*हज़ारीबाग़ विधायक प्रदीप प्रसाद ने सदन में पंचायती राज जनप्रतिनिधियों के मानदेय वृद्धि का मुद्दा प्रमुखता से उठाया* *स्थानीय स्वशासन को सशक्त करने के लिए मानदेय की समुचित समीक्षा और वृद्धि की मांग* झारखंड विधानसभा के सत्र के दौरान हज़ारीबाग़ विधायक प्रदीप प्रसाद ने पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के मानदेय वृद्धि का महत्वपूर्ण मुद्दा सदन के पटल पर प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत के मुखिया, पंचायत समिति सदस्य प्रमुख एवं जिला परिषद सदस्य लोकतंत्र की जमीनी आधारशिला हैं। ये जनप्रतिनिधि सीमित संसाधनों के बावजूद गांव-गांव में सरकार की योजनाओं को लागू कराने, विकास कार्यों की निगरानी करने तथा आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर सक्रिय रहते हैं। अभी वर्तमान में प्रति माह जिला परिषद अध्यक्ष का वेतन मात्र 12000 रुपये, जिप उपाध्यक्ष का वेतन मात्र 10,000 रुपये, पंचायत समिति प्रमुख का वेतन मात्र 8,000 रुपये, उप प्रमुख का वेतन मात्र 4,000 रुपये, मुखिया का वेतन मात्र 2500 रुपये, और उप मुखिया का वेतन मात्र 1200 रुपये हैं। विधायक प्रदीप प्रसाद ने अपने वक्तव्य में कहा कि इतने महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन करने के बावजूद पंचायती राज जनप्रतिनिधियों को इतना कम वेतन मिलता है और तक मानदेय में अपेक्षित वृद्धि नहीं की गई है। यह केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि उनके सम्मान, मनोबल और कार्यक्षमता से जुड़ा विषय है। पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधि लोकतंत्र की मजबूत कड़ी हैं। सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में उनका मानदेय समयानुकूल बढ़ाया जाना आवश्यक है। मैं सरकार से आग्रह करता हूँ कि मानदेय की समुचित समीक्षा कर यथोचित वृद्धि सुनिश्चित की जाए, ताकि स्थानीय स्वशासन व्यवस्था और अधिक सशक्त एवं प्रभावी बन सके। विधायक ने सरकार से इस दिशा में शीघ्र सकारात्मक पहल करने की मांग की है, ताकि जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे जनप्रतिनिधियों को उचित सम्मान और सहयोग मिल सके।
*हज़ारीबाग़ विधायक प्रदीप प्रसाद ने सदन में पंचायती राज जनप्रतिनिधियों के मानदेय वृद्धि का मुद्दा प्रमुखता से उठाया* *स्थानीय स्वशासन को सशक्त करने के लिए मानदेय की समुचित समीक्षा और वृद्धि की मांग* झारखंड विधानसभा के सत्र के दौरान हज़ारीबाग़ विधायक प्रदीप प्रसाद ने पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के मानदेय वृद्धि का महत्वपूर्ण मुद्दा सदन के पटल पर प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत के मुखिया, पंचायत समिति सदस्य प्रमुख एवं जिला परिषद सदस्य लोकतंत्र की जमीनी आधारशिला हैं। ये जनप्रतिनिधि सीमित संसाधनों के बावजूद गांव-गांव में सरकार की योजनाओं को लागू कराने, विकास कार्यों की निगरानी करने तथा आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर सक्रिय रहते हैं। अभी वर्तमान में प्रति माह जिला परिषद अध्यक्ष का वेतन मात्र 12000 रुपये, जिप उपाध्यक्ष का वेतन मात्र 10,000 रुपये, पंचायत समिति प्रमुख का वेतन मात्र 8,000 रुपये, उप प्रमुख का वेतन मात्र 4,000 रुपये, मुखिया का वेतन मात्र 2500 रुपये, और उप मुखिया का वेतन मात्र 1200 रुपये हैं। विधायक प्रदीप प्रसाद ने अपने वक्तव्य में कहा कि इतने महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन करने के बावजूद पंचायती राज जनप्रतिनिधियों को इतना कम वेतन मिलता है और तक मानदेय में अपेक्षित वृद्धि नहीं की गई है। यह केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि