Shuru
Apke Nagar Ki App…
सरधना के पूर्व विधायक संगीत सोम ने केली गांव में किया मुस्लिम वर्ग से सम्पर्क सरधना के पूर्व विधायक फायर ब्रांड नेता ठाकुर संगीत सोम ने केली गांव के मुस्लिम वर्ग से संपर्क कर उन्हें सरकार से मिलने वाली निष्पक्ष योजनाओं के बारे में बात की साथ ही आगामी चुनाव 2027 में मुस्लिम वर्ग से पार्टी के लिए माँगा समर्थन
PARUL SIROHI BC MEERUT
सरधना के पूर्व विधायक संगीत सोम ने केली गांव में किया मुस्लिम वर्ग से सम्पर्क सरधना के पूर्व विधायक फायर ब्रांड नेता ठाकुर संगीत सोम ने केली गांव के मुस्लिम वर्ग से संपर्क कर उन्हें सरकार से मिलने वाली निष्पक्ष योजनाओं के बारे में बात की साथ ही आगामी चुनाव 2027 में मुस्लिम वर्ग से पार्टी के लिए माँगा समर्थन
More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
- सरधना के पूर्व विधायक संगीत सोम ने केली गांव में किया मुस्लिम वर्ग से सम्पर्क सरधना के पूर्व विधायक फायर ब्रांड नेता ठाकुर संगीत सोम ने केली गांव के मुस्लिम वर्ग से संपर्क कर उन्हें सरकार से मिलने वाली निष्पक्ष योजनाओं के बारे में बात की साथ ही आगामी चुनाव 2027 में मुस्लिम वर्ग से पार्टी के लिए माँगा समर्थन1
- मेरठ में आनंद विहार कॉलोनी की सड़कें बदहाल, नगर निगम पर उठे सवाल मेरठ में बागपत बाईपास स्थित आनंद विहार कॉलोनी के वार्ड 38 में सड़कों की हालत खराब बताई जा रही है। सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढों में पानी जमा होने से लोगों का आवागमन प्रभावित हो रहा है। स्थानीय समस्या के कारण मच्छरों के पनपने और डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। कॉलोनी की बदहाल स्थिति को लेकर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों की समस्या को देखते हुए सड़कों की मरम्मत और जलभराव दूर करने के लिए नगर निगम से कार्रवाई की मांग की जा रही है। #Meerut #MeerutNews #AnandViharColony #BaghpatBypass #NagarNigamMeerut #RoadProblems #Waterlogging #DenguePrevention #ERadioIndia1
- मेरठ काशी टोल प्लाजा पर कुछ कांग्रेसियों को पुलिसकर्मियों ने रोका मेरठ में कांग्रेसियों ने दिल्ली चलो के नारे लगाते हुए प्रदर्शन किया और बस में बैठकर दिल्ली के लिए रवाना हुए जीने टोल प्लाजा पर पुलिस कर्मियों ने रॉका तभी कांग्रेसियों के साथ पुलिस की नोकझोंक लगातार चलती रही कुछ कांग्रेसियों को बस में ही डिटेन कर लिया गया1
- करोड़ों का नाला, ढाई सूत की सरिया और घटिया निर्माण का आरोप! रानीगंज में सरकारी धन की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल* *करोड़ों का नाला, ढाई सूत की सरिया और घटिया निर्माण का आरोप! रानीगंज में सरकारी धन की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल* *दस एमएम सरिया का दावा, मौके पर पतली सरिया का इस्तेमाल? खुदाई से ढलाई तक जांच के घेरे में निर्माण कार्य, ठेकेदार और जिम्मेदार अभियंताओं की जवाबदेही पर सवाल* शंकरगढ़, प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र के बारा तहसील अंतर्गत विकासखंड शंकरगढ़ के रेलवे लाइन पार रानीगंज में रानीगंज से नारीबारी मार्ग की ओर करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे नाले के निर्माण कार्य में गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। निर्माण स्थल पर दिखाई दे रही स्थिति और श्रमिकों द्वारा बताई गई जानकारी के बीच अंतर ने पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच की आवश्यकता बढ़ा दी है। नाले में इस्तेमाल हो रही सरिया की मोटाई, कंक्रीट की गुणवत्ता, खुदाई की गहराई, आधार निर्माण और ढलाई की प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब आखिर कौन देगा? जनता के धन से हो रहे निर्माण में यदि गुणवत्ता से समझौता हुआ तो इसकी जिम्मेदारी किसके सिर जाएगी? *दस एमएम सरिया बताई, मौके पर ढाई सूत की सरिया का संदेह—आखिर सच क्या है?* निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों द्वारा नाले में दस एमएम यानी लगभग तीन सूत की सरिया लगाए जाने की बात बताई गई, जबकि मौके पर मीडिया के निरीक्षण के दौरान इस्तेमाल की जा रही सरिया की मोटाई ढाई सूत के आसपास होने का संदेह सामने आया। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि निर्माण में वास्तव में कितने एमएम की सरिया इस्तेमाल की जा रही है? क्या सरिया की मोटाई स्वीकृत तकनीकी प्राक्कलन के अनुरूप है? क्या सरिया की दूरी, जाल की बनावट और उसकी मात्रा निर्धारित डिजाइन के अनुसार रखी गई है? यदि मौके पर इस्तेमाल सरिया स्वीकृत मानक से कम पाई जाती है तो क्या ठेकेदार को भुगतान किया जाएगा या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी? सरिया की वास्तविक मोटाई की पुष्टि तकनीकी मापन से होनी चाहिए, लेकिन उठे सवालों को नजरअंदाज करना भी उचित नहीं होगा। *नाले की खुदाई कितनी, ढलाई कितनी और आधार की मजबूती का हिसाब कौन देगा?* नाले की मजबूती केवल ऊपर से दिखाई देने वाली सीमेंट-कंक्रीट की ढलाई पर निर्भर नहीं करती। निर्धारित गहराई तक खुदाई, तल की सही तैयारी, आधार की मजबूती, कंक्रीट की मोटाई और सरिया की सही स्थिति निर्माण की गुणवत्ता के अहम हिस्से हैं। मौके पर सवाल यह भी है कि नाले की खुदाई कितनी गहराई तक की जा रही है? क्या खुदाई की माप तकनीकी नक्शे के अनुसार है? तल में पत्थर की गिट्टी किस निर्धारित मोटाई और प्रक्रिया से डाली जा रही है? उसके ऊपर कंक्रीट की ढलाई कितनी मोटी की जा रही है? क्या ढलाई से पहले विभागीय अभियंता मौके पर जांच करते हैं या निर्माण कार्य ठेकेदार की मर्जी से आगे बढ़ रहा है? निर्माण स्थल के वीडियो में तल की तैयारी और गिट्टी डालने की प्रक्रिया दिखाई देने की बात सामने आई है। अब विभाग को तकनीकी माप के साथ वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। *सीमेंट, बालू, गिट्टी और पानी के अनुपात की जांच क्यों नहीं?* नाले के निर्माण में इस्तेमाल हो रही सीमेंट, बालू, गिट्टी और पानी की गुणवत्ता तथा उनका निर्धारित अनुपात भी जांच का विषय है। क्या कंक्रीट स्वीकृत श्रेणी के अनुसार तैयार किया जा रहा है? क्या मिश्रण निर्धारित अनुपात में हो रहा है? क्या निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांची गई है? ढलाई के बाद नियमानुसार तराई यानी क्योरिंग कराई जा रही है या नहीं? यदि कंक्रीट की गुणवत्ता कमजोर रही तो नाले में दरारें पड़ने, किनारों के टूटने और जल निकासी व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है। ऐसे में निर्माण के दौरान ही गुणवत्ता परीक्षण कराना जरूरी है, न कि शिकायत सामने आने के बाद कागजी जांच की औपचारिकता निभाना। *करोड़ों का काम, लेकिन ठेकेदार और कार्यदायी संस्था का नाम तक स्पष्ट क्यों नहीं?* आखिर यह नाला किस विभाग या कार्यदायी संस्था द्वारा बनवाया जा रहा है? इसकी स्वीकृत लागत कितनी है? ठेकेदार कौन है? निर्माण कार्य पूरा करने की समयसीमा क्या निर्धारित है? कार्यस्थल पर योजना से संबंधित सूचना पट्ट लगा है या नहीं? यदि लगा है तो उस पर दर्ज विवरण के अनुसार निर्माण कराया जा रहा है या नहीं? क्या निर्माण कार्य की माप पुस्तिका में दर्ज मात्रा मौके पर किए गए काम से मेल खाती है? क्या ठेकेदार को भुगतान से पहले गुणवत्ता की जांच होती है? इन सवालों का जवाब सार्वजनिक होना चाहिए। सरकारी निर्माण कार्य में पारदर्शिता केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। *अवर अभियंता से अधिशासी अभियंता तक—निगरानी की जिम्मेदारी किसकी?* निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी केवल ठेकेदार की नहीं, बल्कि संबंधित विभाग के तकनीकी अधिकारियों की भी होती है। मौके पर अवर अभियंता कितनी बार निरीक्षण कर चुके हैं? सहायक अभियंता और अधिशासी अभियंता ने निर्माण की गुणवत्ता की जांच की है या नहीं? क्या सरिया की मोटाई, ढलाई की मोटाई और कंक्रीट की गुणवत्ता का परीक्षण कराया गया? यदि निर्माण कार्य मानकों के विपरीत हो रहा है तो क्या विभागीय अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है? और यदि जानकारी है तो अब तक सुधारात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग को देना चाहिए। *जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी से तकनीकी जांच की मांग* रानीगंज नाला निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों