ग्वालियर के डबरा अनुविभाग के पिछोर में रेत कंपनी के कर्मचारियों पर दबंगों ने हमला कर जमकर मारपीट की और उनकी गाड़ी तोड़ दी। इस घटना के बाद पीड़ित ने पिछोर थाना प्रभारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें थाना प्रभारी पर रेत माफियाओं और दबंगों को संरक्षण देने तथा अवैध रेत उत्खनन में संलिप्तता का आरोप शामिल है। यह आरोप ऐसे समय में लगे हैं जब पहले भी पिछोर में खुलेआम जुआ खिलाने का वीडियो वायरल हुआ था, जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। यह ताजा मामला आज रात का है, जहाँ रेत कंपनी के दो कर्मचारियों की दबंगों ने पिटाई की। कथित तौर पर हरिओम जाट, छोटू जाट, कपिल यादव सहित अन्य लोगों ने अवैध हथियारों से जानलेवा हमला कर बेरहमी से मारपीट की, जिसके बाद गाड़ी में तोड़फोड़ की गई। इस हमले में कर्मचारी अजय परिहार का हाथ फ्रैक्चर हो गया, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद डबरा से ग्वालियर रेफर किया गया। बताया जा रहा है कि पहले भी इन दबंगों ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया था, जिसमें डायल 112 का एक पुलिसकर्मी घायल हुआ था। घायल कर्मचारी अजय परिहार ने पिछोर थाना प्रभारी शिवम राजावत पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि जब वे अपने साथियों के साथ रिपोर्ट दर्ज कराने पिछोर थाने पहुंचे, तो थाना प्रभारी ने उनके साथ गाली-गलौज की, थाने से भगा दिया और एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया। परिहार ने आरोप लगाया कि थाना प्रभारी अपने निजी लोगों के ज़रिए रेत की ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से 'एंट्री' करवाते हैं और इस बात की जवाबदारी लेते हैं कि पिछोर थाना क्षेत्र में बिना रॉयल्टी के भी ट्रैक्टर-ट्रॉली को कोई नहीं पकड़ेगा। उनका यह भी आरोप है कि रेत की रॉयल्टी चेक करने वाले कर्मचारियों को पुलिस के निजी गुंडों द्वारा धमकाया जाता है, और यदि वे फिर भी न मानें तो उन्हें अजय परिहार जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति तब सामने आई है जब सरकार अवैध उत्खनन पर सख्त है, जिसका एक उदाहरण सबलगढ़ में देखने को मिला था, जहाँ थाना प्रभारी राजकुमारी परमार पर भी रेत माफिया को संरक्षण देने के आरोप लगे थे और उन्हें निलंबित किया गया था। अब देखना होगा कि ग्वालियर पुलिस कप्तान धर्मवीर सिंह इस मामले में कोई कार्रवाई करते हैं या पिछोर थाना इसी तरह विवादों में चलता रहेगा।
ग्वालियर के डबरा अनुविभाग के पिछोर में रेत कंपनी के कर्मचारियों पर दबंगों ने हमला कर जमकर मारपीट की और उनकी गाड़ी तोड़ दी। इस घटना के बाद पीड़ित ने पिछोर थाना प्रभारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें थाना प्रभारी पर रेत माफियाओं और दबंगों को संरक्षण देने तथा अवैध रेत उत्खनन में संलिप्तता का आरोप शामिल है। यह आरोप ऐसे समय में लगे हैं जब पहले भी पिछोर में खुलेआम जुआ खिलाने का वीडियो वायरल हुआ था, जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। यह ताजा मामला आज रात का है, जहाँ रेत कंपनी के दो कर्मचारियों की दबंगों ने पिटाई की। कथित तौर पर हरिओम जाट, छोटू जाट, कपिल यादव सहित अन्य लोगों ने अवैध हथियारों से जानलेवा हमला कर बेरहमी से मारपीट की, जिसके बाद गाड़ी में तोड़फोड़ की गई। इस हमले में कर्मचारी अजय परिहार का हाथ फ्रैक्चर हो गया, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद डबरा से ग्वालियर रेफर किया गया। बताया जा रहा है कि पहले भी इन दबंगों ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया था, जिसमें डायल 112 का एक पुलिसकर्मी घायल हुआ था। घायल कर्मचारी अजय परिहार ने पिछोर थाना प्रभारी शिवम राजावत पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि जब वे अपने साथियों के साथ रिपोर्ट दर्ज कराने पिछोर थाने पहुंचे, तो थाना प्रभारी ने उनके साथ गाली-गलौज की, थाने से भगा दिया और एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया। परिहार ने आरोप लगाया कि थाना प्रभारी अपने निजी लोगों के ज़रिए रेत की ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से 'एंट्री' करवाते हैं और इस बात की जवाबदारी लेते हैं कि पिछोर थाना क्षेत्र में बिना रॉयल्टी के भी ट्रैक्टर-ट्रॉली को कोई नहीं पकड़ेगा। उनका यह भी आरोप है कि रेत की रॉयल्टी चेक करने वाले कर्मचारियों को पुलिस के निजी गुंडों द्वारा धमकाया जाता है, और यदि वे फिर भी न मानें तो उन्हें अजय परिहार जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति तब सामने आई है जब सरकार अवैध उत्खनन पर सख्त है, जिसका एक उदाहरण सबलगढ़ में देखने को मिला था, जहाँ थाना प्रभारी राजकुमारी परमार पर भी रेत माफिया को संरक्षण देने के आरोप लगे थे और उन्हें निलंबित किया गया था। अब देखना होगा कि ग्वालियर पुलिस कप्तान धर्मवीर सिंह इस मामले में कोई कार्रवाई करते हैं या पिछोर थाना इसी तरह विवादों में चलता रहेगा।
- डबरा में लोग रोज़ाना की भीषण गर्मी से परेशान हैं। बीते दिन पानी बरसने के कारण क्षेत्र में उमस काफी बढ़ गई है, जिसने स्थिति को और भी असहज बना दिया है। इस अत्यधिक गर्मी और बढ़ती उमस से डबरा के निवासियों का जीवन दूभर हो गया है, जिससे वे असहज महसूस कर रहे हैं।2
- डबरा में आखिरी दिन ताजिया का जुलूस विसर्जन के लिए निकाला गया। इस दौरान ताजिया को विसर्जन स्थल तक ले जाने की प्रक्रिया संपन्न हुई।1
- ग्वालियर से लगभग 30 किलोमीटर दूर आंतरी गांव में एक रहस्यमयी घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है, जहाँ पिछले कई दिनों से एक ही परिवार के पाँच भाइयों के घरों में अचानक आग लगने की घटनाएँ हो रही हैं। इन घटनाओं में कपड़े, बिस्तर और खाने का सामान जल रहा है, लेकिन अब तक आग लगने की वजह साफ नहीं हो पाई है। यह मामला इतना गंभीर हो चुका है कि प्रशासन से लेकर फॉरेंसिक टीम तक इसकी जाँच में जुटी हुई है। ग्वालियर जिले के आंतरी गांव में कल्याण सिंह बघेल, सेवाराम बघेल, कामता प्रसाद बघेल, महेंद्र बघेल और लक्षीराम बघेल के घरों में रहस्यमयी ढंग से आग लग रही है। शुरुआत कल्याण सिंह के घर से हुई, जहाँ अचानक कपड़ों और बिस्तर में आग लग गई, जिसके बाद एक-एक करके बाकी चार भाइयों के घरों में भी ऐसी ही घटनाएँ होने लगीं। परिवार के सदस्यों का कहना है कि आग लगने के पीछे न तो बिजली का शॉर्ट सर्किट है और न ही कोई चूल्हा जल रहा होता है, फिर भी अचानक सामान जल उठता है। आग इतनी तेजी से फैलती है कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिलता, और दहशत के कारण पूरा परिवार अब घरों के बाहर खुले आसमान के नीचे रात गुजारने पर मजबूर है। परिवार का दावा है कि यदि जला हुआ सामान बचाने के लिए किसी पड़ोसी के घर रखा जाए, तो वहाँ भी उसी सामान में आग लग जाती है, जिससे पूरे गांव में भय का माहौल बना हुआ है। इन घटनाओं के बाद गांव में अंधविश्वास भी फैलने लगा है, जहाँ कुछ ग्रामीण इसे भूत-प्रेत या जादू-टोने का असर मान रहे हैं। कई तांत्रिकों को बुलाकर पूजा-पाठ और टोटके भी कराए गए हैं, लेकिन आग लगने का असल