगह नहीं मिलती। इसके अलावा रेलवे स्टेशन पर अवैध रूप से जबरन पर्ची कटाई जाती है। पुलिस का व्यवहार भी चालकों के साथ बेहद खराब रहता है। इन सभी मुद्दों पर विचार-विमर्श के बाद सभी ई-रिक्शा चालकों की सहमति से 24 अप्रैल शुक्रवार को सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक पूर्ण हड़ताल रहेगी। इस दिन हापुड़ जिले में कोई भी ई-रिक्शा नहीं चलेगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरधना के अध्यक्ष तेजकरण, हापुड़ के अध्यक्ष वरुण त्यागी, क्षेत्रीय अध्यक्ष सोनू, पप्पू यादव, रजत, वकील सहित सैकड़ों ई-रिक्शा चालक मौजूद रहे। चालकों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर तुरंत ध्यान नहीं दिया तो आगे और बड़ी आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।5