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सहराज पंचायत में 15 वें वित्त योजना के तहत निमार्ण हो रहे उप स्वास्थ्य केंद्र का जिला परिषद अध्यक्ष एवं जिप सदस्य एवं मुखिया सभी ने संयुक्त रूप से नारियल फोड़कर किया शिलान्यास गोबिंदपुर अंचल सह प्रखंड क्षेत्र के सहराज पंचायत में पंचायत सचिवालय के समीप 15 वें वित्त योजना के तहत निमार्ण हो रहे उप स्वास्थ्य केंद्र का जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह, जिप सदस्य लक्ष्मी मुर्म एवं मुखिया सभी ने संयुक्त रूप से मिलकर विधिवत रूप से रविवार की दोपहर 1 बजे नारियल फोड़कर किया शिलान्यास. इस मौके पर जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह एवं जिला जिप सदस्य लक्ष्मी मुर्म ने मीडिया के समक्ष कहा कि हमारी शुरुआत से ही राज्य सरकार से मांग थी कि ग्रामीण क्षेत्रों में उपस्वास्थ्य केंद्र का निर्माण किया जाए क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सक उपस्थित नहीं रहने अथवा मरीज को सह समय इलाज नहीं मिलने पर उनकी जान भी चली जाती है. जिले के प्रत्येक पंचायतों में उपस्वास्थ्य केंद्र बनना चाहिए इससे ग्रामीणों को सह समय रहते दवाएं मिल सके. इसके लिए हमलोग राज्य सरकार से मांग करेंगे के प्रत्येक उप स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की

2 hrs ago
user_मो० फारुख (पत्रकार)
मो० फारुख (पत्रकार)
Newspaper publisher गोविंदपुर, धनबाद, झारखंड•
2 hrs ago

सहराज पंचायत में 15 वें वित्त योजना के तहत निमार्ण हो रहे उप स्वास्थ्य केंद्र का जिला परिषद अध्यक्ष एवं जिप सदस्य एवं मुखिया सभी ने संयुक्त रूप से नारियल फोड़कर किया शिलान्यास गोबिंदपुर अंचल सह प्रखंड क्षेत्र के सहराज पंचायत में पंचायत सचिवालय के समीप 15 वें वित्त योजना के तहत निमार्ण हो रहे उप स्वास्थ्य केंद्र का जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह, जिप सदस्य लक्ष्मी मुर्म एवं मुखिया सभी ने संयुक्त रूप से मिलकर विधिवत रूप से रविवार की दोपहर 1 बजे नारियल फोड़कर किया शिलान्यास. इस मौके पर जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह एवं जिला जिप सदस्य लक्ष्मी मुर्म ने मीडिया के समक्ष कहा कि हमारी शुरुआत से ही राज्य सरकार से मांग थी कि ग्रामीण क्षेत्रों में उपस्वास्थ्य केंद्र का निर्माण किया जाए क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सक उपस्थित नहीं रहने अथवा मरीज को सह समय इलाज नहीं मिलने पर उनकी जान भी चली जाती है. जिले के प्रत्येक पंचायतों में उपस्वास्थ्य केंद्र बनना चाहिए इससे ग्रामीणों को सह समय रहते दवाएं मिल सके. इसके लिए हमलोग राज्य सरकार से मांग करेंगे के प्रत्येक उप स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की

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  • गोबिंदपुर अंचल सह प्रखंड क्षेत्र के सहराज पंचायत में पंचायत सचिवालय के समीप 15 वें वित्त योजना के तहत निमार्ण हो रहे उप स्वास्थ्य केंद्र का जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह, जिप सदस्य लक्ष्मी मुर्म एवं मुखिया सभी ने संयुक्त रूप से मिलकर विधिवत रूप से रविवार की दोपहर 1 बजे नारियल फोड़कर किया शिलान्यास. इस मौके पर जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह एवं जिला जिप सदस्य लक्ष्मी मुर्म ने मीडिया के समक्ष कहा कि हमारी