उनके सम्मान, मनोबल और कार्यक्षमता से जुड़ा विषय है। पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधि लोकतंत्र की मजबूत कड़ी हैं। सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में उनका मानदेय समयानुकूल बढ़ाया जाना आवश्यक है। मैं सरकार से आग्रह करता हूँ कि मानदेय की समुचित समीक्षा कर यथोचित वृद्धि सुनिश्चित की जाए, ताकि स्थानीय स्वशासन व्यवस्था और अधिक सशक्त एवं प्रभावी बन सके। विधायक ने सरकार से इस दिशा में शीघ्र सकारात्मक पहल करने की मांग की है, ताकि जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे जनप्रतिनिधियों को उचित सम्मान और सहयोग मिल सके।
- -- चुनावी नतीजों के बाद वार्ड क्षेत्र में समर्थकों के बीच उत्साह का माहौल __ यह जीत वार्ड की जनता की जीत है: निकहत यासमीन __ हजारीबाग। हजारीबाग नगर निकाय चुनाव 2026 में वार्ड नंबर 02 से युवा प्रत्याशी निकहत यासमीन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की। जनता के आशीर्वाद और भरोसे के बल पर उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी फिरोज आलम को 65 मतों से पराजित किया। चुनाव परिणाम के अनुसार निकहत यासमीन को कुल 834 मत प्राप्त हुए। वहीं उनके प्रतिद्वंदी को कड़ी टक्कर के बावजूद हार का सामना करना पड़ा। उल्लेखनीय है कि पिछली बार के चुनाव में फिरोज खलीफा वार्ड नंबर 01 से विजयी घोषित हुए थे, लेकिन इस बार मतदाताओं ने विकास के नए विजन और युवा नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए बदलाव का संदेश दिया। चुनावी नतीजों के बाद वार्ड क्षेत्र में समर्थकों के बीच उत्साह का माहौल देखा गया। ढोल-नगाड़ों और पटाखों के बीच समर्थकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जीत का जश्न मनाया। विजय के बाद निकहत यासमीन ने कहा कि यह जीत वार्ड की जनता की जीत है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वार्ड नंबर 02 में बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने, स्वच्छता, पेयजल, सड़क और नाली जैसी मूलभूत समस्याओं के समाधान के लिए प्राथमिकता के साथ कार्य किया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव परिणाम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मतदाता अब विकास, पारदर्शिता और सक्रिय जनसंपर्क को प्राथमिकता दे रहे हैं। वार्ड नंबर 02 का यह जनादेश नगर निकाय की राजनीति में एक नया संदेश और नई दिशा तय करता नजर आ रहा है।1
- *हजारीबाग विधायक प्रदीप प्रसाद ने सदन में क्षेत्र की जर्जर सड़कों व पुल-पुलियों का मुद्दा उठाया* *ग्रामीण विकास मंत्री ने 15 किलोमीटर सड़क व 10 करोड़ रुपये का पुल निर्माण हेतु प्राथमिकता से कार्य कराने का दिया आश्वासन* झारखंड विधानसभा के सत्र के दौरान हज़ारीबाग सदर विधायक प्रदीप प्रसाद ने हज़ारीबाग क्षेत्र में सड़कों एवं पुल-पुलियों की जर्जर स्थिति का गंभीर मुद्दा सदन के पटल पर प्रमुखता से उठाया। उन्होंने ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में खराब सड़कों के कारण आवागमन में हो रही कठिनाइयों, दुर्घटनाओं की बढ़ती आशंका तथा विकास कार्यों में उत्पन्न बाधाओं का तथ्यात्मक विवरण प्रस्तुत करते हुए सरकार से शीघ्र और ठोस कार्रवाई की मांग की। विधायक प्रदीप प्रसाद ने विशेष रूप से दारू प्रखंड के पेट्टो NH-522 से कृष्णा महतो के घर तक लगभग 02 किलोमीटर पक्की सड़क निर्माण, झुमरा के कोंय जोन्हिया भाया सिवाने नदी तक लगभग 03 किलोमीटर पक्की सड़क, झुमरा डीपू से रामदेव खरिका भाया सिवाने नदी तक लगभग 06 किलोमीटर पक्की सड़क निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। इसी क्रम