बस्ती जिले में कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जहाँ खाद का वितरण सरकारी दिशानिर्देशों के बजाय होल सेलर्स की एक सिंडिकेट और भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से संचालित होने का आरोप है। प्रशासन के किसानों को वाजिब दाम पर खाद उपलब्ध कराने के दावों के विपरीत, जमीनी हकीकत में पूरा सिस्टम कुछ थोक विक्रेताओं और भ्रष्ट अधिकारियों की सांठगांठ के आगे घुटने टेक चुका है, जिससे किसान हितैषी होने का दावा केवल कागजी ढोंग बनकर रह गया है। यह व्यवस्था ‘संगठित लूट’ का रूप ले चुकी है, जहाँ अंततः मार किसान ही खा रहा है। खाद वितरण तंत्र पर बालाजी एजेंसी, रामचंद्र गुप्त, सत्यनारायण एंड संस, शाकंबरी ट्रेडिंग कंपनी, आयुष ट्रेडर्स, सिंह हर्रैया और गुप्ता बभनान जैसे थोक विक्रेताओं का कब्जा बताया जा रहा है। आरोप है कि इन्हें जिले के शीर्ष कृषि अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है, और उनकी मनमानी के खिलाफ कोई भी विभागीय अधिकारी बोलने को तैयार नहीं, जिसे 'मोटे लिफाफों' का परिणाम माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि कृषि विभाग का बजट भले ही शून्य दिखता हो, लेकिन यहाँ की 'अवैध कमाई' करोड़ों में है, और प्रति सीजन ढाई करोड़ रुपये का सीधा कमीशन 'ऊपर' तक पहुँचता है, जिसमें जेडीए और डीडीओ कार्यालय के बाबू तक शामिल हैं। इस संगठित लूट के तरीके में होल सेलर्स कागजों पर कम दर दिखाकर बिल बनाते हैं, लेकिन किसानों से मनमाना दाम वसूलते हैं। उदाहरण के लिए, 266 रुपये की खाद को 280 रुपये में बेचने पर प्रति बोरी 14 रुपये का अवैध लाभ होता है, और टैकिंग के नाम पर अतिरिक्त वसूली के साथ यह मुनाफा लगभग 30 रुपये प्रति बोरी तक पहुँच जाता है। छोटे रिटेलर्स भी इस धांधली का शिकार हैं; जब होल सेलर्स ही मनमाना रेट लेंगे, तो वे किसानों को सस्ता कैसे बेचेंगे? उनकी शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं होती, क्योंकि अधिकारियों को कथित तौर पर प्रति बैग पाँच रुपये का 'सुविधा शुल्क' मिलता है। नतीजतन, खाद की कालाबाजारी और ओवर-रेटिंग का सारा बोझ अंततः किसान की जेब पर पड़ता है। जिले में छापेमारी की कार्रवाई को भी 'दिखावा' बताया जा रहा है, क्योंकि ये केवल कमजोर रिटेलर्स पर की जाती हैं, जबकि बड़े होल सेलर्स के गोदामों पर छापेमारी करने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पाता, क्योंकि ऐसा करने से 'ऊपर' तक पहुँचने वाली 'मलाई' बंद होने का डर है। इस स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन को पारदर्शिता लाने, खाद आवंटन प्रक्रिया को ऑनलाइन और सार्वजनिक करने, फाइलों पर निर्भर रहने के बजाय हर ब्लॉक में 20-20 किसानों से रैंडम फीडबैक लेने और थोक विक्रेताओं के लाइसेंस व गोदामों की सघन जांच करने जैसे कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है। यह सवाल बना हुआ है कि क्या जिले के आला अधिकारी इस 'खाद माफिया' के सामने अपनी नैतिक हिम्मत दिखा पाएंगे, या फिर यह 'खाद का काला खेल' इसी तरह चलता रहेगा, जहाँ साहब से लेकर चपरासी तक अपनी हैसियत बढ़ा रहे हैं और किसान अपनी बदहाली पर आँसू बहा रहा है।
बस्ती जिले में कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जहाँ खाद का वितरण सरकारी दिशानिर्देशों के बजाय होल सेलर्स की एक सिंडिकेट और भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से संचालित होने का आरोप है। प्रशासन के किसानों को वाजिब दाम पर खाद उपलब्ध कराने के दावों के विपरीत, जमीनी हकीकत में पूरा सिस्टम कुछ थोक विक्रेताओं और भ्रष्ट अधिकारियों की सांठगांठ के आगे घुटने टेक चुका है, जिससे किसान हितैषी होने का दावा केवल कागजी ढोंग बनकर रह गया है। यह व्यवस्था ‘संगठित लूट’ का रूप ले चुकी है, जहाँ अंततः मार किसान ही खा रहा है। खाद वितरण तंत्र पर बालाजी एजेंसी, रामचंद्र गुप्त, सत्यनारायण एंड संस, शाकंबरी ट्रेडिंग कंपनी, आयुष ट्रेडर्स, सिंह हर्रैया और गुप्ता बभनान जैसे थोक विक्रेताओं का कब्जा बताया जा रहा है। आरोप है कि इन्हें जिले के शीर्ष कृषि अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है, और उनकी मनमानी के खिलाफ कोई भी विभागीय अधिकारी बोलने को तैयार नहीं, जिसे 'मोटे लिफाफों' का परिणाम माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि कृषि विभाग का बजट भले ही शून्य दिखता हो, लेकिन यहाँ की 'अवैध कमाई' करोड़ों में है, और प्रति सीजन ढाई करोड़ रुपये का सीधा कमीशन 'ऊपर' तक पहुँचता है, जिसमें जेडीए और डीडीओ कार्यालय के बाबू तक शामिल हैं। इस संगठित लूट के तरीके में होल सेलर्स कागजों पर कम दर दिखाकर बिल बनाते हैं, लेकिन किसानों से मनमाना दाम वसूलते हैं। उदाहरण के लिए, 266 रुपये की खाद को 280 रुपये में बेचने पर प्रति बोरी 14 रुपये का अवैध लाभ होता है, और टैकिंग के नाम पर अतिरिक्त वसूली के साथ यह मुनाफा लगभग 30 रुपये प्रति बोरी तक पहुँच जाता है। छोटे रिटेलर्स भी इस धांधली का शिकार हैं; जब होल सेलर्स ही मनमाना रेट लेंगे, तो वे किसानों को सस्ता कैसे बेचेंगे? उनकी शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं होती, क्योंकि अधिकारियों को कथित तौर पर प्रति बैग पाँच रुपये का 'सुविधा शुल्क' मिलता है। नतीजतन, खाद की कालाबाजारी और ओवर-रेटिंग का सारा बोझ अंततः किसान की जेब पर पड़ता है। जिले में छापेमारी की कार्रवाई को भी 'दिखावा' बताया जा रहा है, क्योंकि ये केवल कमजोर रिटेलर्स पर की जाती हैं, जबकि बड़े होल सेलर्स के गोदामों पर छापेमारी करने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पाता, क्योंकि ऐसा करने से 'ऊपर' तक पहुँचने वाली 'मलाई' बंद होने का डर है। इस स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन को पारदर्शिता लाने, खाद आवंटन प्रक्रिया को ऑनलाइन और सार्वजनिक करने, फाइलों पर निर्भर रहने के बजाय हर ब्लॉक में 20-20 किसानों से रैंडम फीडबैक लेने और थोक विक्रेताओं के लाइसेंस व गोदामों की सघन जांच करने जैसे कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है। यह सवाल बना हुआ है कि क्या जिले के आला अधिकारी इस 'खाद माफिया' के सामने अपनी नैतिक हिम्मत दिखा पाएंगे, या फिर यह 'खाद का काला खेल' इसी तरह चलता रहेगा, जहाँ साहब से लेकर चपरासी तक अपनी हैसियत बढ़ा रहे हैं और किसान अपनी बदहाली पर आँसू बहा रहा है।
- तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता अभिषेक बनर्जी को एक इलाके के दौरे के दौरान स्थानीय महिलाओं के भारी विरोध का सामना करना पड़ा, जिन्होंने उनके काफिले पर अंडे बरसाकर अपना कड़ा आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शनकारी महिलाओं का आरोप है कि अभिषेक बनर्जी जिस व्यक्ति की मृत्यु पर शोक व्यक्त करने के लिए वहां पहुंचे थे, वह क्षेत्र का एक कुख्यात अपराधी था जिसका आपराधिक इतिहास रहा है और वह 20 से अधिक महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटनाओं में शामिल था। प्रदर्शन में शामिल एक स्थानीय महिला ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि मृतक व्यक्ति गांव की एक लड़की को भगा ले गया था, उसे अपने साथ रखा, लेकिन उससे शादी करने से इनकार कर दिया। महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि वह व्यक्ति तृणमूल कांग्रेस का कार्यकर्ता था, मगर स्थानीय लोग उसे पार्टी का वैध सदस्य नहीं मानते थे। उन्होंने दावा किया कि वह अपनी दबंगई और आपराधिक गतिविधियों के लिए जाना जाता था, और पार्टी के नाम पर लोगों से पैसे भी वसूलता था। महिलाओं ने स्पष्ट किया कि यह विरोध किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि उस गुंडागर्दी के खिलाफ है जिसे राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी के इस दौरे से अपराधियों को बढ़ावा मिल रहा है और वे इस व्यवस्था के खिलाफ न्याय चाहती हैं। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने सवाल उठाया कि एक अपराधी को राजनीतिक संरक्षण क्यों दिया जा रहा है, और इसी बात को लेकर उनका गुस्सा फूटा। इस घटना के बाद इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही, और महिलाओं ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वे इस अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगी।1