शुरुआत से ही राज्य सरकार से मांग थी कि ग्रामीण क्षेत्रों में उपस्वास्थ्य केंद्र का निर्माण किया जाए क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सक उपस्थित नहीं रहने अथवा मरीज को सह समय इलाज नहीं मिलने पर उनकी जान भी चली जाती है. जिले के प्रत्येक पंचायतों में उपस्वास्थ्य केंद्र बनना चाहिए इससे ग्रामीणों को सह समय रहते दवाएं मिल सके. इसके लिए हमलोग राज्य सरकार से मांग करेंगे के प्रत्येक उप स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की
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    गोबिंदपुर अंचल सह प्रखंड क्षेत्र के सहराज पंचायत में पंचायत सचिवालय के समीप 15 वें वित्त योजना के तहत निमार्ण हो रहे उप स्वास्थ्य केंद्र का जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह, जिप सदस्य लक्ष्मी मुर्म एवं मुखिया सभी ने संयुक्त रूप से मिलकर विधिवत रूप से रविवार की दोपहर 1 बजे नारियल फोड़कर किया शिलान्यास. इस मौके पर जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह एवं जिला जिप सदस्य लक्ष्मी मुर्म ने मीडिया के समक्ष कहा कि हमारी शुरुआत से ही राज्य सरकार से मांग थी कि ग्रामीण क्षेत्रों में उपस्वास्थ्य केंद्र का निर्माण किया जाए क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सक उपस्थित नहीं रहने अथवा मरीज को सह समय इलाज नहीं मिलने पर उनकी जान भी चली जाती है. जिले के प्रत्येक पंचायतों में उपस्वास्थ्य केंद्र बनना चाहिए इससे ग्रामीणों को सह समय रहते दवाएं मिल सके. इसके लिए हमलोग राज्य सरकार से मांग करेंगे के प्रत्येक उप स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की
    user_मो० फारुख (पत्रकार)
    मो० फारुख (पत्रकार)
    Newspaper publisher गोविंदपुर, धनबाद, झारखंड•
    2 hrs ago
  • रौशन रोही के बाउंसर ने चलाया गोली ! रौशन रोही सिंगर अरेस्टेड नालंदा न्यूज वाटरपार्क होली सेलिब्रेशन
    1
    रौशन रोही के बाउंसर ने चलाया गोली ! रौशन रोही सिंगर अरेस्टेड नालंदा न्यूज वाटरपार्क होली सेलिब्रेशन
    user_Neha Sinha
    Neha Sinha
    Photographer Dhanbad-Cum-Kenduadih-Cum-Jagata, Jharkhand•
    1 hr ago
  • धनबाद,,होली से पहले भूली ओपी अलर्ट, शांति और सौहार्द पर जोर,,वार्ड पार्षदों को भी दिया गया सम्मान। (छोटे खान,धनबाद)
    1
    धनबाद,,होली से पहले भूली ओपी अलर्ट, शांति और सौहार्द पर जोर,,वार्ड पार्षदों को भी दिया गया सम्मान।
(छोटे खान,धनबाद)
    user_News Today Jharkhand
    News Today Jharkhand
    Dhanbad-Cum-Kenduadih-Cum-Jagata, Jharkhand•
    1 hr ago
  • झरिया: वार्ड 36 में जीत का जश्न, सुमन देवी की ऐतिहासिक जीत, ढोल-नगाड़ों के साथ निकली भव्य विजय जुलूस
    1
    झरिया: वार्ड 36 में जीत का जश्न, सुमन देवी की ऐतिहासिक जीत, ढोल-नगाड़ों के साथ निकली भव्य विजय जुलूस
    user_Journalist - Roshan Gupta
    Journalist - Roshan Gupta
    पत्रकार Dhanbad-Cum-Kenduadih-Cum-Jagata, Jharkhand•
    6 hrs ago
  • Post by जनता न्यूज़ 24
    1
    Post by जनता न्यूज़ 24
    user_जनता न्यूज़ 24
    जनता न्यूज़ 24
    बाघमारा-कम-कटरास, धनबाद, झारखंड•
    8 hrs ago
