सतना जिले के नयागाँव में जन्मे दीपक त्रिपाठी आज विंध्य क्षेत्र में जनसेवा और समर्पण की एक बेमिसाल मिसाल बन चुके हैं। वे गौ सेवा को अपना परम धर्म मानते हैं और अपने कार्यों से समाज को एक नई दिशा दिखा रहे हैं। पुरुषोत्तम मास में गैवीनाथ धाम पहुँचने वाले श्रद्धालुओं के लिए वे लगातार महाप्रसाद वितरित करते हैं, और उनका यह सेवा कार्य साल भर जारी रहता है। दीपक त्रिपाठी के निस्वार्थ भाव से किए गए सेवा कार्यों की एक लंबी सूची है। कोविड काल के दौरान उन्होंने प्रतिदिन 500 लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की थी। इसके साथ ही, उन्होंने 72 कन्याओं के विवाह में दहेज की पूरी सामग्री उपहार स्वरूप प्रदान की और चित्रकूट के जंगलों में बंदरों के लिए रोजाना भोजन का प्रबंध करते हैं। उनकी दिनचर्या में हर दिन तीन घंटे की पूजा के बाद समाज सेवा के लिए निकलना शामिल है। वे आदिवासी बस्तियों में कंबल, छाता और पन्नी वितरित कर जरूरतमंदों का सहारा बनते हैं। धार्मिक स्थलों पर मंदिर निर्माण, बोरवेल लगाने और शहीद स्मारकों में सहयोग देकर उन्होंने यह साबित किया है कि धन का सही उपयोग केवल जन-कल्याण में ही है। आज उनके साथी रोहित पाण्डेय “सेलौरा” के जन्मदिन के अवसर पर भी उनकी जनसेवा की यह धारा लगातार बह रही है। निस्संदेह, दीपक त्रिपाठी की सेवा योजनाएँ भविष्य में इस क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाएंगी। विंध्यवासी उन्हें अपना भरपूर आशीर्वाद और प्यार दें ताकि वे ऐसे ही नेक काम करते रहें। जय गैवीनाथ!
सतना जिले के नयागाँव में जन्मे दीपक त्रिपाठी आज विंध्य क्षेत्र में जनसेवा और समर्पण की एक बेमिसाल मिसाल बन चुके हैं। वे गौ सेवा को अपना परम धर्म मानते हैं और अपने कार्यों से समाज को एक नई दिशा दिखा रहे हैं। पुरुषोत्तम मास में गैवीनाथ धाम पहुँचने वाले श्रद्धालुओं के लिए वे लगातार महाप्रसाद वितरित करते हैं, और उनका यह सेवा कार्य साल भर जारी रहता है। दीपक त्रिपाठी के निस्वार्थ भाव से किए गए सेवा कार्यों की एक लंबी सूची है। कोविड काल के दौरान उन्होंने प्रतिदिन 500 लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की थी। इसके साथ ही, उन्होंने 72 कन्याओं के विवाह में दहेज की पूरी सामग्री उपहार स्वरूप प्रदान की और चित्रकूट के जंगलों में बंदरों के
लिए रोजाना भोजन का प्रबंध करते हैं। उनकी दिनचर्या में हर दिन तीन घंटे की पूजा के बाद समाज सेवा के लिए निकलना शामिल है। वे आदिवासी बस्तियों में कंबल, छाता और पन्नी वितरित कर जरूरतमंदों का सहारा बनते हैं। धार्मिक स्थलों पर मंदिर निर्माण, बोरवेल लगाने और शहीद स्मारकों में सहयोग देकर उन्होंने यह साबित किया है कि धन का सही उपयोग केवल जन-कल्याण में ही है। आज उनके साथी रोहित पाण्डेय “सेलौरा” के जन्मदिन के अवसर पर भी उनकी जनसेवा की यह धारा लगातार बह रही है। निस्संदेह, दीपक त्रिपाठी की सेवा योजनाएँ भविष्य में इस क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाएंगी। विंध्यवासी उन्हें अपना भरपूर आशीर्वाद और प्यार दें ताकि वे ऐसे ही नेक काम करते रहें। जय गैवीनाथ!
- सतना जिले के नयागाँव में जन्मे दीपक त्रिपाठी आज विंध्य क्षेत्र में जनसेवा और समर्पण की एक बेमिसाल मिसाल बन चुके हैं। वे गौ सेवा को अपना परम धर्म मानते हैं और अपने कार्यों से समाज को एक नई दिशा दिखा रहे हैं। पुरुषोत्तम मास में गैवीनाथ धाम पहुँचने वाले श्रद्धालुओं के लिए वे लगातार महाप्रसाद वितरित करते हैं, और उनका यह सेवा कार्य साल भर जारी रहता है। दीपक त्रिपाठी के निस्वार्थ भाव से किए गए सेवा कार्यों की एक लंबी सूची है। कोविड काल के दौरान उन्होंने प्रतिदिन 500 लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की थी। इसके साथ ही, उन्होंने 72 कन्याओं के विवाह में दहेज की पूरी सामग्री उपहार स्वरूप प्रदान की और चित्रकूट के जंगलों में बंदरों के लिए रोजाना भोजन का प्रबंध करते हैं। उनकी दिनचर्या में हर दिन तीन घंटे की पूजा के बाद समाज सेवा के लिए निकलना शामिल है। वे आदिवासी बस्तियों में कंबल, छाता और पन्नी वितरित कर जरूरतमंदों का सहारा बनते हैं। धार्मिक स्थलों पर मंदिर निर्माण, बोरवेल लगाने और शहीद स्मारकों में सहयोग देकर उन्होंने यह साबित किया है कि धन का सही उपयोग केवल जन-कल्याण में ही है। आज उनके साथी रोहित पाण्डेय “सेलौरा” के जन्मदिन के अवसर पर भी उनकी जनसेवा की यह धारा लगातार बह रही है। निस्संदेह, दीपक त्रिपाठी की सेवा योजनाएँ भविष्य में इस क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाएंगी। विंध्यवासी उन्हें अपना भरपूर आशीर्वाद और प्यार दें ताकि वे ऐसे ही नेक काम करते रहें। जय गैवीनाथ!2
- सतना जिले के तिकुरिया टोला बायपास मैहर रोड पर एक बड़ा सड़क हादसा हुआ है, जहाँ बस और मोटरसाइकिल की भिड़ंत में रामपुर बघेलान थाना अंतर्गत चकदही निवासी दो सगे भाई, विनय यादव (उम्र 26 वर्ष) और विवेक यादव (उम्र 28 वर्ष) की मौके पर ही मौत हो गई। इस दुर्घटना में उनकी बहन बंदना यादव की स्थिति नाजुक बनी हुई है। परिजनों ने बताया कि पोस्टमार्टम कराने के लिए जिला अस्पताल पहुंचने के बावजूद, जिला प्रशासन का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इसी बात से नाराज होकर समस्त परिजनों ने सेमरिया चौराहा बस स्टैंड पर चक्का जाम कर दिया।1
- रीवा पुलिस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर की जा रही विवादित पोस्टों पर पैनी नजर रख रही है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री पर तत्काल ध्यान दिया जाए।1
- मध्य प्रदेश के सतना जिले के प्रकलपुर पोस्ट के अंतर्गत आने वाले ग्राम शाहपुर में, ऐसी स्थिति है कि यदि कोई व्यक्ति सड़क देखने या उसके संबंध में जानकारी लेने जाता है, तो उस पर इसी तरह से आरोप लगाए जाते हैं।1