कारण अभी तक सामने नहीं आया है। हालांकि, प्रशासन लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और जाँच पूरी होने का इंतजार करने की अपील कर रहा है। सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और एहतियात के तौर पर गांव में पानी का टैंकर तैनात कर दिया गया है, साथ ही फायर ब्रिगेड को भी अलर्ट पर रखा गया है। ग्वालियर से आई फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल की बारीकी से जाँच की, जिसके दौरान आग लगने वाले स्थानों के आसपास माचिस की तीलियाँ भी मिलने की बात सामने आई है। अधिकारी फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रहे हैं और बता रहे हैं कि जाँच अभी जारी है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इन घरों में बार-बार आग कैसे लग रही है – क्या इसके पीछे किसी की शरारत है, कोई वैज्ञानिक कारण है या कोई अन्य वजह? इसका जवाब अब जाँच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।1
- मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में आज ओबीसी महासभा द्वारा बहुजन महायज्ञ सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में पूर्व विधायक आदरणीय आर. डी. प्रजापति ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और सामाजिक न्याय के विषय पर अपना संबोधन दिया। इस दौरान, ओबीसी महासभा के कोर कमेटी सदस्य एडवोकेट धर्मेंद्र कुशवाह का भी उल्लेख किया गया, जिसके माध्यम से ओबीसी महासभा को उनकी बात सुनने का आह्वान किया गया।1
- मध्य प्रदेश के ग्वालियर में पांच घरों में अचानक रहस्यमयी आग लगने से इलाके में दहशत का माहौल है। इस घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन तुरंत मामले की जांच में जुट गया है, लेकिन आग लगने का सटीक कारण अभी तक अज्ञात बना हुआ है।1
- मुरैना जिले के किशनपुर गाँव से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। एक धार्मिक कार्यक्रम, भागवत कथा में हुए एक महिला के नृत्य ने पूरे परिवार की मौत का कारण बना दिया। बताया गया है कि रविता कुशवाह ने पीके शंकर जी के मशहूर गाने "बूटी" पर मंच पर नृत्य किया था, जिस पर वहाँ मौजूद लोग तालियाँ बजा रहे थे। इसी बीच, भीड़ में बैठे उसके पति बलराम को यह नृत्य अंदर ही अंदर चुभ रहा था। गुस्से और शक से अंधा होकर, बलराम ने अपनी ही पत्नी और दो मासूम बच्चों को कुल्हाड़ी से बेरहमी से काट डाला। इस जघन्य वारदात के बाद, बलराम खुद रेलवे ट्रैक पर पहुँच गया और ट्रेन से कटकर अपनी जान दे दी।1
- मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के डबरा शहर में जेल रोड स्थित काली माता मंदिर के पास बीच सड़क पर सीवर लाइन डालने के काम से स्थानीय रहवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़क की खुदाई के कारण आवाजाही पूरी तरह बंद हो चुकी है, जिससे लोगों को निकलने में काफी मुश्किल हो रही है। वार्डवासियों ने बताया कि हाल ही में हुई बरसात ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है, जिससे पूरे रास्ते पर कीचड़ और जल भराव हो गया है। सड़क पर गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिससे बच्चों का वहां से निकलना खतरनाक हो गया है। रहवासियों ने प्रशासन से आशंका जताई है कि यदि कोई अप्रिय घटना या बड़ा हादसा होता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। इसी को देखते हुए उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि सीवर लाइन को बीच रास्ते से न निकाला जाए, क्योंकि इसने पूरी तरह से रास्ता रोक दिया है।4