  • बाघमारा. (रिपोर्ट प्रेम कुमार). झारखंड के अग्रणी नेता झारखंड आंदोलनकारी शेरे शिवा महतो का आज पुण्यतिथि है. शिव महतो एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे और अविभाजित बिहार के डुमरी विधानसभा क्षेत्र से तीन बार बिहार विधानसभा के सदस्य रहे। महतो 'झारखंड आंदोलन' के प्रमुख प्रतिभागियों में से एक थे, जिसने 1970 के दशक में बिहार राज्य को विभाजित करके झारखंड नामक एक अलग राज्य बनाने की मांग की थी। वे अपने निर्वाचन क्षेत्र में आदिवासियों के बीच शिक्षा के प्रसार के प्रयासों के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने 1980, 1985 और 1995 में डुमरी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। महतो झारखंड मुक्ति मोर्चा राजनीतिक दल के संस्थापक सदस्यों में से एक थे. शिवा महतो का जन्म 1914 में महाशिवरात्रि के शुभ दिन बोकारो जिले के दुगदा के पास सिजुआ बस्ती में हुआ था। महतो ने अपने जीवन के उत्तरार्ध में समाज सेवा में अपना जीवन व्यतीत किया और मुख्य रूप से आदिवासी समुदायों के गरीब बच्चों की शिक्षा के क्षेत्र में काम किया। वे गरीब बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करने हेतु गाँव-गाँव घूमते थे। उन्होंने ही 'पढ़ो और लड़ो' का नारा भी दिया था। 1962 में वे बिनोद बिहारी महतो से जुड़ गए, जो अविभाजित बिहार के आदिवासियों के लिए झारखंड के अलग राज्य की मांग से जुड़े प्रमुख नेता थे। वे जल्द ही बिनोद बिहारी महतो, शिबू सोरेन और ए. के. रॉय जैसे अन्य नेताओं के साथ झारखंड आंदोलन के स्तंभों में से एक बन गए। महतो ने साहूकारों द्वारा संचालित असंगठित ऋण बाजार के चंगुल से आदिवासियों को मुक्त कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके कारण अंततः एक आदिवासी परिवार बंधुआ मजदूरी में विलीन हो जाता था। राजनीति में उनका पहला कदम 1970 के दशक में आया, जब उन्होंने जेल से ही मुखिया पद के लिए चुनाव लड़ा और आसानी से जीत हासिल की। ​​इसके बाद वे डुमरी विधानसभा क्षेत्र से तीन बार बिहार विधानसभा के सदस्य चुने गए। महतो झारखंड की कोयला खदानों के माफियाओं के खिलाफ अपनी लड़ाई के लिए भी जाने जाते थे। वे अपने प्रभावशाली भाषणों और सिर पर हरी पगड़ी वाले पारंपरिक पहनावे के लिए प्रसिद्ध थे। महतो ने आदिवासी बहुल राज्य में शिक्षा के स्तर को सुधारने के उद्देश्य से झारखंड वाणिज्य महाविद्यालय की स्थापना का भी नेतृत्व किया। सिर पर हरी पगड़ी, गेहुएं रंग के चेहरे पर सफेद नुकीली मूंछें, गठीले शरीर पर सफेद धोती-कुर्ता, उसके ऊपर लदा एक पुराने स्टाइल का बंडी, पैरों में एक काला चमड़े का जूता, और हट्टे कट्टे मजबूत गठीले हाथों में एक टांगी – ये पहनावा, और ये विशेषण कहीं न कहीं किसी गांव में रहने वाले बुजुर्ग हरियाणवी के लिये शायद बिल्कुल सटीक लग रहे होंगे, लेकिन कुछ ऐसा ही पहनावा झारखंड के एक वरिष्ठ आंदोलनकारी नेता का भी हुआ करता था, जो आज इस दुनिया में नहीं हैं। वो नाम है दिवंगत शिवा महतो। वही शिवा महतो, जिनकी गिनती झारखंड आंदोलन के अग्रणियों के तौर पर होती है, जिन्होंने गुरुजी शिबू सोरेन की ही तरह सूदखोरों, महाजनों और माफियाओं के खिलाफ आवाज़ बुलंद किया, जिनके खोरठा भाषा में दिये जाने वाले जोशीले भाषणों से पूरा इलाका गूंज उठता था, जिन्हें ‘झारखंड का शेर’ कहकर संबोधित किया जाता था। आज दिग्गज नेता शिवा महतो की पुण्यतिथि है। 1 मार्च 2022 को डुमरी प्रखंड के घुटवाली स्थित पैतृक आवास में उन्होंने 108 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। डुमरी विधानसभा, जो आज भी पूर्व शिक्षा मंत्री स्व.