सतना जिले के बिरहुली में निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज के काम में चार साल की अत्यधिक देरी से नाराज़ क्षेत्रवासियों ने आज, 1 जून 2026 को, 'रेल रोको' आंदोलन किया। सतना को कोटर, बिरसिंहपुर और सेमरिया से जोड़ने वाले इस अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग पर पुल का काम लंबे समय से अधूरा पड़ा है, जिससे प्रतिदिन लाखों लोगों को आवागमन में भारी परेशानी, दुर्घटनाओं और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। जनता का आरोप है कि अधूरे ब्रिज और जर्जर डायवर्शन रोड के बावजूद निर्माण एजेंसियां और संबंधित विभाग वर्षों से लगातार लापरवाही बरत रहे हैं। समाजसेवी राजेश दुबे जी के नेतृत्व में सुबह 11 बजे बिरहुली रेलवे फाटक पर हुए इस एक दिवसीय आंदोलन में विभिन्न ग्राम पंचायतों के सरपंचों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित आसपास के सैकड़ों गांवों से भारी संख्या में आक्रोशित ग्रामीण और आम नागरिक शामिल हुए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, सतना जिले के तीनों थानों की पुलिस, रेलवे पुलिस, सिटी अनुविभागीय अधिकारी सतना और सीएसपी सतना भारी पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद रहे। आंदोलन के दौरान, रेलवे और ब्रिज निर्माण से जुड़े अधिकारियों ने जनता और आंदोलनकारियों को आश्वासन दिया कि 31 जुलाई तक ब्रिज निर्माण कार्य पूर्ण कर दिया जाएगा और डायवर्शन रोड को भी दुरुस्त किया जाएगा। काफी विचार-विमर्श और सकारात्मक चर्चा के बाद, प्रशासन ने आंदोलनकारियों को लिखित में आश्वासन दिया कि बिरहुली रेलवे ओवरब्रिज का शेष कार्य युद्धस्तर पर पूरा कर 31 जुलाई 2026 तक आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। इस लिखित सहमति के बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया। हालांकि, समाजसेवी राजेश दुबे ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 31 जुलाई तक पुल का निर्माण पूरा नहीं हुआ, तो क्षेत्र की जनता के साथ मिलकर इससे भी बड़ा और उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और निर्माण एजेंसियों की होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीति के लिए नहीं, बल्कि क्षेत्र की जनता के अधिकार, सुरक्षा और सम्मान के लिए किया गया है। जनता ने एक स्वर में कहा कि अब क्षेत्र की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन के लिखित वादे के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है और अब सभी की निगाहें 31 जुलाई की तारीख पर टिकी हैं, इस उम्मीद के साथ कि प्रशासन इस बार अपने वादे पर खरा उतरेगा और तय समय सीमा के भीतर पुल का निर्माण कार्य पूरा कर उसे जनता को सौंप देगा। रेलवे प्रशासन की ओर से कमांडेंट रेल सुरक्षा बल, एस.डी.एम. राहुल सिलडिया और नगर पुलिस अधीक्षक डी.पी. सिंह चौहान की मध्यस्थता में यह लिखित समझौता संपन्न हुआ। इस दौरान थाना प्रभारी सुदीप सोनी, सिविल लाइन थाना प्रभारी योगेंद्र सिंह, आर.पी.एफ. पोस्ट सतना प्रभारी वीरेंद्र यादव, जी.आर.पी. चौकी प्रभारी राजेश राज सहित प्रशासनिक अमले और भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा। आंदोलन में रामबहादुर सिंह, हरिशंकर तिवारी, सगमनिया सरपंच, पवन पांडे, कुलभूषण पाण्डेय, राजकरण पाण्डेय, देवेंद्र पाण्डेय, वेद प्रकाश पाण्डेय, विनीत शुक्ला, अर्जुन सिंह, साधु पयासी, पुष्पराज मिश्रा, अनुज चतुर्वेदी, उमेश पयशी, अनुज मालवीय, किसन तिवारी, भाईयन तिवारी, मुकेश शुक्ला और सत्यनारायण त्रिपाठी भी उपस्थित थे।