पर जिलाधिकारी प्रयागराज और मुख्य विकास अधिकारी को संज्ञान लेकर निष्पक्ष तकनीकी जांच करानी चाहिए। संबंधित विभाग के अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता और अवर अभियंता की मौजूदगी में सरिया की वास्तविक मोटाई, खुदाई की गहराई, आधार की मोटाई, कंक्रीट की गुणवत्ता और निर्माण की माप का परीक्षण कराया जाए। यदि नाला विकासखंड अथवा ग्राम पंचायत की योजना से बन रहा है तो खंड विकास अधिकारी और संबंधित तकनीकी अधिकारियों की भूमिका भी स्पष्ट की जाए। वहीं यदि निर्माण किसी अन्य विभाग या संस्था के माध्यम से कराया जा रहा है तो उसकी जिम्मेदार एजेंसी और अधिकारियों का नाम सार्वजनिक किया जाए। *जनता के पैसे से निर्माण, ठेकेदार की मनमानी नहीं चलेगी!* रानीगंज से नारीबारी मार्ग की ओर बन रहा नाला क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन यदि निर्माण के दौरान ही गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं तो भविष्य में इसकी मजबूती और उपयोगिता पर संदेह होना स्वाभाविक है। क्या नाला निर्धारित मानकों के अनुसार बनेगा या कुछ वर्षों में टूट-फूट और जलभराव की समस्या फिर सामने आएगी? क्या निर्माण पूरा होने के बाद भी इसकी गुणवत्ता की जिम्मेदारी तय होगी? जनता के धन से हो रहे निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या मानकों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जा सकती। अब जरूरत है कि संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर तकनीकी जांच करे, निर्माण की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करे और यदि कोई अनियमितता प्रमाणित होती है तो ठेकेदार सहित जिम्मेदार अधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करे। *सवाल साफ है—करोड़ों की लागत से बन रहे नाले की गुणवत्ता की गारंटी कौन देगा और निर्माण में गड़बड़ी मिलने पर जवाबदेही किसकी तय होगी?*1
- *थाना सिविल लाइन क्षेत्रान्तर्गत मोहनपुरी स्थित दयालेश्वर मंदिर से मूर्तियों की चोरी की घटना का खुलासा करते हुए अभियुक्त की गिरफ्तारी एवं पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही के संबंध में श्रीमति दीक्षा भौरया सहायक पुलिस अधीक्षक/ क्षेत्राधिकारी सिविल लाइन महोदया की बाइट।*1
- ब्रेकिंग न्यूज़ बिजनौर बिजनौर खो नदी में अवैध खनन का बड़ा खेल, पुलिस का छापा एसपी के निर्देश पर पुलिस ने मारा छापा खो नदी में अवैध खनन की सूचना पर पुलिस ने मारा छापा। खनन अनुमति की जगह से 1.5 किलो मीटर दूर अवैध खनन मौके पर एक पोकलेन मशीन, एक लोडर और 15 से अधिक खाली डंपर मिले। 7 भरे हुए डंपर भी मौके पर मौजूद। प्रशासन की मिलीभगत से अवैध खनन का खेल। पुलिस की कार्रवाई के बाद भी मौके पर नहीं पहुंची प्रशासनिक टीम। बड़े पैमाने पर खनन के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों पर सवाल। थाना बढ़ापुर के खोबड़ा गांव के पास खो नदी के अवैध खनन4
- इंडिया गठबंधन की रैली में जाने से रोककर थाना कोतवाली मेरठ पुलिस ने हमें डिटेन कर लिया। आखिर जनता की आवाज़ से इतना डर क्यों? लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने की हर कोशिश का समाजवादी पुरजोर विरोध करेंगे। न झुकेंगे, न रुकेंगे, अन्याय के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा !2
- माननीय चौधरी यशवीर सिंह राज्य मंत्री ( दर्जा प्राप्त ) ने किया मेरठ के नगर पंचायत किठौर में जनसुनवाई आज राज्य मंत्री (दर्जा प्राप्त) माननीय श्री चौधरी यशवीर सिंह जी का जनपद मेरठ के नगर पंचायत किठौर मे लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवन (गेस्ट हाउस) में चेयरमैन श्री तेज बहादुर सिंह जी एवं शहादाब चौधरी ने अपनी टीम के साथ आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। इस दौरान मौके पर माननीय मंत्री जी ने क्षेत्रवासियों की समस्याओं एवं जनहित से जुड़े विभिन्न विषयों को गंभीरतापूर्वक सुना तथा उनके त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण हेतु संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। जनता की सेवा, जनता का सम्मान और समस्याओं का समाधान ही हमारा ध्येय है। 🙏🙏🙏1