जगन्नाथ महतो का गढ़ माना जाता है। दरअसल, कहा जाता है कि जगन्नाथ महतो ने राजनीति का ककहरा शिवा महतो से ही सीखा था, वह उनके राजनीतिक गुरु थे। जगन्नाथ महतो से पहले डुमरी का पूरा इलाका शिवा महतो का ही माना जाता था। शिवा महतो जब पहली बार डुमरी विधानसभा सीट से झामुमो उम्मीदवार बन कर चुनाव लड़े, तब जगरनाथ महतो उनका दाहिना हाथ बने। साल 1980 से लेकर 1999 के विधानसभा चुनाव के पहले तक जगरनाथ महतो शिवा महतो के ही साथ रहे। हालांकि, बाद में दोनों के रास्ते जुदा हो गये। झामुमो के संस्थापक सदस्य और झारखंड आंदोलन के जनक विनोद बिहारी महतो, कामरेड एके राय, गुरुजी शिबू सोरेन जैसे दिग्गज आंदोलकारियों की कतार में शिवा महतो का नाम लिया जाता है। हालांकि, शिवा महतो ने ही आगे चलकर गुरुजी शिबू सोरेन का मोर्चा खोल दिया था, 1990 के दशक में स्व. बिनोद बाबू के बेटे राजकिशोर महतो और कृष्णा मार्डी के नेतृत्व में नौ विधायकों ने झामुमो से अलग होकर मार्डी गुट का गठन कर लिया था। इन विधायकों में डुमरी विधायक शिवा महतो और मांडू विधायक टेकलाल महतो भी शामिल थे। मार्डी गुट की वजह से झारखंड में झामुमो को पहली बार कड़ी चुनौती मिल रही थी। शिवा महतो ने राजनीति में कभी भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। बताया जाता है कि जब कोयलांचल में सूदखोरों, माफियाओं और महाजनों के खिलाफ किसी की मुंह खोलने की हिम्मत नहीं होती थी, तब एकमात्र शिवा महतो ही थे, जो लगातार अपनी आवाज़ बुलंद करते रहे। बेरमो कोयलांचल में विस्थापितों के हक-अधिकार को लेकर विनोद बिहारी महतो के साथ लंबी लड़ाई भी लड़ी। शिवा महतो पर एक बार जानलेवा हमला भी हुआ। बताया जाता है कि एक बार शिवा महतो को मारकर घायल अवस्था में उन्हें फेंक दिया गया था। तब ग्रामीणों ने अस्पताल में भर्ती करवा कर उनकी जान बचायी। खास खोरठा भाषा में भाषण देने की शैली के कारण लोग इन्हें दूर-दूर से सुनने के लिए सभाओं में पहुंचते थे। डुमरी के लोगों को आज अगर उच्च शिक्षा का लाभ मिल पा रहा है, तो इसका सबसे बड़ा श्रेय दिवंगत शिवा महतो को ही जाता है। विधायक रहते शिवा महतो ने डुमरी में झारखंड कॉमर्स इंटर कॉलेज समेत 2 कॉलेज और कई विद्यालयों की स्थापना की। वह गांव-गांव घूम कर लोगों को जागरूक करते रहे और इलाके में शिक्षा का अलख जगाते रहे। गरीब के बच्चों को पढ़ो और लड़ो की सीख देते थे। उन्होंने शिक्षा, न्याय और हक की लड़ाई में अपनी पूरी जिंदगी समर्पित कर दी। आज भी डुमरी और पूरे झारखंड के लोग उनकी विरासत को याद करते हैं, और उनके दिखाये मार्ग पर चलने की प्रेरणा पाते हैं। शिवा महतो की बुलंद आवाज़ और उनके सिद्धांतों की गूंज आने वाली पीढ़ियों को हमेशा संघर्ष और सच्चाई का पाठ पढ़ाती रहेगी।
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    बाघमारा. (रिपोर्ट प्रेम कुमार). झारखंड के अग्रणी नेता झारखंड आंदोलनकारी शेरे शिवा महतो का आज पुण्यतिथि है. शिव महतो एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे और अविभाजित बिहार के डुमरी विधानसभा क्षेत्र से तीन बार बिहार विधानसभा के सदस्य रहे। महतो 'झारखंड आंदोलन' के प्रमुख प्रतिभागियों में से एक थे, जिसने 1970 के दशक में बिहार राज्य को विभाजित करके झारखंड नामक एक अलग राज्य बनाने की मांग की थी। वे अपने निर्वाचन क्षेत्र