में सदर प्रखंड के NH-522 से चाया सिमाना तक लगभग 03 किलोमीटर पक्की सड़क, केसुरा मोड़ से सरौनी तक पक्की सड़क, पौता में पक्की सड़क निर्माण सहित हज़ारीबाग सदर विधानसभा क्षेत्र के सदर प्रखंड, दारू प्रखंड, कटकमदाग प्रखंड एवं कटकमसांडी प्रखंड के कुल 40 सड़कों से अधिक पुल-पुलियों की अनुशंसा किए है उसे सरकार के समक्ष रखी। उन्होंने कहा कि लंबे समय से इन सड़कों और पुल-पुलियों की स्थिति दयनीय बनी हुई है, जिससे ग्रामीणों, विद्यार्थियों, किसानों और आम नागरिकों को प्रतिदिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। विधायक ने सदन में स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार केवल गोलमटोल जवाब देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कार्य होना चाहिए। इस विषय पर राज्य की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने सकारात्मक आश्वासन देते हुए कहा कि संबंधित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण कराया जाएगा। उन्होंने सदन में बताया कि 15 किलोमीटर सड़क निर्माण एवं 10 करोड़ रुपये की लागत से पुल निर्माण की स्वीकृति जल्द दी जाएगी। साथ ही विधायक निधि की राशि भी क्षेत्रीय विकास कार्यों के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा कि हज़ारीबाग के समुचित विकास और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता से जुड़े प्रत्येक मुद्दे को वे सदन में मजबूती से उठाते रहेंगे और क्षेत्र के विकास के लिए निरंतर प्रयासरत रहेंगे।1
- हजारीबाग (केरेडारी थाना)। क्षेत्र अंतर्गत चट्टी बारियातू कोयला खनन परियोजना के विस्थापित रैयत जिनको विगत दिनों झूठे मुकदमे फंसा कर पुलिस प्रशासन द्वारा जेल भेज दिया गया था उनको 8 दिन में ही बेल मिल गई व दिन शनिवार को वे लोग बाहर आ गए। बेल मिलने के तुरंत बाद सभी लोगों ने जेल से निकलकर सीधे पूर्व विधायक अंबा प्रसाद के आवास पहुंचकर इस न्याय की लड़ाई में भरपूर सहयोग करने के लिए आभार व्यक्त किया, जेल से निकलकर बाहर आए विस्थापित रैयतों ने बताया कि इस पूरी लड़ाई में पूर्व विधायक अंबा प्रसाद एवं पूर्व मंत्री योगेंद्र साव हर कदम पर साथ खड़े रहे हैं उसी का नतीजा है कि हम लोग होली से पहले जेल से बाहर निकल गए हैं। बयान बाजी से नहीं कुछ काम करने से लोकप्रियता बढ़ती है विधायक जी-अंबा प्रसाद मौके पर पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने वर्तमान बीजेपी विधायक पर निशाना साधते हुए कहा कि विगत दिनों पूर्व उन्होंने मीडिया को दिए बयान में कहा था कि पुलिस प्रशासन ने योगेंद्र साव एवं निर्मला देवी को छोड़कर बाकी सब को जेल भेज दिया जबकि वास्तविकता इससे कोशों दूर है। इस पूरी लड़ाई में हमने न्यायिक तरीके से लड़ाई लड़कर उनका बेल दिलवाया। गिरफ्तारी के दिन ही पुलिस प्रशासन ने साजिश के तहत बाकी ग्रामीणों को दूसरे जगह छिपा कर रखा और गुपचुप तरीके से जेल भेज दिया वरना उन लोगों की गिरफ्तारी नहीं होने दिया जाता। पूर्व विधायक ने कहा कि वर्तमान भाजपा विधायक को सस्ती लोकप्रिय हासील करने के लिए बयान बाजी करने से बचना चाहिए व रैयतों की हक अधिकार की लड़ाई में संघर्ष करना चाहिए। न्यायालय से बेल मिलना यह सिद्ध करता है कि पुलिस प्रशासन ने झूठे मुकदमे में फंसाया था अंबा प्रसाद ने कहा कि जिन ग्रामीणों को जेल भेजा गया था उन्हें 8 दिन के भीतर ही न्यायालय से बेल मिल गया जो स्पष्ट संदेश देता है कि ग्रामीण विस्थापित अपने हक अधिकार के लिए लड़ाई कर रहे थे और उन्हें प्रशासन ने बलपूर्वक गिरफ्तार करके जेल भेजा था, अंततः उनको बेल मिल गया। पूर्व विधायक ने कहा कि इस लड़ाई में न्यायिक तरीके से मैं और मेरा पूरा