सतना जिले के बिरहुली में निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज के काम में चार साल की अत्यधिक देरी से नाराज़ क्षेत्रवासियों ने आज, 1 जून 2026 को, 'रेल रोको' आंदोलन किया। सतना को कोटर, बिरसिंहपुर और सेमरिया से जोड़ने वाले इस अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग पर पुल का काम लंबे समय से अधूरा पड़ा है, जिससे प्रतिदिन लाखों लोगों को आवागमन में भारी परेशानी, दुर्घटनाओं और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। जनता का आरोप है कि अधूरे ब्रिज और जर्जर डायवर्शन रोड के बावजूद निर्माण एजेंसियां और संबंधित विभाग वर्षों से लगातार लापरवाही बरत रहे हैं। समाजसेवी राजेश दुबे जी के नेतृत्व में सुबह 11 बजे बिरहुली रेलवे फाटक पर हुए इस एक दिवसीय आंदोलन में विभिन्न ग्राम पंचायतों के सरपंचों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित आसपास के सैकड़ों गांवों से भारी संख्या में आक्रोशित ग्रामीण और आम नागरिक शामिल हुए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, सतना जिले के तीनों थानों की पुलिस, रेलवे पुलिस, सिटी अनुविभागीय अधिकारी सतना और सीएसपी सतना भारी पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद रहे। आंदोलन के दौरान, रेलवे और ब्रिज निर्माण से जुड़े अधिकारियों ने जनता और आंदोलनकारियों को आश्वासन दिया कि 31 जुलाई तक ब्रिज निर्माण कार्य पूर्ण कर दिया जाएगा और डायवर्शन रोड को भी दुरुस्त किया जाएगा। काफी विचार-विमर्श और सकारात्मक चर्चा के बाद, प्रशासन ने आंदोलनकारियों को लिखित में आश्वासन दिया कि बिरहुली रेलवे ओवरब्रिज का शेष कार्य युद्धस्तर पर पूरा कर 31 जुलाई 2026 तक आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। इस लिखित सहमति के बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया। हालांकि, समाजसेवी राजेश दुबे ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 31 जुलाई तक पुल का निर्माण पूरा नहीं हुआ, तो क्षेत्र की जनता के साथ मिलकर इससे भी बड़ा और उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और निर्माण एजेंसियों की होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीति के लिए नहीं, बल्कि क्षेत्र की जनता के अधिकार, सुरक्षा और सम्मान के लिए किया गया है। जनता ने एक स्वर में कहा कि अब क्षेत्र की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन के लिखित वादे के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है और अब सभी की निगाहें 31 जुलाई की तारीख पर टिकी हैं, इस उम्मीद के साथ कि प्रशासन इस बार अपने वादे पर खरा उतरेगा और तय समय सीमा के भीतर पुल का निर्माण कार्य पूरा कर उसे जनता को सौंप देगा। रेलवे प्रशासन की ओर से कमांडेंट रेल सुरक्षा बल, एस.डी.एम. राहुल सिलडिया और नगर पुलिस अधीक्षक डी.पी. सिंह चौहान की मध्यस्थता में यह लिखित समझौता संपन्न हुआ। इस दौरान थाना प्रभारी सुदीप सोनी, सिविल लाइन थाना प्रभारी योगेंद्र सिंह, आर.पी.एफ. पोस्ट सतना प्रभारी वीरेंद्र यादव, जी.आर.पी. चौकी प्रभारी राजेश राज सहित प्रशासनिक अमले और भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा। आंदोलन में रामबहादुर सिंह, हरिशंकर तिवारी, सगमनिया सरपंच, पवन पांडे, कुलभूषण पाण्डेय, राजकरण पाण्डेय, देवेंद्र पाण्डेय, वेद प्रकाश पाण्डेय, विनीत शुक्ला, अर्जुन सिंह, साधु पयासी, पुष्पराज मिश्रा, अनुज चतुर्वेदी, उमेश पयशी, अनुज मालवीय, किसन तिवारी, भाईयन तिवारी, मुकेश शुक्ला और सत्यनारायण त्रिपाठी भी उपस्थित थे।
- चित्रकूट जिले के रैपुरा थाना क्षेत्र में एक 12 वर्षीय बालक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद सोमवार शाम परिजनों ने जमकर हंगामा किया। रामनगर निवासी अंकुर विश्वकर्मा नामक यह बालक रविवार दोपहर करीब 12 बजे घर से निकला था, जिसके बाद वह वापस नहीं लौटा। शाम करीब 7 बजे रामनगर के पास एक पंप कैनाल के निकट उसका शव मिलने से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। परिजनों ने अंकुर की हत्या का आरोप लगाया है और गोलू निषाद पुत्र पप्पू निषाद नामक व्यक्ति को दोषी ठहराया है। उनका कहना है कि आरोपी कथित तौर पर नशे की हालत में था