में आदिवासियों के बीच शिक्षा के प्रसार के प्रयासों के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने 1980, 1985 और 1995 में डुमरी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। महतो झारखंड मुक्ति मोर्चा राजनीतिक दल के संस्थापक सदस्यों में से एक थे. शिवा महतो का जन्म 1914 में महाशिवरात्रि के शुभ दिन बोकारो जिले के दुगदा के पास सिजुआ बस्ती में हुआ था। महतो ने अपने जीवन के उत्तरार्ध में समाज सेवा में अपना जीवन व्यतीत किया और मुख्य रूप से आदिवासी समुदायों के गरीब बच्चों की शिक्षा के क्षेत्र में काम किया। वे गरीब बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करने हेतु गाँव-गाँव घूमते थे। उन्होंने ही 'पढ़ो और लड़ो' का नारा भी दिया था। 1962 में वे बिनोद बिहारी महतो से जुड़ गए, जो अविभाजित बिहार के आदिवासियों के लिए झारखंड के अलग राज्य की मांग से जुड़े प्रमुख नेता थे। वे जल्द ही बिनोद बिहारी महतो, शिबू सोरेन और ए. के. रॉय जैसे अन्य नेताओं के साथ झारखंड आंदोलन के स्तंभों में से एक बन गए। महतो ने साहूकारों द्वारा संचालित असंगठित ऋण बाजार के चंगुल से आदिवासियों को मुक्त कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके कारण अंततः एक आदिवासी परिवार बंधुआ मजदूरी में विलीन हो जाता था।
राजनीति में उनका पहला कदम 1970 के दशक में आया, जब उन्होंने जेल से ही मुखिया पद के लिए चुनाव लड़ा और आसानी से जीत हासिल की। ​​इसके बाद वे डुमरी विधानसभा क्षेत्र से तीन बार बिहार विधानसभा के सदस्य चुने गए। महतो झारखंड की कोयला खदानों के माफियाओं के खिलाफ अपनी लड़ाई के लिए भी जाने जाते थे। वे अपने प्रभावशाली भाषणों और सिर पर हरी पगड़ी वाले पारंपरिक पहनावे के लिए प्रसिद्ध थे। महतो ने आदिवासी बहुल राज्य में शिक्षा के स्तर को सुधारने के उद्देश्य से झारखंड वाणिज्य महाविद्यालय की स्थापना का भी नेतृत्व किया।
सिर पर हरी पगड़ी, गेहुएं रंग के चेहरे पर सफेद नुकीली मूंछें, गठीले शरीर पर सफेद धोती-कुर्ता, उसके ऊपर लदा एक पुराने स्टाइल का बंडी, पैरों में एक काला चमड़े का जूता, और हट्टे कट्टे मजबूत गठीले हाथों में एक टांगी – ये पहनावा, और ये विशेषण कहीं न कहीं किसी गांव में रहने वाले बुजुर्ग हरियाणवी के लिये शायद बिल्कुल सटीक लग रहे होंगे, लेकिन कुछ ऐसा ही पहनावा झारखंड के एक वरिष्ठ आंदोलनकारी नेता का भी हुआ करता था, जो आज इस दुनिया में नहीं हैं। वो नाम है दिवंगत शिवा महतो। वही शिवा महतो, जिनकी गिनती झारखंड आंदोलन के अग्रणियों के तौर पर होती है, जिन्होंने गुरुजी शिबू सोरेन की ही तरह सूदखोरों, महाजनों और माफियाओं के खिलाफ आवाज़ बुलंद किया, जिनके खोरठा भाषा में दिये जाने वाले जोशीले भाषणों से पूरा इलाका गूंज उठता था, जिन्हें ‘झारखंड का शेर’ कहकर संबोधित किया जाता था।
आज दिग्गज नेता शिवा महतो की पुण्यतिथि है। 1 मार्च 2022 को डुमरी प्रखंड के घुटवाली स्थित पैतृक आवास में उन्होंने 108 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली।
डुमरी विधानसभा, जो आज भी पूर्व शिक्षा मंत्री स्व.जगन्नाथ महतो का गढ़ माना जाता है। दरअसल, कहा जाता है कि जगन्नाथ महतो ने राजनीति का ककहरा शिवा महतो से ही सीखा था, वह उनके राजनीतिक गुरु थे। जगन्नाथ महतो से पहले डुमरी का पूरा इलाका शिवा महतो का ही माना जाता था। शिवा महतो जब पहली बार डुमरी विधानसभा सीट से झामुमो उम्मीदवार बन कर चुनाव लड़े, तब जगरनाथ महतो उनका दाहिना हाथ बने। साल 1980 से लेकर 1999 के विधानसभा चुनाव के पहले तक जगरनाथ महतो शिवा महतो के ही साथ रहे। हालांकि, बाद में दोनों के रास्ते जुदा हो गये।
