: क्या बदलेगी गौरांगो कॉलोनी की तस्वीर? चुनावी वादों के बीच मौत को दावत देती जर्जर सीढ़ियां! 18/02/2026 फुसरो (बोकारो): नगर परिषद चुनाव 2026 की आहट के साथ ही फुसरो की गलियों में चुनावी चर्चाएं तो तेज हैं, लेकिन स्टेशन रोड स्थित गौरांगो कॉलोनी के निवासियों के लिए असल चुनौती आज भी अपनी जान बचाकर घर तक पहुँचना है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक तस्वीर ने यहाँ के विकास कार्यों की पोल खोल दी है। यह तस्वीर प्रहलाद बाउरी और बादल बाउरी के आवास की ओर जाने वाली सीढ़ियों की है, जो किसी भी वक्त ढह सकती हैं। क्यों गंभीर है यह मुद्दा? हवा में लटकी सीढ़ी: तस्वीर में स्पष्ट दिख रहा है कि सीढ़ी के नीचे का आधार पूरी तरह खत्म हो चुका है। रोजाना का जोखिम: स्कूल जाने वाले बच्चे और महिलाओं को हर दिन इन्हीं जर्जर सीढ़ियों से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। चुनावी उपेक्षा: कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि नेता वोट माँगने तो आते हैं, लेकिन सालों से इस खतरनाक स्थिति को सुधारने की सुध किसी ने नहीं ली। जनता की हुंकार: "हमें झूठे वादे नहीं, सुरक्षा चाहिए" चुनाव की गहमागहमी के बीच गौरांगो कॉलोनी के लोगों का एक ही सवाल है— क्या इस बार नगर परिषद की नई सरकार उनकी इस समस्या का समाधान करेगी? क्या चुनाव के बाद इन जर्जर सीढ़ियों का पुनरुद्धार होगा या फिर प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है?शहर में चुनाव की गहमागहमी है, नेता जी बड़े-बड़े वादे कर रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि: क्या इन जर्जर सीढ़ियों की सूरत बदलेगी? क्या कॉलोनी के गरीबों की सुरक्षा किसी के एजेंडे में है? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है?
: क्या बदलेगी गौरांगो कॉलोनी की तस्वीर? चुनावी वादों के बीच मौत को दावत देती जर्जर सीढ़ियां! 18/02/2026 फुसरो (बोकारो): नगर परिषद चुनाव 2026 की आहट के साथ ही फुसरो की गलियों में चुनावी चर्चाएं तो तेज हैं, लेकिन स्टेशन रोड स्थित गौरांगो कॉलोनी के निवासियों के लिए असल चुनौती आज भी अपनी जान बचाकर घर तक पहुँचना है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक तस्वीर ने यहाँ के विकास कार्यों की पोल खोल दी है। यह तस्वीर प्रहलाद बाउरी और बादल बाउरी के आवास की ओर जाने वाली सीढ़ियों की है, जो किसी भी वक्त ढह सकती हैं। क्यों गंभीर है यह मुद्दा? हवा में लटकी सीढ़ी: तस्वीर में स्पष्ट दिख रहा है कि सीढ़ी के नीचे का आधार पूरी तरह खत्म हो चुका है। रोजाना का जोखिम: स्कूल जाने वाले बच्चे और महिलाओं को हर दिन इन्हीं जर्जर सीढ़ियों से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। चुनावी उपेक्षा: कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि नेता वोट माँगने तो आते हैं, लेकिन सालों से इस खतरनाक स्थिति को सुधारने की सुध किसी ने नहीं ली। जनता की हुंकार: "हमें झूठे वादे नहीं, सुरक्षा चाहिए" चुनाव की गहमागहमी के बीच गौरांगो कॉलोनी के लोगों का एक ही सवाल है— क्या इस बार नगर परिषद की नई सरकार उनकी इस समस्या का समाधान करेगी? क्या चुनाव के बाद इन जर्जर सीढ़ियों का पुनरुद्धार होगा या फिर प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है?शहर में चुनाव की गहमागहमी है, नेता जी बड़े-बड़े वादे कर रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि: क्या इन जर्जर सीढ़ियों की सूरत बदलेगी? क्या कॉलोनी के गरीबों की सुरक्षा किसी के एजेंडे में है? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है?