और उसने बालक के साथ मारपीट की थी। परिजनों ने घटना की सूचना तत्काल डायल-112 पर दी थी। घायल अवस्था में बालक को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामनगर ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बालक की मौत की खबर फैलते ही परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित परिजनों ने झांसी-मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर दिया और कार्रवाई की मांग की, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और करीब आधे घंटे से अधिक समय तक आवागमन बाधित रहा। सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह स्वयं घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों से बातचीत की और उन्हें निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया। एसपी ने बताया कि पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मौके पर रैपुरा थाना प्रभारी राम सिंह सहित भारी पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और क्षेत्र में व्याप्त तनाव को देखते हुए सतर्कता बरती जा रही है।4
- Post by Prakash Pathak Satna1
- चंदई ग्राम के नंद गांव में स्थित काली मंदिर की जमीन पर चल रहे विकास कार्य में ग्रामीणों द्वारा लगातार हस्तक्षेप किया जा रहा है। गांव वाले मंदिर के निर्माण में बाधा डाल रहे हैं और मंदिर न बने, इसके लिए आपस में विचार-विमर्श कर रहे हैं। इस मुद्दे पर ग्रामीणों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है, जिसके कारण गांव के सरपंच और उप-सरपंच दोनों को स्थिति संभालने और मामले को सुलझाने के लिए आगे आना पड़ा है।2
- एक चचेरी बहन द्वारा अपने घर आए भाई को भगाना उसके बड़े पापा की मौत का कारण बन गया। बहन की इस हरकत के कारण उसके बड़े पापा का निधन हो गया, जिससे यह घटना एक दुखद परिणाम में बदल गई।2
- देशभर में सनातन धर्म की अलख जगाने के लिए प्रसिद्ध बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 14 वर्षीय अजय पार बाबा से मुलाकात की। यह मिलन उस समय हुआ जब बागेश्वर धाम सरकार अपनी एक माह की तपस्या पूर्ण कर धाम वापस लौट रहे थे। यह महत्वपूर्ण मुलाकात मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में कैंडी गांव के बाहर हुई। इस अवसर पर अजय पार बाबा के पुजारी करन कुशवाहा भी मौजूद थे। यह दोनों चर्चित बाबा देश में सनातन धर्म के प्रचार और उसकी अलख जगाने में सक्रिय रूप से संलग्न हैं।1
- नरैनी विधानसभा मुख्य चौराहा से करताल रोड मार्ग पर भीषण जाम की समस्या से लोग जूझ रहे हैं। इस जाम के कारण आवाजाही पूरी तरह से बाधित हो रही है, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यह भीषण जाम मुख्य रूप से बड़े वाहनों, जैसे ट्रक और बसों के आवागमन के कारण लगता है। समस्या के समाधान के लिए 'नो एंट्री' लागू करने का सुझाव दिया गया है। जिम्मेदार अधिकारियों, चाहे वे नगर पंचायत नरैनी के हों या ट्रैफिक पुलिस के, से गुजारिश की गई है कि वे इस गंभीर समस्या का तुरंत समाधान करें।1
- सतना शहर की सिटी कोतवाली में आधी रात उस वक्त हंगामा मच गया जब दो पुलिसकर्मियों के बीच एक मामूली विवाद अचानक गाली-गलौज और धक्का-मुक्की में बदल गया। वर्दी में तैनात जवान एक-दूसरे पर ही भड़क उठे, जिससे थाना परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बताया जा रहा है कि यह विवाद किसी छोटी बात को लेकर शुरू हुआ था, लेकिन देखते ही देखते मामला काफी बढ़ गया। घटना का वीडियो और तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं, जिसने पुलिस विभाग की कार्यशैली और अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कानून-व्यवस्था संभालने वाली पुलिस का इस तरह आपस में भिड़ना विभाग की छवि को भी प्रभावित कर रहा है। फिलहाल, इस पूरे मामले को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से जांच की संभावना जताई जा रही है।1