परिवार समर्पित है, किसी भी विस्थापितों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। आगे उन्होंने कहा कि विस्थापित ग्रामीणों को न्यायपालिका पर आज भी भरोसा है एक और जहां पुलिस प्रशासन कॉर्पोरेट के हाथों बिक जाते हैं तो यह दबाव में आ जाते हैं लेकिन न्यायपालिका निडर होकर अपना काम करती है आज यह लड़ाई कानूनी लड़ाई के तौर पर लड़ी जा रही है और मुझे पूरा विश्वास है कि न्यायपालिका ही विस्थापित ग्रामीणों को उनके हक अधिकार को दिलाएगी। अंबा प्रसाद ने कहा कि संविधान सर्वोपरि है लेकिन बड़कागांव विधानसभा के मामले में पुलिस प्रशासन खुद को भगवान मान रही है अब संविधान ही हमें अपना हक अधिकार दिलाएगी, इस बात का पूरा भरोसा है।1
- Post by Boring baleshwar1
- हजारीबाग रूटस रेस्टोरेंट के पास दुर्घटना ।1
- हजारीबाग के मेरु पेट्रोल पंप के सामने शनिवार के दोपहर को महिंद्रा XUV300 और एक बस के बीच जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि कार के आगे का हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसके परखच्चे उड़ गए। घटना के बाद आसपास लोगों की भीड़ जुट गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत घायलों को बाहर निकालने में मदद की।3
- हजारीबाग नगर निकाय चुनाव अंतर्गत वॉर्ड 5 से एक बार फिर श्रीमती रेखा सिंह के बेतहाशा जीत के बाद पूरे वार्ड में विजय जुलूस निकाला गया,,श्रीमती रेखा सिंह ने जीत की खुशी को लेकर जनता का आभार जताया।1
- *हज़ारीबाग़ विधायक प्रदीप प्रसाद ने सदन में पंचायती राज जनप्रतिनिधियों के मानदेय वृद्धि का मुद्दा प्रमुखता से उठाया* *स्थानीय स्वशासन को सशक्त करने के लिए मानदेय की समुचित समीक्षा और वृद्धि की मांग* झारखंड विधानसभा के सत्र के दौरान हज़ारीबाग़ विधायक प्रदीप प्रसाद ने पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के मानदेय वृद्धि का महत्वपूर्ण मुद्दा सदन के पटल पर प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत के मुखिया, पंचायत समिति सदस्य प्रमुख एवं जिला परिषद सदस्य लोकतंत्र की जमीनी आधारशिला हैं। ये जनप्रतिनिधि सीमित संसाधनों के बावजूद गांव-गांव में सरकार की योजनाओं को लागू कराने, विकास कार्यों की निगरानी करने तथा आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर सक्रिय रहते हैं। अभी वर्तमान में प्रति माह जिला परिषद अध्यक्ष का वेतन मात्र 12000 रुपये, जिप उपाध्यक्ष का वेतन मात्र 10,000 रुपये, पंचायत समिति प्रमुख का वेतन मात्र 8,000 रुपये, उप प्रमुख का वेतन मात्र 4,000 रुपये, मुखिया का वेतन मात्र 2500 रुपये, और उप मुखिया का वेतन मात्र 1200 रुपये हैं। विधायक प्रदीप प्रसाद ने अपने वक्तव्य में कहा कि इतने महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन करने के बावजूद पंचायती राज जनप्रतिनिधियों को इतना कम वेतन मिलता है और तक मानदेय में अपेक्षित वृद्धि नहीं की गई है। यह केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि उनके सम्मान, मनोबल और कार्यक्षमता से जुड़ा विषय है। पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधि लोकतंत्र की मजबूत कड़ी हैं। सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में उनका मानदेय समयानुकूल बढ़ाया जाना आवश्यक है। मैं सरकार से आग्रह करता हूँ कि मानदेय की समुचित समीक्षा कर यथोचित वृद्धि सुनिश्चित की जाए, ताकि स्थानीय स्वशासन व्यवस्था और अधिक सशक्त एवं प्रभावी बन सके। विधायक ने सरकार से इस दिशा में शीघ्र सकारात्मक पहल करने की मांग की है, ताकि जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे जनप्रतिनिधियों को उचित सम्मान और सहयोग मिल सके।1