- हक और हुकूक की लड़ाई: मानकी-मुंडा व्यवस्था को अक्षुण्ण रखने का संकल्प, कोल्हान रक्षा संघ ने फूंका आंदोलन का शंखनाद। जगन्नाथपुर (पश्चिमी सिंहभूम): झारखंड के कोल्हान क्षेत्र की ऐतिहासिक स्वायत्तता और पारंपरिक स्वशासन प्रणाली को बचाने की मांग अब तेज़ हो गई है। जगन्नाथपुर प्रखंड अंतर्गत कोल्हान रक्षा संघ के बैनर तले आयोजित एक विशाल रैली ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। सैकड़ों की संख्या में जुटे ग्रामीणों और आदिवासियों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत और विल्किंसन रूल (1837) को पूर्णतः लागू करने की मांग को लेकर बुलंद आवाज़ उठाई। ऐतिहासिक पहचान पर आर-पार की जंग हाथों में बैनर और जुबां पर 'कोल्हान एकता जिंदाबाद' के नारों के साथ प्रदर्शनकारियों ने साफ किया कि वे अपनी पारंपरिक प्रशासनिक व्यवस्था से कोई समझौता नहीं करेंगे। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि 1833 में थॉमस विल्किंसन द्वारा बनाए गए 31 नियम आज भी कोल्हान की विशेष पहचान का आधार हैं, जिन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। प्रमुख मांगें और चिंताएं: मानकी-मुंडा की शक्ति: ग्रामीणों ने मांग की कि वंशानुगत मानकी-मुंडा शासन प्रणाली को और अधिक संवैधानिक मजबूती दी जाए ताकि वे न्यायिक और प्रशासनिक निर्णय स्वतंत्र रूप से ले सकें। सरकारी हस्तक्षेप का विरोध: आंदोलनकारियों का कहना है कि स्थानीय शासन में बाहरी हस्तक्षेप उनकी सदियों पुरानी व्यवस्था को कमजोर कर रहा है। अस्तित्व की रक्षा: वक्ताओं ने कहा कि यह केवल नियमों की लड़ाई नहीं, बल्कि कोल्हान के अस्तित्व और जल-जंगल-जमीन की रक्षा का महासंग्राम है। प्रशासन की बढ़ी धड़कनें क्षेत्र में बढ़ती हलचल को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर है। जानकारों का कहना है कि यदि जगन्नाथपुर और आसपास के क्षेत्रों में उठी इस मांग का समय रहते संवाद के जरिए समाधान नहीं निकाला गया, तो कोल्हान में एक बड़ा जनांदोलन खड़ा होना तय है। बड़ी बात: "कोल्हान की धरती पर अब अपनी परंपराओं को बचाने की जिद ने एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है।"2
- Post by NUNU RAM MAHATO1
- शुरू ऐप न्यूज़ चैनल मैं आपका स्वागत है, मैं रवि गुप्ता प्रेस रिपोर्टर आप देख सकते हैं ,कि नगर पंचायत अध्यक्ष पद के प्रत्याशी शन्द कुमार आचार्य (टूलू) नाना , अपने समर्थकों के साथ प्रचार प्रसार पर निकले हैं उनके समर्थक गर्म जोशी से उनके प्रचार पर लगे हुए हैं, जिनमें महिलाएं -पुरुष प्रचार कर रहे हैं। उनका चुनाव चिन्ह बेंच 🛋️ छाप है, क्रमांक संख्या - 5 है।1
- Post by Shashi kant choursiya1
- झारखंड जुगसलाई में तेज रफ्तार का कहर — टाटा ऐस को मारी टक्कर, डिवाइडर पर चढ़ी गाड़ी, लगा जाम मंगलवार दोपहर जमशेदपुर के जुगसलाई थाना क्षेत्र स्थित टाटा पिगमेंट गेट के पास तेज रफ्तार 407 ट्रक ने टाटा ऐस (मिनी ट्रक) को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि वाहन अनियंत्रित होकर सड़क के डिवाइडर पर चढ़ गया, जिससे कुछ देर के लिए सड़क पर लंबा जाम लग गया। हादसे में चालक परीक्षित दास को हल्की चोटें आईं। उन्होंने बताया कि वे टाटा स्टील यूआईएसएल में कार्यरत हैं और बिष्टुपुर से जुगसलाई की ओर जा रहे थे, तभी पीछे से तेज रफ्तार ट्रक ने टक्कर मार दी।1
- जमशेदपुर के बरनमाइंस इलाके में उस वक्त सनसनी फैल गई जब अचानक चाकूबाजी की घटना सामने आई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग दहशत में आ गए। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को काबू में लिया। घायल को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और हमलावर की तलाश जारी है। बरनमाइंस की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।1
- राउरकेला (ओड़िशा): वन्यजीव संरक्षण को लेकर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत आज Rourkela पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जंगली जानवरों का शिकार कर मांस का अवैध व्यापार करने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि शहर और आसपास के क्षेत्रों में जंगली जानवरों को मारकर उनका मांस ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। सूचना के आधार पर छापेमारी की गई, जहां से भारी मात्रा में जंगली मांस, काटने के उपकरण और अन्य संदिग्ध सामग्री बरामद की गई। कार्रवाई के दौरान कई आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह लंबे समय से जंगल क्षेत्रों में जंगली सूअर (बारह सुकर) समेत अन्य वन्यजीवों का शिकार कर मांस की आपूर्ति कर रहा था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ Wildlife Protection Act 1972 के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है। साथ ही वन विभाग की टीम भी मामले की विस्तृत जांच में जुट गई है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों के अवैध शिकार और व्यापार के खिलाफ आगे भी सख्त अभियान जारी रहेगा और इसमें संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। स्थानीय लोगों ने पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि इससे अवैध शिकार पर रोक लगाने में मदद मिलेगी और जंगलों की जैव विविधता सुरक्षित रहेगी।1
- नगर पंचायत चुनाव अध्यक्ष पद के प्रत्याशी सुमित कुमार चौधरी प्रचार प्रसार में भारतीय जनता पार्टी के लोग उनके समर्थन में एक सभा का आयोजन पाठागार में हुआ1