- बस्ती ज़िले के चौरी बाज़ार में एक सड़क लगभग दो साल से टूटी हुई है, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। सड़क की इस खराब हालत के कारण आए दिन दुर्घटनाएँ होती रहती हैं, जिससे लोग लगातार परेशान हैं।1
- प्रसिद्ध शिक्षक खान सर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने पत्रकारिता को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। एक टीवी एंकर के सवाल के जवाब में खान सर ने सीधा हमला करते हुए कहा, "पढ़ाओ कि कैसे तलवे चाटे जाते हैं, पढ़ाओ... हम पढ़ने आ रहे हैं।" उन्होंने इशारों-इशारों में स्पष्ट किया कि अगर पत्रकारिता का अर्थ सत्ता की चापलूसी करना है, तो ऐसी शिक्षा वे नहीं दे सकते। उनके इस बेबाक बयान पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहां कुछ लोग इसे उनकी निडरता बता रहे हैं, वहीं कुछ अन्य इसे एक विवादित टिप्पणी मान रहे हैं।1
- संत कबीर नगर जिले की मेहदावल तहसील के रसूलपुर चौधरी पोस्ट देवकली में विकास कार्यों पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में जहां सड़क की सख्त ज़रूरत है, वहां उसका निर्माण नहीं कराया जा रहा है। इसके विपरीत, जिस स्थान पर नाले की कोई आवश्यकता नहीं है, वहां बेवजह नाला बनवाया जा रहा है, जो किसी काम का नहीं है। इन कथित अनियमितताओं के लिए प्रधान गौतम को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।1
- संतकबीरनगर जनपद में लगातार बढ़ती चोरी की घटनाओं के बीच, शहर के एक प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता आलोक श्रीवास्तव के बंद पड़े आवास पर चोरों ने धावा बोल दिया। इस वारदात में लाखों रुपये के आभूषण और नकदी चोरी कर ली गई, जिससे एक बार फिर कानून-व्यवस्था और रात्रिकालीन गश्त पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, आलोक श्रीवास्तव बीते 10 अप्रैल 2026 से अपने पिता के स्वास्थ्य उपचार के लिए नोएडा में रह रहे थे, जिसके चलते उनका घर बंद था। शनिवार देर रात पड़ोसियों ने घर में कुछ संदिग्ध गतिविधियां देखीं और आलोक श्रीवास्तव को इसकी सूचना दी। सूचना मिलने पर जब घर की स्थिति का जायजा लिया गया, तो चोरी की बड़ी घटना का खुलासा हुआ। आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि घर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में तीन संदिग्ध व्यक्ति रात करीब 11:30 बजे से 1:50 बजे के बीच घर की रेकी करते और चोरी की घटना को अंजाम देते साफ दिखाई दे रहे हैं। पीड़ित आलोक श्रीवास्तव के मुताबिक, चोरों ने सोने के आभूषणों में दो अंगूठियां, एक मंगलसूत्र, एक लॉकेट और एक नथिया सहित लगभग ₹2 लाख मूल्य के जेवरात उड़ा लिए। इसके अतिरिक्त, चांदी के आभूषणों में पाजेब, कमर करधनी, कई जोड़ी पायल, बच्चों के आभूषण और चांदी के सिक्के शामिल थे, जिनकी कुल कीमत करीब ₹3 लाख बताई गई है। चोरों ने घर में रखी ₹5 से ₹6 हजार की नकदी भी अपने साथ ले ली। घटना की खबर मिलते ही स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचित किया। सभासद प्रतिनिधि मुन्ना पांडे द्वारा पुलिस प्रशासन को मामले की जानकारी दिए जाने के बाद, एसओजी टीम और स्थानीय पुलिस बल मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपितों की पहचान और तलाश में जुटी हुई है। स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में लगातार बढ़ रही चोरी की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए पुलिस प्रशासन से रात्रि गश्त बढ़ाने और संवेदनशील इलाकों में निगरानी मजबूत करने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी वारदातों पर रोक लग सके। वहीं, पुलिस अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और जल्द ही चोरी का खुलासा कर आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।1
- उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह बताया गया है कि भाजपा की व्यवस्था हर जगह धराशायी हो रही है।1
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