झामुमो के संस्थापक सदस्य और झारखंड आंदोलन के जनक विनोद बिहारी महतो, कामरेड एके राय, गुरुजी शिबू सोरेन जैसे दिग्गज आंदोलकारियों की कतार में शिवा महतो का नाम लिया जाता है। हालांकि, शिवा महतो ने ही आगे चलकर गुरुजी शिबू सोरेन का मोर्चा खोल दिया था, 1990 के दशक में स्व. बिनोद बाबू के बेटे राजकिशोर महतो और कृष्णा मार्डी के नेतृत्व में नौ विधायकों ने झामुमो से अलग होकर मार्डी गुट का गठन कर लिया था। इन विधायकों में डुमरी विधायक शिवा महतो और मांडू विधायक टेकलाल महतो भी शामिल थे। मार्डी गुट की वजह से झारखंड में झामुमो को पहली बार कड़ी चुनौती मिल रही थी। शिवा महतो ने राजनीति में कभी भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।
बताया जाता है कि जब कोयलांचल में सूदखोरों, माफियाओं और महाजनों के खिलाफ किसी की मुंह खोलने की हिम्मत नहीं होती थी, तब एकमात्र शिवा महतो ही थे, जो लगातार अपनी आवाज़ बुलंद करते रहे। बेरमो कोयलांचल में विस्थापितों के हक-अधिकार को लेकर विनोद बिहारी महतो के साथ लंबी लड़ाई भी लड़ी। शिवा महतो पर एक बार जानलेवा हमला भी हुआ। बताया जाता है कि एक बार शिवा महतो को मारकर घायल अवस्था में उन्हें फेंक दिया गया था। तब ग्रामीणों ने अस्पताल में भर्ती करवा कर उनकी जान बचायी। खास खोरठा भाषा में भाषण देने की शैली के कारण लोग इन्हें दूर-दूर से सुनने के लिए सभाओं में पहुंचते थे।
डुमरी के लोगों को आज अगर उच्च शिक्षा का लाभ मिल पा रहा है, तो इसका सबसे बड़ा श्रेय दिवंगत शिवा महतो को ही जाता है। विधायक रहते शिवा महतो ने डुमरी में झारखंड कॉमर्स इंटर कॉलेज समेत 2 कॉलेज और कई विद्यालयों की स्थापना की। वह गांव-गांव घूम कर लोगों को जागरूक करते रहे और इलाके में शिक्षा का अलख जगाते रहे। गरीब के बच्चों को पढ़ो और लड़ो की सीख देते थे। उन्होंने शिक्षा, न्याय और हक की लड़ाई में अपनी पूरी जिंदगी समर्पित कर दी। आज भी डुमरी और पूरे झारखंड के लोग उनकी विरासत को याद करते हैं, और उनके दिखाये मार्ग पर चलने की प्रेरणा पाते हैं। शिवा महतो की बुलंद आवाज़ और उनके सिद्धांतों की गूंज आने वाली पीढ़ियों को हमेशा संघर्ष और सच्चाई का पाठ पढ़ाती रहेगी।
    user_प्रेम कुमार साव
    प्रेम कुमार साव
    Local News Reporter बाघमारा-कम-कटरास, धनबाद, झारखंड•
    10 hrs ago
  • Post by PRESS R K PRESS R K
    1
    Post by PRESS R K PRESS R K
    user_PRESS R K PRESS R K
    PRESS R K PRESS R K
    पत्रकार Karma Tanr Vidyasagar*, Jamtara•
    17 hrs ago
  • धनबाद,,वार्ड 32 की नई पार्षद रश्मि राज का जोरदार स्वागत, विजय जुलूस में दिखा उत्साह,,डीजे,और गुलाल पर जीत का शानदार जश्न। (छोटे खान,धनबाद)
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    धनबाद,,वार्ड 32 की नई पार्षद रश्मि राज का जोरदार स्वागत, विजय जुलूस में दिखा उत्साह,,डीजे,और गुलाल पर जीत का शानदार जश्न।
(छोटे खान,धनबाद)
    user_News Today Jharkhand
    News Today Jharkhand
    Dhanbad-Cum-Kenduadih-Cum-Jagata, Jharkhand•
    4 hrs ago
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